Yog nidra and Astral projection world सबसे आसान तरीके से खुद महसूस करे इस अभ्यास द्वारा

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क्या आपने कभी योगनिद्रा के जरिये एस्ट्रल वर्ल्ड में प्रवेश करने के अनुभव के बारे में सुना है ? yognidra and astral projection ये मेरा खुद का अनुभव रह चूका है जिसे आपके साथ आज में शेयर करने वाला हूँ. ज्यादातर लोगो के मन में सवाल रहता है की is astral travel safe or how can i do it at home without master guide तो आपके इन्ही सवालों का जवाब है आज की ये पोस्ट जो Hindi में आपको योग निद्रा के जरिये सूक्ष्म शरीर की यात्रा का अनुभव करने के बारे में है. इसके लिए आपको सिर्फ ध्यान अभ्यास की जरुरत है न की किसी तरह के mantra chant की. अगर आप ध्यान करते है तो एक बार योगनिद्रा का अभ्यास भी करे और शरीर से बाहर विचरण को खुद महसूस करे.

yognidra and astral projection

इस विधि को योग निद्रा / शवासन अथवा शरीर शिथिलीकरण भी कहते है। ये भी ध्‍यान की ही एक विधि है। योगनिद्रा लें और दिन भर तरोताजा रहे। योगनिद्रा द्वारा शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। यह नींद की कमी को भी पूरा कर देती है। इससे थकान, तनाव व अवसाद भी दूर हो जाता है। राज योग में भी इसे प्रत्याहार कहा जाता है। जब मन इन्द्रियों से विमुख हो जाता है। निद्रा का मतलब आध्यात्मिक नींद। यह वह नींद है, जिसमें जागते हुए सोना है, सोने व जागने के बीच की स्थिति है। सबसे पहले तो योगनिद्रा के फायदे जानते है।

how to do yognidra and astral projection

योगनिद्रा और सूक्ष्म शरीर की शुरुआत ये एक ऐसा अभ्यास है जिसमे हम न सिर्फ शरीर को आराम देते है बल्कि शरीर से बाहर विचरण भी कर लेते है. इसके कई सारे फायदे है जिनमे सबसे खास है सूक्ष्म शरीर की यात्रा. शवासन या न्यास ध्यान के अभ्यास से आगे की स्टेप है योगनिद्रा और इसमें अनुभव होता है astral projection का. कुछ लोग इसका अभ्यास प्राण उर्जा को ज्यादा से ज्यादा बढाने के उदेश्य से करते है.

योगनिद्रा न सिर्फ हमारे शरीर और मन को सबसे कम समय में शांत करती है बल्कि प्राण उर्जा ज्यादा से ज्यादा सरंक्षित करने का काम भी करती है. और आगे बढ़ने पर शरीर से बाहर निकलना और astral world me project होना जैसे अभ्यास भी है. सबसे खास बात तो ये है की ये अनुभव स्वभाविक अभ्यास के जरिये प्राप्त किये जाते है जिसके लिए अलग से कोई तैयारी नहीं है बस अभ्यास में लगे रहो. आगे से आगे अनुभव मिलना शुरू हो जाते है.  इससे पहले की yognidra and astral projection के अभ्यास की शुरुआत की जाए इसके फायदे के बारे में जान लेते है.

योगनिद्रा के फायदे :

इससे हम सूक्ष्म जगत में प्रवेश कर सकते है। इसके अलावा निम्न लाभ होते है। प्रत्याहार की सफलता एकाग्रता लाती है।

  • योगनिद्रा में सोना नहीं है।
  • योगनिद्रा द्वारा मनुष्य से अच्छे काम भी कराए जा सकते हैं।
  • बुरी आदतें भी इससे छूट जाती हैं।
  • योगनिद्रा का प्रयोग रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, सिरदर्द, तनाव, पेट में घाव, दमे की बीमारी, गर्दन दर्द, कमर दर्द, घुटनों,जोड़ों का दर्द, साइटिका, अनिद्रा, अवसाद
  • अन्य मनोवैज्ञानिक बीमारियों, स्त्री रोग में प्रसवकाल की पीड़ा में बहुत ही लाभदायक है।
  • योगनिद्रा का संकल्प प्रयोग पशुओं पर भी किया जा सकता है। खिलाड़ी भी मैदान में खेलों में विजय प्राप्त करने के लिए योगनिद्रा लेते हैं।
  • योगनिद्रा 10 से 45 मिनट या अधिक समय तक की जा सकती है।

right method of yognidra and astral projection

अगर आप yognidra and astral projection के अभ्यास का प्रारंभ कर रहे हैं तो ध्यान रखें खुली जगह का चयन किया जाए। यदि किसी बंद कमरे में करते हैं तो उसके दरवाजे, खिड़की खुले रहना चाहिए।

  • ढीले कपड़े पहनकर शवासन करें। जमीन पर दरी बिछाकर उस पर एक कम मोटाई का गददा बिछाये। फाेम का गददा या कम्‍बल ना बिछाये। यदि पलंग पर करना चाहे तो कर सकते है। अब शांति से सीधे लेट जाये।
  • दोनों पैर इतनी दूरी पर रखे कि वो आपस में एक दूसरे को ना छुयें व आप आराम महसूस कर सके। हथेली कमर से कुछ दूरी पर हो। आँखे बंद रहें। शरीर को हिलाना नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक नींद है, विचारों से जूझना नहीं है।
  • अपने शरीर व मन-मस्तिष्क को शिथिल कर दीजिए। सिर से पाँव तक पूरे शरीर को शिथिल कर दीजिए। पूरी साँस लेना व छोड़ना है।अब कल्पना करें कि आप समुद्र के किनारे लेटकर योगनिद्रा कर रहे हैं। आप के हाथ, पाँव,पेट, गर्दन, आँखें सब शिथिल हो गए हैं।
  • अपने आप से कहें कि मैं योगनिद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूँ। योगनिद्रा में अच्छे कार्यों के लिए या अपनी कोई बुरी आदत को छोडने का संकल्प भी लिया जाता है। योगनिद्रा में किया गया संकल्प बहुत ही शक्तिशाली होता है। अब लेटे-लेटे दस बीस बार पूरी साँस लें व छोड़ें। इसमें पेट व छाती चलेगी। पेट ऊपर-नीचे होगा। अब अपने इष्टदेव का ध्यान करें और मन में संकल्प दोहराये।
  • अब अपने मन को शरीर के विभिन्न अंगों पर ले जाइए और उन्हें शिथिल व तनावरहित होने का निर्देश दें। अपने मन को दाहिने पैर के अंगूठे पर ले जाइए। पाँव की सभी उँगलियां कम से कम पाँव का तलवा,एड़ी, पिण्डली, घुटना, जांध, नितंब, कमर, कंधा शिथिल होता जा रहा है। इसी तरह बाया पैर भी शिथिल करें। सहज सॉंस लें व छोड़ें।
  • yognidra and astral projection के अभ्यास को प्रभावी बनाने के लिए कल्पना करें कि ब्रहमाण्‍ड में व्‍याप्‍त प्राण ऊर्जा के बादल आपके शरीर में श्‍वास के माध्‍यम से जा रहे है वो अंदर जाकर पूरे शरीर में समा रहे है और शरीर के अंगों से समस्‍त समस्‍याये अशुद्ध वायु के रूप में आपके श्‍वास छोडते समय शरीर से बाहर जा रहे है।

अब मन को अपने दाहिने हाथ के अंगूठे,सभी उंगलियों पर ले जाइए। कलाई,कोहनी, भुजा व कंधे पर ले जाइए।इसी प्रकार अपने मन को बाएं हाथ पर लेजाएं। दाहिना पेट, पेट के अंदर की आंतें,जिगर, अग्नाशय दाएं व बाएं फेफड़े, हृदयव समस्त अंग शिथिल हो गए हैं। सब आराम कर रहे है यदि आपके किसी अंग में समस्‍या हो तो उसको शांत होने को कहिये व बताइये कि आप उससे प्रेम करते है वो अब ठीक हाे रहा है आप उसको शक्ति दे रहे है।

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भावना शक्ति से करे खुद को सामान्य

  • हृदय के यहाँ देखिए हृदय की धड़कन सामान्य हो गई है। ठुड्डी, गर्दन, होठ, गाल, नाक, आँख, कान, कपाल सभी शिथिल हो गए हैं। अंदर ही अंदर देखिए आप तनाव रहित हो रहे हैं। सिर से पाँव तक आप शिथिल हो गए हैं। ऑक्सीजन अंदर आ रही है। कार्बन डाई-ऑक्साइड बाहर जा रही है।
  • आपके शरीर की बीमारी बाहर जा रही है। कहने का मतलब ये कि मन को उत्‍साहित करने वाली कल्‍पना बीच बीच में करते रहे फिर शांति से लेट जाये और सारी कल्‍पनाये व साेचना बंद कर दे। ये सब कल्‍पनाये पूरे समय नही करनी है शुरूआत में इस प्रकार की भावना मन में प्रफुल्‍लता की भावना भर देती है। शुरूआत में भावना देकर फिर शांत हो जाइये ओर सारे सोच विचार बंद कर दीजिये
  • अपने विचारों को तटस्थ होकर देखते जाइए।अपने आप को भावना दीजिये कि ईश्‍वर प्रदत्‍त आत्‍मशक्ति आपके शरीर में जाकर आपके सारे रोग दोष समाप्‍त कर रही है। अपने मन को दोनों भौहों के बीच में लाएँ व शांति से लेटे रहे। यदि मन बार बार भागता है तो चिन्‍ता ना करे उसको बार बार वही ले आये।
  • दो चार बार के प्रयास पर वो वही रूकने लगेगा। फिर आप शांति से ऐसे ही लेटे रहिये। आपका मन एकदम शान्‍त हो जायेगा।। आप आधे एक घण्‍टे में ही पूरी ऊर्जा प्राप्‍त कर लेंगे। आपको नींद का एक झोंका सा महसूस होगा फिर वो खुद ही समाप्‍त हो जायेगा और आप अपने आपको ऊर्जा से परिपूर्ण महसूस करने लगेंगे।

इस विधि से छह सात घण्‍टे की नींद से प्राप्‍त होने वाली ऊर्जा आधे एक घण्‍टे की योग निद्रा से ही प्रापत हो जाती है।। आप ध्‍यान की किसी भी विधि का इस्‍तेमाल कर रहे हो उसके बाद आघे एक घण्‍टे की योग निद्रा का अभ्‍यास अवश्‍य ही करे। ये भी ध्‍यान का एक शक्तिशाली माध्‍यम है। आपके घ्‍यान के स्‍तर की गहराइ्र के अनुसार ध्‍यान से आपको जितने अनुभव होते है उससे जयादा अनुभव शवासन मे होते है।

beginning of yognidra and astral projection in Hindi

सूक्ष्‍म शरीर के अनुभव यही से शुरू होते है। थोडा प्रयास बढने पर ही आप किसी दिन सपना जैसा महसूस करेंगे आपको महसूस होगा कि आपने सपना देखा कि आप उड रहे है मगर वो सपना नही सच है। आप उस समय सच में अपने शरीर से निकल कर उड रहे है मगर पूरी जागरूकता ना होने से आपको वो सपना महसूस हो रहा है। जब आपकी एकाग्रता व जागरूकता बढती जायेगी तो आप पूरे होशो हवास में शवासन करते हुये yognidra and astral projection के अभ्यास में अपने शरीर से बाहर निकल कर इधर उधर घूम व उड सकेंगे।

कही आने जाने में आपको कोई समय नही लगेगा एक ही सेकेण्‍ड में आप कही भी पहुच जायेंगे। सूक्ष्‍म शरीर की यात्रा के लिये आपको कोई प्रयास नही करना है केवल मुर्दे की तरह लेटे रहना है शरीर को शिथिल करते जाना है। शरीर पर से हमारी पकड ढीली हो जायेगी और हम किसी भी समय उससे बाहर आ जायेंगे।

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शवासन का अभ्‍यास करने पर आपको मालूम होगा कि जब हम सोते है तो भी अपने शरीर को पूरी तरह शिथिल नही करते उसको सहारा दिये रहते हे जो कि सामान्‍य अवस्‍था में हमको समझ में नही आता। योगनिद्रा के समय ही समझ में आता है कि हम सोते समय भी अपने शरीर को सम्‍हाले रखने की कोशिश व मेहनत अन्‍जाने में करते रहते है।

सूक्ष्म शरीर का आध्यात्मिक महत्व

मगर सूक्ष्‍म शरीर की यात्रा का कोई अध्‍यात्मिक महत्‍व नही है केवल खुद को आत्‍मा के रूप में देखने समझने के लिये इसका अभ्‍यास कर ले मगर फिर बार बार सूक्ष्‍म शरीर की यात्रा का प्रयास ना करे क्‍योंकि यदि हम yognidra and astral projection करके बार बार शरीर से बाहर घूमते रहेंगे तो ध्‍यान से प्राप्‍त आत्‍मशक्ति / ब्रहमाण्‍डीय ऊर्जा अथवा अपनी अध्‍यात्मिक शक्ति को खर्चा करते रहेंगे। हम ध्‍यान में एकाग्र होते हे मगर सूक्ष्‍म की यात्रा में वो एकाग्रता समाप्‍त हो जाती है हम चाहे शरीर के साथ इधर उधर घूमे या शरीर छोड कर एक ही बात है। इसलिये बार बार इसका प्रयास ना करे वा इसके माध्‍यम से गलत कार्य करने या किसी के गुप्‍त रहस्‍यों को जानने का प्रयत्‍न ना करे।

यदि कुछ जान भी जाये तो उसको गुप्‍त ही रखे सबके सामने उसका खुलासा ना करे।

Note : यदि आप ध्‍यान में प्राप्‍त किसी भी शक्ति का गलत इस्‍तेमाल करते है तो आपकी सारी अध्‍यात्मिक शक्ति मात्र एक बार के गलत इस्‍तेमाल से ही समाप्‍त हाे जायेगी और आप विभिन्‍न शारीरिक बीमारियों का शिकार हो जायेंगे फिर दुबारा अध्‍यात्‍म में अथवा ध्‍यान में उन्‍नति करना आपके लिये असम्‍भव होगा। कई लोग ये गलती कर चुके है और अब भयंकर परिणाम भुगत रहे है। ये इ्रश्‍वरीय शक्तियॉ है इनका गलत इस्‍तेमाल हमको पतन के गर्त में ही ले जायेगा।

दोस्तों अगर हम अपने आध्यात्मिक रूप को उतना ही मजबूत कर ले जितना सत्य हम शारीरिक और मानसिक रूप को महसूस करते है यकीन मानिये ऐसी कोई समस्या ऐसा कोई काम नहीं होगा जो आपके लिए असंभव होगा। मन की शक्तियों को उभारने वाली ऐसी ही पोस्ट के लिए हमें subscribe करना ना भूले।

yognidra and astral projection final thought

हम सभी आध्यात्मिक दुनिया के अनुभव करना चाहते है लेकिन बिना किसी गाइड के करने में हमें दिक्कत आती है. अनुभव को किसके साथ साझा किया जाए इसे लेकर मन में उलझन रहती है. yognidra and astral projection ऐसा अभ्यास है जिसे आप खुद के स्तर पर कर सकते है. आपको सिर्फ अभ्यास को आगे ले जाना है अनुभव अपने आप बढ़ने लगेंगे. सिर्फ एक महिना कर के देखे और अपने अन्दर के बदलाव को महसूस करे. किसी तरह की समस्या  लिए आप कमेंट में सवाल कर सकते है. इन पोस्ट को पढना ना भूले.

4 COMMENTS

  1. विज्ञान मेँ ‘सूक्ष्म’ का अर्थ ‘बहुत छोटा’ होता है लेकिन अध्यात्म मेँ ‘सूक्ष्म’ का अर्थ क्या होता है? कृपया बतायेँ

    • आध्यात्म में सूक्ष्म का अर्थ उस से है जो एक अंश के रूप में दूसरे रूपों में विद्यमान है और अलग किया जा सकता है सिर्फ शरीर ही नहीं जीवात्मा भी एक अंश के रूप में शरीर के अंदर विद्यमान है और उसे अलग किया जा सकता है इसी तरह सूक्ष्म शरीर, प्रकाश शरीर और स्थूल शरीर है

  2. Dear sir,

    Bhut achhi post h sir. Main bhi jldi hi svasn ko shuru kr rha hu. Thanks sir itne achhe trike se post me smjhane ke liye

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