दुश्मन से छुटकारा पाने के लिए Muslmani putli sadhna की शक्तिशाली साधना का अभ्यास

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आज के समय में हम अपने दुश्मन को परेशान करने के लिए कुछ ऐसे उपाय देखते है जिसमे किसी का शक हम पर ना जाए और काम भी बन जाए. ऐसा ज्यादातर इसलिए होता है क्यों की सामाजिक स्थिति, दुश्मन का मजबूत होना आपको ऐसे उपाय देखने के लिए मजबूर करता है जिसमे किसी तरह का शारीरिक बल नहीं बल्कि तंत्र मंत्र काम आता है. Muslmani putli sadhna यानि कुछ ऐसी इस्लामिक साधना जिसमे हम मुसलमानी पुतली साधना का अभ्यास करते है इसमें काम आ सकती है. ये एक ऐसी साधना है जिसका प्रयोग दुश्मन को शारीरिक और मानसिक तकलीफ देना है. ये उसे मारती तो नहीं है लेकिन वो आपके कण्ट्रोल में आ जाता है जिसे मनचाहे तरीके से नचाया जा सकता है.

Muslmani putli sadhna

पुतली साधना तंत्र अपने आप में बहुत बड़ा विज्ञान है. एक पुतली के साथ किसी भी व्यक्ति की मानसिक और औरा ऊर्जा को जोड़कर हम उसे एक पुतली द्वारा मनचाहे तरीके से कण्ट्रोल कर सकते है. आपने वूडू के बारे में मेरी पिछली पोस्ट में पढ़ लिया है इसलिए अब हम मुस्लिम तरीके से वूडू यानि पुतली वशीकरण साधना के बारे में जानेंगे. ये साधना किसी भी व्यक्ति को कण्ट्रोल कर उसे अपने इशारे पर पुतले की तरह कण्ट्रोल करने के लिए की जाती है. जिस तरह से एक व्यक्ति पुतलो को कण्ट्रोल करता है वैसे ही वो व्यक्ति इसके इशारे पर हरकते करता है.

Disclaimer : इस साधना को शुरू करने से पहले में आपको बता दू की एक एक तामसिक साधना है और साधक को कुछ ऐसी क्रिया करनी पड़ती है जो सामान्य इन्सान के लिए संभव ना हो इसलिए मानसिक स्थिति से मजबूत हो तभी इसकी शुरुआत करे.

Muslmani putli sadhna मुसलमानी पुतली साधना

हिन्दू धर्म में यक्षिणी साधना का विधान है ठीक उसी तरह मुस्लिम धर्म की साधनाओ में पुतली साधना के बारे में पढने के बारे में काफी कुछ मिलता है. परी साधना कोई कोरी कल्पना नहीं है बल्कि इस्लामिक साधना में इसका जिक्र है आइये इस पोस्ट के माध्यम से जानते है 2 महत्वपूर्ण और शक्तिशाली पुतली साधनाओ के बारे में.

सबसे पहले बात करते है पुतली साधना के लिए पुतली का निर्माण कैसे किया जाता है. एक सफ़ेद कागज जो साफ सुथरा हो उसका चुनाव करना चाहिए. यंत्र का निर्माण कर रहे है तो ध्यान दे की सिर्फ इसके खाने काली स्याही से बनाये जाने चाहिए, यंत्र के अक्षर लाल स्याही से और फेरून का नाम काली स्याही से लिखा जाना चाहिए.

पुतली साधना विधि मेथड – 1

एकांत जगह पर साधक हाथ से साढ़े तीन हाथ निचा और ढाई हाथ चौड़ा लम्बा गोल गड्ढा खोद ले. इस गड्ढे में साधक पूरी तरह बैठ जाए ये इस तरह होना चाहिए. इस गड्ढे की दीवार को सटाकर एक और गड्ढा जो की एक हाथ दो अंगुल गहरा और एक बीता गोल हो ऐसा गड्ढा खोदे. इस गड्ढे को 12 साल से कम उम्र के बच्चे के मल से पुताई कर दे.

एक शीशी में खुद का मूत्र ले और उसे अपने साथ रखे. अँधेरे पक्ष की किसी भी रात से इसकी शुरुआत कर सकते है जैसे की पूर्णिमा के बाद से अमावस के दिन. अब आप Muslmani putli sadhna की शुरुआत करे.

नोट : कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष ये दो पक्ष होते है जिन्हें अँधेरा पक्ष और चांदनी पक्ष के नाम से जानते है. अमावस से लेकर पूर्णिमा तक की अवधि को शुक्ल पक्ष जिसमे चंद्रमा की कलाए बढती है और पूर्णिमा से अमावस तक की अवधि जिसमे चाँद की कलाए घटती है को कृष्ण पक्ष कहते है.

साधना के लिए साधक को सर पर टोपी, शरीर पर गंजी और निचे तहमद यानि लुंगी बांध कर उस गड्ढे में पूर्व की ओर मुख कर बैठना चाहिए. ये साधना शाम 7:30 से 11 बजे तक कभी भी शुरू कर सकते है और गड्ढे के अन्दर जो गड्ढा बनाया था उसमे आपको इस पुतली को स्थापित करना है. पुतली को काठ की कील की सहायता से दीवार पर ठोक दे.

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साधना काल का तरीका

पुतली साधना में आपको या फेरून का जप करना है. हर रोज आपको इसका जप सवा घंटा करना है, हर बार जब 21 जप हो जाते है तो आपको उस गड्ढे में शीशी से थोड़ी सी मूत्र की धार देनी है और फिर से जप शुरू कर दे ऐसा सवा घंटा तक चलना चाहिए, इस तरह ये साधना 11 दिन तक करनी है. साधना में जब आपको 9 दिन बीत जाते है तो कम्पन जैसा अनुभव हो सकता है जिसके लिए आपको “खाज खिज्र साहब मेरी मदद करे” यह प्राथना करनी होगी. ऐसा करने से भूकंप का अनुभव होना बंद हो जाएगा और 11 दिन बाद पुतली की साधना सिद्धि हो जाएगी.

अब पुतली को बाहर निकाल ले और गड्ढे को भर दे अगर शीशी में मूत्र बचा हुआ है तो उसे छोटे गड्ढे में डाल दे. नहा-धोकर पुतली की स्थापना किसी साफ सुथरी जगह कर दे.

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पुतली तंत्र का प्रयोग विधि

Muslmani putli sadhna method 1

जैसी पुतली आपने पहले बनाई थी ठीक वैसी ही एक और पुतली बनाए. इसके दोनों चिरागों के बिच जिस व्यक्ति को कण्ट्रोल करना है उसका पूरा नाम लिखे.

अपने दुश्मन के बाए पैर की मिटटी ले आये और एक बड़े ताबीज मे पुतली यन्त्र साफ़ कागज पर उसी तरह लिखकर स्थापित कर दे.

दुश्मन के पैर की मिटटी को पुतली में चीरकर भर दे और फिर घोड़े के 3 बाल लेकर इसे पुतली के चारो और लपेट दे.

अब इस पुतली को एक लम्बी डोरी की सहायता से छत पर इस तरह टांग दे की इसे ऊपर निचे किया जा सके. डोरी की एक और ताबीज होना चाहिए तथा दूसरी ओर पुतली जिससे की अगर पुतली निचे आये तो ताबीज ऊपर जाए और ताबीज निचे आये तो पुतली ऊपर की ओर. इसे आप जब भी ऐसा करेंगे दुश्मन भी वैसे ही उछल कूद मचाने लगेगा.

पुतली साधना के प्रयोग की सीमाए

इस Muslmani putli sadhna का प्रभाव बस इस तरह ही हो सकता है पुतली का काम बस इतना ही है इससे ज्यादा आप दुश्मन को कण्ट्रोल नहीं कर सकते है.

इस पुतली के और भी अलग अलग प्रयोग है और आप जैसे चाहे अपने दुश्मन को सजा दे सकते है. जैसे की

  1. एक पुतली का निर्माण करे और फिर जहा पर आपके दुश्मन में मल मूत्र विसर्जन किया है वहां की मिटटी ले आये. इस मिटटी और पुतली को एक हाथ दो अंगुल गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ दे. जब तक वो पुतली गड्ढे में दबी हुई रहेगी दुश्मन का मल मूत्र बंद रहेगा. ये एक स्तम्भन प्रयोग है.
  2. एक पुतली ऊपर दी गई विधि से बनाए लेकिन इसमें आपको किसी भी तरह का नाम नहीं लिखना है. ये दुश्मन के लिए नहीं बल्कि उपरी साए को हटाने के लिए अचूक प्रयोग है. जिस रोगी में किसी तरह का साया है या प्रेत बाधित है उसके सामने बैठे और उसे इस पुतली वाले कागज को लेने को कहे. रोगी को अपनी नजर इस पुतली पर फोकस करने को कहे. जब वो ऐसा करने लगे तो कुछ देर बाद रोगी को ये कहे की वो दुष्ट साये को इस पुतली में आने को कहे. ऐसा करने पर कुछ देर बाद ही उसे वो आत्मा उस पुतली में दिखाई देने लगती है.

जब रोगी कहे की आत्मा अब कागज में स्थापित पुतली में आ गई तो उस कागज की 3 परत (मोड ) करे. एक सूत को उस पर लपेटे और बहते हुए पानी में डाल दे. ऐसा करने पर आपको पत्थर गिरने की अवाज सुनाई देगी और वो आत्मा अब उस रोगी को कभी परेशान नहीं करेगी.

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पुतली साधना में ध्यान देने योग्य बाते

  1. Muslmani putli sadhna के तीनो प्रयोग करते समय आपको या फेरून का जप करना चाहिए.
  2. जिस पुतली को आपने सिद्ध किया है उसे किसी काम में नहीं लेना है बल्कि साफ सुथरी जगह स्थापित करना है. हर कार्य के पहले पुतली के सामने प्राथना करे की जो काम करने आप जा रहे है उसे सिद्ध करे. इस तरह से अपने सभी प्रयोग को पूर्ण करे आपको कामयाबी मिलेगी.

 पुतली सिद्धि साधना विधि 2

Muslmani putli sadhna method 2

पहली विधि के अनुसार ही इस साधना हेतु पूतली बना ले. एक साढ़े तीन हाथ की लम्बाई का गोल एरिया बना ले. इस एरिया में चार से छ लम्बी लकड़ी गाड़ दे.

ये लकड़ी गाड़ने के बाद जमीन से साढ़े चार हाथ ऊपर रहनी चाहिए. अब एक साढ़े तीन हाथ लम्बा और साढ़े चार हाथ चौड़ा काला कपडा ले. इस कपडे को लकड़ी के चारो और लपेट दे और बिच में सिल दे ताकि वो गिरे नहीं.

इस कपडे को अन्दर की ओर से साधक अपने मल से कपडे को लीप दे और बिच में खड़े हो जाए.

घेरे के बाहर कपडा लगा दे और मुह को पूर्व की ओर करके बैठ जाए. पुतली के कागज पर चारो ओर पत्थर रख दे ताकि वो उड़े नहीं. जिस तरह कपड़े पहली विधि में पहने थे ठीक वैसे ही पहने और साधना की शुरुआत करते हुए “या फारून” का जप शुरू कर दे. ये साधना भी सवा घंटे की है जो की पुरे 9 दिन चलती है.

करीब सातवे रोज साधक को अपने पैर सुन्न होते हुए महसूस होने लगेंगे, हो सकता है की साधक में खड़े होने की भी शक्ति न रहे. इस वक़्त साधक को अपने पैरो के निचे से चार अंगुल गहरा हथेली के बराबर गड्ढा खोद ले और दाये हाथ की हथेली रखकर 21 बार “खाज खिज्र साहब मेरी मदद करे” का जप करे. ऐसे करने से साधक को वापस आत्मबल मिलना शुरू हो जाता है.

Muslmani putli sadhna की साधना के अंतिम दिन साधक का शरीर भाप निकालना शुरू कर देता है जो की साधना से पहले की परीक्षा होती है. ऐसा होने पर पुतली को अपने निचे से निकालकर हाथ में उठा ले और 108 बार “या फारून” का उच्चारण करे. इसके बाद वापस उसे निचे रख ले ऐसा करने से भाप निकलना बंद हो जाती है. नवे रोज आपकी साधना पूर्ण हो जाती है इसके बाद पुतली को निकाल ले और कपडे व् लकड़ी को जला दे. नहा-धोकर उस पुतली को किसी साफ जगह स्थापित कर दे.

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 पुतली का प्रयोग करने का तरीका

  1. एक पुतली ऊपर दी गई फोटो के अनुसार बना ले. सूर्य के निचे काली स्याही से शत्रु का नाम लिखे. उस पुतली से प्राथना करे की जो काम में करने जा रहा हूँ वो पूरा हो ऐसा कहकर उस पुतली को एक थाली पर चिपका दे. अपने शत्रु के दाये पैरो की मिटटी ले आये और उस मिटटी के ऊपर थाली को औंधा रख दे. किसी चीज को लेकर थाली को पिटे जैसी आवाज वो थाली करती है वैसी ही आवाज दुश्मन के पेट से आयेगी. जिस किसी चीज पर चिपका कर मिटटी के ऊपर रखते हुए आवाज पैदा होगी वैसी ही आवाज दुश्मन के पेट से आने लगती है.
  2. पुतली में मुह वाली जगह दुश्मन के पैरो की मिटटी लगा दे और घोड़े की पूंछ के बाल को फिराना शुरू कर दे. जब जब आप ऐसा करेंगे दुश्मन के आँखों में झुंझ, नाक में छींक और गले में खरखरी रहना शुरू हो जायेगा. जब आप ये बंद करेंगे तो दुश्मन भी आराम करेगा.
  3. पुतली के पेट पर दुश्मन के दाये पैर की मिटटी डाल दे और फिर जहा पुतली के हाथ में करात है वहां पर घोड़े की पूंछ का बाल फिराना शुरू कर दे. जब आप ऐसा करेंगे तो दुश्मन के पेट पर जैसे करात चल रही है ऐसा महसूस होगा बंद करने पर उसे आराम मिलना शुरू हो जायेगा.
  4. शत्रु के थूक या पान की पीक को लाकर उसमे कुछ रंग मिलाकर पुतली की आंख पर लेप दे जितने समय तक आँखों पर वो लेप रहेगा दुश्मन के आँखों के आगे उतने ही रंग दिखाई देंगे.
  5. अगर किसी के ऊपर प्रेत या पारलौकिक शक्ति का साया है तो वो इससे ठीक हो जायेगा तरीका उपर वाले के जैसा ही है.

ऊपर जितने भी तरीके और प्रयोग बताए है वो सब दुश्मन को सिर्फ मनचाहे तरीके से कण्ट्रोल करने या फिर हल्का फुल्का नुकसान पहुँचाने के लिए है ना की जान से मारने के लिए.

Muslmani putli sadhna मेरा विचार

दोस्तों ऐसी कई सारी साधना और सिद्धि है जिसके माध्यम से हम अपने कार्य की सिद्धि कर सकते है. 6 अलग अलग कर्म और उनकी सिद्धि साधना के विधान हमें मनचाहे परिणाम पाने में मदद करते है. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से परेशान है जो की आपसे ज्यादा ताकतवर है और उस पर विजय पानी है तो इस तरह की कई साधना है जिनके माध्यम से आप अपनी इच्छा को पूरा कर सकते है.

यहाँ शेयर की गई ये साधना किसी तरह का अनुभव नहीं है बल्कि एक जानकारी है. इसके पूर्ण होने न होने का दावा sachhiprerna नहीं करता है इसलिए इसे करने से पहले किसी अच्छे गुरु या मार्गदर्शक से सलाह जरुर ले. पोस्ट पसंद आये तो शेयर करना न भूले.

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