कर्ण पिशाचनी साधना अनुभव इतिहास और तामसिक साधना का उपाय

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एक बार एक जगह से कर्ण पिशाचनी साधना अनुभव को जानने के मौका मिला. ये अनुभव एक Astrologer का था जिन्होंने इस साधना को सफलतापूर्वक किया था वो भी सात्विक तरीके से और आज एक अच्छी ज्योतिषी करते है. कर्ण पिशाचिनी का इतिहास काफी पुराना है और माना जाता है की ये हमारे आसपास के dimension में भटकने वाली Negative and positive energy entity होती है. आज जिसे देखो वो कर्ण पिशाचिनी की कहानी को बढ़ा चढ़ा कर बताता है लेकिन वास्तव में इस साधना को दोनों ही तरह से किया जा सकता है.

इस पोस्ट में हम कर्ण पिशाचिनी शाबर मंत्र को शेयर करने वाले है साथ ही तामसिक विधि से कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि कैसे की जाए इसके बारे में भी एक साधना डाल रहे है. साधक अपने मर्जी से इसका चुनाव कर सकते है लेकिन विवेक से इसका चुनाव करे क्यों की ये साधना बाद में साधक को पछताने का मौका नहीं देती है और सिर्फ सिद्ध गुरु ही इस सिद्धि को तर्पण कर सकते है.

कर्ण पिशाचनी साधना

कर्ज से डूबे लोग अक्सर इसकी साधना करते है क्यों की ये साधक के कान में त्रिकाल की घटनाओ के बारे में जानकरी देती है. Karna Pishachini Sadhana siddhi के बाद साधक को धन की कमी नहीं रहती है क्यों की पिशाचनी उसकी इस कमी को दूर करती है लेकिन इस साधना की कीमत साधक की उर्जा होती है.

साधक की उर्जा पर ये शक्ति अपना निर्वाह करती है और शक्तिशाली बनती है इसलिए वो हमेशा साधक को भ्रमित करने की कोशिश करती है ताकि लालच में फंस कर वो शक्ति के अधीन हो जाए.

अगर आप ये साधना करना चाहते है तो इस साधना से जुड़े हर पहलू के बारे में पहले जान ले और फिर इसका चुनाव करे. जहाँ तक संभव हो इस साधना को ना करे तो ही बेहतर है क्यों की इसके ज्यादातर प्रयोग सात्विक नहीं है. किसी भी negative energy को attract करना काफी आसान है लेकिन उससे पीछा छुड़ाना और कण्ट्रोल करना बेहद मुश्किल है.

कर्ण पिशाचनी साधना

कर्ण पिशाचनी की साधना के बारे में आप सब ने सुन रखा होगा की ये उन साधनाओ में से एक है जो साधक को भूत की जानकारी देती है. ज्यादातर तांत्रिक इसमें सिद्धि हासिल करते है और इसके अलावा ज्योतिष यानि Astrologer भी इसी के जरिये कई बार भूतकाल की जानकारी देते है. कुछ तांत्रिक लोगो का मानना है की Karna Pishachini Sadhana के जरिये वे अपने आसपास की negative entities को control करते है और उनके जरिये काम लेते है.

हमारे आसपास दोनों ही तरह की शक्ति है और किसी भी Positive energy को control करना आसान नहीं होता है इसलिए हमारा रुझान negative energy की तरफ बढ़ता है. किसी भी negative energy को कण्ट्रोल करना और उससे काम लेना सिर्फ वही साधक कर सकता है जिसे how to complete the Sadhana के बारे में complete guide पता होता है. बगैर पूरी जानकारी के साधक का किसी भी साधना को करना मुमकिन नहीं, इसलिए पूरी जानकारी लेने के बाद ही शुरुआत करनी चाहिए.

कर्ण पिशाचनी साधना के बारे में आप सब ने पहले से जान रखा होगा की जिस negative energy entity को इस साधना के जरिये control किया जाता है वो लालची, काम-वासना से भरी हुई होती है. साधना 3 दिन की है और इसके पूर्ण होने के बाद साधक को Karna Pishachini की pleasure शांत करनी होती है. सुनने में ये किसी fantasy की तरह लग सकता है लेकिन, जो साधना करता है उसे इसका बाद में पछतावा होता है.

ये कोई Spiritual energy नहीं होती है बल्कि Highly negative energy होती है. जैसे ही आपकी साधना पूर्ण होती है ये बगैर किसी वस्त्र के किसी इन्सान के तरह आपके सामने प्रकट होती है. कई बार साधक के मनोबल की कमी की वजह से ये प्रकट नहीं होती है लेकिन अपने होने का अहसास करवा देती है. इसमें साधक के शरीर के साथ खेलना है और उसे excited करना शामिल है.

कौन है कर्ण पिशाचिनी़?

तंत्र और मंत्र शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार Karna Pishachini अपार शक्तियों से भरी एक अद्भुत स्त्री रूप होती है. उसके वशीभूत होते ही वह न केवल बीते काल की घटित घटनाओं के बारे में बताती है, बल्कि मौजूदा समय में चल रही परिस्थितियों से भी अगाह करवाते हुए मार्ग-दर्शन कर भविष्यवाणी भी करती है. इस दौरान व्यक्ति खुद को आत्मविश्वास से भरा हुआ और अद्भुत शक्ति-संपन्न बन जाता है.

यह कहें उसमें दैवीय शक्ति आ जाती है और इच्छापूर्ति संभव हो पाती है. कर्ण पिशाचनी साधना सिद्धि अगर श्मशान में अधोरी के द्वारा या उसकी मदद से की जा सकती है तथा इसके मंत्र को त्रिकालदर्शी मंत्र कहा गया है. कहते हैं इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हर सूक्ष्म से सूक्ष्म और छिपी हुई घटनाओं का पता चल जाता है. उन घटनाओं के आधार पर जीवन के बारे मे सकारात्मक विचारों का विश्लेषण कर समास्याओं का समाधान निकाला जाता है.

कर्ण पिशाचनी को यक्षिणी और पिशाच योनी से माना जाता है. ये हमारे आसपास के dimension में विचरण करने वाली शक्ति होती है जिनका अपना कोई स्वरूप नहीं होता है. मंत्रो की शक्ति से इन्हें आकर्षित कर साधक अपनी कल्पना से एक रूप देता है या फिर ये साधक की उर्जा पर अपना रूप निर्मित करती है. मंत्र जप पूर्ण होते होते इनमे रूप धारण करने की शक्ति आ जाती है और ये साधक से जुड़ जाती है.

किसे करनी चाहिए कर्ण पिशाचनी साधना

जिन साधको का मूलाधार चक्र जाग्रत होता है सिर्फ उन्हें इस साधना को करना चाहिए. एक सामान्य व्यक्ति के काम वासना का स्तर बेहद निम्न होता है जिसके लिए इस तरह की Negative energy की जरुरत को पूरा करना संभव नहीं. ये शक्ति आपके उर्जा को चूसती रहती है जिसके कारण आप पहले शारीरिक और फिर मानसिक स्तर पर कमजोर होते जाते है. आप जितना इस शक्ति का इस्तेमाल करते है उतना ही ज्यादा ये आपको कमजोर करती है.

एक तरीके से आप इसे इसके काम की फीस मान सकते है. जितना काम उतना ही आपको चुकाना होता है. ज्यादातर देखा गया है की लोग धीरे धीरे अपने विवेक को खोते जाते है और लालच में फंस कर सब कुछ गँवा देते है और अंत में खुद का पतन कर लेते है. अगर आप ये साधना करना चाहते है तो 2 चीजो का कण्ट्रोल होना बेहद जरुरी है.

  • आपका मूलाधार चक्र जाग्रत हो ताकि काम भावना आपको परेशान ना कर सके.
  • आपका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा हो और आप लालच को महत्त्व न देते हुए विवेक से शक्ति का इस्तेमाल करे.

Karna Pishachini Sadhana के जरिये हमें सिर्फ भूतकाल की जानकारी मिलती है या फिर ये हमें वर्तमान और भविष्य की जानकारी भी देती है इसे लेकर काफी मतभेद फैला हुआ है.

शायद साधना के तरीके और उर्जा के बदलाव के साथ हमें इसमें बदलाव देखने को मिलते हो जैसे की कर्ण पिशाचनी की सात्विक साधना जिसमे साधक को ज्यादा जानकरी मिलती है. इसकी वजह उस उर्जा का ज्यादा शक्तिशाली होना है.

इस आर्टिकल में हम कर्ण पिशाचनी साधना को करने से पहले कुछ आवश्यक कंडीशन के बारे में भी बात करेंगे और सात्विक तरीके से की जाने वाली Karna Pishachini Sadhana के बारे में भी बात करेंगे.

कर्ण पिशाचिनी प्रयोग

Karna Pishachini Sadhana व्यक्तिगत, पारिवारिक या सामाजिक समस्याओं से मुक्ति के लिए वशीकरण या सम्मोहन से संबंधित वैदिक, Tantra mantra rituals साधनाओं के प्रयोगों की तुलना में कर्ण पिशाचिनी प्रयोग बहुत ही अलग और खास असर देने वाला होता है. तांत्रिक विद्वान के सानिध्य में घोर साधना और मंत्र जाप के जरिए इस अदृश्य शक्ति का ही vashikaran कर लिया जाता है.

कर्ण पिशाचनी साधना जो स्त्री रूप में एक यक्षिणी होती है. उसे ही ‘Karna Pishachini’ कहा गया है। उसके वशीभूत होते ही वह सीधे कान में आकर घटनाओं और समस्याओं का समाधान बताती है और मुश्किलों से छुटकारा मिलाता है. यही नहीं पिशाचिनी की कृपा से उस दौरान मुहंमांगे वरदान की पूर्ति भी हो जाती है. पूछे गए किसी भी प्रश्न का जवाब कान में बताती है.

Things you must be aware before do Karna Pishachini Sadhana

साधना को करने से पहले आपको कर्ण पिशाचनी साधना और इतिहास के बारे में जरुरी जानकारी का होना बेहद जरुरी है. ऐसा इसलिए ताकि अभ्यास के दौरान आपको इसमें किसी तरह के side effect से ना गुजरना पड़े. कुछ जरुरी बाते निम्न है जैसे की

  • 3 दिन की इस साधना में आपको खुद का urine पीना होता है और मल खाना होता है. ( सिर्फ तामसिक तरीके से की जाने वाली साधना में )
  • साधना के पूरा होने के बाद ये शक्ति साधक के सामने बगैर किसी वस्त्र के प्रकट होती है. वो आपको हर तरीके से टच करती है लेकिन आपको नहीं करना है आपको इस दौरान पूरी तरह काबू रखना होता है. अगर आपने ऐसा कुछ किया तो साधना भंग हो जाती है.
  • साधना के बाद Karna Pishachini आपकी पार्टनर बनकर रहती है ऐसे में आप न तो शादी कर सकते है ना ही किसी और के साथ संबध बना सकते है. अगर ऐसा कुछ करते है तो कर्ण पिशाचनी उसे ख़त्म कर देती है. पूरी जिंदगी आपको इस शक्ति की जरुरत को पूरा करना पड़ता है.
  • अगर आप कर्ण पिशाचनी साधना के बाद परेशान होकर खुद की लाइफ को ख़त्म करते है तो आप भी पिशाच योनी में फंस कर रह जाते है जिससे आपकी गति संभव नहीं.
  • इस साधना को तब तक ना करे जब तक की आपके पास कोई और option न बचे क्यों की अगर आपने इसे सिर्फ लालच के चलते किया तो ये आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगी.
  • साधना 3 दिन की है लेकिन आपको 2 दिन पहले और 2 दिन बाद तक इसी क्रम को फॉलो करना चाहिए ताकि सफलता को पक्का किया जा सके.

तामसिक कर्ण पिशाचनी साधना का मंत्र

Om Aim Hreem Shreem Dum Hum Phat Kanak Vajra Vaidurya Mukta Alankrat Bhushne Ahe Ahe Aagachh Aagachh Mam Karne Pravishya Pravishya Bhoot Bhavishya Vartmaan Kaal Gyan Door Drishti Door Shravanam Broohi Broohi Agni Stambnam Shatru Stambnam Shatru Mukh Stambnam Shatru Gati Stambnam Shatru Mati Stambnam Paresham Gatim Matim Sarva Shatrunaam Vaag Aarambh Stambnaam Kuru Kuru Shatru Karya Hani Kari Mam Karya Sidhi Kari Shatrunaam Udyog Vindhwans Kari Veer Chamundani Hatakdharini Nagri Puri Pattansthan Sammohini Asadhya Sadhini Om Shreem Hreem Aing Om Devi Han Han Hum Phat Swaha

हिंदी में

ॐ ऐं ह्रीं श्रीम दम हम फट कनक वज्र वैदुर्य मुक्त अलंक्रत भुश्ने आहे आगाच्छ आगाच्छ मम करने प्रविश्य प्रविश्य भूत भविष्य वर्तमां काल ज्ञान दूर दृष्टि दूर श्रवणम ब्रूही अग्नि स्तंबनाम शत्रु स्तंबनाम शत्रु स्तंबं शतरु मुख् वाग आरंभ स्तम्भनाम कुरु कुरु शत्रु कार्य हनी कारी मम कार्य सिद्धि कारी शत्रुनाम उद्योग विंधवांस कारी वीर चामुंडानी हटकधारिणी नगरी पुरी पट्टनस्थान सम्मोहिनी आध्याय साधिनी ओम श्रीम ह्रीं आइंग ओम देवी हन हम फट स्वाहा

कर्ण पिशाचनी साधना विधान

  • रात के ठीक 12 बजे इस साधना की शुरुआत करनी चाहिए.
  • पूरी तरह एकाग्र होकर ऊपर बताये गए मंत्र का जप पूरा करे.
  • इस दौरान आपको अपने कानो से सुनने वाली आवाजो पर फोकस होना होगा.
  • 3 दिन तक रोज 2 से 3 घंटे तक इस मंत्र का जप करे. कई बार 5 घंटे तक का अभ्यास चलता है. ये सब आपके संकल्प पर निर्भर है.

साधना को सिद्ध होने में कम से कम 3 दिन का टाइम लगता है और इसके बाद आपको आवाजे सुनाई देना शुरू हो जाता है.

Karna Pishachini Sadhana siddhi second method

कर्ण पिशाचनी साधना की ये सिद्धि सात्विक तरीके से संपन्न की जाती है और इसे आप घर पर आसानी से कर सकते है. इसका मंत्र निम्न है.

ॐ नमो कर्णपिशाचिनी अमोघ सत्यवादिनी

मम कर्णे अवतर-अवतर सत्यं कथय-कथय

अतीत अनागत वर्तमान मम दर्शय दर्शय

कथय-कथय ह्नों कर्ण पिशाचिनी स्वाहा ।

प्रातःकाल स्नान कर उत्तर की ओर मुँह कर ऊन का आसन व ऊन का ही वस्त्र व ऊनी कम्बल ही ओढ़े. वेशर चन्दन व कस्तूरी का तिलक करे, गुग्गुल का धूप करे, गाय घृत का दीपक करे. 12 दिन तक रोज दस माला का जाप करे. एकाशन करना, खीर व गेहूँ की रोटी खानी चाहिये.

गेहूँ के आटे की एक टिकड़ी बनाए उसको घृत में तल ले. जाप करते समय उसे मुह में रखकर जाप करे. अन्तिम दिन खीर की 108 आहुति देनी चाहिए

कर्ण पिशाचनी साधना हवन आहुति मंत्र

ह्रीं कर्ण पिशाचिनी स्वाहा ।

ॐ वः वः कम्बली के गंद पिंड पिशाचिनी स्वाहा

साधना संपन्न होने के बाद साधक को कानो में आवाज सुनाई देना शुरू हो जाती है. ये एक सात्विक तरीके से की जाने वाली साधना है जो सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करती है.

कर्ण पिशाचनी साधना की सिद्धि का अनुभव अंतिम शब्द

कर्ण पिशाचनी की साधना की सिद्धि करना आसान है क्यों की ये हमारे मंडल से Negative energy entity को attract करती है. Karna Pishachi Sadhana के जरिये वशीकरण, सम्मोहन और मारण जैसे कर्म को पूरा किया जा सकता है लेकिन ये सिर्फ तांत्रिक क्रिया करने वाले ही कर सकते है. माना जाता है की Tantra mantra ritual करने वाले इस शक्ति को अपने काबू में कर लेते है और इसे दूसरो पर छोड़कर काम को अंजाम देते है.

वैसे कर्ण पिशाचनी साधना सिद्धि को नहीं करना चाहिए क्यों की गलत काम से की गई साधना कभी सुख नहीं देती है और अगर सिद्ध गुरु ना हो तो इनसे छुटकारा पाना भी सम्भव नहीं होता है. तंत्र क्रिया के अलावा Astrology में भी इस साधना के जरिये अच्छे परिणाम हासिल किये जा सकते है. अगर आप ये साधना करना चाहते है तो पहले इसकी सावधानी और जरुरी जानकारी को जान ले और फिर शुरू करे.

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