मानव मस्तिष्क और ब्रह्मांड से जुड़े आश्चर्यजनक तथ्य जो हैरान कर देंगे – अमेजिंग फैक्ट

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मानव मस्तिष्कमानव मस्तिष्क और ब्रह्मांड में ज्यादा अंतर नहीं है !  जितना रहस्यमय ये ब्रह्माण्ड है उतना ही रहस्यमयी हमारा मस्तिष्क। आपने आयरन मैन 3 तो देखी ही होगी जिसमे विलैन अपने दिमाग के खास हिस्से को विकसित कर अपनी बीमारी ठीक करता है। ऐसा वास्तव में भी हो सकता है ! हो सकता है ये आज एक हैरत का विषय है पर भविष्य में शायद ना रहे। क्यों की विज्ञान तरक्की कर रहा है  और जल्दी ही हम मानव मस्तिष्क से जुड़े रहस्यो को अनसुलझा कर सकेंगे। फ़िलहाल तो आप मानव मस्तिष्क और ब्रह्मांड में समानता वाले इन रोचक तथ्य को पढ़े और वॉव करे।

अगर आपसे पूछा जाये की आप ब्रह्मांड के बारे में क्या जानते है तो आप कितना बता सके है अपने और ब्रह्मांड के बारे में। अगर देखा जाये तो ब्रह्मांड और आपका मस्तिष्क एक ही है। जटिल और विशाल जिसका कोई अंत नहीं। आज ऐसे कुछ तथ्य के बारे जानते है जिन्हे जानने के बाद आपके मस्तिष्क की बत्ती blow करने लगेगी। क्यों की आपको आश्चर्य होने लगेगा अपने मस्तिष्क की विशालता पर, आप जानेंगे की ब्रह्मांड और मस्तिष्क की सरंचना एक जैसी ही है। ये आपको ब्रह्मांड को समझने में मदद करेगी।

1. ) हम सब Stardust (तारों की धुल) से बने है :

हम सभी जानते हैं की ब्रह्माण्ड में और पूरी दुनिया में मिलनेवाले सारे तत्व सितारों की गर्मी से बने हैं. यह विशाल सितारे अपने अंत के नजदीक होते हैं तब उनमें सुपरनोवा के रूप में विस्फोट होता हैं. विस्फोट के साथ वे उर्जा के स्वरुप में जीवन के लिए जरुरी सामग्री ब्रह्माण्ड में फैलाते हैं.

ब्रह्माण्ड में फैले हुए इसके उर्जा और तत्व गुरुत्वाकर्षण से एकरूप होकर आकाशगंगाए, तारे , ग्रह और मनुष्य को बनाने के लिए जिम्मेदार हैं. आपके शरीर का हर एक परमाणु ब्रह्माण्ड का हिस्सा हैं. तो जब आप अगली बार आसमान में सितारों की और देखे तो इस तथ्य को एक बार फिर से याद का लीजिएगा. आप और यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही चीज़ है।

2. ) आप का शरीर 99% खाली जगह है :

हम आज तक जिन तत्वों को जानते हैं वे सब परमाणुओं से बने हैं और यह सब परमाणु हमारे शरीर को बनाते हैं. हर परमाणु का एक प्रतिशत हिस्सा प्रोटोन, न्युट्रोन और इलेक्ट्रान से बना हैं. एनी 99% जगह खाली हैं. पृथ्वी पर जितने भी मनुष्य हैं उनके शरीर के तमाम परमाणुओं के बिच की खाली जगह निकल दे तो उनकी साइज़ एक चीनी के दाने जितनी हो जायेगी. इसका मतलब तो यह हुआ की सबकुछ भ्रम हैं. हमारा शरीर जो हम महसूस करते हैं वह भी भ्रम है।

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3. ) आपका दिमाग एक ब्रह्माण्ड है :

समग्र ब्रह्माण्ड में 100 अरब आकाशगंगाए हैं और प्रत्येक आकाशगंगा में 100 अरब तारे हैं. आप एक बार इस विशाल संख्या के बारे में सोचकर देखिए. इसी तरह कुदरत ने इन्सान को एक बहुत ही सक्षम मस्तिष्क के साथ बनाया हैं. इंसानी मष्तिष्क में भी 100 अरब न्युरोंस होते हैं. जिस तरह एक आकाशगंगा में 100 अरब तारे होते हैं उसी तरह एक इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब न्युरोंस होते हैं. यहाँ पर कोई भी एक न्युरोंन दूसरे हजारो न्युरोंस के साथ कनेक्शन बना देता हैं और electrical impulse की मदद से सन्देश को भेजते और ग्रहण करते हैं. संचार के दौरान इसकी हर कोशिका चमक उठती हैं जैसे रात में आसमान चमक उठता हैं. हो सकता हैं हमारा ब्रह्माण्ड भी किसी अति विशाल जीव का एक मष्तिष्क भर हो।

4. ) पृथ्वी पर अब तक रह चुकी सारी प्रजातिओं में से 99% विलुप्त हो चुकी हैं :

यह अविश्वसनीय तथ्य भौतिक अस्तित्व की क्षणभंगुर प्रकृति को दर्शाता हैं. हम इंसानों से पहले कई तरह की प्रजातियाँ यहाँ पर रह चुकी हैं. हम इन्सान तो कुछ हजारो सालों से ही पृथ्वी पर रह रहे हैं जो की बहुत छोटी अवधि हैं. वास्तव में हमारे पहले की प्रजातियाँ अगर विलुप्त न हुई होती तो आज हम इंसानों का वजूद भी न होता. पृथ्वी पर यह प्रक्रिया तो पहले से चलती आई हैं और चलती रहेगी. हम इंसानों की प्रजाति भी भविष्य में एक दिन विलुप्त हो जाएगी।

हम आज तक जिन तत्वों को जानते हैं वे सब परमाणुओं से बने हैं और यह सब परमाणु हमारे शरीर को बनाते हैं. हर परमाणु का एक प्रतिशत हिस्सा प्रोटोन, न्युट्रोन और इलेक्ट्रान से बना हैं. एनी 99% जगह खाली हैं. पृथ्वी पर जितने भी मनुष्य हैं उनके शरीर के तमाम परमाणुओं के बिच की खाली जगह निकल दे तो उनकी साइज़ एक चीनी के दाने जितनी हो जायेगी. इसका मतलब तो यह हुआ की सबकुछ भ्रम हैं. हमारा शरीर जो हम महसूस करते हैं वह भी भ्रम है।

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5. ) कोई भी निरीक्षक (देखने वाला) वास्तविकता को बदल सकता हैं

(An observer can alter reality) क्वांटम मैकेनिक्स ने विज्ञान की दुनिया में क्रांति ला दी हैं और हमारे सामान्य ज्ञान की धारणाओं को चुनौती दी हैं. प्रसिध्ध double-slit प्रयोग की मदद से पता चला की छोटे कणों के बुनियादी गुण बदल जाते हैं जब किसी इंसानी दिमाग या अन्य माध्यम से उनका निरिक्षण हो रहा हो.

जब दो स्लिट्स वाली स्क्रीन पर इलेक्ट्रॉन्स को फायर किया गया तब वैज्ञानिकों को (विवर्तन पैटर्न) diffraction pattern मिला, यह सिर्फ तब मुमकिन हो सकता हैं जब इलेक्ट्रान दोनों ही स्लिट्स से एक साथ गुजर रहे हो. इस व्यव्हार से पता चला की इलेक्ट्रॉन्स ठोंस तत्व के बदले तरंगो या लहरों के स्वरूप में बर्ताव कर रहे थे.

इससे साबित होता हैं की छोटे से छोटा कण भी अपनी स्थिति बदल सकता हैं अगर उसे देखा जा रहा हो या उसका किसी भी तरह से निरिक्षण किया जा रहा हो।

6. ) दिमाग ही सर्वोपरी है

अधिकांश लोगों को पता है कि हमारे शरीर का सबसे जरूरी हिस्सा हमारा मस्तिष्क है । यह सोचना, हमारी भावनाओं को व्यक्त करना, हमारी महसूस करने की क्षमता, यहाँ तक की हमारी अच्छी तरह से साँस लेने की क्षमता के लिए भी जिम्मेदार है। मस्तिष्क हमें स्वयं और हमारे व्यक्तित्व के बारे में हमारी समझ को विकसित करने में मदद करता है।

7. ) मस्तिष्क भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते है :

हमारे दिमाग में एक “मिडब्रेन डोपामाइन सिस्टम” (एमडीएस) होता है, जो घटने वाली घटनाओं के बारे में मस्तिष्क को संकेत भेजता है | हो सकता की हम इसे ही अंतर्ज्ञान अथवा भविष्य के पूर्वानुमान कहते है | जिस व्यक्ति के दिमाग में यह सिस्टम जितना ज्यादा विकसित होता है वह उतनी ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता है।

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8. ) किशोरों का दिमाग पूरी तरह से सक्रीय नहीं होता

लोकप्रिय धारणा है की पांच साल की उम्र तक मस्तिष्क पूरी तरह से विकसित हो जाता है जबकि इसके विपरीत बच्चो के अपनी किशोरावस्था में प्रवेश के दौरान भी उनके दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होते है । मस्तिष्क के ग्रे मैटर यौवन और विकास के अलावा निर्णय लेने की क्षमता के लिए भी जिम्मेदार होते है। हालांकि, अधिकतर काम के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के कुछ हिस्से 17 साल की उम्र तक परिपक्व नहीं होते है, लेकिन केवल दूसरों के साथ अनुभव से सीखते हैं और बढ़ते है।

9. ) मस्तिष्क निद्रा का दौरान अधिक सक्रिय होता है :

कहा जाता है एक अच्छी नींद एक इंसान के लिए जरूरी है । लेकिन कोई भी इसके पीछे का मुख्य कारण नहीं जानता है। दिन के दौरान, हमारे दिमाग ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ करता है जिन्हें याद किए जाने की जरूरत होती है, लेकिन एक अच्छी नींद हमारी यादों को स्थिर करने में मदद करती है।

10. ) पुरुष महिलाओं की तुलना में मस्तिष्क के 10% से अधिक का भाग का उपयोग करते है :

आप लोग इसे गलत अर्थो में न ले यह सिर्फ एक वैज्ञानिक तथ्य है । महिलाओं का दिमाग पुरुष दिमाग की तुलना में छोटा माना जाता है, लेकिन तंत्रिका कोशिकाओं और मस्तिष्क के कोर्टेक्स महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक होशियार और अधिक कुशलता से काम करने के लिए क्षमता देते है |

महिलाओं में सोचने, भावनात्मक, पहचानने की क्षमता पुरुषो से अधिक होती है, लेकिन तर्कसंगत सोचने की क्षमता एक पुरुष मस्तिष्क का प्रमुख कार्य है। पुरुष, महिलाओं की तुलना में अधिक गतिविधियों का प्रदर्शन कर सकते हैं। पुरुष ज्यादातर मस्तिष्क की बाईं ओर का उपयोग करते है।

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11. ) मस्तिष्क, शरीर की अधिकतम ऊर्जा का उपयोग करता है :

मानव मस्तिष्क, शरीर द्वारा उत्पादित ऊर्जा का करीब 20% उपयोग करता है । मष्तिष्क इस ऊर्जा का प्रयोग याद भावना, केंद्रीय तंत्रिका-तंत्र का प्रबंधन, महसूस करने के लिए प्रयोग करता है।

12. ) अलग अलग लोगों के मस्तिष्क का आकार अलग-अलग होता है :

बड़ा सिर के लोगों का बड़ा दिमाग और बुद्धि छोटे सिर के लोगो की अपेक्षा उन्हें और अधिक बुद्धिमान और चालाक बनाती है। आइंस्टीन का मस्तिष्क न्यूरॉन्स की उच्च अनुपात के कारण अन्य वैज्ञानिकों से अलग था।

13. ) मस्तिष्क को कोई भी दर्द महसूस नही होता

हमे कुछ भी चोट लगने अथवा शरीर में कुछ परशानी होने पर दर्द के रूप में मष्तिष्क हमे चेतावनी देता है लेकिन मष्तिष्क का कोई दर्द महसूस कराने का सिस्टम अभी तक नहीं है | परन्तु मष्तिष्क के चारो और कोइशिकाओ के माध्यम से हमे मस्तिष्क के दर्द का अनुभव होता है।

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14. ) मस्तिष्क को कोई भी दर्द महसूस नही होता :

हमे कुछ भी चोट लगने अथवा शरीर में कुछ परशानी होने पर दर्द के रूप में मष्तिष्क हमे चेतावनी देता है लेकिन मष्तिष्क का कोई दर्द महसूस कराने का सिस्टम अभी तक नहीं है। परन्तु मष्तिष्क के चारो और कोइशिकाओ के माध्यम से हमे मस्तिष्क के दर्द का अनुभव होता है।

15. ) हर बार जब हम कुछ सीखते है नई मस्तिष्क झुर्रियां विकसित होती है :

मस्तिष्क में गहरी दरारें, और छोटे खांचे होते है जिनकी सतह पर न्यूरॉन्स होते हैं और जब भी हम कुछ सीखते है हमारे मष्तिष्क में एक नयी सलवट पड़ जाती है इस वजह से हम ज्यादा सीख पाते है और याद रख पाते है।

हैरान है ना ये सब जानकर हमारा मस्तिष्क वाकई अनोखा और विलक्षण है। इसकी ज्ञान सीमा का कोई छोर नहीं है। ना ही इसकी अवचेतन मन की शक्तियों का। इसलिए खुद पर गर्व करे क्यों की समझ में चाहे हम किसी से कम ज्यादा हो मगर कम किसी से नहीं। इसकी वजह है हर इंसान का मस्तिष्क उसकी सोच अलग है यूनिक है।

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