पकौड़े बेचना भी रोजगार है क्या वाकई ये बयान मोदी सरकार की नाकामयाबी दर्शाता है

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PM ka pakaude bechne ka byan ka viral sach kya h?  आखिर ऐसा क्या कह दिया प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी ने जो हर जगह उनका मजाक उड़ाया जा रहा है. अभी हाल ही में हुए एक interview में नरेन्द्र मोदी जी जो प्रधानमन्त्री पद पर है लोगो को पकौड़े बेचना भी एक रोजगार है बताते हुए नजर आये. उन्होंने कहा की पकौड़े बेचना भी एक तरह का रोजगार है. आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा और ऐसा कहने के पीछे उनका असली मकसद क्या था? आइये जानते है प्रधानमन्त्री नरेद्र मोदी के पकौड़े बेचना भी रोजगार है की वायरल खबर के पीछे का सच.

पकौड़े बेचना भी रोजगार है

आजकल देश में एक नया ट्रेंड चल रहा है “पकौड़े बेचना भी एक तरह का रोजगार है” प्रधानमंत्री अब रोजगार के नाम पर लोगो को पकौड़े बेचने के लिए कहेंगे. ये बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. इसके वायरल होने की सबसे बड़ी वजह है सरकार का रोजगार रोजगार के लक्ष्य को पूरा न कर पाना. हम सभी जानते है की भाजपा सरकार ने बहुमत में आने से पहले बहुत सारे वादे किये थे. ऐसा करने की उन्होंने कोशिश भी की लेकिन वो कहते है ना

“एक ही दिन में दुनिया नहीं बदली जा सकती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप दुनिया को बदलने का सपना ही ना देखो”

यही सोच कर नोट-बंदी की गयी जिसकी वजह से देश को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. लोगो ने बड़ी आसानी से दोष दिया सरकार को ऐसे ऐसे लोग लाइन में लगकर 4 हजार लेने आये जो पहले कभी बैंक या एटीएम के आसपास भी नहीं दिखे. इसलिए नहीं की उन्हें पैसे लेने थे बल्कि इसलिए ताकि वो मीडिया को ये बता सके की सरकार अपने वादे पुरे नहीं कर पा रही है.

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और पकौड़े बेचना भी रोजगार है की बात

कुछ दिन पहले के interview में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कहा की पकौड़े बेचना भी एक तरह का रोजगार है. इस बात को मीडिया और राजनीती दलों के साथ उन लोगो ने काफी वायरल कर दिया जो बड़े बड़े business men है और उनके बच्चे ऊँची शिक्षा पा रहे है. ऐसे में लोगो की कई reaction देखने को मिली है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक निजी न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया था. यहां रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पकौड़ा बेच रहा है तो क्या वह रोजगार होगा या नहीं? उसके बाद से पीएम मोदी सोशल मीडिया में सुर्खियों में बने हुए हैं. ऐसे में लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे है.

क्या अब उच्च शिक्षा पा रहे हमारे बच्चे पकौड़े बेचेंग ?

प्रधानमंत्री अपने वादों से हट रहे है रोजगार दिलाने में नाकाम होने की वजह से अब ये कह रहे है.

पढाई-लिखाई छोड़ दो क्यों की पकौड़े बेचने में काफी अच्छा स्कोप है.

कुछ लोगो ने तो सोचने में इतनी तरक्की कर ली है की अगले चुनाव में भाजपा सरकार किस आधार पर वोट मांगेगी ये तक शेयर कर रहे है. कुछ घोषणा आप ही पढ़ लीजिये.

पकौड़े बेचना भी रोजगार है ऐसा कहने की वजह

दरअसल प्रधानमन्त्री जी ने ये बात इसलिए नहीं की थी की वो चाहते है की पढ़े लिखे लोग पकौड़े बेचे, उनके कहने का मतलब था लोगो को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना. हम बचपन से लेकर जवानी तक पढ़ते है सिर्फ अच्छी नौकरी, अच्छी पोस्ट पाने के लिए. क्या कोई ऐसा आपको मिला जो पढता है ज्ञान अर्जन करने के लिए ? नहीं क्यों की हमें बचपन से एक ही बात सिखाई जाती है

पढोगे लिखोगे तो अच्छी नौकरी मिलेगी.

क्या ऐसा होता है ? नहीं क्यों की हम पढ़ लिख कर नौकरी की आस लगाये इधर उधर चक्कर काटते रहते है. और फिर अंत में 100 में 10 नौकरी करते है और 90 या तो छोटा मोटा काम करते है या बेरोजगार रह जाते है. आज इन्टरनेट हर व्यक्ति की पहुँच में है आप इसका फायदा उठा सकते है. अगर आपने हुनर और स्किल है तो आप कभी भी बेरोजगार नहीं रह सकते है. यकीन नहीं तो youtube पर कमाने वाले लोगो से पूछ लो, ब्लॉग से कमाने वालो को पूछ लो, यहाँ तक की अगर आपके पास कोई अच्छी स्किल है तो आप उसे ऑनलाइन भी बेच सकते है जैसे की हम कर रहे है. इस वक़्त ब्लॉग के जरिये हम ऑनलाइन course, paranormal problem के साथ साथ वशीकरण और black मैजिक की genuine service sell करते है.

पकौड़े बेचना भी रोजगार है और लोगो का मजाक बनाना

लोगो ने इस बात को गलत तरीके से पेश कर दिया और हर जगह इसका मजाक बना दिया. अगर आपके बुजुर्ग आपको किसी बड़े व्यक्ति का उदाहरण देते है तो क्या आप बिलकुल उनके जैसे बन जाते है. नहीं ना ! तो फिर पकौड़े बेचने का example आपको पकौड़े बेचने के लिए नहीं बल्कि अपने आसपास के ऐसे मौको को पहचानने के लिए दिया है जिनसे आप स्वरोजगार कमा सकते है.

हम सभी चाहते है अच्छा पैसा कमाना और इसके लिए हम नौकरी करते है. लेकिन असली पैसा कौन कमाता है कंपनी का बॉस. हम ये जानते हुए भी ऐसा करते है क्यों की हमारे पास कई ऐसे excuse है जैसे की

मैंने पढाई इसलिए नहीं की की कल को में खेती करू ?

लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे ?

उन लोगो को मै कुछ example देना चाहूँगा.

  • USA में अच्छी खासी job छोड़कर India में अपने गाँव में आकर एक well educated आदमी वैज्ञानिक तरीके से खेती और बाड़ी कर महीने के लाखो कमा रहा है.
  • आपने मोती सिर्फ समुद्र में पाए जाते है सुना होगा एक छोटे से कसबे में एक आम आदमी जो पढ़ा लिखा है उन्हें अपने farm में बना कर अच्छे खासे पैसे कमा रहा है.
  • केशर की खेती, गुलाब की खेती यहाँ तक की पतंजली प्रोडक्ट को खेतो में उगा कर लोग लाखो रुपये महिना कमा रहे है.
  • घरेलु उधोग में कुछ औरते मिलकर पापड़, अचार और ऐसे ही प्रोडक्ट बनाती और बेचती है और आज ये एक कंपनी का रूप ले चुकी है.

आखिर कोई तो वजह रही होगी की इन लोगो को खेती में जिसे हम लोग सबसे मुश्किल और अनपढ़ लोगो का काम समझते है से ही ये लोग लाखो रुपये महिना कमा रहे है. इसकी वजह है इनकी पढाई और सही समझ. इन्होने इसे कभी छोटा काम नहीं समझा और आज लाखो रुपया महिना कमा कर ये खुद के बॉस है. फैसला आपके हाथ में है छोटी सोच के साथ नौकरी ढूंढते रहना है या फिर जो मौका हमारे पास है उसे समझ कर फायदा उठाना है.

मीडिया और पकौड़े बेचना भी रोजगार है पर राजनीति का खेल

हम हर रोज सबसे ज्यादा मीडिया से प्रभावित होते है, खासतौर से सोशल मीडिया. हम हर रोज सुबह उठते है एक अच्छे दिन के लिए लेकिन उठते ही Facebook और whats app जैसी सोशल मीडिया app लेकर बैठ जाते है जिसकी वजह से हमारा पूरा मूड ही बदल जाता है. मान लेते है की मीडिया हमें खबरों के जरिये देश में क्या चल रहा है. लेकिन इस समय मीडिया भरोसे के लायक नहीं रहा है इसलिए आँख मूँद कर हर खबर को सच मान लेना बेवकूफी ही होगी. हमें खुद के स्तर पर प्रयास करने होंगे.

कुछ चीजे जो आपको सीखनी होगी

सभी राजनैतिक पार्टी अब सरकार की नाकामयाबी को निशाना बना रही है. बढ़ चढ़ कर सरकार अपने काम को और दूसरी पार्टिया पकौड़े बेचना भी रोजगार है के जरिये नाकामयाबी को दिखाने की कोशिश कर रही है. सबसे बड़ा सवाल अगर ये सरकार फैल हो रही है तो सही कौनसी पार्टी है जिसकी पार्टी को हम अगले चुनाव में जिताए. ऐसी कोई पार्टी नहीं है जो दागदार ना हो, जिसने सही तरीके से काम किया हो. और इसका फायदा उठा कर कुछ लोग हमारे भरोसे का फायदा उठाते हुए लीडर बनते है जो बाद में राजनीती में आ जाते है.

आप आदमी पार्टी, पाटीदार के नेता ये सब हमारे बिच में से निकले है जो जाति और मुद्दों के सहारे जीत कर राजनीती में आये है. क्या आज हमारा विकास जाति और समाज के आधार पर अलग अलग होना है ? अगर नहीं तो फिर क्यों हम जाति और मुद्दों को आधार बनाकर वोट देते है. अगर किसी को लगता है की कांग्रेस पार्टी ने काम किया है तो आपको पता होना चाहिए पुरे 5 साल के शासन काल में last के 45 दिन में 90 योजना लागु की गयी थी. खजाने को पानी की तरह बहाया गया था. ये सोची समझी योजना थी जिसकी वजह से आज महंगाई बढ़ी है, जाते जाते सरकार ने पुरे system को इस कदर बिगाड़ दिया था की उसे अभी तक ठीक नहीं किया जा सका.

ये सब में भाजपा के सपोर्ट में होकर नहीं कह रहा बल्कि जो हुआ गलत हुआ इस वजह से कह रहा हूँ. आज लोगो को कितनी ही ऐसी योजना है जिसका पता नहीं है क्यों की उनका सारा दिमाग तो 15 लाख के पीछे है. अगर आपको सरकार की योजनाओं का पता चले तो यक़ीनन वो free के 15 लाख आप इन योजनाओ से वसूल कर सकते हो.

# 1 ) कोई भी काम छोटा नहीं होता है

प्रधानमन्त्री जी ने एक interview में example देते हुए कह दिया की पकौड़े बेचना भी रोजगार है. लोगो को इस बात से मतलब नहीं है की पकौड़े बेचना असली में किस तरह के काम को इशारा करता है. उन्हें तो बस ये ही नजर आता है की पढाई लिखाई कर ली है तो नौकरी करने की बजाय पकौड़े बेचे क्या ? इसी सोच की वजह से हम उन मौको को भी खो देते है जो आगे चलकर हमारे भविष्य को बदल सकते है.

पकौड़े बेचना छोटा और अनपढ़ का काम है. तो क्या हुआ ? और भी कई ऐसे रास्ते है. जैविक खेती, खुद का सोलर पैनल लगा बिजली पैदा करना और बेचना और भी ऐसे कई रास्ते है. सरकार निशुल्क रोजगार सीखने के course चला रही है जिसमे आप औधोगिक स्किल सीख सकते है और खुद का काम शुरू कर सकते है.

लेकिन मीडिया कभी ये सब जानकारी आपको नहीं दिखाएगा. क्यों की हम सबकी मानसिकता बन चुकी है दुसरो में गलती ढूंढने की, बगैर किसी सच्चाई तक पहुंचे जो दिखा उसे सच मान लेने की. इसी वजह से हम आज भी सरकार को कोसते रहते है. क्या ये इन 4-5 साल में ही हुआ है ? नहीं शुरू से ही ऐसा है.

# 2 ) दुसरो को दोष देने की बजाय खुद की जिम्मेदारी निभाओ

हम लोग अगर अपने आसपास गन्दगी देखते है तो दुसरो को दोष देते है और कुछ देर बाद खुद वही पर अपनी गंदगी और फैला देते है ये सोच कर की उसने नहीं सोचा तो में क्यों सोचु. इसी चक्कर में कचरा बढ़ता जाता है. यही हाल आज हर जगह का है. लोगो को हर सुविधा free में चाहिए. मगर वो खुद इसके लिए कुछ भी सहयोग नहीं करना चाहेंगे.

# 3 ) विकसित देश और विकासशील देश में अंतर

विकसित देश की सबसे अच्छी बात ये होती है की वहा ब्रॉड माइंडेड लोग रहते है. किसी भी काम को छोटा नहीं समझते है और अपने आसपास के माहौल को हमेशा साफ रखते है. वही विकासशील देश में लोग सिर्फ बड़े काम करना पसंद करते है. लेकिन हकीकत देखे तो सुबह से लेकर ऑफिस में काम करने वाले well educated की बजाय उनके ऑफिस के बाहर चाय बेचने वाला कमा लेता है.

अगर कभी भी आपको लगे ककी ये काम छोटा है तो ऐसे लोगो से मिलना जो गरीब परिवार से होते है सुबह अपनी पढ़ाई और शाम को सब्जी का ठेला, परांठे वाला ठेला या फिर किसी तरह के फेरी वाले काम को कर अपने परिवार की जिम्मेदारी को पूरा भी कर रहे है और पढाई भी. और उनमे से ज्यादातर कामयाब भी बनते है. पकौड़े बेचना भी रोजगार है कहने के पीछे शायद प्रधानमंत्री ऐसा ही कुछ सोचते हो.

पिता की दौलत जिसे विरासत में मिलती है वो सिर्फ उसे खर्च कर सकता है. लेकिन जो जीवन में संघर्ष देखता है वो बचत और बढ़त दोनों जानता है. मै ये नहीं कहता की ऐसे काम ही करो. अगर आप पढ़े लिखे है, बेरोजगार है और खाली बैठे है तो अपने स्किल को मजबूत बनाओ. आज मार्केट में जो नए नए डिजाईन आ रहे है वो सब उस तकनीक का कमाल है जिसे हम इंडियन “जुगाड़” कहते है.

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पकौड़े बेचना भी रोजगार है – अंतिम शब्द

दोस्तों इस पोस्ट को किसी जाति, पार्टी के प्रचार या पक्ष को किनारा करते हुए पढ़े तो आप पाएंगे की वास्तव में हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाने की जरुरत है. कई बार ऐसा होता है की हम कहना कुछ चाहते है और कह कुछ जाते है. हो सकता है पकौड़े बेचना भी रोजगार है के उदाहरण के जरिये प्रधानमन्त्री हमें छोटे और स्वरोजगार पर जोर देने का कह रहे हो. लेकिन इस वक़्त कुछ लोगो को विरोध और मीडिया को मसालेदार न्यूज़ से ही मतलब है. अगर अब भी हम सबने बदलाव के बारे में नहीं सोचा तो वो दिन दूर नहीं जब हम वही करने पर मजबूर होंगे जो मीडिया हमें दिखायेगी.

निवेदन : आज की पोस्ट पकौड़े बेचना भी रोजगार है को लिखने के पीछे मेरा कोई राजनैतिक उदेश्य नहीं है ना ही में किसी पार्टी या पक्ष का समर्थन करता हूँ. ये पोस्ट लिखने का मेरा उदेश्य सिर्फ आप लोगो को ये बताना है की किसी भी बात को शब्दों से ना पकड़े, उसके गहराई में कही जाने वाली बात का मतलब समझने की कोशिश करे.

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