How Antar Mouna change your life प्रत्याहार में मन को शक्तिशाली बनाने की आसान विधि

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जिस तरह एक साफ सुथरे रूम में हम सही से खुद को सहज कर पाते है उसी तरह शांत मन वाला मस्तिष्क काफी शक्तिशाली हो जाता है. Antar Mouna प्रत्याहार की वो स्टेज है जो योग में mental health से जुड़ा भाग है. हम जाने अनजाने में ही मस्तिष्क में Unwanted intrusive thoughts भरते जाते है और धीरे धीरे ये Repressed anger की वजह बन जाता है. विचारो से भरे मस्तिष्क से हम कभी भी सही निर्णय नहीं ले सकते है.

आपने खुद अनुभव किया होगा की जब आप परेशान होते है तो आपके सामने रखी हुई चीजे भी आपको आसानी से नहीं मिलती है. आपकी किसी भी समस्या का समाधान बेहद आसान होने के बावजूद आपको सूझता नहीं है और आप काफी समय परेशानी में गुजारते है.

कुछ समय बाद जब आप हार मान कर आंखे बंद कर लेते है और आपका मन शांत होता है तब आप कुछ ही समय में इसका समाधान खोज लेते है. कुछ लोगो को लगता है की ये आपके दिमाग का आईडिया है लेकिन वास्तव में ये मौन की शक्ति है.

Antar Mouna

आपका मस्तिष्क जितना ज्यादा शांत होता है उतना ही ये शक्तिशाली होता जाता है. अगर आप psychic powers practice कर रहे है तो आपका मस्तिष्क उच्च स्तर पर शांत होना चाहिए. योग और प्राणायाम में Body and mind reprograming की जाती है.

हम अपने शरीर और मन पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करते है. इसके लिए 3 फैक्टर काम करते है. पहला External source of perception, दूसरा external organ or perception तीसरा the internal perceiver – the witness awareness जो जानता है की वो observe कर रहा है.

योग में प्रत्याहार का महत्त्व है बाहरी स्त्रोत के प्रभाव को कम से कम करना और हमारे internal observation की शक्ति को ज्यादा शक्तिशाली बनाना. हम किसी भी स्थिति में खुद को केन्द्रित रहने के लायक बना लेते है, हमारे आसपास क्या हो रहा है उससे प्रभावित हुए बगैर उन्हें समझते है.

ये सब तभी संभव है जब हमारा अंतर मन शांत हो. आइये बात करते है मन को शक्तिशाली बनाने के लिए योग के अष्ट भाग में से एक प्रत्याहार के अभ्यास के बारे में.

Antar Mouna in Prtyahara basic guide

योग सिर्फ आपको Physical fitness ही नहीं देता है बल्कि ये आपको आपके brain के Highest potential तक पहुँचने में भी मदद करता है. योगा के 8 अंगो में से पहले 4 भाग में Physical fitness पर फोकस किया गया है वही, इसके बाद के 4 भाग में मानसिक स्वास्थ्य यानि mental health को ध्यान में रखा गया है. अष्टांग योग में 5 वे नंबर पर Pratyahara आता है जिसमे internalization of one’s senses पर महत्त्व दिया जाता है.

इस भाग में हम अपनी चेतना को किसी भी तरह की बाहरी स्त्रोत यानि External sources से internal की तरफ ले जाते है. इस चरण में हम Physical segment से Spiritual की तरफ ले जाते है. हम सभी अपने आप में कोई ना कोई Specific manner रखते है. इस तरह से हम सभी एक दूसरे के साथ मिलकर खुद की सबसे Powerful strength को निखारते है.

अंतर मौन यानि Antar Mouna का मतलब है Inner silence ये एक 6 स्टेप में की जाने वाली तकनीक है जिसके जरिये Pratyahara को achieve किया जाता है. ऐसा माना जाता है की इसे पोपुलर Swami Satyananda Saraswati द्वारा किया गया था. उन्होंने बिहार में Antar Mouna at Bihar School of Yoga जैसे teaching center में इसे  Antar Mouna meditation के नाम से सीखना शुरू किया.

इस तकनीक में Complete Awareness, Mindfulness, And A Witness Attitude जैसी स्थिति को प्राप्त करना शामिल था. Buddhism में इस तकनीक को Vipassana technique of meditation के नाम से जाना जाता है. जगह के हिसाब से इस तकनीक में थोड़ा बहुत बदलाव देखने को मिलता है. आइये जानते है इसकी 6 स्टेप के बारे में.

Stages of Antar Mouna

अगर आप अपने अन्दर की शांति को पाना चाहते है तो इस तकनीक को 6 स्टेप के अनुसार पूरा करे. किसी भी व्यक्ति को बिना सही शुरुआत के बड़े स्टेप नहीं लेने चाहिए. अगर हम किसी भी अभ्यास को चरणबद्ध तरीके से पूरा करते है तो उसके फायदे मिलने के चांस बढ़ जाते है. इससे हम आसानी से अभ्यास में आ रही किसी भी problem को find out कर सकते है और दूर कर सकते है.

ये 6 चरण निम्न है.

पहला चरण : सबसे पहले हमें अपने sensory perceptions का ज्ञान होना जरुरी है. हम किस sense में बाहरी sources से जुड़े है इसका ज्ञान होना और उसके प्रति awareness होना हमें इसे समझने में मदद करता है. जब हम काफी लम्बे समय तक इसका अभ्यास करते है तो हम इन्हें सीधे फील करना शुरू कर देते है जैसे की सांसो की गति. अगर आप लम्बे समय तक इसके प्रति aware रहने लगते है तो अपनी बॉडी में इसके प्रवाह को आसानी से महसूस कर सकते है.

दूसरा चरण : जब हम लम्बे समय तक खुद के प्रति aware होना शुरू कर देते है तो ये चेतना एक thought का रूप ले लेती है. यह thought हमेशा हर समय हमारे दिमाग से जुड़ जाता है. हमें अपने हर प्रकार के thought, feeling, fear, desire, experience, and memory को allow कर देना चाहिए. किसी भी तरह के thought या feeling को Suppress नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें फ्री कर देना चाहिए.

धीरे धीरे हम महसूस करेंगे की जितना ज्यादा हम विचारो को स्वतन्त्र करते है उतना ही हमारा मन शांत रहता है.

तीसरा चरण : अब हमें अपने विचारो को चैतन्य निर्माण ( सीधे तौर पर हमारे क्रिएशन की क्षमता ) को बढ़ाना है और उसमे thoughts को इजेक्शन करना है. हमें किसी भी एक thought का चुनाव करना है और उस पर मनन करना है. उस एक विचार से जुड़े emotions, thoughts, and perspectives को फ्री करना है जो अब हमारा Subconscious mind हमें भेज रहा है.

विचारो का बनना और ख़त्म होना ये दोनों प्रक्रिया आपके conscious brain का हिस्सा होना चाहिए. आपको पता होना चाहिए की आप क्या सोच रहे है और क्या dispose किया जा रहा है. यहाँ पर लगातार चलने वाली एक्शन नहीं है बल्कि, ये हमें हमारे deepest disturbances को बाहर निकलने में मदद करता है.

चौथा चरण : ये चरण दूसरे और तीसरे को जोड़ने वाली कड़ी है. हमें किसी भी thought के बनने और ख़त्म होने को लेकर जागरूक होने की जरुरत है. जहाँ दूसरे चरण में हमें उन thoughts को बाहर निकालना है जो लगातार बन रहे है वही, तीसरे चरण में आपको उनसे Permanent छुटकारा पाना है. यहाँ पर Detachment की स्थिति प्राप्त होती है.आप सिर्फ एक witness बन कर देखते और अनुभव करते है.

चरण पांच : ये विचारशून्य का चरण है. जब हम किसी भी तरह की एक्शन को लेकर खुद से detach कर लेते है तो Thoughtless स्टेट में चले जाते है. अब विचार आते और जाते है लेकिन हमें उनसे कोई फील नहीं होती है. एक समय ऐसा आता है जब ऐसा लगता है मानो मस्तिष्क बिलकुल विचारशून्य बन चूका है.

शुरुआत में कुछ विचार घूम सकते है लेकिन जब किसी तरह का engagement नहीं मिलता है तो सब शांत हो जाता है.

छटा चरण : सबसे अंतिम चरण में हम Pratyahara को सफलतापूर्वक पूरा करते है. इस अवस्था में हमारा brain एक ऐसी नींद में प्रवेश करता है जो किसी भी तरह के बाहरी विचार से पूरी तरह फ्री होती है. हमें brain को खोने से बचाने के लिए किसी एंकर की तलाश करनी चाहिए. हमारी आस्था जिसमे सबसे ज्यादा होती है उस तरह का प्रतिक हमें खोने से बचाता है.

Benefits of Antar Mouna

अंतर मौन के कई सारे फायदे है जिन्हें हम Physical and mental health में देख सकते है.

  • मस्तिष्क से नकारात्मक विचारो को ख़त्म करना – Cleansing the mind of all negativity
  • Mental discipline मानसिक अनुशासन को बनाए रखना
  • मस्तिष्क शांत रहता है – Peace and calm of the mind
  • किसी भी स्थिति पर तुरंत रिएक्शन देने की बजाय उसे समझना
  • Emotional courage and resilience भावनातमक मनोबल बढ़ाना
  • मस्तिष्क की जजमेंट वाली आदत को सुधारना – Eradication of distraction and judgment by the mind
  • Development of concentration and perception – मानसिक एकाग्रता को बढ़ाना.
  • Preparation for meditation ध्यान के लिए सही शुरुआत करना.
  • Better self-awareness and intelligence, even precognitive capabilities
How Antar Mouna change your life final conclusion

हमारा मस्तिष्क बेहद शक्तिशाली है. ये जितना शांत होता है उतना ही ज्यादा ये Universal Bliss and wisdom को access करना शुरू कर देता है और flow and expression of joy and harmony को experience करना शुरू कर देते है. जब तक हमारा दिमाग disturbing thoughts and emotions से भरा हुआ रहता है तब तक हम इसकी शांति को अनुभव नहीं कर सकते है.

इस अभ्यास में Purging the mind को फॉलो किया जाता है. Antar mouna का अभ्यास हमें बाहरी विचारो से दूर रहने में मदद करता है. किसी भी तरह की mental tension को हम avoid नहीं कर सकते है और ना ही इससे खुद को दूर कर सकते है. एक Negative thought को छिपाने के चक्कर में हम कई सारे दूसरे negative thought को बनाने लगते है. कुछ emotion ऐसे होते है जिन्हें छिपाना नहीं चाहिए.

गुस्सा अगर उसी वक़्त बाहर निकल जाए जब ये बनता है तो ये किसी तरह का Repressed anger नहीं बनता है. अंतर मौन हमें शक्तिशाली बनाता है और ये प्रक्रिया हमें खुद को समझने में मदद करता है. हमारा subconscious mind ज्यादा से ज्यादा active होने लगता है जिसकी वजह से हम brain के उन हिस्सों को आसानी से access कर पाते है जिनमे Memory को recall किया जाता है.

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