चंद्र त्राटक से होते है ये आध्यात्मिक और शारीरिक बदलाव

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चंद्र त्राटक का अभ्यासचंद्र त्राटक अभ्यास त्राटक के उच्चतम अभ्यास में से एक है। त्राटक को लौकिक और अलौकिक दोनों श्रेणी में भी समझा जाता है और स्टेप by स्टेप अभ्यास द्वारा भी पूर्णता हासिल की जाती है। चंद्र त्राटक उनके लिए सर्वश्रेष्ठ  है जो शीतल प्रभाव के है क्यों की त्राटक के अग्नि, दीपक और दर्पण जैसे अभ्यास में कई बार मन के उग्र प्रवृति के होने की घटना सामने आती है। संयम के वक़्त हमें हमारे मन और प्रक्रिया दोनों को संतुलित रखना जरुरी है। चंद्र त्राटक का अभ्यास हमें शांत, सौम्य और व्यवहार-कुशल बनाता है।

चंद्र त्राटक का अभ्यास रात्रि चयन, ऋतु चयन के आधार पर करना चाहिए। इस बात का खास ख्याल रखे की चन्द्रमा आपको स्पस्ट रूप से दिखाई देता हो। मौसम साफ और वातावरण आपके अनुकूल हो। हालाँकि अगर आपका अभ्यास तीव्र होने लगता है तो आप अपनी इच्छाशक्ति से किसी भी मौसम में चंद्रमा के दर्शन कर सकते है। त्राटक की कई विधियों में से एक चंद्र त्राटक के बारे में तो ये भी वर्णित है की इस अभ्यास में आप अमावस की रात्रि में भी चंद्र दर्शनकर सकते है। ये सब आपकी मानसिक और इच्छाशक्ति पर निर्भर होता है।

चन्द्र त्राटक

त्राटक के श्रेणी में आगे बढ़ते हुए बात करते है चन्द्रमा त्राटक की वैसे तो हम किसी भी चीज पर जो आँखों को सहज लगे और स्थिर हो पर त्राटक कर सकते है. लेकिन आध्यात्म में उतरने के लिए trataka के शुरुआती चरण पार करने के बाद जब हम अग्नि और mirror trataka करना शुरू करते है तब हमें ज्यादा आध्यात्मिक अनुभव होने शुरू हो जाते है. इसलिए इन त्राटक का अपना महत्त्व है. चन्द्र त्राटक का अभ्यास से पहले कुछ BASIC को CLEAR लेते है.

  • moon trataka का अभ्यास सुबह ब्रह्ममुहूर्त में करना चाहिए.
  • त्राटक के दौरान आपका मन शांत होना चाहिए जिससे की त्राटक के वक़्त मानसिक दबाव ना पड़े इसके लिए बेहतर होगा 15 मिनट पहले शरीर और मन दोनों को शांत कर लिया जाये.
  • अभ्यास हमेशा बिंदु त्राटक से शुरू करना चाहिए ये आपको त्राटक में आने वाली शुरुआती परेशानी से बच जाते है. और त्राटक के अनुभव के लिए मानसिक रूप से तैयार भी हो जाते है.
  • Trataka का अभ्यास हमेशा तय वक़्त पर और नित्य होना चाहिए जिससे अभ्यास में सततता बानी रहे।

त्राटक का अभ्यास करते वक़्त बिंदु त्राटक से बढ़ते हुए क्रम में करे एकदम से दर्पण और ज्योति त्राटक शुरू न करे इससे नुकसान ज्यादा होने की सम्भावना होती है.

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चंद्र त्राटक का अभ्यास

चन्द्र त्राटक का अभ्यास आप चन्द्र को देखते हुए करते है जिसमे हम छत पर या कोई भी ऊँची जगह जहां शांति से अभ्यास कर सके और आपको परेशान करने वाला कोई न हो. छत पर बैठ कर पहले मन को शांत कर ले. इसके बाद धीरे धीरे चन्द्रमा को देखे. ये त्राटक रात्रि में 10-11 बजे के बाद करना चाहिए. इसके अभ्यास में एक बात ध्यान रखे त्राटक का अभ्यास चन्द्र के घटने से बढ़ते हुए क्रम में करे जैसे की शुरू में चन्द्रमा छोटा हो से चन्द्र पूर्णिमा का हो के क्रम में. ज्यादातर लोग इस बात को नहीं जानते की चन्द्रमा हमारे मन पर सीधा प्रभाव डालता है. इसलिए अभ्यास में ध्यान रखे की आप त्राटक की शुरुआत किस रात्रि से कर रहे है.

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चन्द्रमा और मानव मन

आपने ऐसी कई मूवी देखी होगी जिसमे इंसान चन्द्रमा को देखते देखते भेड़िया बन जाता है या फिर कोई और जानवर. ऐसा क्या होता है जिससे हमारे मन में चन्द्रमा से बदलाव आता है. ( त्राटक से भुत भविष्य देखे )चलिए इसके पीछे के विज्ञानं को समझे चन्द्रमा की किरणे पृथ्वी पर जब गिरती है तब इसके आकर्षण के प्रभाव से समुन्द्र में ज्वार और विपरीत आकर्षण से भाटा उत्पन होता है.

ज्वार-भाटे की वजह से पानी में उतार-चढाव आता है यही बात अगर मानव शरीर से जोड़ कर देखे तो मानव शरीर 70% पानी से बना है. इसलिए आप खुद अनुभव कर के देखे पूर्णिमा की रात्रि को आपका मन सबसे ज्यादा चंचल होता है. ग्रहण के वक़्त बाहर ना निकलना या फिर उसकी किरणों के प्रभाव से बचना ये अन्धविश्वास नहीं है इन सबके मध्य विज्ञान है जो चन्द्रमा और मानव मन का अध्ययन कर इनसे नतीजे निकलता है.

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चंद्र त्राटक का अभ्यास और अनुभव

त्राटक करते वक़्त शुरू में आपको चन्द्रमा त्राटक में मन में अधीरता महसूस हो सकती है लेकिन जैसे जैसे आपका अभ्यास बढ़ता जाता है वैसे ही आपका मन इसकी किरणों के प्रभाव को सोखना शुरू कर देता है. जिसके कारण बाद में चन्द्रमा की किरणों का आपके मन पर प्रभाव नहीं पड़ता है. इसके अलावा चंद्र त्राटक का अभ्यास आपको ऐसे अनुभव करवाता है जो आपकी समझ से परे हो सकती है. जैसे की चन्द्र को देखते देखते चन्द्रमा का आपके पास आने का आभास, चन्द्रमा का बढ़ना घटना, या फिर उसकी किरणों को अपने शरीर पर महसूस करना क्यों की इसके त्राटक से आपको इसकी आकर्षण शक्ति प्राप्त होने लगती है.

इसलिए अगर आपका मन शुरू से चंचल है तो आप इस अभ्यास को करने से पहले अपने मन को स्थिर करना शुरू कर दे. ध्यान रखे की इस संसार में जो कुछ भी आप देखते है आपके अवचेतन मन की रचना है इसलिए कुछ भी आपके लिए आपके लिए नया नहीं हो सकता है और जब मन स्थिर होना शुरू हो जाता है तब कुछ भी आपको विचलित नहीं कर सकता है.

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प्रेषक की कलम से :

दोस्तों चंद्र त्राटक का अभ्यास हमें कई अलौकिक अनुभूति का अहसास करवा सकता है। गृह नक्षत्र के साथ चंद्र भी हमारे जीवन में हमारे व्यव्हार में परिवर्तन लाता है। और इसे हम अपने व्यव्हार में परिवर्तन का प्रयोग कर खुद भी देख सकते है। बस कुछ देर तक चन्द्रमा को देखते रहिये। और ये प्रयोग चद्रमा के ढलते और बढ़ते क्रम में करके देखिये फर्क आपको खुद दिखने लगेगा।

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कई लोग त्राटक को लेकर सोचते है की कोनसा त्राटक करना बेहतर रहता है ? कोनसा त्राटक हमें शक्तिशाली बनाता है या फिर किस त्राटक का प्रभाव हम सबसे कम समय में महसूस कर सकते है। तो ऐसे लोगो के लिए में सिर्फ इतना कहूंगा की त्राटक को अनुभव की कल्पना से करोगे तो कुछ हासिल नहीं होना है। अगर वक़्त पर अनुभव को छोड़ कर त्राटक को बिना किसी स्वार्थ के करोगे तो इतने रिजल्ट मिलेंगे की खुद आश्चर्यचकित रह जायेंगे।

दोस्तों अगर त्राटक को लेकर आपके मन में कोई भी सवाल है या कोई भी समस्या है तो कमेंट में जरूर बताये हमारे ग्रुप में आपको जल्दी ही आपकी समस्या का समाधान मिलेगा। पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करना ना भूले। और हमें सब्सक्राइब जरूर करे।

2 COMMENTS

    • स्नेहा जी चन्द्र त्राटक के बाद मन में कई तरह के बदलाव आते है. हो सकता है इसका प्रभाव इंसानी कद पर भी पड़ता हो, क्यों की इसका सीधा प्रभाव हमारे मन पर पड़ने की वजह से कई बदलाव देखने को मिल सकते है.

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