जिन्न और जिन्नात पर काबू पाना आपकी कल्पना से भी परे है जानिए ऐसी ही कुछ सच्ची घटनाए

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जिन्नात को काबू करना और जिन्नात को अपना गुलाम बनाना आपने कई जगह पर देखा होगा। इस्लाम धर्म में जिन्नात और रूहानी शक्तियों को कैसे आसानी से काबू कर लेते है। क्या आपने भी कभी अपने जीवन में ऐसे किसी व्यक्ति का सामना किया है जिस पर जिन्नात का साया हो ? शायद नहीं लेकिन इस बात को ignore भी नहीं किया जा सकता है की जिन्नात का अस्तित्व होता है और सबसे बड़ी बात वो किस जगह रहना पसंद करते है इसका ध्यान रखना बेहद जरुरी है। real story about jinn and jinnat from india in hindi. आज जो जानकरी में आप लोगो के साथ शेयर करना जा रहा हूँ वो कोई महज कहानी या किस्सा नहीं बल्कि कुछ सालो पहले की घटनाए है जो मुख्य रूप से राजस्थान से जुड़ी है. आप खुद चाहे तो अपने स्तर पर इसकी जाँच कर सकते है.

जिन्नात को काबू करना
जिन्नात और जिन्न दोनों कुछ मायनो में अलग अलग शब्द हो सकते है। एक बात और आपने जो जिन्नी वाला सीरियल देखा है उसमे और वास्तव के जिन्न में बहुत फर्क है। बहुत से मौलाना के पास लोग जिन्नात और रूहानी शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए आते है। लेकिन क्या आप जानते है की ऐसा क्यों होता है की एक मौलाना का किया हुआ काला जादू या दूसरा कोई रूहानी जादू सिर्फ वही काट सकता है। हमारे हिन्दू धर्म में क्या पाखंड है जो हम आत्माओ को काबू नहीं कर सकते ?

ऐसा बिलकुल नहीं है की हिन्दू धर्म में आज वशीकरण, काला जादू या अन्य किसी तरह का तंत्र-मंत्र-यन्त्र काम नहीं करता है। लेकिन हिन्दू धर्म में सिर्फ सफ़ेद जादू पर जोर दिया जाता है। बहुत कम लोग ऐसे बचे है जिनको हर तरह के रूहानी शक्ति में महारत है। क्यों की आजकल सब ओर पाखंड का जोर है। आज की पोस्ट में बात करने वाले है जिन्नात के बारे में और उन्हें कैसे काबू में किया जा सकता है।

जिन्नात को काबू करना क्या वाकई सरल है :

जिन्न आम रूहानी शक्ति की तरह नहीं होते है। इनके पास भी आयत की शक्ति होती है जो एक मौलाना के पास होती है। जिन्नात भी मुसलमान की तरह रात्रि के दरम्यान अपनी नमाज अदा करते है। इसके अलावा ये बस्ती में भी रहते है जिसकी वजह से ये कमजोर नहीं पड़ते है। ये एक सच्चे दोस्त भी साबित होते है आशिक भी। यही वजह है की कोई भी जिन्नात के केस में नहीं पड़ना चाहता है। इनके लिए पहुंचे हुए पीर या मौलाना जो हरपल पाक कुरान की आयते पढ़ते है वही काबू कर सकते है।

जिन्नात को क्या पसंद है ?

जिन्नात को सबसे ज्यादा सफ़ेद चीजों से प्यार होता है। ये निर्भर करता है की वो किस प्रकृति के है। अगर वो शांत प्रवृति के है तो अपने होने का अहसास आपको ना के बराबर देंगे। अगर आप उनके अधिकार क्षेत्र में जाते है तो ही वो सिर्फ आपके साथ बुजुर्गो जैसा व्यव्हार करेंगे जिसमे कुछ हिदायते हो। इसके विपरीत बुरी प्रवृति के जिन्नात अपने आसपास के लोगो पर हावी होने का, अपने होने का अहसास करवाते रहते है।

बात की जाए राजस्थान की तो राजस्थान के सादुलपुर और तारानगर दोनों ही जगह जिन्नात के किस्से मशहूर है। जिनके बारे में आपको निचे विस्तार से बताया जायेगा। बातो से जिन्नात को काबू करना कारगर है अगर उनकी प्रवृति दयालु है।

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जिन्नात और सादुलपर का मशहूर किस्सा :

अगर आप सादुलपुर गए है तो आप वहा के रेलवे स्टेशन के आसपास के एरिया में जरूर घूमे होंगे। आज से 5-7 साल पहले उसके आसपास एक प्रसिद्ध दुकान थी मिठाई की। वहा के बारे में मशहूर था की इस दुकान से खुद जिन्नात मिठाई लेने आते है। ऐसा लगभग काफी समय तक चला। दुकानदार को इसका पता तब चला जब वो हर बार उनके जाने के बाद अपना गल्ला संभालता और उसमे पैसे नहीं मिलते। मिलते भी कैसे माया के द्वारा बनाये पैसे थे जो कुछ समय बाद खुदबखुद गायब हो जाते।

इस किस्से की गवाह वो एक दुकान ही नहीं एक ऑटो चालक भी था जिसके ऑटो में जिन्नात पास के सुनसान जगह का सफर तय करते थे। उसके अनुसार वो उन्हें हर रात को एक जगह छोड़ने को जाता था और जब पलट कर पैसे मांगता था जो पीछे कोई नहीं। उसे इन सबसे डर भी लगा लेकिन उन जिन्नातो का कहना था की वो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे इसलिए वो हर रोज उन्हें वहा छोड़ के आता था।

जिन्नात और तारानगर की घटना :

तारानगर जो की चूरू जिले की एक तहसील है और मेरे गांव के सबसे पास का शहर है। वहा भी एक जिन्नात की घटना का किस्सा काफी सुनने को मिला था। लेकिन इस किस्से को सुनकर मेरा जिन्नात के प्रति डर ख़त्म हो गया था वजह थी जिन्नात का दयालु होना। वो घटना कुछ इस प्रकार थी :

अब्दुल और उसकी पत्नी फातिमा काफी समय बाद अपने पुश्तैनी घर आये थे। उनके पुरखे ये घर उनके लिए विरासत में छोड़ गए थे जो कुछ समय पहले वहा से रुखसत कर गए थे काम की वजह से। पुश्तैनी घर में आकर फातिमा काफी खुश थी वही अब्दुल इसलिए खुश था की वापस वो अपनों के बिच चला गया था। घर काफी बड़ा था इसलिए उन्होंने अपने लिए कुछ कमरों को रहने लायक बनाया और बाकि कमरों को ऐसे ही छोड़ दिया।

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जिन्नात और रूहानी शक्तियों का कब्ज़ा

अगर किसी घर में लम्बे समय तक साफ सफाई और पूजा पाठ जैसे धार्मिक कार्य ना हो तो उस घर में रूहानी शक्तियों का कब्ज़ा हो जाता है ये बात इसलिए सच है क्यों की इन शक्तियों को सुनसान जगह सबसे पसंद है। इसलिए आपने देखा होगा की शाम के वक़्त अगर आपका घर नया है या निर्माण चल रहा है तब भी उसमे दीपक जरूर रखते है। ऐसा इसलिए ताकि वहा शुभ शक्ति का संचार हो सके। फातिमा ने जिन कमरों की सफाई नहीं की थी उनमे एक कमरे में जिन्नात की नजर पड़ गयी। इसकी वजह थी वहा किसी की चहल पहल नहीं थी।

घर में रहने वालो को खबर भी नहीं थी की घर में जिन्नात का साया पड़ चूका है। एक रोज फातिमा ने घर में बैठे बैठे सफाई करने का सोचा सभी कमरों की सफाई करते करते वो उस कमरे में चली गयी जहा पर जिन्नात का ठिकाना था। फातिमा को सफाई करते देख जिन्नात खुश हो गया और उसने उसे आवाज दी की बेटा आपने यहाँ सफाई कर दी मुझे बेहद ख़ुशी हुई अब इसमें एक पानी का मटका रख दो और कभी इस कमरे में मत आना।

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जिन्नात का रहस्य खुल गया :

फातिमा ने जब ये सुना तो वो डर गयी। उसने अब्दुल को जब ये बात बताई तो पहले तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ लेकिन जोर देने पर वो मौलाना यानि मौलवी से मिलने को राजी हो गया। जब मौलाना ने घर का दौरा किया तो उन्हें जिन्नात के होने का अहसास हुआ। जिन्नात को काबू करना के लिए उन्होंने सीधे तौर पर जिन्नात से भिड़ने की तैयारी कर ली। लेकिन वो भूल गए थे की जिन्नात भी उनसे दो कदम आगे थे। जब भी मौलाना आयते पढ़ते जिन्नात भी आयते पढ़ना शुरू कर देता। जिन्नात को काबू करना मौलाना के लिए वाकई बेहद कठिन था। अंत में जिन्नात ने उस कमरे से मौलाना को बाहर कर दिया।

अब्दुल और उसका परिवार अब काफी खौफजदा हो गए थे। हालाँकि जिन्नात ने अभी तक किसी को की नुकसान नहीं पहुँचाया था लेकिन जिन्नात की फितरत का क्या भरोसा। उन्होंने काफी लोगो से मुलाकात की तब एक नेक बन्दा उनकी मदद को तैयार हुआ। उसने कुछ मिठाई और तोहफे लिए और जिन्नात के कमरे में चला गया। वहा जाकर उसने जिन्नात से दुआ सलाम की और तोहफे भेंट किये।

जिन्नात उसके व्यव्हार से प्रभावित हुआ और उससे बात करने लगा। उसने शुरू की सभी बाते बताई की किस तरह उसकी नजर उस कमरे पर पड़ी। तब उस बन्दे ने उससे गुजारिश की उसे इंसानी बस्ती से दूर रहना चाहिए क्यों की दोनों का मिलन संभव नहीं है। जिन्नात ने उसकी बातो को गंभीरता से लिया और वो वहा से चला गया। इसके बाद उन्हें जिन्नात का कोई अनुभव नहीं हुआ।

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जिन्नात को दोस्त बनाना :

jinn भी दोस्ती की भाषा जानते है और दोस्ती की खातिर कुछ भी कर सकते है। इसलिए ये बात तो समझ में आती है की अगर जिन्नात अच्छी प्रवृति का हुआ तो बातो से उसे मनाया जा सकता है। जिन्नात गजब के हुस्न के मालिक होते है। इंसानी बस्ती में अगर उनकी नजर में कोई आ जाता है तो वो उससे सच्चा इश्क़ भी करते है। जिसमे कई बार खुद की मर्जी होती है तो कई बार दिमाग पर काबू पा कर भी। जिन्नात को काबू करना बेहद मुश्किल कार्य है।

जिन्नात को बुलाने का मंत्र :

jinn को बुलाने और भगाने या control करने के लिए कुरान में आयते पढ़ी जाती है। हालाँकि जिन्नात को लेकर मेरा खुद का कोई अनुभव नहीं है ना ही में कुरान के बारे में ज्यादा जनता हूँ लेकिन इसकी जिज्ञासा की वजह से मेने अपने खास दोस्त जो की मुस्लिम है से बातचीत की थी। उनके अनुसार इस्लाम में आयते ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली है। इल्म और आयतो का सम्मलित रूप मौलाना को मजबूत बनता है। लेकिन जब बात आती है जिन्नात को काबू में करने की तब बड़े बड़ो के पसीने छूट जाते है।

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जिन्नात को काबू करना और उन्हें अपना हमदम बनाना:

इसकी वजह है जिन्नात का खुद का आयते पढ़ना। जिन्नात भी एक सच्चे मुसलमान की तरह नमाज अदा करते है लेकिन इनका वक़्त रात्रिकालीन का होता है। मौलाना जब रात्रि में कुरान की आयते पढ़ते है तब उससे आकर्षित होकर कई रूहानी शक्तिया और जिन्नात मौलाना के आसपास घूमते रहते है। इनमे से कई मौलाना को उसके शागिर्द बनने का सुझाव देते है। यही वजह है की इस्लाम में रूहानी शक्तियों से जुड़े ज्यादा अनुभव जिन्नात के होते है।

आज की पोस्ट जिन्नात को काबू करना आपको कैसी लगी हमें जरूर बताये। हमारा किसी धर्म पर अंगुली उठाना नहीं है। ये सिर्फ बातचीत के आधार पर एकत्रित की गई जानकारी है। इसलिए इसमें ठोस वजह कुछ नहीं है सिवाय फियर फाइल के कुछ एपिसोड के जिनमे जिन्नात से जुड़े अनुभव दिखाए गए है। आप उन्हें देख सकते है।

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  1. श्रीमान जी।प्रणाम। मैं अपने एक अनुज की समस्या को लेकर काफी परेशान,काफी समय से हूं।यदि आप इस बारे में कुछ मदद कर सकें तो मैं आपका आभारी रहूंगा।आपके जवाब के बाद मैं विस्तार से आपको उसकी बीमारी/समस्या से अवगत कराता हूं।धन्यवाद।

  2. कुमार जी। धन्यवाद्।आपके जल्द जवाब हेतु।समस्या यह है कि मेरा अनुज जिसका नाम ashim mishra है,आयु ४४-४५वर्ष है,गत १३-१४वर्षों से ना जाने किस बीमारी या चीज से पीड़ित है कि उसका जीवन बेकार हुआ जा रहा है। प्रारम्भिक दौर में अचानक उसकी तबीयत खराब हो जाती थी जैसे कि सुध बुध खो बैठता था,सारे जिस्म में दर्द महसूस होता था,तब हमने डॉक्टर्स को दिखलाया,सबने कहा कि ब्लड प्रेशर low वजह है जिसका काफी इलाज भी करवाया किंतु समस्या बनी रही तथा और भी विकट होती चली गई। इन सबसे उसका काम,वह जॉब करता था, छूट गई।इस समस्या के शुरू होने से पहले उसका विवाह किया था,वह भी लगभग दो माह के बाद,लड़की ने दहेज का केस कर दिया तथा अदालत में करीब दो साल चक्कर काटने तथा मुआवजा देने के बाद जान बची जबकि हमने कोई दहेज लिया ही नहीं था। इन सब बातों से भी वह काफी परेशान रहा।जब डॉक्टर्स से कोई राहत नहीं मिली तो हम तंत्र मंत्र की शरण में गए,कभी बिहार,कभी बनारस,कभी बॉम्बे,जिसने भी जहां कुछ बताया हम उसे लेकर गए किन्तु कोई पक्की बात नहीं बन पाई।बात अधिक न लंबी करके मैं उसके लक्षण आप को बताता हूं जिस से शायद आप कुछ समझ पाएं।अचानक से अच्छा भला बैठा है, उसे उबासियां आने लगती है,उबासियां भी ऐसी जोकि आम लोगों जैसी नहीं बल्कि कुछ अजीब सी जिसमें उसका मुंह बहुत अधिक खुल जाता है जोकि असमन्या है!फिर उसके सारे शरीर में बेहद दर्द महसूस होने लगता है जिससे वह कराहने जैसा लगता है,अंत में वह अचेत सा होकर गिर पड़ता या लेट जाता है १-२घंटों के लिए!कभी तो स्वयं ही उठ जाता है,तथा कभी उठाना पड़ता है।कोई जॉब/काम नहीं कर पाता है,कहीं अकेले भेजने में डर लगता है कि कहीं रास्ते में कुछ ऐसा हो गया तो कौन संभालेगा!बहुत विकट समस्या है।आज जब आपके ब्लॉग में शास्त्री जी के बारे में पढ़ा तो इस उम्मीद से आपको लिखा की शायद वह कुछ इस पर रोशनी डाल पाएं,इसलिए मैं भाई को लेजाने को भी तैयार हूं।कोई भी यदि उसे देखे तो यही कहेगा कि यह बिल्कुल सही है किन्तु सही बात तो हमें पता है जो पिछले १२-१३साल से यह सब देख रहें है।धन्यवाद पुनः आपके जवाब के लिए तथा आपने जो उत्सुकता दिखाई।

    • संजय जी आपकी पूरी मदद की जायेगी. हालाँकि ब्लॉग का उदेश्य है सही जानकारी उपलब्ध करवाना लेकिन कुछ लोग इसका गलत फायदा उठाने की सोचते है. आप अपना ईमेल चेक कर लीजिये.

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