रिश्तो में तालमेल बिठाना आपके रिश्तो के लिए है जरुरी

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सास और बहू का रिश्तासास और बहू का रिश्ता सबसे खास माना गया है क्यों की हर स्त्री इन दोनों स्टेज से गुजरती है। अगर आप कभी बहु रही है और आपके अनुभव ख़राब रहे तो जरुरी नहीं की आप अपनी बहू को भी वही अनुभव दे। सास और बहू का रिश्ता अगर सामंजस्य बैठ जाता है तो घर के बाकि रिश्ते अपने आप बनने लग जाते है। अगर सास माँ बन कर बहू को प्यार दे। और बहू सास को बेटी की जगह सम्मान दे तो घर को स्वर्ग बनते देर नहीं लगती है।

शादी के बाद एक लड़की आपके घर की बहू बनती है। उसके लिए सारे रिश्ते नए होते है, अनजान होते है ऐसे में उसे दो ही सहारे सबसे ज्यादा होते है पहला अपने पति का दूसरा अपनी सास का। अगर आप अपनी बहू को बेटी की तरह अपने परिवेश में ढलने में मदद करती है तो उसे आसानी रहती है सभी रिश्ते सँभालने में वक़्त नहीं लगता है। और समाज में भी आपके रिश्ते की तारीफ और मिशाल बनती है।

हम अपने आसपास के माहौल से सबसे ज्यादा प्रभावित होते है। खासतौर से सोशल मीडिया जिसमे टीवी भी शामिल है आप सुबह भले ही कितने ही अच्छी सोच के साथ उठे लेकिन शाम ढलते ढलते टीवी, सोशल मीडिया और आपके आसपास का माहौल आपके दिमाग की सोच बदल कर रख देता है। अगर आप अपने रिश्तो को वैसे ही नजरिये से देखते है जैसा आपको दिखाया जा रहा है तो सावधान हो जाइये क्यों की आपके रिश्ते टूट सकते है। इसलिए अपने विवेक और समझदारी से रिश्तो को समझे ना की घटने वाली घटनाओ पर आंख मूँद कर विश्वास करे

सास और बहू का रिश्ता – आजकल के टीवी सीरियल

आजकल टीवी में जितने भी पारिवारिक सीरियल है सबमे सास को एक गुस्सेल, विलेन टाइप की औरत की तरह पेश किया गया है। सीरियल वालो के लिए ये एक मनोरंजन हो सकता है पर इससे सबसे ज्यादा हमारे समाज में सास और बहु का रिश्ता प्रभावित हुआ है। हर सास सोचती है की उसे ऐसी चालक बहु ना मिले वही एक लड़की ये सोचती मुझे ऐसी सास के साथ रहना ही नहीं है। आपस में सामंजस्य रखना तो कही नहीं दीखता इसी वजह से रिश्ते कमजोर होते जा रहे है। आज एक कहानी के जरिये आपको बताने की कोशिश की गई है की रिश्तो में सामंजस्य रखने के लिए किसी एक का झुकना जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। सास और बहू का रिश्ता असल में वैसा नहीं होता है जैसा दिखाया जाने लगा है।

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सास और बहू का रिश्ता-विवाह निमंत्रण :

सुनंदा और उसके पति अपने बहु के मायके विवाह में आए थे। सुनंदा घर के प्रांगण में ही लगे अशोक के वृक्ष के निचे मेहमानों के लिए लगी कुर्सी पर बैठी थी। अचानक सड़क पार सामने के घर के अहाते में धूप में बैठी वृद्धा को उसने देखा। प्रातः काल का समय था। उसने देखा एक छोटी बालिका ने प्लेट में नाश्ता लेकर मुस्कुराते हुए उसे दिया। थोड़ी देर उसके पास बैठी, फिर उठकर चली गई और पानी का गिलास लेके वापस लौट आई। वृद्धा ने फिर उसके सर पर स्नेह से हाथ फेर और दोनों मुस्कुराई। यह देख सुनंदा ने सोचा ये शायद उसकी पोती होगी। दोनों का मित्रवत स्नेह देख वह गदगद हो गई।

उसका ध्यान तब भंग हुआ जब उसकी बड़ी बहु अपनी बहनो और परिवार वालो को अपने पड़ोस में नाश्ते के निमंत्रण पर आवाज देकर बुलाने लगी। सभी मेहमानों को इकट्ठा कर उन्हें नाश्ते के लिए ले चली। इतने में बड़ी बहु की छोटी बहन जो अभी अविवाहित थी, ने टोका दीदी वो आपकी सासु जी बैठी है उन्हें भी ले चले। बड़ी बहु बोली, अरे रहने दे, उन्हें कहाँ ले चलेंगे ? अच्छा नहीं लगेगा। सुनंदा की उपेक्षा कर वो सब चल दी। सुनंदा चुपचाप उन सब को जाते हुए देख रही थी। थोड़ी देर बाद सब पडोसी के घर से मुस्कुराते हुए लौट रही थी।

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सास और बहू का रिश्ता न बरते लापरवाही

घर में प्रवेश करते ही बड़ी बहु ने घोषणा कर दी की सबने नाश्ता कर लिया है अब दोपहर का खाना ही बनेगा। सुनंदा ने ये सब सुना तो अवाक् रह गई। उसने कल उपवास रखा था वह कल भी भोजन नहीं कर पाई थी। सुबह से उसे चाय भी नसीब नहीं हुई थी।

सुबह दो घंटे घूमकर सुनंदा के पति वापस आए। उसके पास जाकर बोले नाश्ता-वाश्ता आया की नहीं, में तो बाजार से कर आया हु। सुनंदा मायूस होकर बोली, भूख के मारे मेरा जी घबराने लगा है। बारह बज गए है। घर पर तो हम दस बजे ही खाना खा लेते है। कल उपवास की वजह से कुछ खा-पी भी नहीं पाई थी। सुनंदा के पति को सारा माजरा समझ आ गया। आजकल की सोच के अनुसार ‘सास’ यानि उपेक्षा योग्य व्यक्तित्व। कुछ सासो या कहे की कुछ भारतीय टेलीविजन सीरियल वाली सासो के कारण सबको एक श्रेणी में रखा जाने लगा है।

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सास और बहू का रिश्ता – टीवी सीरियल ने बदला इसका अभिप्राय

सास शब्द का एक ही अर्थोपकर्ष हो गया। यह सोचते हुए सुनंदा के पति ने उससे कहा, ये लो आधा गिलास पानी एक एक घूंट करके पी लो तब तक में कॉलोनी की दुकान से कुछ नाश्ता लेकर आता हूं। ये कह कर वे चल दिए थोड़ी ही देर में वे लौट आये। सुनंदा के पास खड़े होकर स्वयं की ओट अपने बैग में छुपकर लाई हुई नाश्ते की पुड़िया उसे दे दी। सुनंदा नाश्ता कर ही रही थी की बड़ी बहू की दादी इधर आ गई। वो सुनंदा के पास जाकर बोली, अरे ! ब्याणजी बहुत देर बाद नाश्ता कर रही हो, अब तो खाने का वक़्त हो गया है। सुनंदा बोली हां आ गया था। बहू पड़ोस में नाश्ता करने गई थी। वहां से ले आई थी। रखा था, अब खा रही हूं अच्छा ठीक है में आपके लिए चाय लाती हूँ.

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यह कह कर दादी तो चली गई सुनंदा के पति ने कहा ‘सुनंदा तुमने झूठ क्यों बोला ? जब की तुम्हारी बहू तो तुम्हे टालकर चली गई थी।’

सुनंदा बोली अच्छा नहीं लगता। बहू की दादी क्या समझेगी की उसकी पोती कितनी लापरवाह है वह बहू से कहेगी,परिवार में बात फैलेगी और बहु फिर बहू भी नाराज हो जाएगी। छोटी सी बात से अगर आपस में तनाव फैलता है तो झूठ बोल देना कही ज्यादा बेहतर है। मेरे एक झूठ बोलने से कोई परेशानी भी नहीं हुई, और किसी बात का कोई बतंगड़ भी नहीं बनेगा। और फिर कोई कहेगा सास तो ऐसी ही होती है।

शिक्षा :

दोस्तों अक्सर ये कुछ घरो में देखने को मिल जाता है की शादी के बाद परिवार में रिश्ते किस तरह बदलने लगते है। रिश्तो के मायने बदलने लग जाते है। ऐसे में अगर हम अपने रिश्तो को सँभालने पर ध्यान ना दे आपस में सामंजस्य ना बैठा पाए तो रिश्ते टूटने लगते है आपस में दरार बढ़ने लगती है। क्यों की हमारा विश्वास अपनों से ज्यादा बाहरवालों पर होने लगता है। ऐसे में हमें चाहिए की हम आपस के रिश्तो को सुधारने का वक़्त निकाले। अपनी ख़राब छवि को सुधारे और सब मे प्यार प्यार बांटे हमें प्यार ही मिलेगा।

यही हाल हमारे दोस्ती में अच्छे रिश्ते में होता है। अगर किसी दूसरे को पता चल जाये की आपके आपके अपने के साथ मन मुटाव है तो वो इस दरार को ओर बढ़ाने की कोशिश करता है। आपको महत्वपूर्ण बताएगा और आपके अपने की कोई अहमियत नहीं है ऐसा दिखाने की कोशिश करता है। बेहतर होगा रिश्तो को बचाने के लिए उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति के साथ शेयर न करे जो आपको सिर्फ आपको ही खास और महत्वपूर्ण दिखाने की कोशिश करता है। पहले घर के बड़े रिश्तो को सुलझा दिया करते थे पर एकल परिवार की वजह से अब आपके आसपास के लोग ये मौका छोड़ते नहीं है।

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