उपभोक्ता अदालत बन गयी है और भी सुविधाजनक जानिए कैसे

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उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायतबाजार में शॉपिंग करते वक़्त हम जल्दबाजी में पूरा भुगतान करने के बावजूद कम गुणवत्ता वाली चीजे ले आते है जिनका पता हमें बाद में चलता है। दुकानदार हमें अच्छे उत्पाद दिखाकर नकली उत्पाद बेच देते है। या फिर सब्जी और फल बेचने वाले दुकानदार हमें सही चीजे दिखाकर निम्न गुणवत्ता की चीजे बेच देते है। दुकानदार हमें बिल देने में भी आनाकानी करते है। फिर भी हम ज्यादातर मामले में बगैर विरोध के इन्हे लेने को मजबूर हो जाते है।

इसकी वजह है हमें उपभोक्ता अदालत के बारे में सही जानकारी का आभाव होना। उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत हमारी काफी मदद कर सकता है खासतौर से क़ानूनी पेंच को समझने और अपने केस को सही तरीके से प्रस्तुत करने में ताकि हमें सही न्याय मिल सके।

हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है सुविधाओं का अधिकार :

हम सभी जानते है की भारत के सविंधान में हमारे मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। इसमें हमारे अधिकार के अंतर्गत किसी भी तरह के शारीरिक और मानसिक शोषण के खिलाफ हमें आवाज उठाने का अधिकार है। बदलते वक़्त के साथ उपभोक्ता की शिकायतों की आसानी से सुनवाई करने और जल्दी मदद करने के लिए उपभोक्ता अदालत का गठन हुआ। लेकिन बहुत कम लोग ही जानते है की उपभोक्ता अदालत कैसे काम करती है।

इसका सही तरीके से इस्तेमाल कैसे हो ताकि हमें हमारे अधिकार का पूरा हक़ मिले। ज्यादातर लोग खरीददारी के वक़्त सामान की कीमत और उसके तौल के साथ उसकी गुणवत्ता को लेकर लापरवाही बरतते है। ये लापरवाही न सिर्फ उनकी जेब बल्कि उनकी सेहत पर भी भरी पड़ती है।

कई बार हम किसी सुविधा की वस्तु के लिए पूरा पैसा भुगतान करते है। कई बार तय मूल्य से ज्यादा का भी भुगतान करना पड़ता है जो हमारी मज़बूरी या जानकारी के ना होने की वजह से होता है। ऐसी स्थिति में हम उम्मीद करते है की हमें इसका पूरा लाभ मिलेगा मगर कुछ समय बाद ही उस सेवा की वस्तु में कमी आ जाती है या खराबी आ जाती है।

आप वापस दुकानदार के पास जाते है लेकिन वो अपने बहाने से आपकी समस्या से पल्लू झाड़ लेता है। ऐसे में उपभोक्ता अदालत इस तरह के मामले में आपकी मदद कर सकती है।

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उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 1986

उपभोक्ताओं के अधिकारों के सरंक्षण के लिए भारतीय संसद द्वारा विनियमित इस अधिनयम को ही उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम कहते है जिसकी स्थापना 1986 में की गयी थी। जम्मू कश्मीर को छोड़कर ये पुरे भारतवर्ष  में प्रभावी रूप से लागु है। इसके तहत उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उनके द्वारा भुगतान की गयी राशि के लिए उन्हें समुचित सुविधाए मिले सुनिश्चित करना शामिल है।

उपभोक्ता अदालत क्या काम करती है

उपभोक्ता अदालत एक ऐसा न्यायलय है जहा उपभोक्ता के अधिकारों से जुड़े मसलो पर न्याय दिलाया जाता है। इसमें निम्न बाते शामिल है :

  1. दुकानदार द्वारा कम मात्रा में सामान उपलब्ध करवाना।
  2. गुणवत्ता में कामी वाले उत्पाद उपलब्ध करवाना।
  3. बिल ना देना।
  4. उत्पाद में कमी निकलने पर आपकी शिकायत का समाधान ना करना।
  5. आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजों की बिक्री करना जिसमे expire डेट का प्रोडक्ट बेचना शामिल है।

आपके अधिकारों के साथ खिलवाड़ :

आजकल हर कोई गुणवत्ता और भविष्य को लेकर काफी सजग हो चूका है। ऐसे में ज्यादातर लोग स्वास्थ्य बीमा और अच्छी चीजों पर पैसा व्यय करना पसंद करते है। लेकिन क्या आप जानते है की ज्यादातर बिमा कम्पनी अपनी प्राइवेसी पालिसी में ऐसी बाते शामिल करती है जिनके बारे में वो आपको खुलकर नहीं बताती है और बाद में उन्ही का सहारा लेकर आपको मिलने वाले सुविधा और लाभ से वंचित कर देती है। निचे कुछ केस है जो इस बारे में और ज्यादा जानकारी देते है। अब घर बैठे भी आप उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत पर आप अपनी इन समस्या के समाधान पा सकते है।

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उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत मामला 1 :

अलवर राजस्थान के रहने वाले संबित मेहता ने परिवार के सभी सदस्य का स्वास्थ्य बीमा ( health insurance )  करवा रखा था। बेटे की बीमारी के दौरान कैशलेश सुविधा का लाभ ना उठाने के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना उठाना पड़ा था। अदालत ना जाकर जब उन्होंने consumer helpline पर सलाह ली तब सम्बंधित कम्पनी ने ना सिर्फ उनसे माफ़ी मांगी बल्कि आगे से ऐसा ना होने का वायदा भी किया।

उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत मामला 2 :

महाराष्ट्र की सुदीप्ति ने झंझट से बचने के लिए DTH की सालभर की किश्त एक साथ जमा करवा दी थी। उनका आरोप था की सिर्फ 2 माह में ही सालभर के पैसे ख़त्म हो गए। ऐसा इसलिए क्यों की कंपंनी ने उनसे बिना अनुमति लिए कुछ अन्य सेवाएं और चैनल सुविधा उपलब्ध कर दी थी। हेल्पलाइन पर इस तरह की शिकायत दर्ज करने के बाद न सिर्फ माफ़ी मांगी गयी बल्कि पुरे साल की चैनल सुविधा भी चालू की गयी। उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत द्वारा सुदीप्ति ने अपनी समस्या कासमाधान भी पा लिया और DTH कंपनी को सबक भी मिल गया।

दोस्तों बात ये नहीं है की आपकी समस्या कितनी बड़ी और छोटी है बात है आपको होने वाली समस्या की। अगर आप किसी चीज या सेवा के लिए भुगतान करते है तो आपका पूरा हक़ की आप उस सुविधा का तय और निर्धारित लाभ उठा सके। आखिर कब तक हम इस तरह की परेशानी में कोम्प्रोमाईज़ करते रहे। कुछ लोग बस कुछ पैसो की ही तो बात है सोच कर मामले को जाने देते है लेकिन आपकी ये चूक उन लोगो को हिम्मत देती है की वो इसे आगे भी दोहराते रहे।

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आखिर क्यों लोग कतराते है शिकायत दर्ज करने से :

इसकी वजह है लोगो का समस्या को इग्नोर करना। उन्हें लगता है हम पहले से ही परेशान हो चुके है इसके समाधान के लिए लम्बी प्रक्रिया से गुजरेंगे तो समस्या और बढ़ेगी। इस लिए ज्यादातर शिकायते तो उपभोक्ता अदालत में पहुँचती ही नहीं है। लोगो का सोचना ये है की उपभोक्ता अदालत में पहले से ही लाखो केस चल रहे है फिर इस मामले का निवारण होगा या नहीं ? उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत अब और भी सुविधाजनक बन गया है जहा छोटे मामले कम समय में सुलझा दिए जाते है।

उपभोक्ता शिकायत हेल्पलाइन का काम :

अगर आप भी सोच रहे है की उपभोक्ता फोरम में शिकायत कैसे करे ? तो ये हेल्पलाइन आपके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है अगर आप पहली बार शिकायत दर्ज करवाने जा रहे है, तो पहले कहा शिकायत करे, वेबसाइट का पता, दफ्तर का पता, सारी जानकारी प्रतिनिधि उपलब्ध करवाते है। इसके लिए आपको कही किसी प्रक्रिया के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ते है और शुरुआती जानकारी आपको घर बैठे फोन पर मिल जाती है। इसके लिए आप जिला उपभोक्ता फोरम पर भी संपर्क कर सकते है जो हर जिले में होता है।

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बहुत सारी कम्पनियो से है अनुबंध :

मान लीजिये आपको मोबाइल बिल से जुड़ी समस्या है। हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करवाने के बाद वो आपकी शिकायत को मोबाइल से जुडी कम्पनी में भेज देते है। इसके पीछे उनका मकसद कम समय में बिना अदालत जाए शिकायत को सुलझाना है। इस प्रक्रिया में पैसा, समय और ऊर्जा बचाने के साथ साथ जल्दी न्याय मिल जाता है। कंज्यूमर हेल्पलाइन से 200 से ज्यादा कंपनी जुड़ी है। ज्यादातर मामले पहले स्तर पर ही सुलझा लिए जाते है।

केस मजबूत होता है :

कुछ मामले जिनका निबटारा हेल्पलाइन के माध्यम से नहीं हो पाता है वे मामले उपभोक्ता अदालत में पहुँचते है। न्यायलय में अगर आपने पूरी प्रकिया का पालन किया है और आपके पास केस से जुड़े आवश्यक दस्तावेज है तो आपका ही केस मजबूत होगा। अगर आप पहली शिकायत ही सीधा उपभोक्ता फोरम में कर देते है तो केस लम्बा खींचने के असर बढ़ जाते है। उपभोक्ता फोरम के फैसले सभी कंपनी को मानने पड़ते है। बेहतर होगा की पहले उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत पर आप अपनी इन समस्या से जुडी आवश्यक जानकारी जान ले ताकि फैसला आपके हक़ में रहे।

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उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत :

इसके लिए आपको उपभोक्ता न्यायलय की वेबसाइट पर जाकर अपने नाम से यूजर नाम और पासवर्ड से खाता बना कर शिकायत करनी होती है। शिकायत से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी इस पर अपलोड किये जा सकते है। 1800-114-000 उपभोक्ता फोरम शिकायत नंबर पर शिकायत कर सकते है और 8130009809 पर SMS के द्वारा भी शिकायत दर्ज करवा सकते है।

onsumer helpline की ही तरह consumer association of India जैसी कुछ स्वंय सेवी संस्थाए भी इस तरह उपभोक्ताओं की समस्या सुलझा रही है। इस तरह अदालतों का समय बचने के साथ साथ मामलो का भी कम समय में समाधान हो रहा है।

दोस्तों हमें हमारे अधिकारों के प्रति सचेत  रहना चाहिए। आज की पोस्ट उपभोक्ता अदालत ऑनलाइन शिकायत भास्कर के परिवार से ली गई जानकारी के आधार पर है। आप दिनांक 25-01-2017 के दैनिक भास्कर के मधुरिमा पृष्ठ से पढ़ सकते है। जानकारी अच्छी थी इसलिए सच्ची-प्रेरणा पर इसे शामिल किया गया। उम्मीद करते है आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो और कुछ अच्छा पढ़ने को मिला हो।

2 COMMENTS

  1. Sahara India Hame Q Shop K Bond ka Jo Sahara India Ne Banaya tha 2012-2013 main Dhokha Dhadi se real estate or housing Bond ki awaz mein uska paisa aab 2018-19 main Sahara India nahi de rahi hai Maine Sahara India ke
    headquarter main bhi application bheji thi or abhi take koi bhi sunwhai nhi hai
    My number hi 9509821000

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