How Cannon-Bard Theory works in Hindi definition, example and Criticisms

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इन्सान अपने आसपास से बहुत कुछ सीखता है. अपने आसपास हो रही घटना से हम बचपन में एक छोटे बच्चे से लेकर बूढ़े होने तक सीखते रहते है. लेकिन क्या आपने कभी नोटिस किया है किस घटना पर आपका मन किस तरह का reaction करता है ? The Cannon-Bard Theory हमें इसके बारे में डिटेल से समझने में मदद करती है. हम किस तरह की घटना पर किस तरह की बॉडी हरकत करेंगे या फिर emotional reaction करेंगे ये सब इस theory के जरिये समझा जा सकता है.

इस theory के अनुसार lower part of the brain जिसे thalamus के नाम से जानते है हमारे experience of emotion को कण्ट्रोल करता है. the higher part of the brain, यानि the cortex ये expression of emotion को कण्ट्रोल करता है यानि हमें किस इमोशन को किस तरह एक्सप्रेस करना है ये हमारे दिमाग के उपरी हिस्से द्वारा कण्ट्रोल किया जाता है. इसे physiological reactions कहते है.

The Cannon-Bard theory

किसी घटना के दौरान हमारे इमोशन क्या होंगे या फिर हम किस तरह की physiological reactions करेंगे ये इस theory में समझाने की कोशिश की है लेकिन इसमें कई कमियां भी है. हम किस घटना को किस तरह manage करेंगे ये भी ध्यान देना चाहिए. human emotion and behavior को समझने के लिए आज कई theory दी जा चुकी है लेकिन इन सब में कुछ न कुछ कमी है.

आज की पोस्ट में हम कैनन बार्ड थ्योरी को जानने वाले है जो इमोशन पर फोकस है. आइये जानते है इसके बारे में डिटेल से.

How Cannon-Bard Theory works in Hindi

The Cannon-Bard theory of emotion जिसे thalamic theory of emotion के नाम से भी जाना जाता है वास्तव में एक physiological explanation of emotion है. किसी भी घटना को लेकर हमारे मन में किस तरह के emotion and thought develop होते है उन सबको इसके जरिये समझा जाता है. इसे लोगो के सामने लाने वाले Walter Cannon and Philip Bard थे जिनके नाम पर इस theory का नाम रखा गया है.

इस theory में हम किसी emotion को experience करने के बाद कौनसी physiological reactions करते है इसके बारे में समझा जाता है. कुछ एक्टिविटी जो common है जैसे की sweating, trembling, and muscle tension यानि हमारे मन की भावनाए किस तरह की हरकत के लिए जिम्मेदार होती है इसके बारे में हम इसमें समझते है. एक cannon bard theory example के तौर पर

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अब आपकी इमोशन कैसी है ? आपकी reaction क्या होगी आपका emotion आपके डर को दिखायेगा और इसके रिजल्ट में आपको पसीना आयेगा, आप नज़ारे चुराने लगेंगे, आपका low self-confidence कोई भी पकड़ लेगा या फिर आपकी बॉडी में एंठन होना शुरू हो जाएगी.

ये सब किसी 3 स्टेप में work करता है.

  1. आप किसी घटना से गुजरते है
  2. उसके अनुसार आपके मन में emotion बनते है
  3. उस emotion के according आपकी body physiological reactions करती है

यहाँ पर आपको ये जान लेना जरुरी है की आपके body physiological reactions किसी emotion पर निर्भर नहीं करती है. कई बार हम खुद को स्थिर रखते है जिसकी वजह से इमोशन तो बनता है लेकिन हरकत नहीं.

Common cannon-bard theory example

हम इसे साफ तौर पर देख सकते है की किस तरह हमारे लाइफ की किसी भी घटना के अनुभव और उसके अनुसार बनने वाले emotion पर cannon-bard theory लागू की जा सकती है. ये आप पर निर्भर करता है की आप कितने stable है क्यों की जब आप negative emotional responses करते है तो उसके विपरीत positive emotions भी develop होता है.

आइये इसे कुछ उदाहरण के तौर पर और ज्यादा क्लियर समझते है.

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A Frightening Experience

रात के अँधेरे में अगर आपको अकेले कही जाना हो तो क्या आप ये आसानी से कर पाते है ? अँधेरी रात में आप सुनसान जगह या गली से गुजर रहे होते है और अचानक ही आप किसी के कदम की आवाज सुनते है. आप हल्का सा पीछे मुड़कर देखते है तो आपको एक shaodw people figure आपके पीछे दिखाई देती है जो आपको ही फॉलो कर रही है. ऐसी स्थिति में क्या होता है ?

अगर बात करे Cannon-Bard theory of emotion की तो ऐसी स्थिति में लगभग सभी लोग डर का अनुभव करते है. डर का अनुभव करने के साथ ही आपका दिल जोर से धडकने लगता है. आप अपने चलने की स्पीड को तेज कर लेते है और जो रास्ता 15 मिनट का होता है उसे 5 मिनट में पूरा करने की कोशिश करते है.

यहाँ पर shadow figure का दिखना एक घटना है, आपका डर को अनुभव करना एक emotional reaction है और दिल का जोर से धडकना या फिर आपकी चाल को तेज करना ये आपके body physiological reactions है. ऐसा 95% लोगो के साथ होता है खासकर उन लोगो के साथ जो अकेले चलने से पहले कुछ डरावना सुनते है.

नयी जॉब लगना और पहले दिन का डर

जब भी किसी की नयी जॉब लगती है तब उसका पहला दिन हमेशा ही तनाव भरा रहता है. ऑफिस का पहला दिन, नए लोगो से मिलना, अपने रोल को समझना और दूसरो के साथ ताल मेल बिठाना ये सब लगा रहता है. आपकी पहली प्राथमिकता रहती है की आप सबके बीच अपना first impression is last impression वाला concept अच्छा बनाए. इसकी वजह से आप खुद को stable नहीं रख पाते है और जल्दबाजी दिखाते है.

इस दौरान आप physical and emotional signs of stress से गुजरते है क्यों की आप जरुरत से ज्यादा प्रेशर पर काम करते है. इस दौरान खुद को nervous feel करना आम बात है और कुछ लोगो को तो पेट में गड़बड़ी का अहसास भी होता है.

पहला प्यार और उससे मिलने जाना

पहला पहला प्यार और उस पर पहली बार मिलना जिसे आज हमने डेट का नाम दिया है. इस स्थिति के दौरान कौन खुद को nervous होने से रोक सकता है ? शायद कोई नहीं. ये एक ऐसी घटना है जिसमे दोनों ही प्रेशर एक नयी जॉब की तरह लेते है. इस दौरान हम 2 तरह के इमोशन से गुजरते है पहला मिलने का excitement और दूसरा अपना बेहतर करने का pressure.

Happiness and excitement के साथ साथ sweaty palms and a rapid heartbeat ये दोनों ही तरह के इमोशन आप खुद में नोटिस कर सकते है.

दूसरी अलग theory के साथ तुलना

भावनाओ को समझने के लिए अलग अलग theory है. The Cannon-Bard theory दूसरी कई theory से कई मायनो में अलग है. अगर बात करे James-Lange Theory of emotion की तो उनके अनुसार किसी भी घटना की वजह से पहले एक body physiological reactions होती है और फिर emotional reaction develop होती है. इस theory को dominant theory of emotion की तरह देखा जाता है.

इस कमी को The Cannon-Bard theory के जरिये समझने की कोशिश की गई और emotional experiences किस तरह develop होते है इसे समझाने की कोशिश की गई. आइये James-Lange Theory of emotion को थोड़ा डिटेल से समझते है.

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James-Lange Theory

वास्तव में देखा जाए तो The Cannon-Bard theory का आईडिया इस theory से ही लिया गया है. जेम्स की theory में physiological explanation for emotions को समझाया गया था वही कैनन बार्ड थ्योरी में neurobiological approach को महत्त्व दिया गया है. William James’s theory के अनुसार किसी भी घटना में पहले अपने आसपास के वातावरण के अनुसार physiological reaction होती है. इसके बाद बॉडी में हो रही reaction के अनुसार ही emotion develop होते है.

जब आप किसी कुत्ते को देखते है जो आपको देखकर भोंकना शुरू कर देता है तब क्या होता है ? आपकी हार्ट-बीट तेज हो जाती है. सांसे तेज होने लगती है और इसके अनुसार ही आपके मन में डर पैदा होने लगता है. The Cannon Bard theory ने इसे थोड़ा अच्छे से explain करने की कोशिश की है और उनके अनुसार न तो emotional reaction किसी तरह के physiological reaction पर निर्भर है ना ही इसके विपरीत होता है.

किसी भी घटना के बाद हमारे अन्दर उसके अनुसार इमोशन बनते है जो बॉडी की हरकत को दर्शाता है लेकिन अलग अलग कंडीशन में ये सब पर लागू नहीं होता है.

Schacter-Singer Theory

इस theory को two-factor theory के नाम से भी समझा जा सकता है. इस theory ने पहले की दोनों ही theory को अधूरा साबित कर दिया और एक नया concept लोगो के सामने रखा. The Schacter-Singer theory के अनुसार physiological reaction भले ही पहले हो लेकिन एक ही तरह की बॉडी हरकत कई अलग अलग इमोशन के लिए एक जैसी रहती है.

यहाँ पर सबसे बड़ी कमी को लोगो के सामने रखा और क्लियर किया की physiological reactions को particular emotion के साथ लेबल करना होगा.

Criticisms in The Cannon Bard theory

The Cannon-Bard theory को लेकर लोगो ने कई सवाल भी खड़े किये है जिसमे thalamus के emotion के रोल से जोड़ा गया है और उस पर बहुत ज्यादा महत्त्व दिया गया. सिर्फ एक भाग को महत्त्व देकर बाकि के हिस्सों को ignore करना इस theory पर काफी सारे सवाल खड़ा करता है. ये सिर्फ limbic system का एक भाग है जो इमोशन में एक बड़ा रोल निभाता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की बाकि हिस्सों को किनारा कर दे.

रिसर्च में ये बात साबित भी हुई है की ये process जितना theory में explain की गई है उससे कही ज्यादा काम्प्लेक्स है. Basic assumption of Cannon-Bard theory के अनुसार physical reactions किसी भी तरह के emotion को लीड नहीं करती है. लेकिन, जब एक शोध किया गया जिसमे लोगो को physical reactions जैसे की मुस्कुराना या फिर स्माइल करना जैसे टेस्ट किये गए तो पाया की वे इस तरह की बॉडी हरकत के दौरान खुद को उस इमोशन के करीब पाते है.

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