ध्यान सिर्फ आपके शारीरिक और मानसिक ही नहीं आध्यात्मिक विकास में भी सहायक है

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क्या आप जानते है की ध्यान का महत्व क्या है ? ध्यान क्यों करते है या फिर हमें क्यों नियमित ध्यान के लिए कुछ वक़्त निकालना चाहिए। आज में आपके सामने कुछ ऐसी बाते रखने जा रहा हूँ, जिनकी वजह से हमें नियमित ध्यान की आदत अपना लेनी चाहिए। ध्यान के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ क्या है इन सब बातो को आज समझते है। complete personal and spiritual development by meditation in Hindi.

ध्यान का महत्व
सबसे पहले में आपको बता देना चाहूंगा की ध्यान लगाने के लिए कही किसी गुफा, पेड़ या पहाड़ो पर जाने की जरुरत नहीं है। ना ही हमें अपने सांसारिक कर्म का त्याग करना पड़ता है। ज्यादातर लोग ध्यान के बारे में यही धारण बना लेते है की गृहस्थ व्यक्ति कभी ध्यान में सफल नहीं हो सकता है या फिर इसके लिए हमें सांसारिक जीवन का त्याग करना पड़ता है।

ध्यान क्या है और ध्यान का महत्व क्या है :

ध्यान की अलग अलग चरण में अनुभव के अनुसार अलग अलग परिभाषा दी जा सकती है। पर अगर सरल शब्दो में इसे समझे तो ध्यान का मतलब है किसी वस्तु, चीज पर गौर करना, उसे समझना। साधारण जीवन में हम ज्ञान को समझते है, आध्यात्मिक संसार में हम अपने अंतर के रहस्य को समझते है कैसे ? ये सब ध्यान द्वारा संभव है। अगर साधारण जीवन में आप पुरे होश में किसी चीज को समझते है तो वो भी ध्यान की ही परिभाषा है। क्यों की ध्यान का दूसरा नाम है होश।

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ध्यान लगाने के माध्यम :

ध्यान लगाने के लिए आप सुखासन और पद्मासन की मुद्रा इस्तेमाल कर सकते है। सुखासन में बैठने के बाद अगर आपकी कमर सीधी नहीं हो रही है तो आप बाये पैर को इस तरह लगाए की दाये पैर पर वो सपोर्ट का काम करे। इस तरह करने से आप पाएंगे की आपका कमर सीधा होने लगा है।

सबसे सरल विधि है आंखे बंद कर किसी के विचार पर फोकस होना। जैसे की आपको कुछ याद नहीं आ रहा और आप आंख बंद कर उसके आसपास की गतिविधि के बारे में सोचते है और आपको याद आ जाता है। ध्यान का ये सरलतम अभ्यास है जिसमे हम अपनी समस्या को अच्छे से समझ कर ना सिर्फ उसका समाधान सोच पाते है बल्कि उसके विकल्प भी जो समस्या को बेहतर तरीके से हल करने में मददगार होते है।

दूसरी अवस्था में आप ऊपर के दोनों आसन में किसी का भी चुनाव कर ले और अपने आज्ञाचक्र पर ध्यान केंद्रित करे। तीसरी अवस्था में आप अपनी सांसो पर ध्यान लगा सकते है। माध्यम कोई भी हो आपका मकसद एक ही है फोकस होना।

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ध्यान के कई चरण है लेकिन में इन्हें सिर्फ 3 चरण में समझाना चाहूंगा ताकि हम ध्यान की गलत धारण को तोड़ कर अपने लिए उपयुक्त चरण के हिसाब से ध्यान कर सके। ध्यान को 3 चरण में बाँटने से आप उसके रहस्य को समझ सकते है जो निम्न तरह से है :

1.) संसार में रहकर ध्यान की अवस्था

ये चरण उन लोगो पर लागु होता है जो काम इतनी तल्लीनता से करते है की उसे समझ पाना उनके लिए मुश्किल नहीं होता है। अगर आप किसी काम को अच्छे से समझ लेते है मतलब आपका ध्यान सिर्फ उस काम में था। इस तरह की अवस्था ऐसे लोगो में दिखाई देती है जो अपने काम में माहिर होते है।

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2. ) अंतर ध्यान :

जब हम खुद पर विश्वास रखना शुरू कर अपने अंतर्मन से सवाल जवाब करते है और आपका मन आपको गाइड करता है तब समझ ले की अपने अंतर ध्यान द्वारा खुद का स्पिरिचुअल गाइड ढूंढ लिया है। ऐसा गाइड जो आपको कभी भटकने नहीं दे सकता है। इसे जाग्रत करने के लिए अंतर पर ध्यान लगाना चाहिए। आपका अंतर्मन जाग्रत होता है जब आप अंतर पर फोकस होने लगते है।

3.) अलौकिक ध्यान की अवस्था :

ध्यान की इस अवस्था में हम खुद को समझ लेते है, अपने अंतर को जाग्रत कर लेते है और ऐसे अनुभव करने लगते है जो अनुपान और अलौकिक हो। इस तरह के अनुभव अपने मन के पूर्ण संयम द्वारा संभव है। मन की स्थिति को स्थिर रख कर जब हम अपने अंदर फोकस होते है तो अवचेतन मन की शक्तिया जाग्रत होने लगे है अगले चरण में आप आयाम की यात्रा कर सकते है। ये सब सुने सुनाये अनुभव है जो एक योगी करता है।

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ध्यान का महत्व :

ध्यान को अगर नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाये तो हमें कई तरह के फायदे होने लगते है। ध्यान का महत्व अंदाजा हम इस बात से ही लगा सकते है की इसका कुछ मिनट का अभ्यास हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास कर सकता है। ये फायदे शारीरिक और मानसिक होने के साथ आध्यात्मिक भी होते है आइये जाने वो मुख्य वजह क्यों आपको ध्यान करना चाहिए :

1.) मन और शरीर होता है शांत :

ध्यान से पहले शरीर और फिर मन की गतिविधि शांत होती है। चंचल मन शांत होता है तो आप खुद को स्थिर महसूस करते है। ये अवस्था ऐसी होती है जैसे आप सबकुछ जानते हुए भी उसे ग्रहण कर रहे हो। आपका मन जब शांत होगा तो आप बेहतर सोच पाते है, नए नए आईडिया समझ पाते है ये आईडिया और कोई नहीं आपका मन आपको सुझाता है।

2.) ध्यान का महत्व-मानसिक तनाव में कमी :

जब हम ध्यान करते है तो इसका मतलब है हम गतिविधि में विराम ले रहे है। जिससे हम खुद को एकांत में या कही भी दूसरी सभी गतिविधि से दूर कर लेते है। और जब कोई बहरी गतिविधि नहीं होती है तब आंखे बंद होने की वजह से आपका मन ज्यादा नहीं सोच पाता है। वो धीरे धीरे कम विचारो पर चलता है और अंत में न्यूनतम विचार से शून्य की अवस्था में चला जाता है। इससे हमारा मानसिक तनाव हटता है जो काम या विचारो के बोझ से थक जाता है।

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3.) रिचार्ज होने का सबसे अच्छा माध्यम :

रिचार्ज होना मतलब मानसिक और शारीरिक कार्यो के लिए अपने अंदर की ऊर्जा को बढ़ाना। जब हम नियमित ध्यान करते है तो विचारो के साथ ख़त्म होने वाली ऊर्जा की खपत रुक जाती है और वो फिर से स्टोर होने लगती है। सामान्य रिचार्ज का माध्यम है सोना ( नींद लेना ) पर अगर आप जल्दी से कम वक़्त में दोबारा खुद को तरोताजा महसूस करना चाहते है तो ध्यान करिये।

5.) होता है समस्याओ का समाधान :

खुद की समस्या के समाधान में ध्यान का महत्व बहुत बड़ा है। इंसानी मस्तिष्क हर समस्या को खुद सुलझा सकता है। बशर्ते इसके सोचने की क्षमता को सही दिशा दे। इंडिया में जुगाड़ू तकनीक किसका कमाल है। मतलब हम मस्तिष्क को जिस दिशा में ले जाना चाहे ले जा सकते है। अगर आपको अपनी समस्या का अच्छा और बेहतर समाधान चाहिए तो कुछ पल ध्यान में बैठ कर अपनी समस्या पर फोकस होने की कोशिश करे। आपको समस्या से होने वाली समस्या नहीं उसके समाधान के बारे में सोचना है।

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अगर हम किसी एक विचार पर या हल पर फोकस होते है तो हमारा मस्तिष्क हमें उसके कई विकप सुझा सकता है। इसके लिए आपको समस्या या बात को अच्छे से समझने की जरुरत है।

6.) ध्यान है खुद की शक्तियों को उभारने का माध्यम :

ध्यान द्वारा हम अपनी प्रतिभा को निखार सकते है। हमारी विशेषताओ को समझने में उन्हें बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने का ध्यान सबसे अच्छा माध्यम है। इसलिए अगर आप जानना चाहते है की आपकी काबिलियत क्या है तो कुछ पल एकांत में बैठकर सोचे की आप क्या काम बेहतर तरीके से कर सकते है, आपकी रूचि किसमे है और आप उसे और बेहतर कैसे कर सकते है।

ध्यान के महत्व और उसके चरण और अवस्थाएं मेरे अपने निजी विचार है। क्यों की मेने इसे इस तरह से समझने की कोशिश की है। आज की पोस्ट ध्यान का महत्व आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताए। अगर आपको लगता है की पोस्ट में कुछ गलती है या सुझाव है तो हमें बताये।

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