seven chakra imbalancing को control करने का सरल chakra healing meditation

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सप्त चक्र संतुलन की समस्या तब उत्पन होती है जब हम अभ्यास में ऊर्जा को नियंत्रित नहीं कर पाते है या फिर किस एक चक्र पर प्रवाह ज्यादा होने लगता है। सप्त चक्र के बारे में हम सभी जानते है। ये एक फनल आकार लिए हुए सात चक्रो का समूह है। जो अपने आप में अलग अलग मतलब और प्रकाश किरणे लिए हुए है। सप्त चक्र में चक्र शब्द संस्कृत से लिया गया है। इसका मतलब है पहिया या घुरी। हमारे पुरे शरीर में सात मुख्य और सैंकड़ो शायद अनगिनत छोटे चक्र है. ये सभी शरीर में अलग अलग जगह स्थित है इनमे मुख्य सिर्फ सात चक्र है कही कही आठवे चक्र का भी जिक्र होता है खैर ये सब अलग अलग मायने है क्यों की kriya yog meditation 7 chakra in hindi का जिक्र है वही तंत्र में आठवें चक्र का विस्तार से वर्णन किया है।

सप्त चक्र संतुलन
ये सभी चक्र कॉस्मिक ऊर्जा से चार्ज होते रहते है ठीक वैसे ही जैसे हमारा घर मुख्य पावर हाउस से बिजली ( ऊर्जा ) प्राप्त करता है। कभी कभी ऐसा होता है की तनाव, भावनात्मक और शारीरिक समस्या की वजह से इन चक्रो को सही तरीके से ऊर्जा प्राप्त नहीं कर पाता है। अगर इनमे सही तरीके से ऊर्जा संचरण नहीं हो पाता है। तो बीमार होने के चांस बढ़ जाते है। ऊर्जा का अनियमित प्रवाह शारीरक थकान ( बीमारी ) , मानसिक समस्या उभर सकती है।

आज की पोस्ट में पहले बात करते है शरीर में सप्त चक्र संतुलन की समस्या से क्या प्रभाव पड़ता है। और फिर 7 chakra healing कैसे करे इस पर भी विस्तार से बात करते है।

चक्र 1 मूलाधार चक्र

रंग लाल है और मेरुदंड के सबसे निचले हिस्से में मौजूद है। ये चक्र पृथ्वी से जुड़ा हुआ है और भौतिक जीवन के लिए जिम्मेदार है। आपके पैर, बड़ी आँत, और हड्डियों से जुड़ा है और आपको लड़ने की कला के लिए तैयार करता है। इसमें ऊर्जा प्रवाह की अगर समस्या उत्पन होती है तो इंसान में भय उत्पन होता है, आत्मरक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाता है।

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चक्र 2 स्वाधिस्ठान चक्र

इसका रंग संतरे जैसा है और इसकी स्थिति मेरुदंड निचले हिस्से और नाभि के मध्य है। हमारे शरीर के निचले हिस्से के अंगो जैसे किडनी, संचरण तंत्र, और प्रजनन अंग से जुड़ा है। ये चक्र हमारी भावनाये, सेक्सुअल इच्छा, निवेदन को प्रदर्शित करता है। चक्र में अनियमित ऊर्जा के प्रवाह से भावनात्मक मनोविकार की समस्या, यौनेच्छा, आपके अनचाहे व्यव्हार के लिए जिम्मेदार है।

चक्र 3 मणिपुर चक्र

ये चक्र पीले रंग का है और इसकी स्थिति नाभि से कुछ इंच ही ऊपर होती है। आपके पाचन तंत्र, अग्नाशय, भुजा जैसे अंगो से जुड़ा है।
ये आपके भावनात्मक जीवन को आधार देता है। भावनात्मक व्यव्हार जैसे खुद के बारे में सोचना, हंसना, गुस्से जैसे भाव इस चक्र से जुड़े है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता, सवेंदनशीलता, इसी चक्र से जुड़े है। इसमें ऊर्जा के अनियमित प्रवाह से गुस्सा, चिड़चिड़ाहट, दिशा की कमी ( खुद को गाइड करने की क्षमता में में कमी जैसे विकार देखे जा सकते है।

चक्र-4 ह्रदय चक्र / अनाहत चक्र

इसका रंग हरा और स्थिति ह्रदय में है। प्यार, सद्वभावना, शांति जैसे भाव इसी चक्र से जुड़े है। इसे हमारी आत्मा का घर भी माना जाता है.
आपके फेफड़े, ह्रदय, भुजाएँ, जैसे अंग इस चक्र से जुड़े है। हम प्यार में सिर्फ ह्रदय चक्र के प्रभाव से पड़ते है और बिना शर्त के शुद्ध भावनाए हमसे जुड़ती है। ये चक्र यौन केंद्र की ओर गति करता है जिसमे मजबूत आकर्षण की भावनाएं उत्सर्जित होती है।

माना जाता है की शादी की इच्छा ह्रदय चक्र और मूलाधार चक्र की ऊर्जा के मिलन से जुडी होती है। इसमें ऊर्जा के अनियमित प्रवाह से ह्रदय, फेफड़े, और प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आती है।

चक्र 5 विशुद्ध चक्र

इसका रंग नीला और स्थिति गले में है। इस चक्र से आपके बोलने की कला, वार्तालाप का तरीका, खुद को जाहिर करने की क्षमता जैसे भाव जुड़े है। आपके शरीर में गले, भुजा, कंधे, थायराइड ग्रन्थि, हाथो को नियंत्रित करता है। ये चक्र आपके बाह्य और अंतर की आवाज को पहचानने में मदद करता है।

इसके अलावा विचारो में बदलाव, स्थानांतरण, शुद्धिकरण जैसी क्रिया के लिए जिम्मेदार है। बोलने, वार्तालाप में गिरावट, ईमानदारी में कमी जैसे लक्षण इस चक्र में ऊर्जा के अनियमित प्रवाह के लिए जिम्मेदार है।

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चक्र-6 आज्ञाचक्र

धूसर रंग के इस चक्र की स्थिति हमारे माथे के बीचोबीच भ्रकुटी की जगह है। इस चक्र का संबंध हमारे आध्यात्मिक जीवन से जुड़ने का है।
जिज्ञासा, प्रश्न और उनका समाधान इस चक्र के भाव है। आंतरिक द्रश्य की कल्पना, बौद्धिक विकास जैसी क्षमता इसी चक्र में सरंक्षित रहती है इसीलिए इस चक्र को शक्ति केंद्र कहा जाता है।

आपके इस जन्म और पिछले जन्मो की यादे इसी चक्र में सुरक्षित रहती है। माथे में खिंचाव, मानसिक थकावट, तनाव, और स्मरण शक्ति में गिरावट इस चक्र में ऊर्जा के अनियमित प्रवाह के लक्षण है।

चक्र – 7 सहस्रार चक्र

बैंगनी रंग के इस चक्र की स्थिति आपके सर के सबसे ऊपरी हिस्से में है। ये चक्र आपके नर्वस सिस्टम, दिमाग और पिट्यूटरी ग्रन्थि को नियंत्रित करता है। इस चक्र के साथ आपकी आध्यात्मिक जानकारी, सूचनाओ को समझने की क्षमता, स्वीकृति और आशीर्वाद जैसे भाव जुड़े होते है।

इस चक्र को आपके आत्मा के परमात्मा से जुड़ने के द्वार भी कहा जाता है। चक्र में ऊर्जा अनियमित प्रवाह मनोवैज्ञानिक विकार ( पागलपन ) के लिए जिम्मेदार होता है।

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सप्त चक्र संतुलन कैसे बनाए :

जब तक ऊर्जा का प्रवाह इन चक्रो में सही तरीके से होता है शरीर सही तरीके से कार्य करता है। ऊर्जा का प्रवाह सतत बनाने और ब्लॉक हो चुके चक्र को वापस अनब्लॉक करने के लिए हमें निम्न उपाय करने चाहिए।

1.) शारीरिक व्यायाम :

योग और शारीरिक व्यायाम हर चक्र के लिए अलग अलग अलग है इसे करके आसानी से चक्र में ऊर्जा के प्रवाह को बनाये रखा जा सकता है।

2.) सप्त चक्र संतुलन – chakra crystal

हमारे चक्र अलग अलग फ्रीक्वेंसी की तरंगे छोड़ते है जो की अलग अलग रंग से सम्बंधित है। chakra healing stone & chakra healing crystal इसी सिद्धान्त पर कार्य करते है। 7 chakra stone से हम प्राकृतिक स्वंय हीलिंग सीखते है और शरीर को इस काबिल बनाते है। इसके लिए हमें अपने चक्र की जगह पर इन क्रिस्टल को रखना होता है और अपनी मानसिक ऊर्जा को इस पर फोकस करना होता है। आपकी एकाग्रता जितनी मजबूत होगी उतनी ही जल्दी क्रिस्टल से ऊर्जा आपके चक्र में स्थापित होने लगती है। क्रिस्टल सिर्फ आपकी ऊर्जा को गुणित करता है जिससे ब्लॉक ऊर्जा चक्र में बैलेंस हो जाती है और चक्र सही कार्य करने लगता है.

3.) सप्त चक्र संतुलन और ध्यान

ध्यान हमारे अंतर की आवाज सुनने के लिए सबसे अच्छा माध्यम है। इसके अलावा ये हमें विपरीत परिस्थिति में भी शांत रहना सिखाता है। जब मन स्थिर और शांत होता है तो आप आसानी से पता लगा सकते है की शरीर में दर्द कहाँ है और कोनसा चक्र ब्लॉक हो रहा है।

4.) नियमित प्रश्नावली / जिज्ञासा

ज्ञान हमेशा नियमित रूप से अपनाते रहना चाहिए। जितना ज्यादा हमारी समझ होगी उतना ही हम खुद को समझते है। हर चक्र से जुड़ा ज्ञान हमें बताता है की हमें किस स्थिति में क्या करना चाहिए जिससे हर स्थिति में हम खुद को पॉजिटिव रख सकते है। इसके अलावा हम खुद में इतने सक्षम हो जाते है की खुद को शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक समस्याओ से कैसे निकलना है जानते है।

5.) सप्त चक्र संतुलन में मददगार सकारात्मक विचार :

सकारात्मक विचार हमें बताते है की हम मुश्किलो को कैसे सकारात्मक रह कर निकल सकते है। इसके लिए सकारात्मक विचार हमारे दिमाग को तैयार करते है। जितना ज्यादा हम सकारात्मक विचार मस्तिष्क तक पहुंचते है उतना ही ज्यादा हम पुराने विचारो से निकल पाते है और नए विचारो तरीको को अपना पाते है।

6.) सप्त चक्र संतुलन के लिए अपनाए अरोमा-थेरेपी :

प्राकृतिक पौधो के तेल इस्तेमाल हीलिंग, सुंदरता बढ़ाने और भावनात्मक तथा आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है. ये थेरेपी हमारे चक्र को संतुलन की अवस्था में लाने में सहायक है क्यों की ये खुद की प्राकृतिक ऊर्जा को समेटे हुए होती है जो हमारे चक्र से जुड़ कर उसकी ऊर्जा गुणवत्ता में सुधार लाती है। chakra gemstone and chakra healing bracelet are also a good option.
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7.) हीलिंग म्यूजिक-HEALING MUSIC

अल्फ़ा म्यूजिक हमारे चक्र के स्पंदन को ट्यून करता है। जब दो 1 फ्रीक्वेंसी के माध्यम मिलते है तो ऊर्जा में गुणित वृद्धि होती है। इसका इस्तेमाल हम चक्र को स्पंदित करने में कर सकते है। इसे हम ऐसे समझ सकते है जैसे की तनाव में होने पर कुछ लोग म्यूजिक सुनते है और तनाव गायब। दोस्तों अब तो आप समझ ही चुके है की चक्र के ऊर्जा को संतुलित करना कोई मुश्किल काम नहीं है जरुरत है बस सही तरीके के ज्ञान की। इसलिए जिज्ञासु बने ज्ञान बढ़ाये अपनी समझ में बढ़ोतरी लाये।

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2 COMMENTS

  1. Sit chakra healing ke time ham non veg kha sakte hai kya sir muje gym jana padta hai to biba non veg ke protein intake pura nhi hota to non veg meri jarurat hai to kya chakra healing me ham kha sakte hai kya

    • मूंग सबसे अच्छा स्त्रोत है आप मांस की जगह ये ले सकते है नहीं तो सामान्य त्राटक में आप ये सब ले सकते है. इसका आध्यात्म स्तर पर करने के समय आपको नियम का पालन करना होता है.

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