क्या आप जानते है दुसरो के मन की आवाज कैसे महसूस करे जानिए खास सीक्रेट्स

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मन की आवाज सुननामन की आवाज सुनना किसी भी वाक्य के विश्लेषण के बगैर ही उसे स्वीकार करना। ज्यादातर श्रद्धा और विश्वास के मामले में हम intuition शब्द का इस्तेमाल करते है। आध्यत्मिक स्तर पर इसका बहुत बड़ा महत्व है और शरीर से बाहर विचरण हो या सूक्ष्म शरीर की यात्रा ये हर जगह हमारे सफर को आसान बनाता है। सहज बोध या मन की आवाज इसे हम ऐसे समझ सकते है :

“हम कही जा रहे है और अचानक ही हमारे अंदर से अहसास होता है की हमें आज नहीं जाना चाहिए। हम रुक जाते है और बाद में पता चलता है की हमें वाकई नहीं वहा नहीं जाना चाहिए था। जैसे एक्सीडेंट, ख़राब सफर या अन्य किसी वजह से हम जाते तो हमें नुकसान उठाना पड़ता।”
“हम किसी काम में उलझे हुए है और अचानक ही हमें लगता है की हमें कही और होना चाहिए हम चले जाते है और जहा हम जाते है वहा हमारा कोई इन्तजार कर रहा होता है।”

ऐसे कई उदहारण है जहा हम काम करते करते अचानक ही किसी अन्य काम को करने लगते है। और बाद में हमें पता चलता है की हमें यही करना चाहिए था। ये एक तरह से पूर्वानुमान और छटी इंद्री की तरह लगता है।

मन की आवाज सुनना कैसे काम करता है :

सहज बोध हमारे चेतन मन को किसी भी कार्य को बगैर किसी तर्क के सीधे एक्सेप्ट करने के लिए बाध्य करता है। आध्यात्मिक यात्रा में जब कुछ ऐसा घटने लगता है जिससे हमारा चेतन मन उलझने लगे तो ये हमें उससे बाहर निकलने में मदद करता है। सहज बोध तर्क वितर्क करने से बचाता है जिससे हम किसी भी स्तर में आसानी से विचरण करने लगते है। मान लीजिये हमारे मन में अचानक ही कोई विचार उठता है और जब तक हम उसे नहीं करते बार बार वही ख्याल मन में उठता रहता है फिर हम उसके अनुसार करने लगते है। क्या इस दौरान हमारा मन तर्क वितर्क करता है की हमें ये करना चाहिए या नहीं ?

हमारे मन की आवाज एक tuning पर काम करती है यानि अवचेतन मन को लगातार एक स्तर पर जाग्रत रखने की कला जो हमें वक़्त पर आगाह कर सके। मन की आवाज सुनना या अंतरात्मा की आवाज ये कुछ शब्द है जो इसे और बेहतर तरीके से समझाते है।

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1.) सहज बोध में खुद को जोड़ना सीखे :

मन की आवाज सुनना या फिर शरीर के अंदर की हलचल को महसूस करना इस कला को activate करने की first step है। हमारे शरीर के कम्पन हमें हमारी भावनाओ के बारे में बताते है, जैसे हम क्या महसूस कर रहे है, हमारे आसपास क्या घट रहा है और हमें किस चीज की जरुरत है। इसे समझने के लिए आप खुद को एक ऐसे पात्र की तरह मान ले जिसमे विचार और भावनाए आ और जा रहे है। जब हम इसे महसूस करने में सफल हो जाते है तब हम समझने लगते है की जरुरत और मिलने पर हमारा शरीर किस फ्रीक्वेंसी पर रिएक्शन करता है। दिनभर हर एक्शन पर हमारा शरीर विभिन्न फ्रीक्वेंसी को कैच करता है जो भावनाओ और फीलिंग पर निर्भर करती है। अभ्यास द्वारा हम इसे समझने में सक्षम हो सकते है।

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2.) अपने आप पर और सहज ज्ञान में विश्वास करना शुरू कर दे :

एक बार जब आप समझ जाते है की आपका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है, सुनिश्चित करे की कौनसे reason आपके साथ है ना की जो दुसरो पर कार्य करते है, ना ही जो हमें दूसरे बताए। मन की आवाज सुनना यानि खुद की प्रतिक्रिया को समझना और उस दौरान कौनसा कारण उस प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है को समझने की कोशिश करे। उदाहरण के लिए समझे तो मान लीजिये की आपको राह चलते ही वापस जाने का मन करने लगते है आपको बार बार लगता है की आपको वापस चले जाना चाहिए। आपका मन घबराने लगता है और आप पर घबराहट छाने लगती है आप बैचेन होने लगते है।

आपके आसपास के लोगो को लगता है की आपको कुछ हुआ और वो अपनी सलाह आपको देने लगते है जैसे आराम करो कुछ खा लो पी लो वगैरह। कोई नहीं जानता ये किस वजह से हुआ है सिर्फ आपको पता है। इसलिए मन की आवाज को सुनना शुरू करे और अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझे ना की लोगो की राय को। एक बार जब आप ये करना शुरू कर देते है तो बाद में आपके शरीर के कम्पन आपको और भी ज्यादा इस बारे में सहज बोध के संकेत समझने लगते है।

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3.) सहज बोध के ज्ञान को विस्तारित करे :

जब आप मन की आवाज सुनना की क्षमता को खुद में विकसित कर लेते है तब वक़्त आता है की आप इसका और विस्तार करे। इसके लिए आप दुसरो का चुनाव कर उन पर एक्सपेरिमेंट कर सकते है। जैसे की उनसे मिलने और उन्हें छूने पर अनुभव करे की वो क्या महसूस कर रहे है।या फिर जब आप किसी से मिले या हाथ मिलाये तो महसूस करे की वो क्या अनुभव कर रहा है। ज्यादातर मामले में क्षणिक भर वक़्त के लिए आपके दिमाग में कुछ आईडिया आते है और इग्नोर हो जाते है। आपको इन्ही आईडिया को कैच करना है।

एक माँ अपने बच्चे को सिर्फ छू कर समझ जाती है की वो क्या चाहता है। ये मन की बात सुनना का सबसे बड़ा उदाहरण है जिसमे कोई आपको बताता नहीं है पर आप फिर भी सामने वाले की जरुरत को समझ जाते है। इसके लिए जरुरी है आपसी स्तर पर फ्रीक्वेंसी की Tuning बनानी पड़ती है। true friends में हमेशा एक टूनिंग होती है जिससे वो सामने वाले के मन की बात को छुपाने के बावजूद समझ ही जाते है। दुसरो पर इस प्रयोग की सफलता के लिए आपको Body language और feeling के matching के साथ आपके मन में उठने वाली frequency को सामने वाली फ्रीक्वेंसी के साथ जोड़ना होता है।

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4.) खुद के स्तर पर करे सहज बोध के विस्तार का प्रयास

हम सभी बचपन से सुनते आते है की अगर बड़ा बनाना है तो बड़े लोगो की तरह सोचो और बड़े लोगो की संगत में रहो। सही भी है क्यों की आप जैसी संगत में रहते है आप पर उसका वैसा ही प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए खुद को हमेशा ऐसे लोगो के आसपास रखो जो दुसरो की भावनाओ को समझते हो। दुसरो की भावनाओ का ख्याल रखते है और लोगो के बिच प्रिय हो। इसके साथ साथ आप किसी के बारे में कल्पना भी कर सकते है। जितनी ज्यादा आपकी कल्पना शक्ति विकसित होगी आपकी सोच उतनी ही विस्तारित होगी और आप उतना ही अच्छा सोच सकेंगे।

दोस्तों मन की आवाज सुनना या फिर दुसरो के मन की बात जानना कोई चमत्कार या जादू नहीं है। ये एक कला है जिसे हर कोई अपने अंदर विकसित कर सकता है। इसके लिए आपको सिर्फ किसी भी घटना के होने पर मन में आने वाले शुरुआती और क्षणिक पल के विचारो पर केंद्रित होने की जरुरत है। अभ्यास द्वारा हम इससे बढ़ा सकते है।

4 COMMENTS

  1. Bro Kya Aap Hame Bata Sakte Hai Ki Blog Ke Liye Backlink Kaise Banate Hai. Mera Matlav Hai Ki Guest Post Aur Comment Ke Alawa Koi Aur Tarika Hai Blog Ka Backlink Banane Ka Agar Hai To Aap Mujhe Jarur Bataye Bhai Plz…

    • Bro backlink quality chahiye to hamesa guest post or comment se hi achive karna chahiye. Span directory se km time me backlink achive karne se bache sath hi dusre blog ke sath ap external backlink prapt karne ki kosis kare

  2. Thanks bro aapka kahna yahi hai ki mai comment or guest post karke hi backlink banao yahi naa to agar hum jyada se jyada comment karke jaldi se jaldi backlink banaye to koi problem bhi ho sakti hai.

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