ध्यान और इश्वर नाम जाप से जानिए खुद की अहमियत को और बनाए इसे और भी बेहतर

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इश्वर ने इस सृष्टि में सबको एक जैसा प्यार दिया है ये सिर्फ हमारे कर्म होते है जो हमें अच्छा और बुरा बनाते है। ध्यान का जीवन में क्या महत्व है और ध्यान द्वारा हम इश्वर को कैसे पा सकते है आज की इस एक छोटी से कहानी के जरिये समझने की कोशिश करते है। अक्सर ऐसा होता है की हम सब अपनी सही अहमियत नहीं समझ पाते है क्यों की हमें पता नहीं होता है की हमारी असली अहमियत क्या है ? एक छोटी सी कहानी के जरिये हम कैसे जाने खुद की कीमत को और संवारे अपने जीवन को समझने की कोशिश करेंगे। क्या आप जानते है की कैसे हम ध्यान द्वारा इश्वर नाम के जाप कर कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को. इस पोस्ट में जानिए एक कहानी के माध्यम से.

कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को
जब तक हमें खुद की अहमियत का ही पता नहीं चलेगा की हम क्या कर सकते है, हम असल जिन्दगी में कुछ कर ही सकते इसलिए सबसे पहले खुद की पहचान करना बेहद जरुरी है। सिर्फ खुद की पहचान कर ही हम जिंदगी में आने वाली मुश्किलों को आसान कर सकते है। ये कहानी है एक बाप और बेटे की जिसमे बाप बेटे को ये समझाने की कोशिश करता है की हम खुद की अहमियत को पहचान कर किसी और की कीमत का निर्धारण कैसे कर सकते है।

कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को ?

माइकल जब 13 साल का हुआ तो उसके पिता ने उसे एक पुराना कपड़ा देकर उसकी कीमत पूछी।
माइकल बोला एक डॉलर तो पिता ने कहा कि इसे बेचकर दो डॉलर लेकर आओ। माइकल ने उस कपड़े को अच्छे से साफ़ कर धोया और अच्छे से उस कपड़े को फोल्ड लगाकर रख दिया। अगले दिन उसे लेकर वह रेलवे स्टेशन गया, जहां कई घंटों की मेहनत के बाद वह कपड़ा दो डॉलर में बिका।

कुछ दिन बाद उसके पिता ने उसे वैसा ही दूसरा कपड़ा दिया और उसे बीस डॉलर में बेचने को कहा।

इस बार माइकल ने अपने एक पेंटर दोस्त की मदद से उस कपड़े पर सुन्दर चित्र बना कर रंगवा दिया और एक गुलज़ार बाजार में बेचने के लिए पहुंच गया। एक व्यक्ति ने वह कपड़ा बीस डॉलर में खरीदा और उसे पांच डॉलर की टिप भी दी।

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कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को – सबसे ऊँची बोली लगाना

जब माइकल वापस आया तो उसके पिता ने फिर एक कपड़ा हाथ में दे दिया और उसे दो सौ डॉलर में बेचने को कहा। इस बार माइकल को पता था कि इस कपड़े की इतनी ज्यादा कीमत कैसे मिल सकती है। उसके शहर में मूवी की शूटिंग के लिए एक नामी कलाकार आई थीं। माइकल उस कलाकार के पास पहुंचा और उसी कपड़े पर उनके ऑटोग्राफ ले लिए।

ऑटोग्राफ लेने के बाद माइकल उसी कपड़े की बोली लगाने लगा। बोली दो सौ डॉलर से शुरू हुई और एक व्यापारी ने वह कपड़ा 1200 डॉलर में ले लिया।

रकम लेकर जब माइकल घर पहुंचा तो खुशी से पिता की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने बेटे से पूछा कि इतने दिनों से कपड़े बेचते हुए तुमने क्या सीखा? माइकल बोला – पहले खुद को समझो, खुद को पहचानो। फिर पूरी लगन से मंजिल की ओर बढ़ो क्योकि जहां चाह होती है, राह अपने आप निकल आती है।

कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को

पिता बोले कि तुम बिलकुल सही हो, मगर मेरा ध्येय तुम्हें यह समझाना भी था कि अगर इंसान खुद के बने कपड़े को मैला होने के बाद भी इतनी कीमत बढ़ा सकता है, तो फिर वो परमात्मा अपने बनाये हम इंसानों की कीमत बढ़ाने में क्या कोई कसर छोड़ भी सकता है?

सोचो कपड़ा मैला होने पर इसकी कीमत बढ़ाने के लिए उसे धो कर साफ़ करना पड़ा, फिर और ज्यादा कीमत मिली जब उस पर एक पेंटर ने उसे अच्छे से रंग दिया, और उससे भी ज्यादा कीमत मिली जब एक नामी कलाकार ने उस पर अपने नाम की मोहर लगा दी।

तो विचार करें जब इंसान उस निर्जीव कपड़े को अपने हिसाब से उसकी कीमत बड़ा सकता है। तो फिर वो मालिक जिसने हम जीवों को बनाया है क्या वो हमारी कीमत कम होने देंगा? जीवात्मा भी यहां आकर मैला हो जाता है लेकिन सतगुरु हम मैले जीवात्माओं को पहले साफ़ और स्वच्छ करते हैं, जिससे परमात्मा की नज़र में हम जीवात्माओं की कीमत थोड़ी बढ़ जाती है। फिर सतगुरु हम जीवात्माओं को अपनी रहनी के रंग में रंग देते हैं, फिर कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है। और फिर सतगुरु हम पर अपने नाम की मोहर लगा देते हैं फिर तो इंसान अपनी कीमत का अंदाज़ा ही नही लगा सकता।

लेकिन अफ़सोस इतना कीमती इंसान अपने आप को कौड़ियों के दाम खर्च करते जा रहा है उसे अपने आप की ही पहचान नही, उसे अपने ऊपर लगी सतगुरु के नाम रूपी कृपा और उस अपार दया की कद्र नही, क्योकि अगर कद्र होती तो उसक हुकुम में रहकर भजन बन्दगी को पूरा पूरा समय देकर अपने इंसानी जामे का मकसद और उसकी कीमत भी जरूर समझते

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कैसे जाने खुद की अहमियत को – अंतिम शब्द

जिस तरह से आपने इस छोटी सी कहानी के जरिये एक कपड़े की कीमत को जाना है वैसे ही ध्यान द्वारा अपने कीमती जीवन को संवारने की भी कोशिश करे ताकि हमें बाद में ये ना लगे की ये जीवन ऐसे ही तुच्छ कार्यो में बीता दिया। इश्वर नाम जाप और ध्यान में कैसे जाने खुद की कीमत और अहमियत को की ये छोटी सी कहानी बहुत बड़ी बाते सिखने को दे जाती है. उम्मीद करता हूँ आपको ये कहानी अच्छी लगी होगी. यू ही sachhiprerna से जुड़े रहिये और latest update पाते रहे।

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