योगासन की खास विधिया जिनसे निर्माण होता है निरोगी काया का

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योगासन और ध्यान दोनों ही एक साथ हमारे जीवन को निरोगी बनाने में महत्वपूर्ण है। ध्यान करने की अनेकों विधियों में एक विधि यह है कि ध्यान किसी भी विधि से किया नहीं जाता, हो जाता है। ध्यान की योग और तंत्र में हजारों विधियां बताई गई है। हिन्दू, जैन, बौद्ध तथा साधु संगतों में अनेक योगासन विधि और क्रियाओं का प्रचलन है। विधि और क्रियाएं आपकी शारीरिक और मानसिक तंद्रा को तोड़ने के लिए है जिससे की आप ध्यानपूर्ण हो जाएं। यहां प्रस्तुत है योगासन की सरलतम विधियां, लेकिन चमत्कारिक। अगर आप इसमें नए है तो आपके लिए कुछ yoga poses for beginners शेयर किये गए है. जिनमे से कुछ yoga poses for kids भी है ताकि बच्चे भी आसानी से कर सके.

yoga poses for beginners

योगासनकी हजारों विधियां हैं। भगवान शंकर ने माँ पार्वती को 112 विधियां बताई थी जो ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ में संग्रहित हैं। इसके अलावा वेद, पुराण और उपनिषदों में ढेरों विधियां है। संत, महात्मा विधियां बताते रहते हैं। उनमें से खासकर ‘ओशो रजनीश’ ने अपने प्रवचनों में ध्यान की 150 से ज्यादा विधियों का वर्णन किया है।

yoga poses for beginners in hindi

आजकल हर जगह yoga classes खुल चुकी है जहाँ पर हजारो रूपये खर्च कर लोग खुद को निरोगी बनाये रखने की कोशिश कर रहे है. वैसे तो योग और प्राणायाम में बेहद सावधानी रखनी होती है लेकिन इन yoga poses for beginners को हम शुरुआत से कर सकते है. अगर आप इस फील्ड में नए है और योगा करना चाहते है तो इन खास स्थिति और मुद्रा का आपको पता होना चाहिए. आइये जानते है योगा करने वाले लोगो को शुरुआत किनसे करनी चाहिए.

सिद्धासन और रेचक

1- सिद्धासन मुद्रा yoga poses for beginners में सबसे पहले आती है. सिद्धासन में बैठकर सर्वप्रथम भीतर की वायु को श्वासों के द्वारा गहराई से बाहर निकाले। अर्थात रेचक करें। फिर कुछ समय के लिए आंखें बंदकर केवल श्वासों को गहरा-गहरा लें और छोड़ें। इस प्रक्रिया में शरीर की दूषित वायु बाहर निकलकर मस्तिष्‍क शांत और तन-मन प्रफुल्लित हो जाएगा। ऐसा प्रतिदिन करते रहने से ध्‍यान जाग्रत होने लगेगा।

2- सिद्धासन में आंखे बंद करके बैठ जाएं। फिर अपने शरीर और मन पर से तनाव हटा दें अर्थात उसे ढीला छोड़ दें। चेहरे पर से भी तनाव हटा दें। बिल्कुल शांत भाव को महसूस करें। महसूस करें कि आपका संपूर्ण शरीर और मन पूरी तरह शांत हो रहा है। नाखून से सिर तक सभी अंग शिथिल हो गए हैं। इस अवस्था में 10 मिनट तक रहें। यह काफी है साक्षी भाव को जानने के लिए।

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सुखासन से बनाये स्वस्थ काया

3- किसी भी सुखासन में आंखें बंदकर शांत व स्थिर होकर बैठ जाएं। फिर बारी-बारी से अपने शरीर के पैर के अंगूठे से लेकर सिर तक अवलोकन करें। इस दौरान महसूस करते जाएं कि आप जिस-जिस अंग का अलोकन कर रहे हैं वह अंग स्वस्थ व सुंदर होता जा रहा है। यह है सेहत का रहस्य। इस yoga poses for beginners के जरिये साधनक आसानी से शरीर और मन को ध्यान के लिए तैयार कर सकता है.

4. चौथी विधि क्रांतिकारी विधि है जिसका इस्तेमाल अधिक से अधिक लोग करते आएं हैं। इस विधि को कहते हैं साक्षी भाव या दृष्टा भाव योग में रहना। अर्थात देखना ही सबकुछ हो। देखने के दौरान सोचना बिल्कुल नहीं। यह ध्यान विधि आप कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं। सड़क पर चलते हुए इसका प्रयोग अच्छे से किया जा सकता है।

5. नासिकाग्र का अर्थ होता है नाक का आख‍िरी छोर, ऊपरी हिस्सा या अग्रभाग। इस भाग पर बारी-बारी से संतुलन बनाने हुए देखना ही नासिकाग्र मुद्रा योग कहलाता है। लेकिन यह मुद्रा करने से पहले योग शिक्षक की सलाह जरूर लें, क्योंकि इसके करने से भृकुटी पर जोर पड़ता है।

योगासन मुद्रा की विधि – yoga poses for beginners

किसी भी आसन में बैठकर नाक के आखिरी सिरे पर नजरे टिका लें। हो सकता है कि पहले आप बाईं आंखों से उसे देख पाएं तब कुछ देर बाद दाईं आंखों से देखें। इस देखने में जरा भी तनाव न हो। सहजता से इसे देखें।

अवधि– इस मुद्रा को इतनी देर तक करना चाहिए कि आंखों पर इसका ज्यादा दबाव नहीं पड़ें फिर धीरे-धीरे इसे करने का समय बढ़ाते जाएं।

इसका लाभ– इससे जहां आंखों की एक्सरसाइज होती है वहीं यह मस्तिष्क के लिए भी लाभदायक है। इससे मन में एकाग्रता बढ़ती है। इस मुद्रा के लगातार अभ्यास करने से मूलाधार चक्र जाग्रत होने लगता है जिससे कुण्डलीनी जागरण में मदद मिलती है। इससे मूलाधार चक्र इसलिए जाग्रत होता है क्योंकि दोनों आंखों के बीच ही स्थित है इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी जो मूलाधार तक गई है।

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6 special yoga poses for beginners – ‘हंसी मुद्रा’

जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है कि यह कैसी मुद्रा होगी। सोचने और त्वरित निर्णय की क्षमता बढ़ाने में यह मुद्रा लाभदायक मानी गई है। मस्तिष्क के विकास में यह मुद्रा सहायक है। इसे हरिध्यान मुद्रा योग भी कहते हैं।

मुद्रा की विधि – सुखासन या उत्कटासन में बैठकर अपने हाथ की सभी सबसे छोटी अंगुली को छोड़कर अंगुलियों को अंगूठे के आगे के भाग को दबाने से ‘हंसी मुद्रा’ बन जाती है।

अवधि- इस मुद्रा को प्ररंभ में 5-8 मिनट से करके 30-48 मिनट तक कर सकते हैं।

मुद्रा का लाभ- इस मुद्रा नियमित अभ्यास से विवेक बढ़ता है अर्थात इससे सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है और इससे शरीर का भारीपन समाप्त हो जाता है।

विशेषता- माना जाता है कि इस मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से राजसिक ताकत बढ़ती है और व्यक्ति धन संपन्न बना रहता है।

सावधानी –इस मुद्रा को करते समय किसी भी प्रकार का मंत्र नहीं जपना चाहिए और ना ही कोई अन्य धार्मिक उपक्रम करें।

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7 अनुशासन मुद्रा की विधि best yoga poses for beginners

बिल्कुल साधारण सी विधि है। अनुशासन मुद्रा को पद्मासन, समपाद या सुखासन में बैठकर अपनी तर्जनी अंगुली को बिल्कुल सीधा कर दें। बाकी बची हुई तीनों अंगुलियों को अंगूठे के साथ मिला लें। इस मुद्रा को अनुशासन मुद्रा कहते हैं।

समय-प्रारंभ में इस मुद्रा को प्रतिदिन 5 से 8 मिनट करें। फिर 1 महीने तक इसके अभ्यास का 1-1 मिनट बढ़ाते जाएं।

परिणाम और लाभ-इस मुद्रा को करने से व्यक्ति अनुशासन में रहना सिख जाता है। अनुशासन मुद्रा को करने से नेतृत्व करने की शक्ति बढ़ती है। इससे कार्य क्षमता का विकास होता है तथा व्यक्ति में नेतृत्व की शक्ति जाग्रत होने लगती है। अनुशासन मुद्रा सफलता का सूत्र है।

ये मुद्रा एक्यूप्रेशर चिकित्सकों अनुसार रीढ़ की हड्डी पर असर करती है और व्यक्ति अपने आप में नई जवानी को महसूस करता है।

सावधानी- किसी की तरफ अंगुली उठाकर बात ना करें, इससे अनुशासन भंग होता है। अनुशासन मुद्रा को एक बार में ज्यादा लंबे समय तक न करें। अंगुली को जबरदस्ती ताने नहीं।

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8 अश्विनी मुद्रा

योगासन

गुदाद्वारा को बार-बार सिकोड़ने और फैलाने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते हैं। अश्विनी मुद्रा इतनी आसान है कि इसको करने में किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। कुछ एक्सपर्ट के अनुसार ये yoga poses for beginners उचित नहीं है. लेकिन अभ्यास किया जाए तो अच्छे अनुभव है.

विधि : कगासन में बैठकर (टॉयलैट में बैठने जैसी अवस्था) गुदाद्वार को अंदर ‍खिंचकर मूलबंध की स्थिति में कुछ देर तक रहें और फिर ढीला कर दें। पुन: अंदर खिंचकर पुन: छोड़ दें। यह प्रक्रिया यथा संभव अनुसार करते रहें और फिर कुछ देर आरामपूर्वक बैठ जाएं।

सावधानी : यदि गुदाद्वार में किसी प्रकार का गंभीर रोग हो तो यह मुद्रा योग शिक्षक की सलाह अनुसार ही करें।

लाभ : इस मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं। शरीर में ताकत बढ़ती है तथा इस मुद्रा को करने से उम्र लंबी होती है। माना जाता है कि इस मुद्रा से कुण्डलिनी का जागरण भी होता है।

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9 शक्ति मुद्रा

शक्ति मुद्रा हम जाने अंजाने करते रहते हैं, लेकिन इसे जानकर तरीके से करेंगे तो लाभ मिलेगा। इससे शरीर की कमजोरी हटाई जा सकती है। खिलाड़ियों के लिए शक्तिमुद्रा बहुत ही लाभ करती है।

शक्ति मुद्रा की विधि : किसी भी आसन में बैठकर अपने दोनों हाथों को पूरी तरह भींच लेने से या मुटि्ठयां बनाने से शक्ति मुद्रा बन जाती है। शक्ति मुद्रा को करने के और भी तरीके हैं जैसे दोनों हाथों की तर्जनी और मध्यमा से अंगूठे को दबा लें और बाकी बची अंगुली को दूसरे हाथों की अंगुली के पोरों से परस्पर मिला दें। इस मुद्रा को शिव शक्ति मुद्रा कहते हैं।

समयावधि : 2 से 3 मिनिट करें।

yoga poses for beginners – लाभ और प्रभाव-

यदि व्यक्ति का शरीर कमजोर होता है वो इस मुद्रा के निरंतर अभ्यास से अपने शरीर में एक नई ताकत फूंक सकता है। इस मुद्रा को करने से शरीर का कांपना भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है और चेहरे की कांति बढ़ जाती है।

देखें और महसूस करें कि आपके मस्तिष्क में ‘विचार और भाव’ किसी छत्ते पर भिनभिना रही मधुमक्खी की तरह हैं जिन्हें हटाकर ‘मधु’ का मजा लिया जा सकता है। उपरोक्त सभी तरह की सरलतम ध्यान विधियों के दौरान वातावरण को सुगंध और संगीत से तरोताजा और आध्यात्मिक बनाएं। चौथी तरह की विधि के लिए सुबह और शाम के सुहाने वातावरण का उपयोग करें।

योग के आसनों को सीखना प्रारम्भ करने से पूर्व कुछ आवश्यक सावधानियों पर ध्‍यान देना जरूरी है। आसन प्रभावकारी तथा लाभदायक तभी हो सकते हैं, जबकि उनको उचित रीति से किया जाए।

  • 1.योगासन शौच क्रिया एवं स्नान से निवृत्त होने के बाद ही किया जाना चाहिए।
  • 2.योगासन करने के एक घंटे पश्चात ही स्नान करें।
  • 3.योगासन समतल भूमि पर आसन बिछाकर करना चाहिए
  • 4.मौसमानुसार ढीले वस्त्र पहनना चाहिए।
  • 5.योगासन खुले एवं हवादार कमरे में करना चाहिए, ताकि श्वास के साथ आप स्वतंत्र रूप से शुद्ध वायु ले सकें। अभ्यास आप बाहर भी कर सकते हैं, परन्तु आस-पास वातावरण शुद्ध तथा मौसम सुहावना हो।
  • 6.आसन करते समय अनावश्यक जोर न लगाएं। प्रारम्भ में आप अपनी मांसपेशियों को कड़ी पाएंगे, लेकिन कुछ ही सप्ताह के नियमित अभ्यास से शरीर लचीला हो जाता है। आसनों को आसानी से करें, कठिनाई से नहीं। उनके साथ ज्यादती न करें।

Note : मासिक धर्म, गर्भावस्था, बुखार, गंभीर रोग आदि के दौरान आसन न करें।

योगासन में सावधानी और निर्देश :

  • 8.योगाभ्यासी को सम्यक आहार अर्थात भोजन प्राकृतिक और उतना ही लेना चाहिए जितना क‍ि पचने में आसानी हो। वज्रासन को छोड़कर सभी आसन खाली पेट करें।
  • 9.आसन के प्रारंभ और अंत में विश्राम करें। आसन विधिपूर्वक ही करें। प्रत्येक आसन दोनों ओर से करें एवं उसका पूरक अभ्यास करें।
  • 10.यदि आसन को करने के दौरान किसी अंग में अत्यधिक पीड़ा होती है तो किसी योग चिकित्सक से सलाह लेकर ही आसन करें।
  • 11.यदि वातों में वायु, अत्यधिक उष्णता या रक्त अत्यधिक अशुद्ध हो तो सिर के बल किए जाने वाले आसन न किए जाएं।

विषैले तत्व मस्तिष्क में पहुंचकर उसे क्षति न पहुंचा सकें, इसके लिए सावधानी बहुत महत्वपूर्ण है।

12.योग प्रारम्भ करने के पूर्व अंग-संचालन करना आवश्यक है। इससे अंगों की जकड़न समाप्त होती है तथा आसनों के लिए शरीर तैयार होता है।

अंतत: आसनों को किसी योग्य योग चिकित्सक की देख-रेख में करें तो ज्यादा अच्छा होगा।

4 COMMENTS

  1. आपने बेहतरीन post शेयर किया है । योग निरोगी काया के लिए बहुत जरुरी होता है ।

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