लाइफ में अगर एक विचार की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे है तो Narrative therapy का सहारा कैसे ले

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हम अपनी लाइफ में जब भी आगे बढ़ने की सोचते है या फिर कोई अहम् फैसला लेते है एक ऐसी सोच हम पर हावी हो जाती है की हम उस काम को तो क्या किसी भी काम में आगे नहीं बढ़ पाते है. इस प्रॉब्लम को dominant story के नाम से जानते है जिसमे एक ऐसा विचार हमारे अन्दर डाल दिया जाता है जो हमारा अपना नहीं होता है लेकिन उस एक विचार का हमारी पूरी लाइफ में असर देखने को मिलता है. इस problem के solution के लिए हम Narrative therapy की help लेते है ताकि हम उस विचार से लड़कर अपनी ताकत को समझ सके और आगे बढ़ सके.

Narrative therapy in Hindi

असल में इस थेरेपी के जरिये हम पहले खुद को एक अलग सोच से जोड़ते है और जब ऐसा होता है तो पुरानी सोच हमें किस तरह से प्रभावित कर रही है और इसका solution क्या है इस पर काम करना शुरू कर देते है. किसी भी प्रॉब्लम को तब तक सुधार नहीं सकते है जब तक की हम उससे एक दुरी ना बना ले. अगर आपके आसपास घट रही घटनाए सिर्फ आपकी डोमिनेंट story की वजह से हो रही है तो उन्हें रोककर हम इस समस्या से बाहर निकल सकते है. इस पोस्ट में हम how Narrative therapy help us to improve our life in Hindi के बारे में जानने वाले है.

Narrative therapy in Hindi

ये एक थेरेपी है जिसमे हम लाइफ में घट रही हर घटना को एक कहानी की तरह समझते हुए उसमे छुपे हुए अपने मतलब निकालते है. आपने महसूस किया होगा की एक बार हम किसी दुसरे व्यक्ति द्वारा खुद को जज करने के बाद लाइफ में घट रही किसी भी घटना को उस एक घटना से जोड़ देते है और खुद को लाचार और कमजोर ही महसूस करना शुरू कर देते है.

इसका असर हमारी लाइफ में होने वाली बाकि सभी घटनाओं पर पड़ता है. जब भी हम कुछ करने की सोचते है हम पर एक डोमिनेंट स्टोरी हावी हो जाती है जिसकी वजह से खुद को आगे नहीं ले जा पाते है. हम जो भी करते है उसे कमजोरी से जोड़ देते है जो शायद हमारे अन्दर हो ही नहीं लेकिन किसी एक व्यक्ति द्वारा हमें जज करने की वजह से हम उसे सच मान लेते है.

इस थेरेपी का मकसद आपको डोमिनेंट story से दूर कर strength पर फोकस करना होता है. हम कमजोरी को कड़ीयो में तोड़कर उनका समाधान खोजना शुरू कर देते है जिसकी वजह से प्रॉब्लम को महसूस करने की बजाय हम उससे बाहर निकलने की सोचते है. इस थेरेपी में एक व्यक्ति को उसकी कमियों में फंसे रहने की बजाय उससे बाहर निकलकर अपने आप को समझने में मदद करते है. आइये इसके बारे में और ज्यादा डिटेल से जानते है.

इस थेरेपी की शुरुआत कैसे हुई ? Origins

इस तरह की थेरेपी की खोज सबसे पहले Michael White and David Epston, two New Zealand-based therapists ने की थी. इस खोज का मुख्य आधार था लोगो को एक अलग नजरिये से देखना ना की जो हमारी प्रोब्लम है उस नजरिये से. आगे चलकर इसे non-blaming and non-pathological in nature के नाम से जाना जाने लगा क्यों की ये थेरेपी हमारे सोचने समझने में और point of view यानि हम समस्या को किस नजरिये से देखते है में बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

इन दोनों therapists का मानना था की ये बेहद जरुरी है की हम किसी भी समस्या के लिए खुद को या दुसरे को दोष ना दे. ना ही कभी भी अपने आप को किसी भी हाल में powerless or hopeless महसूस होने दे. इस थेरेपी को काम करने के लिए three main components in mind की जरुरत पड़ती है और ये एक therapists और उसके क्लाइंट के बिच रिश्ते को समझने में मदद करती है.

  1. Respect: पहले चरण में वे लोग जो की participating in narrative therapy का एक एक्टिव हिस्सा होते है उन्हें respect दी जाती है. इसके अलावा उनके इस साहसिक कदम के लिए उन्हें सपोर्ट किया जाता है क्यों की उन्होंने खुद के पर्सनल चैलेंज को accept करते हुए काम को शुरू किया है.
  2. Non-Blaming: क्लाइंट को कभी भी work through their stories के लिए blame नहीं किया जाता है साथ ही उन्हें ऐसा दुसरो के साथ ना करने के लिए भी ट्रेन किया जाता है. किसी भी अनचाहे और बुरे व्यवहार या काम को पहचानने की बजाय उसे दूर करने के लिए फोकस रहना सिखाया जाता है.
  3. Client as Expert: आप खुद को बेहतर जान सकते है कोई और नहीं और यही चीज आपको किसी भी परिस्थिति से बाहर निकलने में मदद करती है. जब क्लाइंट खुद को एक्सपर्ट के सामने explore करते है तब उन्हें क्लाइंट के बारे में और ज्यादा जानकारी मिलती है जो की सीधे तौर पर उन्हें विचार और व्यवहार में बदलाव लाने में मदद करती है.

Key Concepts थेरेपी के मूल तरीके

इस थेरेपी का मुख्य कांसेप्ट stories that we develop within ourselves and carry through our lives के चारो ओर घूमता है. हम अपनी लाइफ में होने वाले personal experiences को एक मतलब दे देते है और फिर उन मतलब के साथ जो हमारे दिमाग की उपज है या फिर किसी और के द्वारा हमारे दिमाग में भेजे गए विचारो की वजह से हम पर एक प्रभाव पड़ता है. इसके वजह से हम खुद को उस नज़रिये से देखना शुरू कर देते है. आसान शब्दों में कहे तो किसी घटना का अपना ही मतलब निकाल लेना और उसके अनुसार ही जिंदगी को जीने लगना इसका मुख्य concept है.

हमारी कहानियां influence our thoughts का काम करने लगती है जिसकी वजह से decision-making and behaviors में भी बदलाव साफ़ देखने को मिलना शुरू हो जाते है. इसके लिए आपको Narrative therapy से जुड़े following principles को समझना होगा

  1. Reality is socially constructed हम जिस तरह से दुसरे लोगो के साथ पेश आते है और व्यवहार करते है निर्भर करता है की हम रियलिटी को कैसे महसूस करते है. ये सभी experiences with others हमारे लिए known reality का काम करने लगते है.
  2. Reality is influenced by (and communicated through) language कई बार ऐसा होता है की हम कहना कुछ चाहते है और सामने वाले को कुछ और समझ आता है. एक ही वाक्य के अलग अलग लोगो के लिए जिस तरह से मतलब निकलते है वो भाषा के समझने के कारण होते है. एक इवेंट या एक्शन के इन different interpretation की वजह से भी हमारे नजरिये में बदलाव आता है.
  3. Having a narrative can help us maintain and organize our reality एक घटना को एक कहानी की तरह समझने से हम उसके विभिन्न पहलु को समझने की कोशिश करते है. ये सब हमें हमारे ही एक्सपीरियंस को समझने में मदद करता है.
  4. There is no “objective reality जो चीज, नियम या बाते आपके लिए सही है वो सबके लिए सही हो ऐसा जरुरी नहीं. एक ही अनुभव की अलग अलग लोगो के लिए अलग अलग रियलिटी हो सकती है.

हमारी लाइफ से जुड़े सभी अच्छे और बुरे अनुभव को हम घटना या कहानी की तरह याद रखते है. पूरी उम्र हम उन घटनाओं के जरिये अपने लाइफ के अनुभव को समझने की कोशिश करते है. इन सभी कहानियो का हमारे पास्ट, वर्तमान और भविष्य पर असर पड़ता है.

थेरेपी के लिए अहम् रोल निभाने वाले कारक

अब अगर बात कहानियो किस्सों की चल रही है तो एक नजर हम डालते है किस्से और कहानियो के हमारे थेरेपी में अहम् रोल के बारे में भी जान लेते है. ये किस्से कहानी इन तथ्यों से जुड़कर बनी हो सकती है जैसे की

ये सभी element हमें किसी भी घटना से जुडी कहानी को समझने में मदद करते है. ऐसे भी कई फैक्टर हो सकते है जो की हमारे कहानी को develop करने में अहम् योगदान निभाते है. इसके जरिये हम घटनाओ से कैसे खुद को जोड़े को समझने में मदद मिलती है. इसमें

  • Age
  • Socioeconomic status
  • Race
  • Ethnicity
  • Gender
  • Sexual identity

ये सभी फैक्टर ये तय करते है की हम घटनाओं के साथ कैसे interact कर रहे है. उनका हमारे ऊपर क्या असर हो रहा है और हम दुनिया के साथ कैसे व्यवहार करते है ये सभी इन फैक्टर पर depend करता है. ये हमारा विश्वास ही है जो सभी दूसरी चीजो को वैसे ही दिखाता है जैसे हम देखना चाहते है यानि हमारे ही नजरिये से दुनिया को देखना. हम खुद को समझाते है की दुसरो के साथ कैसे interact करे जब वो हमारे अनुसार ही हमारे साथ व्यव्हार कर रहे हो.

हम एक समय में अलग अलग कहानी को लेकर चलते है ये कोई किस्से कहानी नहीं बल्कि हमारे सपने या फिर टारगेट होते है जिन्हें हमें पाना होता है. ये हमारे पर्सनल लाइफ, प्रोफेशनल लाइफ, सोशल लाइफ से जुड़े होते है और जब थेरेपी के जरिये इन्हें समझने की कोशिश की जाती है तो हम खुद को explore करना शुरू कर देते है इस वजह से एक फायदा ये भी होता है की हमारे decision-making and behavior में भी बदलाव देखने को मिलना शुरू हो जाता है.

Our Dominant Story

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हम एक ही समय में एक से ज्यादा story के साथ जिंदगी बिताते है लेकिन इन सब में एक story ऐसी होती है जो बाकि सब पर हावी होती है.

ऐसी एक Dominant Story हमारे लाइफ में कई बार casually pain पैदा करने लगती है. ये एक story हमारे लाइफ में ग्रोथ, हेल्थ इन सबको प्रभावित करने लगती है.

एक narrative therapist अपने क्लाइंट्स के साथ मिलकर उस एक story को explore करने की कोशिश करता है.

क्लाइंट अपने साथ जो एक story एक हादसा लेकर चलता है उसका उसकी relationship पर क्या असर पड़ता है इसे समझने के बाद उसे सुलझाने की कोशिश होती रहती है. इससे हमारे decision-making और behavior patterns को लाइफ सुलझाने में मदद मिलती है.

यहाँ Dominant Story से हम उस एक घटना को समझ सकते है जिसकी वजह से हम अपनी दूसरी लाइफ की activity को प्रभावित करना शुरू कर देते है. हम सब की लाइफ में कोई न कोई एक ऐसी घटना होती है जिसकी वजह से हम बाकि की story में सही तरह से तालमेल नहीं बिठा पाते है.

 Thin Descriptions

अभी ऊपर हमने जिस डोमिनेंट स्टोरी का जिक्र किया है वो हमारे ऊपर किसी दुसरे व्यक्ति के जजमेंट से जुड़ी होती है. ऐसी एक कहानी जिसे हम खुद के लिए सही मान लेते है क्यों की उसे उस व्यक्ति ने कहा है जिससे हम सबसे ज्यादा प्रभावित होते है. उदाहरण के लिए मान लीजिये आप बचपन में पढ़ाई में थोडा कम तेज होते है.

आपके घरवाले या टीचर आपको मनबुद्धि कह देते है. अब आगे क्या होगा ? आप अब जब भी पढने की कोशिश करते है तो आपको लगता है की याद नहीं कर पाएंगे क्यों की आप मंदबुद्धि है. ये एक story आपको अब जब भी पढाई करते है प्रभावित करेगी क्यों की ये story आपके लिए अब डोमिनेंट बन चुकी है और वो भी किसी और के द्वारा थोपी गई कहानी.

narrative therapy में इन specific judgement को thin descriptions का नाम दिया जाता है. चूँकि ये हमारी लाइफ में साथ साथ चलता है इसलिए इसे thin conclusion का नाम दे दिया जाता है. इसमें दो चीजे काम कर रही है पहली thin एक टर्म है जो की उस specific कंडीशन को दर्शाती है और conclusion जो की उस कंडीशन में क्या बदलाव किया जा सकता है इसे description के जरिये दर्शाया जाता है. ये दोनों चीजे हमारे decision-making and behavior को प्रभावित करती है जिसकी वजह से कुछ बदलाव हम नोटिस कर पाते है.

Confusing Ourselves with Our Problems

ऊपर एक उदाहरण दिया गया था जिसमे किसी खास व्यक्ति के द्वारा हमें जज करने से जुड़ी कंडीशन शेयर की गई थी. इसे दुसरे शब्दों में समझने की कोशिश करते है. मान लीजिये आपके घरवाले आपको नाकारा, आलसी समझने लगते है और बात बात पर आपको ये याद दिलाते है की आप वो है तो क्या होगा ? आप उस image को भूल नहीं पाएंगे क्यों की ऐसा आपके घरवालो ने कहा है. इस बात को हमारे दिमाग से निकालना बेहद मुश्किल हो जायेगा क्यों की ये आगे चलकर एक डोमिनेंट स्टोरी बन जाती है.

ये चीज हमें लाइफ में आगे चलकर बहुत ज्यादा परेशान करती है क्यों की हम खुद पर से भरोसा खो देते है और एक सही निर्णय नहीं ले पाते है. इसके अन्दर सबसे बड़ी कमी भी यही है की इस पूरी story में हम अपनी कमजोरी पर ज्यादा फोकस होते है दुसरे शब्दों में कहे तो अगर हम इससे बहार निकलकर कुछ अच्छा करते भी है तो उसका सारा श्रेय खुद नहीं दे पाते है.

ये दर्शाता है की हमारे अन्दर विश्वास की कितनी कमी है. हम खुद को उस छवि से बाहर निकाल नहीं पाते है और ऐसे काम जो हमारी छवि को बदल सके हमारे लिए काम नहीं कर पाते है.

How Narrative Therapy Helps

Narrative therapy ज्यादातर उन story पर फोकस करती है जो की हमारे डोमिनेंट story से जुड़ी है और हमारी लाइफ में कुछ भी अच्छा करने से हमें रोक रही है. एक trained narrative therapist अपने क्लाइंट के साथ मिलकर उन problematic story को explore करता है और उनसे बाहर कैसे निकला जा सकता है इससे जुड़े best solution की तलाश करता है.

इस थेरेपी की मदद से हम उन विकल्प story की शुरुआत करते है जो हमारे लिए opportunity to challenge judgment का काम करती है साथ ही हमारा ध्यान डोमिनेंट स्टोरी की बजाय दूसरी कहानियो पर फोकस हो इस पर काम करती है ताकि हम खुद को और बेहतर बना सके.

ये सब करने के पीछे एक ही उदेश्य होता है our view of self, challenge old and unhealthy beliefs and to open our minds to new ways of living को change करना और लाइफ को बेहतर बनाने से जुड़ी कोशिश करना.

इस पूरी प्रोसेस में एक strong emphasis on separating the person from their problem काम करता है जो की एक नई तरह की विचारधारा व्यक्ति के मन में पैदा करता है. हम अपनी समस्या से जब तक जुड़े रहते है तब तक उन्हें examine नहीं कर पाते है इसलिए सबसे पहले एके स्पेस हमें अपने और समस्या के बिच पैदा करना होता है जिसके बाद हम आराम से अपनी समस्या को गौर कर पाते है.

ये सब करना ना सिर्फ हमें प्रॉब्लम से बाहर निकालता है बल्कि become an expert in their own life में भी help करता है. दुसरे शब्दों में समझे तो किसी एक गलत विचारधारा को तोड़कर नए विचारधारा को पैदा करना ही इसका उदेश्य है.

Narrative Therapy Exercises

आज के समय में ऐसी कई तकनीके और exercise है जिसके जरिये हम अपने problematic डोमिनेंट स्टोरी से छुटकारा पा सकते है और खुद को heal कर सकते है. कुछ खास मगर सबसे ज्यादा प्रयोग में आने वाली तकनीक निचे शेयर की जा रही है आप भी कर सकते है.

  • Putting Together Our Narrative

ज्यादातर लोग अपनी प्रॉब्लम से बाहर नहीं निकल पाते है क्यों की कोई उन्हें समझता ही नहीं है. एक्सपर्ट अपने क्लाइंट के साथ मिलकर उनसे अपनी और उनकी कहानी को शेयर करने लगते है. जब ऐसा होता है तो क्लाइंट उनके साथ मिलकर खुद को समझना शुरू करते है. डोमिनेंट story से बाहर निकलते हुए वो अपनी आवाज और खूबियों को पहचानना शुरू कर देते है जिसकी वजह से उनकी खास बाते खासकर आगे बढ़ सकते है. ऐसा करने का उदेश्य लोगो को अपनी प्रॉब्लम से हटाकर उन्हें अपनी खूबियों पर फोकस करना होता है.

कई बार ऐसा होता है की हम खुद ही नहीं जानते है की आखिर ऐसी क्या वजह है जिसकी कारण अहम् आगे नहीं बढ़ पा रहे है. ऐसी स्थिति में एक्सपर्ट सिर्फ अपने point of view को क्लाइंट में डालते है जिसके कारण वो अपनी प्रॉब्लम को समझना शुरू कर देते है. इसमें दिमाग तो क्लाइंट का होता है लेकिन इसमें जो जानकारी भरी जाती है वो एक एक्सपर्ट की होती है.

  • Externalization

ये तकनीक हमें अपनी प्रॉब्लम से दूर करने का काम करती है. ऊपर शेयर की गई तकनीक में हम अपनी आवाज को महसूस करना शुरू कर देते है और नई तरह की story पर फोकस होना शुरू कर देते है. जब हम ऐसा करते है तो जो unhealthy story होती है उसमे और हमारे बिच एक दुरी पैदा होना शुरू हो जाती है. Narrative therapy में अपने क्लाइंट को परेशानी वाली चीजो से दूर रखने पर काफी काम करते है.

इस दुरी को पैदा करने की काबिलियत को हम Externalization का नाम देते है. इसका मतलब है एक स्थिति से खुद को दूर करना. जब ऐसा होता है तब हम प्रॉब्लम को समझना शुरू कर देते है ना की उसे महसूस करना. जब ऐसा होता तो आगे चलकर हम खुद की उन खास बातों को बाहर निकालने की कोशिश करना शुरू कर देते है जो हमें आगे ले जा सकती है.

  • Deconstruction

इसका काम लोगो को उनकी समस्या को सही तरीके से समझने में मदद करता है. कई बार ऐसा होता है की हम प्रॉब्लम से बाहर सिर्फ इस वजह से नहीं निकल पाते है क्यों की हम खुद को डोमिनेंट स्टोरी से जोड़ लेते है और उसे इतना बड़ा मान लेते है की उससे बाहर ही ना निकल पाए. प्रॉब्लम को बड़ा मानने की वजह से हम उसमे इतना कंफ्यूज हो जाते है की बस उसी में उलझे रहते है और वास्तविकता से बाहर नहीं निकल पाते है. इसकी वजह है हमारे आसपास की घट रही घटनाओं को उस प्रॉब्लम से जोड़ लेना.

एक्सपर्ट इससे बचने के लिए प्रॉब्लम को छोटे छोटे टुकड़े में बाँट देते है और बाद में उसे इस तरह से सुलझाते है की एक प्रॉब्लम दुसरे प्रॉब्लम से न जुड़ पाए. ऐसा करने से हम डोमिनेंट story से आसानी से बाहर निकल पाते है.

  • Unique Outcomes

अगर हम मान लेते है की प्रॉब्लम बहुत बड़ी है और हम उससे कभी बाहर नहीं निकल सकते है तो हम उसी में फंस कर रह जाते है. कोई भी उपाय हम करते वो हमारे लिए काम नहीं कर पाता है क्यों की हम उसे अपनी प्रॉब्लम से ज्यादा नहीं समझ पाते है. यही वजह है की इसका असर हमारे decision making, our behaviors, our experiences, and our relationships पर देखने को मिलता है और ये चीजे बहुत ज्यादा प्रभावित होना शुरू हो जाती है.

एक्सपर्ट ना सिर्फ हमें challenge our problems के काबिल बनाते है बल्कि उसके alternate उपाय को भी आगे उभरने में मदद करते है जो हम अपने साथ लेकर चलते तो है लेकिन प्रॉब्लम की वजह से कभी उन पर ध्यान नहीं दे पाते है. ऐसा करना हमें develop a new, healthy story of who we are ( हम वास्तव में कौन है ) , what we want ( हम असल में क्या चाहते है ), and who we want to become ( हम वास्तव में बनना क्या चाहते है ) के लिए help करता है.

एक सही एक्सपर्ट की तलाश कैसे करे ?

Narrative therapy अपने आप में unique, specialized approach to counseling है जो हमें अपनी प्रॉब्लम से बाहर निकलने, negative image तोड़ने में मदद करती है. आप अपने आसपास के लोकल एरिया में उनकी पाह्चन कर सकते है या फिर ऑनलाइन सर्च कर सकते है. अगर आप जयपुर से है और ऐसे ही किसी एक्सपर्ट की तलाश कर रहे है तो इस वेबसाइट पर विजिट कर सकते है.

वैसे तो आजकल सबकुछ ऑनलाइन है और हम अपने लिए सबसे best का चुनाव कर सकते है फिर भी आप एक्सपर्ट से मिलकर उनके बारे में जान ले और फिर बेहतर अनुभव ले.

Narrative Therapy and my final thought

हर इन्सान की पहचान उसके शब्द होते है. अगर हम खुद को समझ नहीं पाते है तो आगे नहीं बढ़ सकते है. अगर हम अपने अन्दर फंसे हुए है या फिर किसी एक इमेज को ही सही मानकर अपनी खूबियों को बाहर नहीं निकाल पा रहे तो Narrative Therapy की मदद ले सकते है. इसकी वजह से हम खुद को प्रॉब्लम से बाहर निकाल कर आगे बढ़ने में help कर सकते है. अगर आप भी दुसरे लोगो द्वारा किये गए जजमेंट की वजह से खुद को आगे ले जाने में ना कामयाब पा रहे है तो आपको इसकी सहायता लेनी चाहिए.

आप चाहे तो किसी ऐसे दोस्त का चुनाव कर सकते है जो आपको आपकी प्रॉब्लम की बजाय आपकी ताकत पर फोकस करने में help कर सके. ऐसा करने से आप अपना ध्यान अपनी कमियों से हटा सकते है और उन्हें खुद से दूर कैसे किया जाए इस बारे में सोच सकते है. उम्मीद करता हूँ आपको पोस्ट समझ आ गई होगी और आप भी अपनी कमियों में फंसे रहने की बजाय खुद को अपने strength पर फोकस कर पाएंगे.

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