सामुद्रिक और शकुन शास्त्र में जानिए आपके शरीर के अंगो के फड़कने के राज

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शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्रसामुद्रिक शास्त्र सम्पूर्ण अंगो का शास्त्र है। पुराणों के अनुसार भगवान् कार्तिकेय ने इसकी शुरुआती रचना की थी जिससे भगवान् शिव रूष्ट हो गए और उन्होंने ग्रन्थ को पूरा होने से पहले ही समुन्द्र में फेक दिया। बाद में जब गुस्सा शांत हुआ तब उन्होंने ही समुन्द्र से बचा ग्रन्थ पूरा करने को कहा और इस तरह इसका नाम सामुद्रिक शास्त्र पड़ा। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शरीर के अलग अलग अंगो में हलचल होना विभिन्न संकेतो को दर्शाता है। शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र के विषय है जिसमे हम विभिन्न संकेतो के अर्थ को समझते है।

शकुन शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र को अलग मिला के देखे तो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओ को देखने की एक विधि मिलती है। भविष्य में क्या होने वाला है कोई नहीं जानता लेकिन आसपास के कुछ खास संकेतो के आधार पर हम इनका पूर्वानुमान लगा सकते है। भारत जैसे देश में बिल्ली का रास्ता काटना और घर से निकलते वक़्त छींकना दो सबसे बड़े संकेत है शकुन और अपशकुन के जिनके आधार पर लोग पूर्वानुमान करते है।

काली बिल्ली का रास्ता काटना हमें विपत्ति का संकेत देती है और हम कुछ देर के लिए यात्रा को टाल देते है। यही संकेत छींक देने से जुड़ा है जिसमे माना जाता है की ऐसा होने से काम की सिद्धि नहीं होती है। शकुन शास्त्र में कुत्तो को शकुन रत्न कहा गया है क्यों की ये इंसानो के सबसे करीब है और उनके गतिविधियों के अनुसार कुछ संकेत करते है जिनके आधार पर हम भविष्य की घटनाओ का आकलन करते है। भविष्य देखने और शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में अलग अलग तरह से बताये गए है।

शकुन-शास्त्र क्या है ?

shakun-shastra हमारे आसपास के जीव-जन्तुओ के विभिन्न गतिविधिओ से जुड़ा एक शास्त्र है जो भविष्य की पूर्वानुमान और आकलन के आधार पर हमें संकेत देता है। शकुन शास्त्र के अनुसार सूक्ष्म गतिविधो के आधार पर हम आसानी से भविष्य का आकलन कर सकते है। ये ज्योतिष का ही एक भाग है और भविष्य बताने में सहायक लेकिन अन्धविश्वास से भरी हुई विद्या के नाम से जानी जाती है।

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शकुन शास्त्र कैसे काम करता है :

future-telling practice हमारे आसपास घटने वाली उन अकस्मात घटनाओ को पढ़ने का काम करता है जो हमारे आसपास घटती है और खास संकेत देती है। शकुन शास्त्र और सामुद्रिक विज्ञान में ऐसे कई रहस्यों का वर्णन किया है जो भविष्य की घटनाओ को समझने में सहायक सिद्ध हो सकते है। इनमे हमारे शरीर में अचानक कोई हरकत होना, हमारे आसपास होने वाला अकस्मात बदलाव या फिर जीव जन्तुओ में आने वाला बदलाव इन सबकी और संकेत देता है। शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में समझे जा सकते है।

शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र :

शकुन शास्त्र अपने आप में ज्योतिष विद्या का एक भाग है जिसमे कोई भी एक्सपर्ट भविष्य की गणना करने से पहले आपके आसपास की घटना और शरीर के भागो को समझने बाद ही करता है। इसका एक मतलब तो यही है की शरीर के भागो में बदलाव भी खास संकेत देते है। इन्हे समझ कर हम भी कुछ कुछ अंदाजा लगा सकते है। इनमे सबसे ज्यादा पॉपुलर है उल्लू, कुत्ते, चमगादड़, छींकना और फड़कने की हरकत।

1.) छींकने से जुड़े शकुन और अपशकुन :

  • घर से निकलते वक़्त अगर कोई छींक देता है और कार्य में बाधा और एक से ज्यादा बार छींका कार्य सिद्धि का संकेत माना जाता है।
  • प्रथम प्रहर ( सुबह 6 से 9 बजे ) में छींक सुनना अनेको कष्ट का, दूसरे प्रहर में सुनना शारीरिक कष्ट का, तीसरे प्रहर में सुनने से स्वादिष्ट भोजन की प्राप्ति और चौथे प्रहार में सुनने से मित्र मिलन संभव है।
  • कोई वस्तु खरीदते वक़्त अगर छींक आ जाए तो वो वस्तु शुभ होती है।
  • सोने से पहले और उठने के तुरंत बाद छींक की धवनि अशुभ मानी जाती है।
  • मरीज के दवा लेने के समय छींकने से उसके जल्दी ठीक होने की सम्भावना रहती है।

यज्ञ और भोजन करते समय तुरंत पहले छींकने को अशुभ संकेत माना गया है।

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2.) शकुन शास्त्र में अंग फड़कने के अलग अलग मतलब :

शकुन शास्त्र में पुरुष का अगर बांया भाग फड़कता है तो भविष्य में कोई दुखद घटना झेलनी पड़ती है वही दांये भाग के फड़कने से खुशखबरी मिलती है। महिलाओ के मामले में बिलकुल उल्टा है।

  • माथे में हलचल भौतिक सुख की और कनपटी में फड़कन धन लाभ का संकेत है।
  • दोनों गाल एक साथ फड़कने का संकेत है धन लाभ।
  • होंठ फड़कना नए दोस्तों से मिलने का संकेत है।
  • हथेली में हलचल बड़ी समस्या का संकेत करती है वही उंगलिया में हलचल दोस्तों से मिलने का संकेत है।
  • दांयी जांघ फड़कना शर्मिंदगी का और बांयी जांघ धन लाभ का संकेत देती है।
  • बायीं आँख का फड़कना स्त्री से वियोग और दुःख का लक्षण है वही दांयी आँख के फड़कने के संकेत विवाह और प्रेम से जुड़े है।
  • हथेली के कोने में फड़फड़ाहट भविष्य में किसी मुसीबत में फंसने की ओर संकेत करता है।

छाती में फड़फड़ाहट दोस्तों से मिलने की और संकेत करता है जिसमे छाती के दाहिने और विपदा तथा बायीं और और जीवन में संघर्ष एवं मध्य में फड़फड़ाहट लोक प्रियता का संकेत देती है। अंग फड़कने से जुड़े शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में आप और भी ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते है।

3.) कुत्तो  से जुड़े शकुन और अपशकुन :

  • शकुन शास्त्र के अनुसार कुत्ता यदि अचानक धरती पर सर रगड़ना शुरू कर दे तो वहा गड़े धन के होने की सम्भावना होती है।
  • अगर किसी रोगी के सामने कुत्ता बार बार पूंछ और ह्रदयस्थल को छाते तो उस रोगी के जल्दी ही मरने के आसार होते है।
  • यात्रा के दौरान अगर कुत्ता बायीं और संग संग चले तो सुन्दर स्त्री और धन की प्राप्ति होती है वही दांयी और चलने पर किसी प्रकार के धन की हानि के संकेत मिलते है।
  • जुआरी के जुआ खेलते वक़्त कुत्ता अगर मैथुन करता मिले तो जुआ जितने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • अगर भोजन करते समय आपके सामने कुत्ता आ जाता है और पूछ उठाकर सर को हिलाता है तो भोजन नहीं करना चाहिए ऐसा भोजन करने से बीमार पड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • कुत्ते के पेड़ के निचे खड़े होकर भोंकने से वर्षाकाल में अच्छी वर्षा के संकेत मिलते है।
  • कुत्ता अपनी जीभ से दाहिने अंग को चाटे तो कार्यसिद्धि की सुचना है और पेट छूता दिखे तो लाभ मिलता है।

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4.) छिपकली से जुड़े शकुन और अपशकुन :

घर में पाए जाने वाली छिपकलियाँ भी भविष्य को लेकर हमें कुछ संकेत देती रहती है। इसके अलग अलग स्थिति में पाए जाने और गिरने से लेकर कई शकुन और अपशकुन जुड़े हुए है। जानते है ऐसे ही कुछ शकुन और अपशकुन के बारे में

  • नए घर में प्रवेश के वक़्त अगर गृहस्वामी को मरी हुई या मिटटी लगी हुई छिपकली दिखाई दे तो घर के सदस्य रोगी होने की सम्भावना हो सकती है इससे बचने के लिए पुरे विधि-विधान और वास्तु पूजा के बाद ही गृह प्रवेश करना चाहिए।
  • छिपकली समागम करती दिखे तो दोस्तों से मिलन, लड़ती दिखे तो कलह और अलग जाती दिखे तो बिछड़ने के संकेत है।
  • रात्रि कालीन समय में अगर भोजन के दौरान आपको छिपकली का बोलना सुनाई दे तो ये शुभ संकेत है।
  • माथे पर गिरे तो सम्पति मिलने की सम्भवना बढ़ जाती है।
  • नाक पर छिपकली का गिरना भाग्योदय का संकेत है।
  • गर्दन पर गिरने से यश की प्राप्ति और मुछ पर गिरने से सम्मान की प्राप्ति होती है।
  • छाती के दाहिनी और गिरने से ढेर सारी खुशिया वही दाए और गिरने पर घर में कलह का संकेत देती है।

5.) कौए और उल्लू से जुड़े शकुन-अपशकुन:

शकुन शास्त्र के अनुसार कौए और उल्लू के कुछ संकेत हमारे लिए शुभ और अशुभ होते है इसलिए घर से जाते समय या कही भी इस तरह के संकेत को नजरंदाज नहीं करना चाहिए।

  • व्यक्ति के ऊपर से कौए का गुजरना मान, सम्मान की हानि करवाता है, वही महिला के सर पर बैठने से पति पर संकट आता है।
  • यात्रा के समय अगर कौआ आपके सामने सामान्य स्वर में कांव कांव करे और चला जाए तो कार्य सिद्धि का संकेत है।
  • यदि कौआ रात को आपके घर के आंगन में कर्कश स्वर में कांव कांव करे तो घर में पारलौकिक संकट का सामना करना पड़ता है।
  • उल्लू अगर किसी घर के ऊपर जाकर बैठना शुरू कर दे तो वो घर जल्दी ही उजड़ जाता है, यही संकेत चमगादड़ो पर लागू होता है।
  • अगर उल्लू रात्रि में यात्रा करते वक़्त होम-होम की आवाज निकाले तो ये आपके लिए शुभ संकेत है।
  • owl का बाई और बोलना और दिखना शुभ है वही दांयी और दिखाई देने और बोलने अशुभ संकेतो से जुड़े है।

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शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र के सकारात्मक पहलु :

शकुन शास्त्र के इन खास संकेतो को समझकर हम खुद में उत्साह जगा सकते है, सकारात्मक बन सकते है और कार्य को सफल बनाने में मदद करते है। अगर आप इनमे विश्वास करते है तो आप खुद को इनसे जोड़ कर कार्य को सफल और असफल बना सकते है। मन में एक सकारात्मक सोच और उत्साह आपके काम को सफल बनाने में सबसे ज्यादा मदद करता है।

शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र के नकारात्मक पहलु :

अगर आप इनमे बहुत ज्यादा विश्वास करते है तो आप इसके अन्धविश्वास का शिकार है। ये बात सच है की शकुन शास्त्र के हर संकेत खास और सही है जिनका एक मतलब है लेकिन इनकी भी एक गणना और स्थिति के आधार पर आकलन करना चाहिए। जिससे हमें सही परिणाम मिले। बिल्ली का रास्ता काटना भी जगह और स्थान के आधार पर समझना चाहिए। मान लीजिये किसी को एलेर्जी है या फिर साँस की बीमारी तो क्या आपके यात्रा के समय उसका छींकना आपके लिए शुभ और अशुभ के मायने रखेगा या नहीं। इसलिए हर बार इसे खुद से जोड़ना आपको वहम का शिकार भी बना सकता है।

दोस्तों कैसी लगी आपको आज की शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र से जुड़ी हमारी ये पोस्ट। अगर आप भी शकुन शास्त्र को मानते है और इसे खुद के लिए शुभ और अशुभ महसूस करते है तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये।

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