घर पर किये जाने वाले कुछ आसान मगर खास अभ्यास जो बनाते है साधक को mesmerism में expert

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mesmerism और hypnotism की कड़ी में आगे बढ़ते हुए अब बात करते है मेस्मेरिज्म की power हासिल करने के लिए साधक को किन गुणों से युक्त होना चाहिए। मेस्मेरिज्म और सम्मोहन दोनों में ही साधक को पवित्र मन वाला होना चाहिए, साधक पवित्र विचारों वाला और स्वार्थहीन होना चाहिए. सिर्फ पवित्र मन का साधक ही मेस्मेरिज्म की शक्तियां धारण कर सकता है। mesmerism practice at home के लिए साधक में क्या गुण होने चाहिए और कैसे कोई भी इसे without गुरु और guide के कर सकता है आज की पोस्ट में जानते है सबसे खास और आसानी से किये जाने वाले अभ्यास के बारे में.

mesmerism practice at home

मेस्मेरिज्म के साधक को प्राण ऊर्जा से युक्त होना चाहिए. प्राण ऊर्जा शरीर में कैसे बढ़ाई जाये इसके लिए प्राण ऊर्जा की पोस्ट देखे। प्राण ऊर्जा सभी शक्तियों का मूल है प्राण ऊर्जा ही सम्मोहन में चुम्बकीय / आकर्षण शक्ति में बदलती है और मेस्मेरिज्म में यही शक्ति हमारे subconscious mind को activate कर हमें बंधनो से मुक्त करती है. वह स्थान जहां मेस्मेरिज्म का अभ्यास किया जाये उसे पहले इसके लायक बना लेना चाहिए।

mesmerism practice at home के लिए स्थान का चुनाव

मेस्मेरिज्म की शक्ति को अभ्यास से बढ़ाया जाता है. और अभ्यास के लिए स्थान का चुनाव करना जरुरी है. इसके अभ्यास के लिए गहन शांति और संयम जरुरी है. इसलिए मेस्मेरिज्म के अभ्यास के लिए ऐसा स्थान चुने जो सुन्दर साफ और अंधकार रहित हो न उसमे तरी (नमी) हो. शुद्ध वायु का प्रवाह कमरे का मुंह उत्तर या पूर्व की दिशा में शुभ मना जाता है. उष्ण, दुर्गन्धयुक्त न हो और कमरे के अंदर चुने की पुताई हो।

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mesmerism practice at home के लिए समय का चुनाव :

मेस्मेरिज्म के अभ्यास के लिए समय हमेशा नियत होना चाहिए। हमेशा एक तय वक़्त पर अभ्यास करना शक्ति के संतुलन को बढ़ाता है. रात्रि के 10 बजे बाद का वक़्त अभ्यास के लिए सही माना गया है. क्यों की इस वक़्त तक हम सांसारिक से मुक्त हो कर मस्तिष्क की हलचल को संयत करने लगते है. इसलिए इस वक़्त अगर रोज तय वक़्त पर अभ्यास किया जाये तो सफलता मिलती है। मेस्मेरिज्म के अभ्यास में दो प्रकार के अभ्यास किये जाते है

  1. विचारों को एक जगह केंद्रित कर मानसिक शक्ति को चेतन्य करते है।
  2. दूसरे अभ्यास में नेत्रो की आकर्षण शक्ति को बलवान बना कर आकर्षण शक्ति को चेतन्य किया जाता है।

आँखों की आकर्षण शक्ति को बढ़ाने का अभ्यास

एक साफ सुन्दर कमरे में जहां शोरगुल ना हो.ऐसे कमरे में 1 फुट लम्बे चौड़े सफ़ेद कागज पर काली स्याही से इसके बीचोबीच एक गोल चव्वनी के बराबर निशान बना कर दीवार पर चारो कोनो पर कीले गाड़ दे. जिससे ये कागज हिले नहीं। इस बिंदु पर त्राटक का अभ्यास करे आँखों से पानी आने पर आँखे बंद कर दोबारा कुछ देर बाद अभ्यास करे. यह बिंदु त्राटक जैसा अभ्यास है.यह अभ्यासं सुबह 4 से 5 बजे के मध्य करना चाहिए।

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magnetic power and mesmerism

प्रत्येक मानव शरीर के अंदर अनन्त विधुत शक्ति का भंडार है. इसके द्वारा मानव अपने विचारों को दूसरे मानव के अंदर प्रवेश करवाता है. जब त्राटक का अभ्यास हो जाता है तब मनुष्य के आकर्षक शक्ति में बाहरी वस्तुओं की शक्ति लीन हो जाती है।

mesmerism practice at home अभ्यास

मेस्मेरिज्म के लिए 2 अभ्यास होते है. ये अभ्यास मनुष्य के प्रकृति पर निर्भर करते है. मनुष्य की प्रकृति सर्द और गर्म होती है ये निर्भर करती है चन्द्रमा और सूर्य के ऊपर.जिन की प्रकृति सर्द होती है। उन्हें चन्द्रमा पर अभ्यास करना चाहिए और जिनकी प्रकृति गरम होती है उन्हें सूर्य पर अभ्यास करना चाहिए।

1. Moon gazing tratak – mesmerism practice at home

इस अभ्यास में चन्द्रमा के उदय और अस्त होने पर नजर स्थिर रखनी होती है. जिस समय चन्द्रमा का उदय होता है उस वक़्त चन्द्र पर नजर स्थिर रखे. चन्द्रमा के उदय को टकटकी लगा कर देखे। कुछ समय तक चन्द्र का रंग बदलता हुआ दिखाई देता है इसके बाद चन्द्रमा के अभ्यास को बढ़ाते रहने पर नए नए रहस्य दिखने लगते है.

इसकी वजह है शरीर का 70%हिस्सा जल से निर्मित होता है, और चन्द्रमा के उतर चढाव से इसमें बदलाव आते रहते है ये हमारे मन की गति उसकी हलचल को नियत्रित करता है. इसलिए चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करने से मन की गति का संयम होता है. ये उनके लिए प्रभावशाली है जिनके मन की गति चंचल होती है. चन्द्र त्राटक से हमें मन के संयम में सहायता मिलती है.

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2. सूर्य के अस्त पर त्राटक/sun tratak

सूर्य जिस वक़्त अस्त होता है. तब किसी निर्जन स्थान पर सूर्यास्त के वक़्त मुंह पर कपडा लगाकर आँखे बंद कर मन में दृढ संकल्प करके सोचे की मुझे सूर्य के दर्शन हो.

  • इस तरह का अभ्यास मुंह पर कपडा लगाकर आँखे बंद कर संकल्प शक्ति द्वारा आत्मशक्ति को चेतन्य कर किया जाता है. इस तरह का अभ्यास सूर्य के अस्त पर किया जाता है जब सूर्य का रंग लाल होता है.
  • उस वक़्त से लेकर सूर्य के अस्त होने तक यानि के 30 से 40 मिनट तक के अभ्यास के वक़्त में अपनी आत्मशक्ति को बलवान करने का प्रयत्न जैसे जैसे अभ्यास बढ़ता है आँखों के मध्य में बिंदु दिखाई देने लगेगा.
  • कुछ दिन बाद यह बिंदु गायब होकर श्वेत बिंदु का रूप ले लेता है. इसी तरह अभ्यास करते करते वह बिंदु प्रकाशवान होने लगता है। अभ्यास के 10 से 15 दिन अभ्यास के बाद चाहे सूर्य दिखाई दे या न दे जब भी निर्जन स्थान पर आप अपनी आकर्षण शक्ति को बलवती कर संकल्प लेंगे और मन में कामना करेंगे आपको सूर्य के दर्शन होने लगते है।
    कुछ लोगो के मतानुसार सूर्य की शक्ति अति सूक्ष्म है और

“ॐ श्री आंक” सूर्य का बीज मंत्र है.

सूर्य की उपासना में यह मंत्र प्रधान है. सूर्य त्राटक में जिस कपडे को मुंह पर ढकते है वह लाल रंग का होना चाहिए. चन्द्र का प्रभाव ठंडा है इसके अभ्यास में दूध दही और श्वेत कपडे का इस्तेमाल करना चाहिए।

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mesmerism practice at home – माध्यम का चुनाव

मेस्मेरिज्म में मामूल यानि शागिर्द की आवश्यक्ता होती है,  इसके लिए स्वस्थ शरीर के ऐसे युवा बालक का चुनाव करे जो आप पर विश्वास करता हो. कांच के गिलास में पानी भर कर एक घेरे में कुछ बच्चों को बिठा दे और उन्हें कहे की पानी पर नजर जमाए. जिस बालक की नजर सबसे पहले आपके आकर्षण से बंद होने लगे उस बालक का चुनाव करे।

mesmerism practice at home साधना नियम/mesmerism rule

जब त्राटक के द्वारा आँखों की आकर्षण शक्ति बलवान हो जाती है तब एक कमरे में माध्यम (बालक) को दक्षिण दिशा में बैठा दे और उसके पीछे खड़े होकर मन में विचार करे की उसकी आकर्षण शक्ति के प्रभाव से बालक जल्दी से अचेतावस्था में आ जाये. बालक जिसे आप पर उसके मन में भी यही विचार हो की में गुरु के आकर्षण शक्ति के प्रभाव से अचेत हो रहा हुँ. साधक माध्यम के दोनों हथेलियों पर अपने हाथ के दोनों अंगूठे रख कर नेत्रो से नेत्र मिलाये परन्तु पलक न झपकाए.

इस अवस्था इस अवस्था में बालक पर सम्मोहन का प्रभाव पड़ना चाहिए. जब बालक अचेत हो जाये तब उसे पृथ्वी पर चित लेटा दे. इसके बाद पास द्वारा ( raiki ) पुनः चेतना में लाइए. इस प्रकार का अभ्यास प्रतिदिन करे इससे उस समय साधक बालक से जो सवाल करेगा बालक उनके सही सही जवाब देगा।

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दूसरी क्रिया में पहली क्रिया से ज्यादा जल्दी असर पड़ता है. साधक अपने दोनों हाथो में चुम्बक ले और बालक के दोनों हाथो में दो लोहे की गोलिया देवे इसके बाद दोनों (साधक और बालक) हाथो से हाथ और आँखों से आँखे मिलते रहे. इससे बालक जल्दी अचेतावस्था को प्राप्त होगा। साधक पत्र के हाथ में हरी घास दे करहवा गांठ रखे और हाथो को मिलावे या बालक के पांव या अंगूठे गायों के थनों से तत्काल निकला हुआ दूध मले. परन्तु नेत्र मिलते रहे इस बात का ध्यान रखे. क्यों की आँखों का सम्बन्ध पैरो के अंगूठे से है।

पात्र को सचेत करना

बालक के शरीर पर उल्टा पास करके हम बालक को सचेत कर सकते है. इसके अलावा पंखे से हवा करके या घंटे का शब्द करने से भी बालक को सचेत किया जा सकता है। mesmerism practice at home का अभ्यास करने के लिए ये सबसे अच्छी प्रैक्टिस है.

mesmerism practice at home – पास करना

आँखों के अलावा शरीर की विधुत ऊर्जा का प्रवाह हाथो की अंगुलियों के पोरुओ में सबसे अधिक है. पास अनुलोम और प्रतिलोम 2 तरह से किया जा सकता है. प्रतिलोम पास का कार्य विधुत ऊर्जा के प्रवाह को उतारना है.

  1. अनुलोम पास : ( सीधा पास ) पास मस्तिष्क से शुरू होकर पैरो की तरफ किया जाता है. जो बिना किसी स्पर्श के होना चाहिए। इसके लिए रैकी की पोस्ट जरूर पढ़े।
  2.   2. प्रतिलोम पास ( उल्टा पास ) प्रतिलोम पास पैरो से शुरू होकर मस्तिष्क की और किया जाता है. दोनों तरफ के पास से पहले आकर्षण शक्ति चढ़ाई दूसरे में उतारी जाती है. जिससे माध्यम ( बालक ) सचेत हो जाता है.

इसका कारण सिर्फ इतना ही है की पोरुओ द्वारा वायु बिजली की किरणों को अपनी और खींचती है. हाथो में वायु का अंश दूसरे स्थान से अधिक रहता है. इसे ही पास मार्जन कहते है।

पढ़े  : क्यों आखिर कई बार एक के बाद एक काम उल्टे पड़ने लगते है जानिए इसके पीछे की वजह

mesmerism practice at home_ final word

तो दोस्तों ये तो थे कुछ आसान और घर पर की जाने वाली मेस्मेरिज्म की साधना से जुड़ी खास प्रैक्टिस. अगर आप और ज्यादा जानना चाहते है तो मार्जन के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए पढ़े मार्जन की आने वाली पोस्ट। आज के इस पोस्ट mesmerism practice at homeपर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।

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