खोपड़ी के पीछे निकल रही हड्डी की वजह कही मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल तो नहीं ?

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एक नयी रिसर्च में चौंका देने वाली बात सामने आई है की जो लोग अपना ज्यादातर समय सर को आगे की ओर झुका कर electronic gadget पर काम करते है उनके सर के पीछे हुकनुमा आकृति विकसित हो रही है. कुछ लोग इसकी तुलना खोपड़ी में निकल रहे सींग से कर रहे है. इस बात को सुनने वाले लोग इसे किसी तरह की विकिरण का परिणाम समझ रहे है लेकिन हकीकत तो ये है की ऐसा हमारे सिर और गर्दन पर दबाव पड़ने की वजह से हो रहा है क्यों की लगातार बैठे रहने की वजह से हम एक स्थिति को लम्बे समय तक नहीं बनाए रख पाते है और नतीजन सर और गर्दन पर इसका विपरीत असर पड़ता है.

खोपड़ी में निकल रहे सींगपुराने सीरियल में शैतान, राक्षस इन सबके सर पर सींग जरुर देखे होंगे. बचपन में हमें डराया भी जाता था की शैतानी करने वाले लोगो के सर पर सींग निकल आते है और हम बदमाशी नहीं करते थे. किसे पता था की उस समय की ये परिकल्पना अब हकीकत बनने जा रही है. युवा वर्ग में सर के पीछे एक हड्डी विकसित होने लगी है जो की हुक जैसी आकृति दिखाई देती है. छोटे बच्चे भी आजकल घंटो मोबाइल में लगे रहते है जिसकी वजह से जल्दी ही उन पर इसके विपरीत परिणाम देखने को मिल रहे है. इस रिसर्च ने हम सबको चौंका दिया है और अब समय है की हम इसके लिए कुछ एक्शन ले नहीं तो आने वाले समय में विकृत शरीर रचना जेनेटिक समस्या के तौर पर देखने को मिल सकती है.

आइये जानते है की आखिर मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने वाले युवा वर्ग में खोपड़ी के पीछे सींग निकलने की इस खबर का सच क्या है.

युवाओं की खोपड़ी में निकल रहे सींग

जाँच में ये बात सामने आई है की इसका असर युवा वर्ग पर ज्यादा देखने को मिला है. खोपड़ी में निकल रहे सींग की वजह है उनका ज्यादा से ज्यादा समय सर को झुककर मोबाइल में लगे रहना. bio mechanics यानी कि जैव यांत्रिकी पर की गई एक नई research में खुलासा हुआ है कि सिर को ज्‍यादा झुकाने के कारण युवा अपनी skulls के पीछे horns develop कर रहे हैं. रिसर्च के मुताबिक mobile पर घंटों वक्त बिताने वाले youth खास कर जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है, वो इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं. इस रिसर्च को Australia के क्‍वींसलैंड स्थित sunshine coast university में किया गया है.

हमारे रीढ़ की हड्डी से वजन के शिफ्ट होकर सिर के पीछे की मांसपेशियों तक जाने की वजह से कनेक्टिंग टेंडन और लिगामेंट्स में हड्डी का विकास हो रहा है जिसकी वजह से एक हुक या सींग की तरह की हड्डियां बढ़ रही हैं. ये हड्डी गर्दन के ठीक ऊपर की तरह खोपड़ी से बाहर निकली हुई है. ‘वॉशिंगटन टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, खोपड़ी के निचले हिस्से इस कांटेदार हड्डी को देखा जा सकता है. यह हड्डी किसी सींग की तरह लगती है.

अगर बात करे मेडिकल की तो डॉक्टरों के मुताबिक, हमारे खोपड़ी का वजन करीब साढ़े चार किलोग्राम का होता है यानी एक तरबूज के बराबर. आमतौर पर मोबाइल का इस्तेमाल करते वक्त लोग अपने सिर को लगातार आगे पीछे की तरफ हिलाते हैं. ऐसे में गर्दन के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और इसी के चलते हड्डियां बाहर की तरफ निकल जाती है, जो किसी किसी सींग की तरह दिखती है. ऐसा सिर पर ज्यादा दबाव पड़ने से हो रहा है.

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पहली बार नजर आये है इस तरह के विपरीत परिणाम

पहली बार मोबाइल डिवाइस को लेकर इस तरह का खुलासा हुआ है जिसमे खोपड़ी में निकल रहे सींग जैसी समस्या को लोगो के सामने रखा गया है. इससे पहले भी mobile towers से निकलने वाला radiation हम पर stress and anxiety जैसे side effect डाल रहा था. अगर आपको लगता है की ये किसी तरह का विकिरण है तो ऐसा बिलकुल नहीं है. ये स्थिति इसलिए पैदा हो रही है क्यों की हम लगातार मोबाइल जैसे डिवाइस पर चिपके रहते है और घंटो मोबाइल पर लगे रहने की वजह से हमारा सर भी आगे की और झुका रहता है जिसकी वजह से एक सही posture नहीं बन पाता है.

घंटो एक ही स्थिति में या फिर सर को बहुत ज्यादा आगे और पीछे झुकाए रखने की वजह से शरीर का पूरा वजह गर्दन पर पड़ता है. ये स्थिति उन लोगो के साथ भी देखी गई है जो घंटो लैपटॉप और डेस्कटॉप पर चिपके रहते है. घंटो तक एक ही जगह बैठे रहने की वजह से वो अपना posture बनाए रख पाने में कामयाब नहीं हो पाते है जिसकी वजह से आगे की ओर झुक कर काम करने लगते है. ऐसे में उनके शरीर और रीढ़ की हड्डी में विकार साफ़ दिखाई देने लगता है.

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अब तक की रिसर्च और डॉक्यूमेंट

इस पर काफी लम्बे समय से शोध चल रही थी और पहली बार 2016 में शोधकर्ताओं का पहला पेपर जर्नल ऑफ एनाटॉमी में साल 2016 में प्रकाशित हुआ था. इस शोध में 18 से 30 साल की उम्र के बिच के 216 लोगो पर ये टेस्ट हुआ था. उनके x ray report में इस बात का खुलासा हुआ की 41% युवा लोगो के सर के पीछे की हड्डी को महसूस किया जा सकता है. ये अनुमान पहले के अनुमान से कही ज्यादा था जो की महिलाओं की तुलना में पुरुषो में ज्यादा देखने को मिला था.

how mobile cause horn on skull

इसी कड़ी में आगे एक दूसरा पेपर साल 2018 में पेश किया गया जिसमें चार टीनएजर्स को बतौर केस स्‍टडी लिया गया था.इस शोध में एक नई बात सामने आई की इन टीनएजर्स के सिर पर सींग genetic disorder की वजह से नहीं बल्‍कि खोपड़ी और गर्दन पर पड़ रहे दबाव की वजह से थीं.

इस पेपर से महीना भर पहले प्रकाशित की गई शोध रिपोर्ट में 18 साल से लेकर 86 वर्ष तक के 1200 लोगों के एक्‍स-रे को शामिल किया गया था. शोधकर्ताओं ने पाया कि 33 फीसदी लोगों में सींग जैसी हड्डी के विकसित होने की बात सामने आई थी. सबसे ज्यादा बच्चे मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करते है और चूँकि उनका शरीर विकास की स्टेज पर होता है इसलिए उनके खोपड़ी में निकल रहे सींग की घटनाओं में ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है.

छोटे बच्चे भी मोबाइल के आदी होते जा रहे है

आजकल छोटे छोटे बच्चे भी घंटो मोबाइल पर विडियो देखने में लगे रहते है. इस बिजी लाइफ में जब हमारे पास काम ज्यादा होता है और बच्चो को सँभालने वाला कोई नहीं होता है तब हम बच्चो को ( 1 से 8 साल ) को मोबाइल पर कार्टून जैसे विडियो चलाकर दे देते है और बच्चे चाव से इसे देखते रहते है जिसके चलते घर की महिलाओं को काम करने में आसानी हो जाती है. आगे चलाकर बच्चो को बिजी रखना हो या फिर उनको बहलाना हो बस मोबाइल दे दो वो उसमे लगे रहेंगे.

हमें लगता है की इससे हमें मदद मिली है लेकिन इसके छिपे हुए खतरे से हम अनजान रहते है. छोटी सी उम्र में बच्चे को मोबाइल की लत लगा देने से वो अब किसी और काम की बजाय मोबाइल में लगे रहेंगे. उनकी आँखे कमजोर हो जाएगी और झुक कर मोबाइल देखते रहने की वजह से वो सीधे से खड़े भी नहीं हो पाएंगे.

छोटे बच्चो को हमें मोबाइल से दूर रखना चाहिए. कोशिश करे की उन्हें जितना हो सके बाहर के खेल और प्राकृतिक वातावरण मिले. अगर आप काम कर रहे है तो बुजुर्ग को बच्चे को खिलाने की जिम्मेदारी दे वो उन्हें घुमा लेंगे या फिर बाहर खेल में बिजी रख सकते है. छोए बच्चो का मन बहुत जल्दी बदलता है इसलिए आसानी से इस लत को छुड़ाया जा सकता है.

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ज्यादा देर तक electronic gadget पर काम करने से होने वाले नुकसान

अभी तक की जितनी भी जाँच सामने आई है उनसे ये बात साफ जाहिर हो रही है की मोबाइल डिवाइस पर ज्यादा देर तक चिपके रहना वाकई बेहद खतरनाक साबित हो रहा है. इसके कुछ बेहद ज्यादा negative effect देखने को मिल रहे है जैसे की

  • ज्यादा देर तक mobile device से चिपके रहने वाले लोगो में stress and anxiety की प्रॉब्लम ज्यादा देखने को मिलती है.
  • कुछ देर तक electronic gadget का प्रयोग करना आपके लिए सही है लेकिन ज्यादा देर तक इन पर निर्भर रहना आपके सोचने समझने की क्षमता को प्रभावित कर देता है.
  • जो लोग ज्यादा देर तक मोबाइल में लगे रहते है उनका अपने आसपास के माहौल में ढालना सरल नहीं होता है खासतौर से अपने आसपास के रिश्ते में जुड़ाव.
  • सामाजिक एकाकीपन होना क्यों की हम virtual world में फंसे रहते है और उसे ही दुनिया मान लेते है.
  • इंसानी कल्पनाशक्ति का क्षय होना शुरू होना.
  • शारीरिक विकार जिसमे body posture का बिगड़ना और खोपड़ी में निकल रहे सींग शामिल है.
  • नींद ना आना, चिडचिडापन जैसी समस्या.

इस तरह की कई मानसिक समस्या हमें युवा वर्ग में ज्यादा देखने को मिल रही है जो ज्यादातर समय electronic gadget and social media पर चिपके रहते है. लम्बे समय से एक जगह बैठे रहने, सर को बहुत ज्यादा आगे झुकाए रखने की वजह से posture बिगड़ने लगता है.

कैसे निपटे इस समस्या से

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट हमारी लाइफ का एक हिस्सा है जिन्होंने ज्यादातर समस्या का समाधान किया है इसलिए इनसे एकदम से छुटकारा पाना तो बिलकुल असंभव है लेकिन फिर भी कुछ ऐसे कदम है जिन्हें उठा कर हम इसके असर को कम कर सकते है.

  • दिनभर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से चिपके रहने की बजाय कुछ समय नेचर के साथ गुजारे. इस दौरान आपके पास किसी तरह का कोई डिवाइस ना हो और कोई काम ना हो.
  • अगर आपका लम्बे समय तक गैजेट पर काम करना जरुरी है तो इसे टुकडो में करे. हर आधे या एक घंटे के बाद कुछ मिनट का गैप दे और थोडा घूम ले.
  • लेट कर या बैठे बैठे या फिर चलते हुए ज्यादा देर तक मोबाइल से ना चिपके. कोशिश करे की मोबाइल को देखने के लिए आप ज्यादा आगे या पीछे न झुके.
  • अगर आपको लम्बे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना जरुरी है तो बाजार में मिलने वाले प्रोडक्ट को पहने. ये एक बेल्ट की तरह है जो आपके कमर खासकर रीढ़ के पोस्चर को एक सही स्थिति में बनाए रखता है. ( खरीदने के लिए click here 🙂 )
  • आरामदायक चेयर की बजाय स्टूडेंट टेबल ले इससे आप कुर्सी से चिपके रहने की आदत से छुटकारा पा सकते है.
  • हरदम मोबाइल पर निर्भर रहना छोड़ दे. सुबह उठने के आधे घंटे बाद और सोने से आधा घंटा पहले मोबाइल को अपने से दूर कर दे.
  • मोबाइल की बजाय जरुरी काम कंप्यूटर पर अगर कर सकते है तो उस पर करे इससे आँखों पर जोर नहीं पड़ेगा.

इन टिप्स को फोल्लो कर आप मोबाइल डिवाइस की वजह से खोपड़ी में निकल रहे सींग की समस्या से छुटकारा पा सकते है. अगर आपके पास कुछ और एक्स्ट्रा टिप्स है तो आप कमेंट में शेयर करे.

क्या वाकई मोबाइल का खोपड़ी में निकल रहे सींग से कोई कनेक्शन है ?

युवा वर्ग सबसे ज्यादा खोपड़ी में निकल रहे सींग की प्रॉब्लम से गुजर रहा है. अभी तक हमें इसका असर इस स्तर पर नहीं दिखा है की कोई सॉलिड कदम उठाए जाए क्यों की अभी ये जाहिर हुआ है लेकिन वो दिन दूर नहीं जब खोपड़ी के पीछे एक हॉर्न जैसी आकृति हमें साफ साफ दिखाई देने लगे. इसका संबंध मोबाइल से नहीं है क्यों की ये किसी तरह का डिसऑर्डर नहीं है जो किसी रेडिएशन की वजह से हुआ हो. इसकी मुख्य वजह है सर को बहुत ज्यादा आगे और पीछे घंटो झुकाए रखना. इस वजह से भार का असंतुलन और हड्डी विकसित हो रही है.

हम अक्सर छोटे बच्चो को बिजी रखने के लिए मोबाइल में विडियो चलाकर दे देते है क्यों की हमारे पास उनके लिए समय नहीं होता है या फिर हम दुसरे काम में बिजी होते है. धीरे धीरे ये एक आदत बन जाती है और बच्चे मोबाइल के लिए जिद्द करने लगते है. हम इसे सीरियसली नहीं लेते है और आगे चलकर बच्चो के दिमाग पर इसके विपरीत प्रभाव नजर आने लगते है. इसलिए समय रहते बचे.

अगर पोस्ट से आपको कोई काम की जानकारी मिली है तो इसे शेयर करना ना भूले.

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2 COMMENTS

  1. आपके द्वारा लिखे हुए सभी पोस्ट बहुत ही काम के और हेल्पफुल होते है और आपके लेख को पढ़कर समझना भी बहुत आसान होता है. में अक्सर आपके ब्लॉग को पढ़ती हूँ और आपके द्वारा लिखा हुआ पोस्ट मेरी समझ में आसानी से आता है

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