आत्महत्या करने की इन वजहों पर क्या आपने कभी गौर किया ?

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आत्महत्या करने की वजहआजकल आये दिन समाचार पत्र में आत्महत्या करने के मामले पढ़ने को मिलते है। पढ़ने के बाद मन कुछ समय के लिए खिन्न हो जाता है क्यों आखिर लोगो को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ता है ? क्या प्रकृति ने उनके लिए कोई और मार्ग ही नहीं छोड़ा या फिर उन्होंने ही प्रकृति और उसके न्याय को समझने में भूल की हो। आज हम बात करेंगे आत्महत्या करने की वजह और क्या आत्महत्या करना सही और अंतिम विकल्प है ? साथ ही इस तरह की स्थिति से बाहर कैसे निकला जा सकता है।

जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है लेकिन संघर्ष से भरी हुई है। इसलिए अगर आपको इसकी खूबसूरती को महसूस करना और जीना है तो संघर्ष करते रहना होगा। कहते है इंसान अपने शरीर में चुभा हुआ कांटा भी नहीं निकाल सकता है और आत्महत्या के दौरान होने वाली असीम पीड़ा को महसूस करते हुए मरता है। आत्महत्या करने की वजह कोई भी हो सकती है लेकिन इसकी शुरुआत छोटी छोटी असफलताएं है जिन्हे हम शुरू में समझने की कोशिश नहीं करते और बाद में इन्हे बहुत बड़ा मान लेते है।

आत्महत्या करने की वजह :

सुसाइड करने की सबसे बड़ी वजह है इंसान के धैर्य और विवेक का ख़त्म हो जाना। उसे लगने लगता है की अब और कोई रास्ता शेष नहीं है और जब इस तरह की अवस्था लम्बे समय तक बनी रहती है तो अंत में वो इंसान सुसाइड कर लेता है। आत्महत्या करने की वजह हर जगह अलग अलग है मसलन बचपन में किसी बच्चे का अपनों के द्वारा अनदेखा किया जाना। या फिर जवानी में घरवालों का अच्छे नंबर का प्रेशर और एग्जाम में फ़ैल होना सबसे खास युवा में प्यार को लेकर आत्महत्या करना यानि अगर उन्हें प्यार ना मिला तो उनका जीना बेकार हो गया। बुढ़ापे में भी बुजुर्गो का बच्चो द्वारा मानसिक प्रताड़ित करना। उन्हें लगने लगता है की अब उनके और जीने का कोई मतलब नहीं रहा है।

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कौन और क्यों करता है आत्महत्या :

जब किसी को लगातार एक के बाद एक असफलता का सामना करना पड़ता है तब उसे लगने लगता है की अब वो कुछ भी हासिल नहीं कर सकता है। यहाँ पर असफलता से तनाव बनता है जो अगर किसी के साथ शेयर नहीं किया जाए तो अवसाद बन कर इंसान को चिड़चिड़ा कर देता है और ऐसे में उसके किसी से भी बातचीत करने के सारे रास्ते बंद हो जाते है। तनाव बनने के सबसे बड़ा कारण है असफलता और इससे उत्पन चिचिड़ापन क्यों हम मान लेते है की हमारी जिंदगी का सिर्फ एकमात्र गोल उस सफलता को हासिल करना है जो हर पल मायने बदलती रहती है।

धैर्य और विवेक का समाप्त हो जाना :

इंसान में जब तक धैर्य होता है वो तब तक हार नहीं मानता है और विवेक से काम लेकर नए नए रास्तो को खोजता रहता है। विवेक ही है जो हमें समझने का अवसर देता है की जिंदगी में अभी सबकुछ ख़त्म नहीं हुआ है। हम अब भी कुछ और हासिल कर सकते है और हम लग जाते है जिंदगी के संघर्ष में खूबसूरती के अहसास की एक और कोशिश में। आत्महत्या करने की वजह को लेकर मनोवैज्ञानिक का मानना है की हमारी तनाव और तकलीफ को शेयर करने से हमें नए नए आईडिया मिलते है जो हमारी सोच को नया नजरिया देते है।

क्या वाकई आपके जिंदगी के मायने ख़त्म हो चुके है :

नहीं ऐसा कभी नहीं होता है की हमारे सामने कोई अवसर ही ना रहे। जिंदगी में हम चाहे लाख मुसीबत में फंसे हो उससे निकलने के अवसर प्रकृति हमें जरूर देती है। फर्क हमारे नजरिये का होता है जो उस एक अवसर में ही फंसा रहता है जो हम खो देते है। और यही वजह आगे चल कर दुःख और तनाव के बाद आत्महत्या करने की वजह बनती है।

जब भी मुझे लगता है की बस अब में और नहीं सह सकता तो में अपनी आँखे बंद करता हूँ और सबसे ज्यादा तो उन हालात को समझने की कोशिश करता हूँ जिनकी वजह से तनाव होता है। फिर देखता हु की तनाव लेने की वजह क्या वाकई है भी या नहीं। और लास्ट में उसे कुछ समय के लिए इग्नोर कर खुद को रिफ्रेश कर दोबारा नए सिरे से समस्या का समाधान ढूंढने की कोशिश करता हूँ। इस ट्रिक से मुझे हमेशा समस्या से समाधान और खुश रहने की वजह मिलती है।

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ईश्वर हमें अनंत अवसर देता है :

ये बिलकुल सत्य है और ऐसा में इसलिए कह सकता हूँ क्यों की मुझे हमेशा ये महसूस हुआ है। बचपन में घरवालों के द्वारा अनदेखा करने की वजह से एक लड़का हमेशा सोचता था की मुझे मर जाना चाहिए। और वो इसकी कई कोशिश भी करता था जैसे जहर खा लेना, घर से दूर खेतो में अकेले ही रात्रि को चले जाना ( क्यों की बचपन में सुना था भूत खा जायेंगे ) लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वक़्त के साथ उसे पता चलता है की वो उन सबसे अलग बना है, उसे कुछ करना चाहिए। और फिर परिस्थिति ऐसी बनी की उसे घरवालों से दूर रहना पड़ा जो उसके लिए ही अच्छा था। क्यों की एक नजरिये से उसे उस हालात से छुटकारा ही मिल गया जिसकी वजह से उसे लगता था की उसे मर जाना चाहिए यानि घरवालों द्वारा अनदेखा किया जाना।

जब वही लड़का युवा हुआ तो उसे पता चलता है की कोई उसे बेहद प्यार करता है। हालाँकि उसे प्यार में यकीं नहीं था क्यों की उसके लिए लड़कियों को इम्प्रेस करना और फिर उनसे ये कहलवाना की वो उससे प्यार करती है एक खेल सा बन चूका था शायद बचपन में जो प्यार उसे घरवालों से नहीं मिला वो यहाँ पर ईगो बन चूका था। इस लिए जब उसे पता चला की वो उससे प्यार करती है ये जानते हुए भी की वो लड़कियों के दिल से खेलता रहता है उसने उसके प्यार को भी स्वीकार कर लिया। उनका प्यार का सिलसिला लगभग 5 साल चला।

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संकल्प की शक्ति और इसका महत्व :

इस दौरान उनमे कुछ भी शेष नहीं रहा था। इसलिए दोनों ही चाहते थे की उनके प्यार को शादी तक ले जाया जाए। घरवाले दोनों के ही खिलाफ थे लेकिन जिद्द के आगे झुकना पड़ा और एक एक कर लगभग सभी मान चुके थे। लेकिन लड़के के बुजुर्ग ने उसे संकल्प के साथ कसम दिलवाई की वो फिर उस लड़की के गांव भी नहीं जायेगा। वो संकल्प इतना बड़ा था की लड़के को सबकुछ भूल जाना पड़ा। उसके लिए सबसे मुश्किल था उस गांव में ना जाना लेकिन परिस्थितिया ऐसी बनने लगी की 5 साल बीतने के बाद भी उसका उस गांव में जाना नहीं हुआ। ये संकल्प इतना बड़ा था की जैसे जिंदगी का अहम् फैसला इसी पर बदल गया हो।

 मन और मस्तिष्क को बदलना :

इस दौरान उस लड़की ने कई बार सुसाइड करने की कोशिश की। लगभग पागलो जैसी स्थिति हो चुकी थी उस लड़की की। जब उस लड़के को इसका पता चला तो उसने उसके मन को बदलने की कोशिश की और गुमनाम रहकर उसके साथ दोस्त की तरह बने रहकर उसके सोच को नया नजरिया दिया।

आज वो लड़की अपनी जिंदगी में बेहद खुश है इस शर्त के साथ की वो लड़का फिर कभी उसे अपना चेहरा ना दिखाए। तो क्या वो लड़का बेवफा था ? या लड़की का सुसाइड करना उसके प्यार की वजह थी ? नहीं दोनों के बिच शारीरिक संबंध बनने की वजह से प्यार मजबूत हुआ वही ये सोच कर की अब वो किसी और की नहीं बन सकती उस लड़की के सुसाइड करने की वजह बनी।

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आत्महत्या को लेकर मेरे विचार :

आत्महत्या करने की वजह को लेकर मेरा मानना है की कोई भी परिस्थिति इतनी ख़राब नहीं हो सकती है की हमें आत्महत्या करनी पड़े। हमारी सोच और नजरिया जितना खुला और विस्तृत होगा हम उतना ही बेहतर सोच पाएंगे। आज तक की जिंदगी में मेने अकेले ही लाइफ का आधे से ज्यादा अकेले रहकर गुजारा है। इस दौरान कई हालात ऐसे भी बने की मुझे लगने लगा इन सबसे छुटकारा पा लेना बेहतर है लेकिन फिर कुछ समय के खुद को उस सबसे हटा लेना मुझे जीवन के नए मायने सीखा देता था।

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क्या करे जब चारो और से निराशा हाथ लगे :

  • खुद को सबसे अकेले करना या आसपास के लोगो से जोड़ लेना ताकि आप खुद को दूसरी जगह बिजी रख सके।
  • जिस वजह से आपको तनाव आता है कुछ समय के लिए उससे दूर रहे फिर जब मूड बदल जाए और आप खुश हो तब उस समस्या पर नए सिरे से गौर करे आपको 100% समाधान मिलेगा।
  • ज्यादातर परेशानी हमारी सोच और महत्व पर निर्भर है अगर हम इन्हे महत्व ही ना दे तो ऐसी कोई परेशानी नहीं जो हमें परेशान कर सके।
  • कुछ समय के लिए सो जाना आपको नयी स्फूर्ति से भर देता है।

दोस्तों आत्महत्या करने की वजह कोई भी हो लेकिन अगर हम थोड़ा सा भी खुले दिमाग से परिस्थिति पर गौर करे तो हम किसी भी परेशानी या तनाव से बाहर निकल सकते है। जब भी आपको लगे की तनाव ज्यादा हो रहा है और स्थिति आपके बस से बाहर हो रही है। आप सबकुछ छोड़ कर कुछ समय के खुद को आराम दे। जब शरीर थकता है तभी हम कुछ नया नहीं सोच सकते है। शरीर में नयी स्फूर्ति के बाद हमें सबकुछ नए सिरे से सोचने पर हर मुश्किल हालात से निकलने के मार्ग मिलने शुरू हो जाते है।

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