कम समय में सांसो के जरिये kundalini meditation में सफलता हासिल करने की सरल विधि

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आप सबने कुण्डलिनी शक्ति के बारे में बहुत कुछ सुन रखा होगा. लोगो के अनुसार ये शक्तिशाली क्रिया है और साधक का मानसिक संतुलन बिगाड़ सकती है. ये पूर्ण सत्य नहीं है लोगो में बदलाव आते है लेकिन वो उन्हें सिर्फ फालतू विचारो की बजाय खुद पर फोकस करता है. Kundalini Meditation या फिर guided kundalini meditation एक ऐसी विधि है जिसके जरिये हम चक्र जागरण की प्रक्रिया को बैलेंस करते हुए कुण्डलिनी जागरण करते है. इस अभ्यास को धीरे धीरे करने पर आप कई सारे ऐसे बदलाव महसूस कर सकते है जो आपने सोचे भी नहीं होंगे.

kundalini meditation

ये विधि कुण्डलिनी जागरण की हठ योग क्रिया विधि से अलग है. हमें पूरा ध्यान सांसो पर रखना है और प्राण वायु को शरीर के चक्रों पर फोकस करते हुए उन्हें जाग्रत करना है. बिना किसी नुकसान के हम धीरे धीरे इसे संभव बना सकते है और रीढ़ में प्राण वायु के जरिये कुण्डलिनी जागरण के स्पंदन को महसूस कर सकते है.

हम अपने दैनिक क्रिया-कलाप में कई ऐसे लोगो से मिलते है जिन्हें देखकर लगता है मानो कोई रोबोट है. अपने आप काम करते रहना और अन्दर ही खोये रहना. ऐसे लोग अपनी ही मस्ती में डूबे रहते हुए काम करते रहते है. अगर आप उन लोगो में से एक है तो आप बहुत कुछ कर सकते है. ऐसे लोगो में काफी सारी खास बाते होती है.

Origin of Kundalini Meditation in Hindi

कुण्डलिनी ध्यान की उत्पति काफी समय पहले ही हो चुकी है लेकिन आज जो ध्यान की विधि आपको बताने वाले है वो एक बदलाव की वजह से अस्तित्व में आई. 1968 में Yogi Bhajan इंडिया छोड़कर वेस्ट में गए ताकि दुसरे लोगो को ध्यान कैसे किया जाए जैसी तकनीक के बारे में अपने ज्ञान को लोगो में बाँट सके. उन्होंने वहां पर कई सारे रहस्य का सामना किया और लोगो के बिच ध्यान से जुडी गलत बातो का खंडन किया.

ये वो समय था जब लोगो में सुचना युग का फैलाव हो रहा था. लोग एक दुसरे के सुख दुःख को समझना शुरू कर चुके थे. इसका एक सकारात्मक पहलू ये देखने को मिला की लोगो में निम्न स्तर पर ले जाने की बजाय ध्यान उन्हें अच्छे स्तर पर विकसित कर रहा था.

Purpose of Kundalini Meditation

Kundalini meditation एक भाग है Kundalini yoga है. इसका प्रयोजन शरीर की उर्जा को उठाना है जो की हर इन्सान में सोई हुई रहती है. हम सभी मानते है की कुण्डलिनी उर्जा को ऊपर उठने के लिए 7 चक्र से गुजरना होता है. इस प्रोसेस को हम Kundalini Meditation कहते है जो की ध्यान की विधि और योग का मिला जुला स्वरूप है.

इस प्रोसेस का उदेश्य body and mind के बिच एक तरह system of communication बनाना है जो सभी तरह के physical and mental as well as spiritual issue को दूर कर सके. ये विधि हमारे शरीर के प्रति हमारी चेतना को सांसो के माध्यम से जोडती है और हमें वर्तमान में रखती है. आगे बढ़ने पर हम पाते है की अब हमारा कनेक्शन हमारे higher self से बनना शुरू हो गया है और हम आगे बढ़ने लगे है.

जिस तरह से हर रोज नहाना हमारे भौतिक शरीर को साफ़ रखता है वैसे ही हर रोज किया गया ध्यान हमारे मस्तिष्क को साफ रखता है दुसरे शब्दों में कहे तो Kundalini meditation as a way to cleanse your mind   दिन भर की थकावट को दूर करना हो तो इसे काफी हेल्पफुल माना गया है. सबसे बढ़िया बात balance your energy and calm your mind जो की आपके दिमाग में चलने वाले unwanted anxiety thoughts को रोकती है और आपको रिफ्रेश फील करवाती है.

इस नजरिये से देखा जाए तो ये कोई धर्म से जुडी क्रिया योग की विधि नहीं है बल्कि शरीर और मन के प्रति हमारे चेतना को बढाने वाला एक अभ्यास है.

Benefits of Kundalini Meditation

सरल भाषा में कहे तो हमारे दैनिक जीवन में ज्यादा से ज्यादा हमारी चेतना को बढाता है. इसके अलावा कुछ और फायदे है जिन्हें आप निचे पढ़ सकते है.

  • तनाव को दूर कर आपको आराम फील करवाता है.
  • सांसो को ग्रहण करने का सही तरीका सीखते है और अपने फेफड़ो की क्षमता को सही करते है.
  • एकग्रता बढती है और अनचाहे विचारो पर रोक लगती है.
  • दिनभर के कामो के लिए आवश्यक उर्जा मिलती है.
  • आपके brain patterns में बदलाव आता है और आप पहले से ज्यादा emotional balance experience करने लगते है.
  • हमारे शरीर, मन और आत्मा इन तीनो के बिच तालमेल और संतुलन की अवस्था पैदा होती है.
  • Strengthen your nervous system यानि हमारे सोचने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है.
  • हमारे उर्जा का सही उपयोग होना शुरू हो जाता है और रचनाशक्ति के जरिये हम नव निर्माण की क्रिया में भागीदार बनने लगते है.

How to Practice Kundalini Meditation

कुण्डलिनी ध्यान की सही शुरुआत के लिए आपको step by step guide को follow करना चाहिए. हमेशा छोटे से प्रयास से शुरुआत करनी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए. हम रोज कर सके ऐसी एक छोटी शुरुआत करनी चाहिए और फिर आगे अभ्यास में बढ़ना चाहिए जिससे की हमें सही फायदा और मोटिवेशन दोनों मिल सके.

ये एक छोटी सी शुरुआत की जा सकने वाली प्रैक्टिस है जिसे हर रोज सिर्फ 5 मिनट देकर भी आप कर सकते है.

स्थान का चुनाव 

ये वो जगह होनी चाहिए जहाँ आप कुछ देर शांति से अभ्यास कर सके. आसपास का माहौल शांत और सौम्य हो ताकि आप बोर ना हो जाए. अभ्यास के समय एक पानी की बोतल भी आपको साथ रखनी चाहिए.

क्या पहनना चाहिए

आपको ढीले कपडे पहनने चाहिए जो की सूती हो तो बेहतर होगा. कपडे आरामदायक हो और सर पर रुमाल या कोई कपडा जरुर पहन ले. कपडे साफ़ और लाइट कलर के होने चाहिए ताकि आपके अन्दर इसका positive effect पैदा हो.

अभ्यास करने का सही टाइम

आप इसके लिए सुबह का समय चुन सकते है. Kundalini Meditation ही नहीं किसी भी अभ्यास के लिए सुबह का समय सही रहता है क्यों की इस दौरान आपको डिस्टर्ब करने वाली चीजे नहीं होती है. कभी भी खाना खाने के बाद अभ्यास न करे क्यों की इस दौरान आपके शरीर में खून की गति को सही रखना जरुरी है और इस दौरान अभ्यास करने से आपके शरीर में खून के प्रवाह की गति धीमी हो जाती है जिसकी वजह से खाने को पचने में टाइम लगता है.

सही स्थिति का चुनाव करे

आराम से एक आसन पर बैठ जाए और पैरो को मोड़ ले, आप चाहे तो एक कुर्सी का चुनाव भी कर सकते है ध्यान रहे की आपके शरीर का भार आपके पैरो पर होना चाहिए. आँखों को 90% तक बंद कर ले ऊनि कम्बल का चुनाव भी कर सकते है या फिर आसन की जगह एक तकिया भी लगा सकते है. आपको बस इस स्थिति में ध्यान रखना है की आपकी रीढ़ सीधी अवस्था में हो.

कितने समयकाल की हो अभ्यास

अभ्यास चाहे कितनी ही देर का हो वो अभ्यास होता है. कुछ लोग सिर्फ 5 मिनट करते है तो कुछ लोग इसे 3 घंटे तक कर लेते है अभ्यास चाहे कितनी भी डॉ किया हो महत्वपूर्ण है की आप उसे कितनी concentration से कर पाते है. अगर आप अभ्यास को कम समय दे पा रहे है तो कोशिश करे की जितना समय दे रहे है वो 100% एकाग्रता से हो.

सांसो पर दे ध्यान

आपको आरामदायक स्थिति में बैठने के बाद सबसे पहले अपनी साँस पर कण्ट्रोल करना है. इसकी गति को जितना धीमा कर सकते है कर ले. सांसो की गति को आप लम्बा कर सकते है जैसे की 4-5 सेकंड में साँस ले इतना ही अन्दर रखे और फिर इतने ही सेकंड में इसे बाहर निकाले.

कुछ लोग इसे अलग तरह से करते है जिसमे वो पहले लम्बी साँस अन्दर लेते है कुछ देर रोकते है और फिर बेहद कम समय में सांसो को बाहर निकाल देते है. अगले पल में वो छोटी अंतराल की साँस अन्दर लेते है और लम्बे अंतराल में सांसो को बाहर निकालते है. दोनों ही तरीके कारगर है. आप जिसे बेहतर तरीके से कर सकते है Kundalini Meditation में सांसो को उसी तरह ले.

प्राण को अन्दर गति करते हुए महसूस करना

अभ्यास के दौरान आपकी सांसे अन्दर किस तरह गति कर रही है उसे महसूस करे. ध्यान के अभ्यास में साँस को किसी खास एक चक्र पर फोकस कर उस क्षेत्र में घूमते हुए अनुभव करे. एक दूसरा तरीका प्राण वायु को अपान वायु से मिलाना होता है जो की बेहद शक्तिशाली विधि है. प्राण को शरीर में चक्रों पर गति करते हुए महसूस करना आपको जल्दी ही उस जगह में एक वाइब्रेशन अनुभव करवाता है.

एक और विधि में हम प्राण वायु को नाक द्वारा और अपान वायु को गुदा मार्ग से अन्दर खींचते हुए बंध लगा लेते है. दोनों तरह से बंद होने के बाद आपको आंखे बंद रखते हुए इन दोनों वायु के टकराव को महसूस करना होता है. निचे की हवा को ऊपर की और तथा ऊपर की हवा को पेट की ओर महसूस करे. जल्दी ही आपको अनुभव होना शुरू हो जाता है. जब दोनों वायु का मिलन होता है तब शरीर में ठंडक का अनुभव होना शुरू हो जाता है जो की बाद में तेज हो जाती है. कुण्डलिनी जागरण में इसका बहुत बड़ा रोल है.

पूर्ण करे ध्यान की अवस्था

जब अभ्यास पूर्ण हो जाए तो अचानक ना उठे. अपने सांसो को गहरा करते हुए आँखे खोले, हथेली को रगड़े और शरीर को खींचे. हवा में हाथो को ऊपर उठाते हुए ध्यान की अवस्था को पूर्ण करे.

धीरे धीरे समय के साथ बढाए अभ्यास को

अभ्यास को अचानक से ना करे, धीरे धीरे बढाते हुए इसका टाइम बढाए. आते जाते विचारो पर ध्यान को फोकस करे और अपने रीढ़ की जगह पर स्पंदन को महसूस करे. अगर धीरे धीरे अभ्यास को बढाया जाए तो ये पूरी विधि kundalini guided meditation आपको बिना किसी नुकसान के सिद्ध होती है. ज्यादातर लोग मानते है की ऐसा करना खतरनाक है जबकि kundalini awakening meditation में हमारे अन्दर की personality में बदलाव आता है. कई दोष दूर होते है ना की मानसिक संतुलन ख़राब होता है.

कुण्डलिनी ध्यान पर की गई की कुछ रिसर्च

अब तक जो भी रिसर्च कुण्डलिनी मैडिटेशन पर हुई है वो सभी इसके प्रारम्भिक स्टेज पर हुई है. इनसे कुछ खास बाते सामने आई है जिसमे से एक है mental health conditions को ठीक करना. कुण्डलिनी ध्यान कई तरह की मानसिक समस्याओ का समाधान करता है जो की आप निचे पढ़ सकते है.

  • किसी भी तरह की addiction
  • Depression जिनसे आज हर कोई गुजर रहा है.
  • जल्दी ही fatigue फील करने की प्रॉब्लम को दूर करना
  • Grief
  • किसी भी चीज को सिखने में आ रही समस्या को दूर करना ( learning disorders )
  • किसी तरह का phobias
  • Sleep disorders यानि ठीक से सो न पाना.
  • Anxiety अगर आप इससे परेशान है तो आपको Kundalini Meditation का अभ्यास करना चाहिए.
  • obsessions and compulsions

ये सभी नतीजे 2 महीने के अभ्यास के बाद के है और खासकर सकारात्मक बदलाव को महसूस किया गया है.

Kundalini Meditation – final thought

अगर आप how to practice Kundalini meditation to improve your mindfulness in daily life को लेकर सीरियस है और सीखना चाहते है कुछ ऐसा जिससे आप आगे बढ़ सके तो आपको इसका अभ्यास करना चाहिए. शुरुआत में छोटे बदलाव हमें बड़े बदलाव के लिए तैयार करते है. अगर आपको ध्यान करना कठिन लग रहा है या फिर आप खुद को विचारो से मुक्त नहीं कर पा रहे है तो घबराइए नहीं बल्कि थोडा थोडा समय आप ध्यान को दे.

शुरुआत में भले ही 2 मिनट ही हमें बहुत बड़ा संघर्ष लगे लेकिन आगे चलकर ये स्थिति 2 घंटे में बदल जायेगी. हम खुद को meditate state में ले जाकर बहुत कुछ कर सकते है जैसे की शांत रहना, बुरी आदते छोड़ना, विचारो में खुद को शांत रख पाना यहाँ तक की आदतों में बदलाव भी आप इसके जरिये आसानी से कर सकते है.

नोट : ध्यान दे कुण्डलिनी जागरण की विधि कोई बहुत बड़ी और कठिन विधि नहीं है. 
चक्रों पर प्राण वायु की गति देकर हम इन्हें जाग्रत कर सकते है. जागरण की प्रक्रिया में 
हमारे अन्दर कुछ बदलाव जरुर आते है लेकिन किसी तरह की शक्तिमान वाली शक्ति आप शुरुआत में 
नहीं देख पाएंगे. ये ध्यान और योग की विधि है और आप इसे कर सकते है.

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