बुजुर्ग माँ-बाप बोझ नहीं जिम्मेदारी है इसलिए उनकी सही समय पर इज्जत और परवाह करे

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why should we obey and love our parents ? बुजुर्गो का सम्मान करना हमारे लिए जरुरी है क्यों की जो सम्मान हम उन्हें आज देंगे वही हमें हमारी आने वाली पीढ़ी देगी. जब भी आपको वक़्त मिले show love and respect to your parents क्यों की उम्र के आखरी पड़ाव में हम उन्हें सिर्फ यही दे दे तो उन्हें तकलीफ नहीं होगी. लेकिन जिस उम्र के आखरी पड़ाव में जहाँ उन्हें आपके प्यार की सबसे ज्यादा जरुरत होती है उस उम्र में उन्हें बदहाली, जलील होना पड़ रहा है. आज हम बात करने वाले है respect your parents क्यों की जिन्होंने अपनी उम्र आपके लिए गुजार दी है उन्हें भी आपसे कुछ प्यार के पल की उम्मीद होती है.

respect your parents

कुछ लोग दुसरो को दिखाने के लिए लोगो को अपने घर पनाह तो दे देते है लेकिन वो उन्हें बोझ लगने लगते है. इसके सबसे बड़ा example है बूढ़े माँ-बाप, बेटे जब शादी के बाद अलग होते है तो उनके बिच इस बात को लेकर हमेशा झगडा होता की माँ-बाप किसके पास रहेंगे. छोटा बेटा माँ बाप को अपने पास रखता तो है लेकिन उनके नाम से अलग जगह की मांग करता है, ज्यादा जमीन और जगह मिलने के बावजूद वो उनके साथ ऐसे व्यवहार करता है जैसे वो उन्हें पाल रहा है. आज की कहानी भी ऐसी ही एक औरत की है जो अपने पति की मौत होने के बाद अपने रिश्तेदार के पास रहने तो लगती है लेकिन जल्दी ही उसे अहसास हो जाता है की कही ये उसकी भूल तो नहीं ? ऐसे लोग ज्यादातर तो इसे अपनी नियति मान कर accept कर जीना सीख भी जाते है लेकिन उनकी जिंदगी बदतर होने लगती है.

respect your parents – माता पिता की करे हमेशा इज्जत

आज लिखते हुए मन थोडा उदास है क्यों की जब भी हम अपने आसपास बुजुर्गो को इस कदर बदहाली का सामना करते हुए देखते है तो दिल दुखता है. में भावुक किस्म का हूँ इसलिए जब भी किसी को परेशानी में देखता हूँ उसकी हेल्प करने की कोशिश करता हूँ. मेरा हमेशा से एक ख्याल था की मै लोगो को प्रेरित करू की बुजुर्गो का सम्मान करे और उनके प्रति प्यार जाहिर करे.

आज के टाइम respect your parents एक दिखावा बन कर रह गया है. fathers day and mothers day जैसे खास दिन पर अपने माता-पिता के साथ फोटो खिंचवाते हुए लोग social  media पर दुसरो को ये दिखने की कोशिश करते है की वो अपने माँ बाप की कितनी परवाह करते है लेकिन बाकि दिन का क्या ? ज्यादातर लोग तो बाद में उन्हें पूछते भी नहीं. आइये एक कहानी के माध्यम से जानते है की किस तरह लोग दिखावे में दुसरो के सामने खुद को अच्छा दिखाते है लेकिन अन्दर से वो वैसे नही होते जैसा दिखाते है.

त्यौहार पर कही जाना अखरता है

मुझे एक हफ्ते के लिए एक सेमिनार अटेंड करने banglore जाना पड़ा. वहाँ पर मेरी एक कजिन रहती थी सुलताना जब उसे पता चला की में वहाँ आ रही हूँ तो उसने मुझसे वादा लिया की मै उसके यहाँ ही रुकू. banglore पहुंची तो वहाँ उसके पति सिराज और सुलताना खुद मुझे लेने आई हुई थी. घर पहुंचे तो मुझे एक 30-32 साल की उदास महिला भी वहाँ दिखी जिसके साथ एक 6-7 साल की छोटी बच्ची भी थी. किचन से जुड़े स्टोर रूम में वो दोनों रहती थी.

पहचान होने पर पता चला की वो सिराज की ममेरी बहन थी, और वो बच्ची उसकी बेटी. कुछ साल पहले जमीला यानि सिराज की ममेरी बहन के पति का एक accident में देहांत हो गया था. मौत के बाद जमीला एकदम अकेली हो गई थी क्यों की मायके से कोई था नहीं और ससुराल वाले उसे रखना नहीं चाहते थे, तब सिराज ने बेसहारा मामा की लड़की जमीला को अपने घर में पनाह दी.

अगली सुबह जमीला हम सबको गरमा गरम परांठे सेंक कर खिला रही थी. सुलताना तीखे लहजे में उसे निर्देश दे रही थी, “घी कम लगाओ, चाय मसालेदार बनाना” वगेरह. सिराज और बच्चे मजे से खा रहे थे. मैंने कहा जमीला, आप भी सेहरी कर लो, वक़्त निकला जा रहा है. सुलताना ने झेंप कर कहाँ हाँ हाँ तुम भी खा लो वर्ना दिन में काम नहीं होगा.

दिल दुःख कर रह गया

सुबह मै घर से निकल ही रही थी की किचन से सुलताना की आवाज आई “घर में सबने रोजा रखा है, इनकी महारानी के लिए खाना पकेगा” जमीला की धीमी आवाज आई “भाभी रात की सब्जी है, बस रोटी सेंक कर डिब्बे में दे रही हूँ नाश्ता तो आप लोगो के बचे परांठे से करा दिया” मेरा दिल दुखकर रह गया. वापस आई तो देखा सब सो रहे थे. जमीला पसीने से भीगी खाना पका रही थी, शाम को टेबल पर ढेर सारी चीजे सजी हुई थी. आइसक्रीम, लस्सी, भजिये, कबाब, फ्रूट-चाट आदि.

सुलताना ने एक प्लेट में खाने की सभी चीजे निकाल कर जमीला को पकड़ा दी और सिराज बस देखते रह गए. दुसरे दिन सिराज गरीबो में बाँटने के लिए ढेर सारे कपडे ले आए. उसमे जमीला और मोनी के भी कपडे थे. सुलताना ने कपडे देते हुए कहा की ‘हम भी कितना खर्च उठाए, खाना-पीना और अब कपडे भी. जमीला के शौहर की मौत के बाद जो पैसा मिला वो भी सिराज ने business में लगा दिया.

चौथा दिन गुजरने पर रोजा खोलने के बाद मेने सुलताना और सिराज को अपने पास बुलाया और कहाँ की मुझे कुछ बात करनी है. बच्चो को भी बिठाया और कहा “तुम लोग रोजा रखते हो, खैरात करते हो और अपने ही घर में जुल्म करते हो. रोजा सिर्फ खाने का नहीं बल्कि नजर जुबान और व्यव्हार का भी होता है. respect your parents क्यों की आप अगर किसी का दिल दुखाते है, बुरे शब्द बोलते है तो भी आप गुनेहगार है.

मेरी बात शायद उनकी समझ में आ गई थी मैंने देखा की अगले दिन से ही सुलताना के व्यव्हार में परिवर्तन आ गया था. मुझे शुकून मिला. जमीला भी गले लग कर रो पड़ी. मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा – दिल तोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है. मै तो बस इतना ही कहना चाहती थी.

बुजुर्ग माता-पिता के साथ अन्याय करना

कहते है शादी के बाद बेटा माँ बाप का नहीं बल्कि बीवी का हो जाता है. एक से ज्यादा बेटे हो तो उनके बिच माँ-बाप किसके साथ रहे इस बात को लेकर सबसे बड़ी बहस होती है. मज़बूरी में या अपने फायदे की सोच कर उनमे से एक बेटा माता-पिता की जिम्मेदारी तो ले लेता है लेकिन वो उनसे ये उपेक्षा भी रखता है की वो पहले की तरह काम करते रहे.

जिस उम्र में माता-पिता को अपनी जिम्मेदारियो से मुक्त होकर पोते और पोतियों के संग वक़्त बिताना चाहिए उस उम्र में भी वो पहले की तरह काम करते है. जब तक शरीर साथ देता है बेटे-बहू को भी कोई तकलीफ नहीं होती है लेकिन जैसे ही उम्र के साथ शरीर जवाब देने लगता है उन्हें बहू और बेटे के ताने सुनने पड़ते है. वो उनके सतत ऐसे बर्ताव रखते है जैसे कोई अहसान कर रहे हो.

क्या बूढ़े माँ बाप की जमीन / जायजाद जो उन्हें विरासत में मिली है पर उनका कोई हक़ नहीं रहा जो खुद के बेटे और बहू के सामने उन्हें वक़्त वक़्त पर जलील होना पड़ता है. किसी कारणवश अगर बेटे से कुछ पैसे मांग भी ले तो बेटा सो बहाने बनाता है, यहाँ तक की खाने-पिने में भी उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है. ये सब देख कर बेहद दुःख होता है जब कोई माँ-बाप अपने ही बेटे के आगे मांग कर खाने को मजबूर होता हुआ दिखता है.

why not you are doing respect your parents – आखिर इसकी वजह क्या है ?

पुराने समय से ही ये एक रीती चली आ रही है की वंश को आगे बढाने के लिए घर के सदस्य हमेशा अलग होते है. कुछ इसे  सकारात्मक रवैये की तरफ से सोचते है तो कुछ लालच और अपने स्वार्थ की वजह से. ये बात सच है की एक घर में जहाँ सब कुछ limited है बढ़ता हुआ परिवार समा नहीं सकता और इसके लिए लोगो का अलग अलग होना जायज भी है.

परिवार के सदस्यों का अलग होना इस पर भी निर्भर करता है की ये आपकी मज़बूरी है या स्वार्थ. कुछ लोगो को परिवार में खर्चे उठाने में तकलीफ होती है क्यों की उन्हें लगता है की वो ही ज्यादा खर्च उठा रहे है बाकि सदस्य नहीं , अगर अलग हो जायेंगे तो सुख से खाना पीना और बचत कर सकते है. ये बात अलग है की बाद में उनके खर्चे कम होने की बजाय बढ़ते ही है.

बचपन से ही हम सुनते आये है की कौन किसका है ? कोई नहीं आज तुम सब बच्चे हो कल को तुम लोगो की शादी हो जाएगी और तुम सब अलग अलग हो जाओगे. अभी भाई भाई कर रहे हो बाद में मिलना भी पसंद नहीं करोगे. आप में से शायद कुछ लोगो ने बचपन में अपने बुजुर्गो से ये बात जरुर सुनी होगी की “दुनिया अलग होती है” शादी हुई की तुम सभी न्यारे हो जाओगे. सवाल ये उठता है की अगर बचपन से ही हमें इस तरह की शिक्षा मिलती है तो बड़े होकर हमारे बुजुर्ग हमसे क्या उपेक्षा रखेंगे.  खैर ये अलग विषय है और बहुत कम ही देखने को मिलता है.

आखिर बुजुर्गो को अपने साथ रखने में प्रॉब्लम क्या है ?

प्रॉब्लम कुछ नहीं है इसके पीछे लोगो के अपने स्वार्थ है जिनमे से कुछ आपको अपने आसपास देखने को मिल जाएंगे. जैसे की

respect your parents क्यों की बच्चो की परवरिश करने में सहायक है – एक दादी अपने पोते पोतियों को ज्यादा समय दे सकती है जिसकी वजह से बहू को बाकि काम करने में आसानी रहती है वही बेटे को भी अपने कामो में सहायता मिलती है. जब तक शरीर में जान है तब तक सही है लेकिन जब शरीर जवाब देने लगता है तब यही लोग बेटे-बहू को बोझ लगने लगते है.

respect your parents और लोगो पर अच्छा इम्प्रैशन – कुछ लोगो आसपास के रिश्तेदारी और लोगो में अपनी अच्छी शाख बनाने के चक्कर में भी माँ-बाप को अपने पास रखते है ताकि लोग ये ना कह सके की जिस माँ-बाप ने इतना बड़ा किया आज उनको ही अकेला छोड़ दिया, ये बात अलग है की घर के अन्दर बेटा अपने माँ-बाप से आराम करने की उम्र में भी काम करवाता और ताने देता है.

respect your parents  क्यों की जमीन / जायजाद में ज्यादा हिस्सेदारी – जमीं / जायजाद के बंटवारे में जिसके हक़ में माँ बाप रहते है उसके हिस्से में सामान्य से ज्यादा हिस्सा आता है ताकि वो माँ-बाप मकी जिम्मेदारी को निभा सके. वैसे तो इस पर माँ-बाप का हक़ होता है ताकि अगर उनके बेटे उनका साथ न दे तो वो अपना गुजरा कर सके. घर हो या जमीन बेटा-बहू माँ-बाप को तब तक अच्छे से रखते है जब तक की वो अपना हिस्सा उनके नाम ना कर दे. एक बार ऐसा हुआ नहीं की बूढ़े माँ-बाप को जलील, ताने मारने लगते है यहाँ तक की घर से भी निकाल देते है.

respect your parents – अंतिम शब्द

दोस्तों जो आज आपके बुजुर्गो के साथ हो रहा है वो आने वाले समय में आपके साथ भी हो सकता है. जिस लालच में पड़कर आप अपने माँ-बाप को बदहाली की स्थिति में ला देते है उसी स्थिति में आपको भी एक दिन आना पड़ सकता है. respect your parents क्यों की बच्चे वर्तमान से सीखते है जैसा वो आपको करते हुए देखते है वही वो आपके साथ करेंगे. अगर आप चाहते है की आपका बुढ़ापा ऐसा न हो तो उसके लिए आज ही अपने बुजुर्गो का सम्मान करना शुरू कर दे और बच्चो को सही संस्कार दे.

पोस्ट पर आपके विचार कमेंट box में रखे और हमें बताए आज की पोस्ट आपको कैसी लगी. आप किस पॉइंट को आज के समय में बुजुर्गो की बदहाली के लिए जिम्मेदार मानते है हमें बताना ना भूले.

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2 COMMENTS

  1. हम सभी को अपने बुजुर्गों की देखभाल करनी चाहिए , माता -पिता किसी के हमेशा नहीं रहते , बेहतर हो समय रहते उनकी सेवा की जाए … समाज को दिशा देता सार्थक आलेख

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