आध्यात्मिक साधना में सफलता पाने के लिए एक आदर्श आश्रम की पहचान करने से जुड़ी खास जानकारी

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क्या आपने कभी सोचा है की पुराने समय में ऋषि मुनि दुनिया से अलग वन में कुटिया का निर्माण कर साधना करते थे आखिर क्यों ? क्या हम समाज के बिच रहकर साधना नहीं कर सकते है या फिर आश्रम और कुटिया इनके जरिये हम कुछ ऐसे बदलाव पाते है जो साधना को सफल बनाते है. साधना में सफलता और आश्रम का योगदान क्या और कैसे होता है तथा एक आदर्श आश्रम की पहचान कैसे की जाए इसके बारे में आज हम जानने वाले है. फर्जी बाबा जो खुद को धर्मगुरु बता कर अपने आश्रम की स्थापना कर रहे है उनमे और पुराने समय के आश्रम में क्या अंतर है जैसी कुछ खास बातो पर आज जानते है.

साधना में सफलता और आश्रम का योगदान

आज जहाँ भी देखते है हर धर्मगुरु ने अपने आश्रम की स्थापना कर रखी है. क्या ये वास्तव में एक आदर्श आश्रम है जहाँ हम साधना जैसे अनुभव कर सकते है, नहीं ! क्यों की आज जो भी हो रहा है वो सब दिखावा है. मन को साधने की बजाय दिखावा और आडम्बर रचा कर फर्जी लोग धर्मगुरु बन चुके है. पुराने धर्मग्रंथो को तोड़ मोड़ कर अपने स्वार्थ के लिए पब्लिश करना आम बात बन चुकी है. अगर आप वास्तव में जानना चाहते है की एक सही आश्रम की तलाश कैसे की जाए और वहां क्या होना चाहिए तो जानिए इन खास पॉइंट्स के द्वारा.

साधना में सफलता और आश्रम का योगदान

हम सभी ने अष्ट सिद्धि और साधना के बारे में काफी सुना है. पुराने समय में ऋषि मुनि पर्वतो या गुफाओ / आश्रम में साधना करते थे. आज भी लोगो का मानना है की साधना के सफल में होने में आश्रम का काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है. कई बार लोगो की मानसिकता बन जाती है की उन्हें साधना करनी है जो की बिना किसी आश्रम या पर्वत / जंगल के संभव नहीं होगी इसलिए वो घर का त्याग कर भटकते रहते है साधना में सफलता के लिए और अंत में न घर के रहते है न घाट के.

एक आश्रम का साधना में क्या योगदान होता है ये हम आज जानने वाले है. मै उन आश्रम की बात नहीं कर रहा हूँ जो आज धर्मगुरूओ द्वारा बनाए जा रहे है. एक आदर्श आश्रम कैसा होता है और उसमे किन किन चीजो का समावेश हमारी साधना को सफल बनाता है इन सबके बारे में आज डिटेल से कुछ खास बाते शेयर की जा रही है. इस पोस्ट पर आप अपने विचार रख सकते है.

आश्रम से जुड़ी खास बाते

  • एक आदर्श आश्रम वो होता है जो प्रकृति के नजदीक होता है.
  • जहाँ जाने मात्र से आपका मन पवित्र और शरीर संतुलन की अवस्था में आने लगता है.
  • जहाँ पैसे नहीं आपके संस्कार मायने रखते है वो होता है आश्रम.
  • आश्रम में हर चीज और गतिविधि स्थिर और संतुलित होती है तथा आपको संतुलित बनाए रखती है.
  • आश्रम का लाइफस्टाइल आपको स्थिर रखने वाला होना चाहिए ना की परेशान करने वाला या बोझ लगने वाला.
  • बाहरी दुनिया से अलग जहाँ मोबाइल, फास्टफूड और मनोरजन के साधन ना हो.

क्या घर पर की गई साधना सफल हो सकती है ?

पहले के समय में आश्रम होते थे साधना और शिक्षा के लिए और उस समय तो इतनी सुविधा नहीं थी जितनी आज है, ऐसे में हमें लगता है की हम साधना के लिए बाहर कही किसी आश्रम में क्यों जाए जब हमें सब सुविधा घर पर ही मिल सकती है. ये बात बिलकुल सही है की साधना के लिए आज हमें सभी चीजे घर पर मिल सकती है लेकिन, क्या आप घर पर रह कर अपने शरीर और मन को पूरी तरह साध पाओगे ? इसलिए कहा जाता है की साधना में सफलता और आश्रम का योगदान दोनों एक दुसरे के पूरक है.

किसी भी साधना के लिए विधान से ज्यादा महत्वपूर्ण है हमारा खुद का सधा हुआ होना. घर पर की गई साधना ज्यादातर असफल हो जाती है क्यों ? क्यों की हम सभी विधि विधान तो अपनाते है लेकिन उन सावधानियो का ख्याल नहीं रख पाते है जो हमें रखनी चाहिये. साधना के लिए आवश्यक मन और शरीर पर कण्ट्रोल नहीं होता है. इन कारणों से साधना में / ध्यान में / सिद्धि में सफलता नहीं मिलती है. आपको सबसे पहले तो एक आश्रम के लिए आवश्यक बातो का ज्ञान होना चाहिए की वो कैसा हो ताकि साधना में सफलता सुनिश्चित की जा सके.

साधना में सफलता और आश्रम का योगदान – कैसा होना चाहिए आश्रम

एक आश्रम के लिए हमें कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए. इन सभी बातो का संबंध साधना में सफलता से है. अगर आप इन सभी विशेषता को किसी जगह पाते है तो वो आपके लिए एक आदर्श आश्रम बन सकता है.

प्राकृतिक वातावरण के हो नजदीक

पुराने समय में लोग जंगल और गुफा में साधना करते थे इसकी वजह यही थी की वहां उन्हें सही वातावरण मिलता था. हम जितना प्राकृतिक वातावरण के नजदीक होते है साधना में उतना ही ज्यादा मन लगा रहता है. प्रकृति की सुगंध हमारे अन्दर प्राण उर्जा के भण्डार को बढ़ाती है और सांसो में लय स्थापित होती है. दुसरे शब्दों में कहे तो आपको साधना के लिए शुरुआती तैयारी करने की जरुरत ही नहीं पड़ती है. आप इन बदलाव को अपने अन्दर महसूस कर सकते है. साधना में सफलता और आश्रम का योगदान तभी संभव है जब निम्न खास बाते आपको वहां मिले जैसे की

  • मन शरीर और सांसो का संतुलन.
  • सकारातमक और सात्विक भाव मन में उत्पन होना.
  • प्राण उर्जा का संतुलन जो की स्वस्थ्य प्राण वायु द्वारा बढ़ता रहता है.

रेडियो वेव से दूर

आज दुनिया में शायद ही कोई जगह है जहाँ मोबाइल न पहुंचा हो. इसके चाहे अनंत फायदे हो लेकिन आज ये हमारा अभिन्न अंग बन चूका है. सुबह से लेकर रात को सोने तक हम और चाहे कुछ भी पास में ना रखे लेकिन ये जरुर मिलेगा. मन में अशांति, चिडचिडापन और अवसाद इन सबकी वजह रेडियो वेव है. एक आदर्श आश्रम की स्थिति ऐसी जगह पर होनी चाहिए जहाँ पर मोबाइल को रखने की मनाही हो.

गाँव में आज भी आपको ऐसी स्थिति मिल जाएगी. मोबाइल से हम जितनी दुरी बनाए रखेंगे मन को उतना ही शांत रख सकते है. मोबाइल हमारे पास रहेगा तो हमारा मन उसमे ही लगा रहता है. इससे दुरी बनाए रखना संभव तो नहीं है लेकिन कोशिश ये रखे की दिन के कम से कम 2 घंटे भी इससे दूर रहे तो अच्छा बदलाव महसूस कर सकते है. साधना में सफलता और आश्रम का योगदान तभी काम करेगा.

बाहरी दुनिया से अलग हो

आश्रम की स्थापना किसी पहाड़ या घाटी में करने की बात नहीं हो रही है. एक आश्रम का कनेक्शन बाहरी दुनिया से अलग ही हो तो बेहतर है क्यों की अगर ऐसा नहीं होगा तो साधना में जो हमें सब क्रिया करते है उसका कोई मतलब नहीं. बाहरी दुनिया से अलग होने के कुछ मायने है जैसे की.

  • सुबह एक फिक्स time पर उठ जाना.
  • नाश्ते में अंकुरित आहार न की कोई फ़ास्ट फ़ूड
  • दिन भर साधना से जुड़ी गतिविधि और रात्री को एक सुनिश्चित समय पर सो जाना.

क्या हमें ये सारी सुविधा घर पर ही मिल सकती है ? मिल सकती है लेकिन कितने समय तक ये कहना मुश्किल है क्यों की घर का माहौल ऐसा होता है की कुछ भी फिक्स नहीं होता है. ऐसे में हम सामंजस्य नहीं बैठा पाते है जिसकी वजह से उचित परिणाम नहीं मिल पाते है.

साधना में सफलता और आश्रम का योगदान जहाँ का खानपान हो सादा

हमारी लाइफस्टाइल और खानपान ये दोनों ही ऐसी चीजे है जो साधना को प्रभावित करती है. अगर बात करे सही खानपान की तो सुबह उठते ही आधे घंटे के अन्दर हमें healthy चीज खा लेनी चाहिए और 2 घंटे के अंदर भारी नाश्ता जैसे की परांठे / घी / बटर या अंकुरित आहार खाना चाहिए. दोपहर में माध्यम खाना और रात्रि को हल्का और जल्दी पचने वाला सुपाच्य खाना खाना चाहिए. लेकिन हो इसका उल्टा रहा है.

हम दिन में हड़बड़ी में उठते है नाश्ता या तो ब्रेड का करते है या करते ही नहीं है और दोपहर के खाने को कुछ भी खा लेते है और रात्रि में भारी खाना खा लेते है. ये सोच कर की चलो पुरे दिन की भरपाई हो गई लेकिन वास्तव में ये भरपाई नहीं आपकी तोंद बढाने का काम करता है. अगर हम खानपान को ऊपर बताए हुए तरीके से करे तो संतुलित रहते है कही किसी GYM जाने की जरूरत नहीं क्यों की दिन भर की गतिविधि काफी है.

खानपान का साधना से क्या संबध है ? बिलकुल है क्यों की अगर खानपान सही होगा तो विचार सही होंगे क्यों की हम जैसा अन्न खाते है हमारे विचार भी वैसे ही होते है. इसलिए आहार पर एक नजर जरुर डाल ले.

आजकल के आश्रम कितने सही है ?

आजकल के जो आश्रम है वो साधना के लिए कम और मनोरंजन / समय व्यतीत के लिए ज्यादा काम आ रहे है. आश्रम को प्राकृतिक रूप से बना हुआ होना चाहिए. उसमे भव्य बुल्डिंग किस काम की, फैंसी लाइट किस काम की, खानपान में उत्तम भोग किस काम के. आज हमारे पास पैसा है तो बड़े लोगो का time pass का जरिया ये आश्रम ही बने हुए है. साधना में सफलता और आश्रम का योगदान होता है ये सोच कर इन आश्रम में जाना पूरी तरह से सही फैसला नहीं है.

सभी आश्रम पहले सामान्य ही होते है फिर इनके भक्त अमीर लोग बनना शुरू हो जाते है तो बड़ी रकम जुटना शुरू हो जाती है जो अंत में आश्रम को भव्य रूप दे देती है. एक गुरु को कैसा होना चाहिए इसे लेकर दो मत है और दोनों ही अपनी जगह सही है.

  • पहला – गुरु जिस रूप में रहना चाहे रह सकता है. फर्क इस बात से पड़ता है की वो उस चकाचोंध से प्रभावित हो रहा है या नहीं.
  • दूसरा – एक गुरु को हमेशा पैसो / माया और दिखावे से दूर रहना चाहिए.

पहला मत सही इसलिए है क्यों की गुरु ने लम्बे समय तक जो नाम कमाया है उसे हक़ है की वो अब जो चाहे वो करे. और दूसरा मत इसलिए क्यों की जो गुरु दिखावे करना शुरू कर देते है वो राम रहीम ( अगर किसी को बुरा लगे तो sorry ) की तरह पतन की राह पर चल देते है. गुरमीत राम रहीम ने अच्छे कार्य किये है इसलिए उन्हें एक आदर्श समाजसेवी के रूप में देखा सकता है लेकिन अध्य्तामिक गुरु के रूप में किस प्रकार से देखे ? अगर उनका कोई शिष्य है जो लोगो को ये बता सके की वो आध्यात्मिक कैसे थे तो जरुर यहाँ कमेंट करे.

sachhiprerna का उदेश्य किसी को गलत ठहराना नहीं है न ही हम किसी की भावनाओ को ठेस पहुंचाते है. ये बात यहाँ सिर्फ रीडर के अपने विचार जानने के लिए है. आप अपने विचार कमेंट के माध्यम से रख सकते है. दुसरे भी गुरु है जिन्होंने समय समय पर दिखावे का प्रदर्शन किया है और आज जेल में है.

साधना में सफलता और आश्रम का योगदान – अंतिम विचार

दोस्तों मेने स्कूल time में योग लाइफ and मैनेजमेंट में हिस्सा लिया था. ये जगह आश्रम तो नहीं थी लेकिन सबकुछ इतना सही था की उसके संतुलित वातावरण में 5 दिन बिताने के बाद मुझे खुद में काफी सारे सकारातमक बदलाव महसूस हुए. आज की पोस्ट का टाइटल साधना में सफलता और आश्रम का योगदान उन्ही अनुभव पर आधारित है और अगर आप इसके बारे में कुछ अलग सोचते है तो हमें कमेंट में जरुर बताए.

2 COMMENTS

  1. Dear sir,

    Baat to bhut achhi h. But Sir aaj ke time me to sbkuchh hi ulta ho rha h. Jin guruo ko gyan h jo phuche huye achhe sant hain vo to kisi Van ya fir phadiyo me chle jate hain. Or jinko thoda sa gyan ho jata h vo yha pr hmko bdi hi asaani se mil jate hain. Jinka kaam mere hissab se to bs ek hi rh gya h. Ki duniya ko bewkoof bnao or business kro. Or sir agr koi achha sant ya fir achhe gyan vala koi milta h to us time tk log thk chuke hote hain pakhndiyo se lut lutkr to vo us achhe sant Pr bhi vishvas nhi krte kyoki sir vo baar baar dhokha kha chuke hote hain.

    • आपका कहना सही है बलराम जी इसी वजह से मेने कुछ ऐसे पॉइंट शेयर किये है जो अगर आपको मिले तो आप विश्वास कर सकते है की गुरु वास्तव में काबिल है या हमें कुछ सही सिखने को मिलेगा.

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