बचपन में बच्चो को सही परवरिश देने के फायदे जो पूरी जिंदगी काम आते है

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बच्चो की सही परवरिश कैसे करेरुचिका दिल्ली जैसे महानगर में रहती है जहा उसकी माँ निर्मला एक कामकाजी महिला है। अपनी बेटी को हर ख़ुशी देने के लिए निर्मला जी हमेशा काम में व्यस्त रहती थी। जब घर में जवान बेटी हो तो बेटी की फ़िक्र होना जायज है खासतौर से तब जब वो सिंगल मदर हो। निर्मला देवी जानती थी की बच्चो की सही परवरिश कैसे करे ताकि वो आने वाली हर मुसीबत के समय खुद को स्थिर बनाये रख सके। एक दिन जब रुचिका घर में अकेली पढाई कर रही थी तभी बाजु वाले शर्मा अंकल आये और उन्होंने रुचिका से कहा “बेटा आपकी माँ आज काम के सिलसिले में शहर दे बाहर गई है और मुझे आपके साथ रहकर आपका ख्याल रखने को कहा है”

रुचिका गेट खोलने ही वाली थी की उसे माँ की कही बात याद गई। बेटा जब भी कोई अजनबी या जान-पहचान का व्यक्ति तुम्हे ये कहे की मेने कहाहै तो पहले मुझसे पूछ लेना। उसने उसी वक़्त माँ को फोन किया तो माँ ने मना कर दिया।रुचिका फोन रख कर पलटी तो शर्मा अंकल वहा पर नहीं थे वो तो कब का भाग चुके थे।

एक समझदारी रुचिका को बड़ी मुसीबत से बचा गई। क्यों की उसके ही पड़ोस के अंकल की उस पर गलत नजर थी। और ऐसा आजकल हर जगह देखने को मिल जायेगा। हम आज जिस समाज में रह रहे है वो इस कदर दूषित हो चूका है की अकेले रहे तो परेशानी और साथ मिल कर रहे तो भी। ( शहरो में ) इसलिए ये बेहद जरुरी हो चूका है की हम बच्चो को अनजान जगह और अकेले में सुरक्षित रहने की सही जानकारी दे। आज की पोस्ट में बात करते है क्यों बछ्कों को सही जानकारिया देना जरुरी है।

बाल यौन शोषण से बचाव करने के तरीके आपको बच्चो को बचपन से ही बताने चाहिए जिसमे बच्चो को गलत तरीके से छूना, उन्हें उनकी मर्जी के बगैर बगैर कपड़ो के करना और गलत चीजे दिखाना शामिल है। बच्चो की सही परवरिश करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। कामकाजी महिलाओ पर भी बच्चो की परवरिश की जिम्मेदारी उतनी ही है जितना की किसी हाउसवाइफ की ऐसे में आपको बच्चो को आत्मनिर्भर बनने पर जोर देना चाहिए।

बच्चो को दे सही संस्कार :

अक्सर देखा जाता है की बच्चो में जिद्दी प्रवृति बहुत जल्दी विकसित होने लगती है। इसकी वजह आपका उन्हें बचपन से किसी काम को करवाने के बदले लालच देना या फिर उन्हें बच्चा समझ कर उनकी गलतिया इग्नोर करना शामिल है। या फिर आप बच्चा समझ कर उन्हें सही से समझना नहीं चाहते है। ऐसी स्थिति में बच्चो पर गलत प्रभाव पड़ता है और वो जिद्दी प्रवृति के होने लगते है। बच्चो को बचपन से ही कुछ गुणों को विकसित करते रहना चाहिए जिससे की उनका मानसिक विकास सही तरीके से हो ये सब इसलिए जरुरी है क्यों की वक़्त के साथ आप उनके साथ रहे या ना रहे उन्हें आसपास के वातावरण में कैसे ढलना है ये सीखना बेहद जरुरी है। आपको पता होना चाहिए बच्चो की सही परवरिश कैसे करे और उन्हें वक़्त आने पर क्या क्या सिखाना जरुरी है। साथ ही बच्चो को कैसे समझाए आना चाहिए।

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बच्चो को निम्न गुण अपनाने के लिए करे प्रेरित :

  1. अपना काम खुद करना जैसे खुद की सफाई, नहाना और सही तरीके से रहना।
  2. किसी चीज के प्रति पागल ना होना ये बच्चो में सबसे ख़राब बात है और वो अक्सर ऐसी चीजों की डिमांड करते है। उन्हें इनके बगैर रहना सिखाए।
  3. बच्चो को लालची बनने या लालच देकर काम करवाने की बजाय उस काम का महत्व बता कर भी काम करवा सकते है। इससे वो कुछ नया सीखेंगे ही।
  4. उम्र के हिसाब से उन्हें हर वो काम करना सिखाना चाहिए जो उन्हें अकेले रहने पर किसी पर निर्भर ना होने दे।
  5. बच्चो के सही मानसिक और शारीरिक विकास पर ध्यान दे ताकि बच्चे हरदम नया सिखने को तैयार रहे।

बच्चो की सही परवरिश कैसे करे :

अक्सर शहरो में कामकाजी होने की वजह से माता-पिता बच्चो को स्कूल ले जाने और लाने में असक्षम होते है। ऐसे में अगर उन्हें अकेले में कैसे रहा जाए नहीं जाए तो संभव है की कोई गलत व्यक्ति इसका फायदा उठा कर किसी आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे दे। बच्चे चाहते है की उनके माता पिता उन्हें बेहद प्यार करे। उनके लिए इसके मायने भी अलग अलग हो सकते है।

जैसे किसी बच्चे के लिए स्कूल लाना ले जाना प्यार करने का तरीका है और माता पिता ऐसा ना कर पाए तो अनजान व्यक्ति जब उन्हें इस तरह का ऑफर देता है तो वो उनके जाल में फंस जाते है। क्यों की वो सही गलत का मतलब नहीं जानते है। इसलिए वक़्त वक़्त पर बच्चो को समझने और उन्हें अकेले में इस तरह की स्थिति में कब क्या करना चाहिए का प्रशिक्षण और सही ज्ञान जरूर दे। पहले के वक़्त में बुजुर्ग जानते थे बच्चो की सही परवरिश कैसे करे क्यों की उनके पास वक़्त का अनुभव था इसलिए जितना हो सके बुजुर्गो का स्नेह बच्चो को जरूर दे। ताकि बच्चो में संस्कार विकसित हो सके।

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1.) बच्चो की सही परवरिश कैसे करे-प्रलोभन से दूर रहना :

बुरे इरादे वाले लोग अक्सर छोटे बच्चो को बहलाने फुसलाने के लिए बिस्किट, चॉकलेट, खिलोने आदि का प्रलोभन देते है। इसलिए बच्चो को ये सीखना चाहिए किसी भी अपरिचित से कुछ भी खाने पिने की वस्तु ना ले। कई बार परिचित लोग भी शारीरिक शोषण के इरादे से इन चीजों का लालच देते है। बच्चो को उम्र के हिसाब से शारीरिक और मानसिक शोषण और उनसे बचने के उपाय बताते रहना चाहिए। अगर कोई अनजान या परिचित बच्चो को कोई चीज देना भी चाहता है तो परिजनों की अनुमति के बाद ही उसे ग्रहण करे इस तरह की बातो का ध्यान रखना उन्हें बचपन से सिखाना चाहिए।

2.) डरने की जगह दिमाग लगाना

child safetytipsमम्मी-पापा की दुर्घटना, बीमारी या उनकी तरफ से अचानक आये बुलावे के बारे में बताकर भी आपराधिक तत्व के लोग बच्चो को अपने साथ ले जाने में कामयाब हो जाते है। बच्चे ये सुनते ही घबरा जाते है की उनके परिजनों के साथ कुछ अप्रिय घटा है। लेकिन ऐसे हालात में घबराने के बजाय ठन्डे दिमाग से काम करना चाहिए और माहौल का जायजा लेना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए की ऐसे हालात में भी उनका कोई निकट का ही जानकार उन्हें लेने आएगा। अगर आपको पता है बच्चो की सही परवरिश कैसे करे और उन्हें समय समय पर क्या बताना है तो आप उन्हें बड़ी मुश्किलों से खुद निकलने में सक्षम बना सकते है।

उन्हें साफ़ शब्दों में बताये की किसी भी हालत में आपके परिजन किसी अजनबी को आपको लेने नहीं भेज सकते है। आप अजनबी को ये कह कर भी डरा सकते है की आपके जानकार कभी भी आपको लेने यहाँ आ सकते है। अगर आप दोनों वर्किंग यानि कामकाजी है तो अपने बच्चो को हिदायत जरूर दे की किसी भी अजनबी के साथ जाने से पहले निकट के जानकार को सुचना जरूर दे जैसे स्कूल में किसी अध्यापक या गार्ड को, रास्ते में चलते हुए किसी जानकर की दुकान या ट्रैफिक पुलिस को भी आप ये सब बता सकते है। इससे अनजान व्यक्ति के मन में भय होने लगेगा।

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3.) जोश में होश ना खोना

बच्चो में 2 बाते कॉमन है एक तो उन्हें आप जिस काम के लिए मना करते है वो उसे सबसे पहले करेंगे दूसरा किसी भी बात को लेकर उत्साह दिखाने की प्रवृति। जैसे की आप बच्चो को कहते है की उस घर तुम्हे नहीं जाना है वहा पर कोई नहीं रहता है तो बच्चे जब आपस में मिलते है तो वहा जरूर जायेंगे। दूसरा अगर कोई कह दे की उस जगह पर बिच्छ / सांप या अन्य जानवर आ गया है तो बच्चे कुछ नया देखने के उत्साह के मारे बड़ी मुसीबत में फंस जाते है। बहादुरी भरे काम करना अच्छी बात है पर होश में जोश नहीं खोना चाहिए। जिससे की जोखिम में ना फंस जाए। अपने से बड़ो के साथ कैसे बात करते है बच्चो को ये बचपन से सिखाना चाहिए।

4.) बच्चो की सही परवरिश कैसे करे-अजनबी अच्छे भी होते है

इन सबके बावजूद भी कई बार बच्चे मुसीबत में फंस जाते है। ऐसे हालात में हो सकता है की वो किसी अन्य अनजान व्यक्ति से भी मुसीबत ना मांगे। इससे बचने के लिए उन्हें वक़्त वक़्त पर अच्छे और बुरे लोगो की पहचान करना सिखाये। आप चाहे तो बड़ो के साथ मिल कर बच्चो को प्रैक्टिकल रूप से जीवन के वास्तविक अनुभव सीखा सकते है। अगर बच्चे कभी मुसीबत में फंस जाए तो अनजान व्यक्ति से कैसे मदद मांगे और कैसे अच्छे और बुरे लोगो की पहचान करे जरूर बताए।

अक्सर भीड़ भाड़ वाली जगह जैसे मेला, शॉपिंग माल में तैनात गार्ड और मेले में मंदिर के जो साचारक होते है उनसे कैसे मदद मांगे बच्चो को जरूर सिखाना चाहिए। क्यों की भीड़-भाड़ वाली जगह अगर अजनबी व्यक्ति से मदद मांगे तो कुछ हद तक हो सकता है वो इस स्थिति का फायदा उठाये लेकिन बच्चे अगर सीधे सही लोगो से पहचान कर मदद मांगे तो उन्हें समस्या से बचाया जा सकता है।

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 सुरक्षित रहने के लिए अपनाये इन तरीको को :

कामकाजी माता पिता के सामने सबसे बड़ी समस्या में से एक है बच्चो की सही परवरिश कैसे करे क्यों की उन्हें ज्यादातर वक़्त ऑफिस और काम को देना पड़ता है। इसलिए माता पिता अपने बच्चो के मध्य कोड वर्ड बना सकते है जो अनजान जगह या उन्हें लाने ले जाने में काम आता हो। इस तकनीक का इस्तेमाल कर आप बच्चो को अनजान व्यक्ति से दूर रहने की सही जानकारी दे सकते है और वो गलत बातो में फंसेंगे भी नहीं। जब भी कोई अनजान व्यक्ति आपके बच्चो को ये कहे की वो उसे लेने आया है तो उसे वो कोड वर्ड पूछने को कहे जो आप दोनों के बिच तय हुआ है। अगर वो अनजान व्यक्ति या परिचित सही जानकारी दे तो वो उसके साथ आ सकते है।

भरोसा सिर्फ जानकार पर ही करे

कोई अनजान व्यक्ति आपसे ये कहे की उसे आपके माता-पिता ने आपके साथ रहने को कहा है खासतौर से लड़कियों को तो जल्दबाजी में आकर उन्हें घर में प्रवेश करने से पहले माता-पिता को फोन करके जरूर पूछे। अगर ऐसा ना हो तो अपने सबसे खास और भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी जरूर दे।

अगर आप कामकाजी है तो बच्चो को अकेले रहना सिखाये ना की किसी पडोसी को ये कहे की वो आपके बच्चो का ख्याल रखे। क्यों की जब आप दुसरो को ये कहते है तो इसका एक मतलब ये है की आप अपने बच्चो से दूर है। और हो सकता है की ऐसे हालात का पडोसी फायदा उठा ले। इनसे बचे। आपको सीखना होगा की बच्चो की सही परवरिश कैसे करे क्यों की ऐसा करना वक़्त आने पर उन्हें मजबूत आत्मनिर्भर बनाता है। किसी पर निर्भर होने की बजाय अगर वो खुद अपने आप को संभालने में सक्षम हो जाते है तो संभव है की वो हर वक़्त पर आने वाली मुसीबत का सामना डट कर कर पाएंगे।

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