ध्यान से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमी जिनकी वजह से हमें सही अनुभव नहीं हो पाते है

ध्यान से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमी जिनकी वजह से हमें सही अनुभव नहीं हो पाते है

ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये उन लोगो की सोच है जिन्होंने कभी ध्यान करने की कोशिश भी नहीं की है। या फिर अगर की भी तो ऐसी बड़ी बड़ी बाते और नियम पालन की धारण बनाई की ध्यान ही बोझ लगने लग गया। आम समाज में जहा विकसित देश importance of meditation अपने daily life में अपना कर problem solve कर रहे है वही भारत जैसे देश में जो Meditation और आध्यात्म का जनक माना जाता है वही पर इसको लेकर बहुत से लोग जागरूक नहीं है। top myth and fact about meditation in Hindi.

ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये
meditation से जुड़ी गलत धारणाये रखने वाले इंसान के लिए Meditation हमेशा कठिन हो जाता है क्यों की उसने कभी उसे सही तरीके से करने की कोशिश नहीं की। हमें Meditation को साधना समझ कर नहीं करना चाहिए जिसमे बहुत से नियम और निर्देश हो बल्कि एक व्यायाम जिससे हम खुद को पूरी तरह बदल ले की तरह करना चाहिए। इससे ना सिर्फ ध्यान आपको आसान लगेगा बल्कि इसके आश्चर्यजनक परिणाम भी मिलेंगे। आइये देखते है हमारे समाज में फैली ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये जो किस तरह ध्यान को रहस्यमयी बना रही है।

ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये :

meditation करने का सही तरीका है उसकी कार्यप्रणाली को समझना जिसके लिए हमें सिर्फ कुछ पल कुछ देर अकेले में बिताना है। सिर्फ कुछ देर सहज रूप से बैठने मात्र से आप ध्यान का अहसास कर सकते है। सबसे पहले तो ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये जानते है।

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1.) ध्यान बहुत कठिन है :

हमने ये धारणा इसलिए मन में बना ली है क्यों की हमारी नजर में ध्यान मतलब गुफाओ, हिमालय में बैठे साधु संत है जो कठिन तप और ध्यान लगाते है। जबकि अगर आप अनुभवी गुरु से सही मार्गदर्शन ले लेते है तो वही ध्यान आपकी दिनचर्या का आसान सा हिस्सा बन जाता है। ये आपके सांसो पर ध्यान लगाना हो सकता है या फिर एक मंत्र का जाप करना भी।

ध्यान हमें कठिन लगता है इसकी एक वजह हमारा जबरदस्ती एकाग्रता पर ध्यान देना भी हो सकता है। क्यों की हमारा असली काम एकाग्र होना है लेकिन जबरदस्ती नहीं क्यों की ध्यान का दूसरा नाम ही सहज होना है। इसलिए कभी भी जबरदस्ती एकाग्रता का अभ्यास न करे इसकी बजाय किसी माध्यम में खोने का अभ्यास करे जैसे त्राटक इसके बाद ध्यान आपके लिए बहुत ज्यादा सहज हो जायेगा।

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2.) ध्यान में सफल होना मतलब पूर्ण विचारशून्य :

ध्यान हमारे विचारो को रोकने का काम या शून्य होने का काम नहीं करता है। ये दोनों ही हमारे अंदर तनाव या आंतरिक अस्थिरता लाते है। हम अपने विचारो को कण्ट्रोल नहीं कर सकते है पर ध्यान द्वारा हम ये तय कर लेते है की उन्हें महत्व कितना देना है। और यही हमें सफल बनाता है। अगर हमारे विचारो के मध्य गैप भी आ जाता है तो भी हम ध्यान में सफल है।

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हम ध्यान में किसी माध्यम का प्रयोग तो करते ही है जैसे हमारी सांसे, हमारे विचार या आज्ञाचक्र या फिर किसी मंत्र का जप। विचार फिर भी आते है पर हम उन पर ध्यान देने की बजाय महत्व हमारे मंत्र जाप या सांसो को देते है इससे एक गैप आ जाता है जो विचारो की गति को तोड़ देता है। ये कुछ क्षण के लिए भी महसूस हो सकता है पर हमारा मस्तिष्क इतने कम वक़्त में भी तरोताजा महसूस कर सकता है। क्या आप जानते है :

ध्यान की शून्यावस्था में बिताया गया एक पल आपको दोबारा तरोताजा कर देता है।

3.) ध्यान में लंबे समय की साधना और धैर्य की आवश्यकता है :

ध्यान का महत्व और लाभ कम समय और लंबे समय दोनों पर लागू है। अगर आप नियमित अभ्यास करते है तो कुछ दिन में ही आप इसके लाभ महसूस कर सकते है। वैज्ञानिक तथ्यों से ये प्रमाणित हो चूका है की ध्यान के कुछ सप्ताह के अभ्यास से भी हमें शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिल सकते है।

हावर्ड में किये गए एक प्रयोग द्वारा सिद्ध किया गया की ध्यान के कुछ सप्ताह की प्रैक्टिस न सिर्फ आपके तनाव को कम करती है बल्कि आपके मानसिक सोच में भी वृद्धि करती है और आप चीजो को ज्यादा समय तक सहेजे रख सकते है। नियमित अभ्यास द्वारा आप खुद के तनाव स्तर को नियंत्रित कर सकते है जैसे में करता हु आंखे बंद कर। क्या आप जानते है की :

ध्यान में बिताये गए आपके कुछ मिनट आपके अंदर सोचने की बेहतर क्षमता का विकास कर देता है। और आप ज्यादा से ज्यादा सूक्ष्म और सवेंदनशील होने लगते है।

4.) ध्यान मतलब सबकुछ छोड़ कर पलायन कर जाना :

ध्यान का मतलब है अपने अंतर से जुड़ना ना की भौतिक स्वरूप में सब कुछ छोड़ कर पलायन करना। ध्यान में हम अपने अंतर की गहराई में उतरते है जो संभव है कुछ वाक्यो को बार बार दोहराकर। इन सबसे हमें पता चलता है की हम कौन है और हमारा उदेश्य क्या है। ध्यान द्वारा हम खुद की समस्याओ का समाधान कर सकते है और इन सबके लिए हमें कही एकांत या छुपने की जरुरत नहीं है।

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5.) मेरे पास ध्यान करने के लिए प्रयाप्त वक़्त ही नहीं है :

हमारी आज की जीवन शैली बहुत ही व्यस्त हो चुकी है। ऐसे में अगर कुछ पल मिले तो हमें उन क्षण में ध्यान करना चाहिए। क्यों की कुछ ना करने से तो अच्छा है थोड़ा बहुत ही करना। ध्यान हमारी जरुरत बन जाये तब हम इसे दिनचर्या में भी उतार सकते है।

जब हम ध्यान करते है तो हम वक़्त का सही इस्तेमाल कर पाते है क्यों की इस वक़्त हमारी धड़कन मंद पड़ जाती है, खून का बहाव सामान्य हो जाता है और हम ज्यादा से ज्यादा रिलैक्स हो जाते है जिसके लिए हम वक़्त ढूंढते फिरते है वो ही तो हम कर रहे है। इतना ही नहीं ध्यान का कुछ पल का अभ्यास भी आपके दिनचर्या में आपके काम के तरीके और सोच पर काफी बड़ा प्रभाव डालता है जिससे वक़्त ही बचता है। यकीन ना हो तो करके फर्क महसूस कर के देखे।

6.) ध्यान सिर्फ आध्यात्म या धर्म विशेष से जुड़ा है :

ध्यान असल में हमें कोलाहल भरे माहौल से शांत माहौल में ले जाने का माध्यम है। ध्यान के लिए आध्यात्म या धर्म विशेष से संबंध रखना या कोई विश्वास मानना भी जरुरी नहीं है। कुछ लोग अपने अंतर में उतरने और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ के लिए ध्यान करते है जैसे रक्तचाप, हृदय संबंधी स्वास्थ्य के फैक्टर। ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये हमारे व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

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7.) ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये – उत्कृष्ट अनुभव की कामना :

ध्यान में कुछ लोग सिर्फ इसलिए निराश हो जाते है की उन्हें किसी भी तरह का आध्यात्मिक उन्नति, शक्ति का अनुभव या बदलाव महसूस नहीं होता है। तो क्या ध्यान से सिर्फ यही हासिल होता है। ऐसे लोग दूसरे पहलुओ पर ध्यान देना भूल जाते है। जैसे की स्वभाव में बदलाव, स्वास्थ्य, कार्यशैली और अन्य कई फैक्टर जो सामान्य जीवन से जुड़े है। ध्यान का महत्व सामान्य जीवन में हमें ज्यादा रचनात्मक, धैर्यशील, खुद से प्यार और जो मिले उसके प्रति एक आदरणीय स्वभाव बनाना है। जिसमे हम कामयाब भी होते है।

दोस्तों ध्यान कोई बहुत बड़ा रहस्य नहीं है जिसके लिए आपको अलग जीवन का दिखावा करना पड़े। इसके लिए आपको सिर्फ कुछ मिनट ही देने पड़ते है जिससे दैनिक जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आप महसूस कर सकते है। आज की पोस्ट ध्यान से जुड़ी गलत धारणाये आपके हर उस सवाल का जवाब है जो आपको ध्यान करने से रोकता हो। आज की पोस्ट पर अपने सुझाव जरूर दे और हमें सब्सक्राइब करना ना भूले।

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