Subconscious Emotions and How to Deal with Them 2021 Hindi Guide

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Subconscious Emotions वे खास message होते है जो Subconscious mind से डिलीवर होते है और इनका productive behavior में एक अहम् role होता है. आपको ये जान कर हैरानी हो सकती है की ये आपके Subconscious mind की ability or confidence होती है जिसकी वजह से आप कुछ भी कर पाते है. हम जो भी काम करते है उसके लिए पहले हमें उस काम को सीखना होता है. हमारे subconscious mind programing के लिए couple of suggestions किस तरह रेडी किया जाता है आइये जानते है.

इस पोस्ट में हम Subconscious Emotions के बारे में बात करने वाले है. आपने देखा होगा की विपरीत परिस्थिति में होने के बावजूद हम कभी कभी ऐसी एक्टिविटी कर देते है जो किसी मैजिक से कम नहीं होती है. कई बार किये गए हमारे unsuccessful conscious efforts के बावजूद अगर काम नहीं बन रहा है तो हमें अपने brain को Calm कर गहरी साँस लेनी है. शांत मन होगा तो solution आपको खुद ढूंढे ऐसी स्थिति बनती है.

Subconscious Emotions

ऐसी स्थिति में जब आप किसी भी solution के लिए ओपन हो जाते है तो आपका Subconscious mind खुद आपको solution provide करने लगता है. आप अपने अवचेतन मन को program कर सकते है जैसे की सुबह 5 बजे का अलार्म लगाकर सोने की तैयारी करे और साथ ही अपने subconscious mind को कहे की वो आपको 5 मिनट पहले उठा दे. आप देखेंगे की कुछ दिन बाद ही आप तय समय से 5 मिनट पहले बिना किसी अलार्म के उठने लगे है.

इस तरह की process को confidence in your subconscious mind कहते है यानि की आपका अवचेतन मन के प्रति भरोसा. जब ऐसा होता है तब आप Subconscious Emotions को trigger कर कुछ भी कर सकते है. इमोशन को आप एक मेसेज की तरह ले की किस तरह feelings of fear, anxiety, frustration, anger, envy, or procrastination with joy, peace, and fulfilment जैसे इमोशन को बदल सकते है.

Subconscious Emotions and How to Deal with Them

Subconscious Emotions आपके subconscious mind के खास message होते है जिन्हें हम किसी स्थिति के दौरान खुद में change लाने के लिए इस्तेमाल कर सकते है. विपरीत परिस्थिति के दौरान हमारा brain एक खास state में कुछ हार्मोन release करता है जिसकी वजह से बॉडी अपनी लिमिट से भी ऊपर काम करना शुरू कर देती है. हमारे काम करने की क्षमता को इमोशन काफी हद तक कण्ट्रोल करते है.

अवचेतन भावनाए हमारे मस्तिष्क को किसी खास स्थिति के लिए रेडी करने का काम करती है जिन्हें आप निचे दिए गए उदाहरण के जरिये समझ सकते है.

भावना शक्ति का अभ्यास

भावना शक्ति का अभ्यास एक निर्देश को बार बार दोहराना ही है. जब हम विचारो के भंवर में फंस जाते है तब हम समझ नहीं पाते है इससे बाहर कैसे निकले तब भावना शक्ति का प्रयोग कर हम बड़ी से बड़ी बढ़ा को दूर कर सकते है. भावना शक्ति हमें संयम सिखाती है. हमें शांति का मार्ग प्रदान करती है, इन सबके आलावा ध्यान से बढ़ी हुई शक्ति को संजो कर रखती है.

एक उदहारण : कबड्डी का खेल चल रहा था. खिलाडी जी जान से गोल करने में लगे थे. खेल में जीत की उम्मीद सिर्फ एक खिलाडी के गोल पर थी. तभी उसके अंगूठे पर बॉल आकर लगती है और अंगूठे में चोट लग जाती है. खून बहने लगता है लेकिन वो खिलाडी अपने गोल में इतना मगन था की उसे ध्यान ही नहीं रहा था. जब गोल पूरा हो गया तब उसका ध्यान अपनी पीड़ा पर आया और वो दर्द इतना तेज था की वो बेहोश हो गया. क्या ये दर्द शुरू से इतना ही रहा था.

जी हा दर्द तो तब भी था बस ध्यान नहीं रहा. क्यों की उसके मन में सिर्फ एक ही Subconscious Emotions थी की उसे बस गोल करना है.

एक दूसरा उदाहरण उस बच्चे का जो कभी स्टेज पर नहीं गया. जब वो पहली बार स्टेज पर जाता है तब उसका मन शंकित रहता है मन विचारो से घिरा रहता है की में ये कर पाउँगा या नहीं. लेकिन जब वो बोलना शुरू होता है तब उसे ऐसा लगता ही नहीं की वो पहली बार बोल रहा है. ये सब एक चमत्कार जैसा लगता होगा लेकिन ये सब भावना का खेल होता है. आँखे बाद कर सब भूल जाना और सिर्फ एक ही बात याद रखना में ये कर सकता हु. फिर देखिये आप कैसे दुसरो को अपने आकर्षण में लाते है.

भावना शक्ति का सबसे बढ़िया उदाहरण छोटा सा बच्चा है जो खेल खेल में चोटिल होता रहता है.

बच्चा खेलते खेलते गिर जाता है और उसे चोट लग जाती है दर्द भी होता है पर तभी माँ अति है और घाव पर मुह से फूंक मारती है और कहती है की बस ये अभी सही हो जायेगा और कुछ देर बाद बच्चा वापस हंस खेलने लगता है. क्या ये कोई चमत्कार नहीं ये माँ की भावना होती है जिसे बच्चे का अंतर्मन स्वीकार कर लेता है और उसकी भावना काम कर जाती है.

भावना शक्ति का दूसरा नाम है आत्मसुझाव

मेने कुछ दिन पहले की पोस्ट पब्लिश की थी जिसमे आत्मसुझाव का जिक्र किया था. आत्मसुझाव यानि खुद को सुझाव देना. जब लगातार एक वाक्य दोहराया जाता है तो वो सीधा असर करता है. इसलिए आत्मसुझाव आपके विचारो में बदलाव लाने का सबसे अच्छा माध्यम साबित हो सकता है. अगर आपको सफर के दौरान तनाव महसूस होने लगता है तो आंखे बंद कर खुद को सुझाव दे की आपका मन शांत हो रहा है. कुछ देर बाद आपका मन शांत हो जाता है.

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भावना शक्ति को बनाये कैसे रखे

इस संसार में सबसे तेज क्या है ? क्या ये कोई भौतिक रचना है या फिर मनुष्य की कोई कृति ? सबसे तेज है हमारे मन की गति. इसका ईंधन क्या है हमारा आत्मविश्वास जो हमारे मन को गति प्रदान करता है. जिसका आत्मविश्वास जितना मजबूत होता है हमारे मन की गति और उसकी वास्तविकता उतनी ही सच्ची होती है. हर वो रचना जो आज अपने भौतिक स्वरूप में है बीते हुए कल की कल्पना है और जो आज की कल्पना है वो कल की रचना होगी.

आत्मविश्वास हमारे मन की ऊर्जा है इससे कोई कम नहीं कर सकता है सिवाय खुद आपके आपका एक नकारात्मक विचार आपके मन में खुद के खिलाफ शंका पैदा कर देता है जिससे आपका आत्मविश्वास गिरने लगता है. इसके साथ ही हमारी इच्छा शक्ति, शंकल्प शक्ति और भावना शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है.

सबसे जरुरी है आपका अपने ऊपर विश्वास आपका अपने ऊपर जितना ज्यादा विश्वास रहता है आपके सफल होने के chance उतने ही ज्यादा होते है, इसलिए अगर सफल होना है तो खुद पर विश्वास बनाये रखे कोई भी एक बार में सफल नहीं होता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की बार बार प्रयत्न करने पर सफल नहीं हो सकता है. कोशिश करने पर ही सफल हो सकते है, इसमें Subconscious Emotions का योगदान हो सकता है. इसलिए अगर आपको भावना शक्ति को मजबूत करना है तो सबसे पहले शंका और दुसरो के नकारात्मक टिप्पणी से प्रभावित होना बंद करना पड़ेगा.

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भावना शक्ति का अभ्यास

भावना शक्ति का अभ्यास सिर्फ आपका ध्यान मजबूत करता है. विचारो के भंवर से निकल कर कर आपको एक विचार पर टिके रहने का सामर्थ्य प्रदान करता है.

  • इसके लिए आप सबसे पहले शरीर को शिथिल करने का प्रयत्न करे जो आप लेट कर और हरकत को बंद कर आसानी से कर सकते है. जब शरीर शिथिल हो जाता है तब मन को शांत करना होता है. मन को शांत करने के लिए मन के विचारो को बंद करना होता है जो एकाएक संभव नहीं है.
  • शुरू में आप सिर्फ एक विचार को सोचे की सिर्फ एक विचार ही आपको बार बार दोहराना है.
  • कुछ समय बाद ही आपके मन सिर्फ वह विचार दोहराया जाता है बाकि विचार नहीं आते है.
  • कुछ देर बाद ऐसा लगता है जैसे आपका शरीर बेजान सा हो गया है और मस्तिष्क एकदम खाली खाली सा.

अब आप इसे अपने शरीर पर आजमाए लेट जाये और शरीर को शिथिल कर ले, मन को शांत करने का प्रयत्न करे ये न कर सकते तो कोई बात नहीं अपने मन में सिर्फ एक ही विचार दोहराये जो आपके शरीर से सम्बधित हो जैसे की आपके शरीर का वो भाग जिस पर भावना दी जा रही है वो उस भावना के अनुसार कार्य करने लगा है. उदाहरण के लिए अपने भावना दी है की आपके पैर की हरकत बिलकुल बेजान हो रही है कुछ देर ये भावना दे आप महसूस करेंगे की आपके पैर की हरकत बंद हो कर बिलकुल बेजान हो गई है.

भावना शक्ति को और मजबूत करे

भावना शक्ति का अभ्यास करते हुए आप भावना दे कर शिथिल पड़े अपने हाथ को हवा में भावना द्वारा उठाये ये शुरू में मुश्किल जरूर है लेकिन अभ्यास से संभव है. इसके लिए आपको अपने शायरी की हरकत को बंद करना होगा और भावना दे की आपके हाथ हवा में उठ रहा है.

Subconscious Emotions के कुछ ही देर बाद आपके हाथ थोड़ा थोड़ा करके हवा में उठ शुरू हो जाता है. इस समय आपको सिर्फ भावना को बार बार दोहराना है और ध्यान देना की आप हाथ को उठाने के लिए बल का प्रयोग न करे क्यों की इस वक़्त आपकी चेतना और अवचेतना में निर्देश का आदान प्रदान होता है और दोनों ही अपने अपने भाव से आपके आदेश ग्रहण करते है लेकिन आपको सिर्फ भावना शक्ति का अभ्यास पर ध्यान देना है उस वक़्त भावना में कोई व्यवधान या फिर निर्देश के प्रशारण में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए .

ये अभ्यास आपके अंतर्मन को मजबूत बनता है जिससे भावना शक्ति तेजी से और पलो में आपको ध्यान की शक्ति का बोध कराती है. और आप ध्यान में तेजी से उतरने लगते है.

सावधानी
  • भावना शक्ति का अभ्यास आपके मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है.
  • उपरोक्त अभ्यास में आपके मस्तिष्क बहुत जल्दी थकने लगता है इसलिए ज्यादा जोर न दे वर्ना अभ्यास के बाद आपको थकान महसूस होने लगती है.
  • हाथ हवा में उठना एक स्वाभाविक प्रक्रिया होनी चाहिए इसके लिए मानसिक बल न लगाये.

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How to train your subconscious mind with emotion

आप अपने अवचेतन मन को किसी भी स्थिति के लिए train कर सकते है बशर्ते आपके अन्दर उसे हासिल करने का confidence होना चाहिए. यहाँ कुछ ऐसे टिप्स है जिन्हें आप फॉलो कर सकते है.

  • आपके अन्दर unchangeable change के लिए will power होनी चाहिए.
  • खुद को सफल बनने के लिए परमिशन दे.
  • आपके आसपास के लोगो के डर को अपने काम के बीच ना आने दे.
  • अपने आसपास के positive reinforcement को बनाए रखने की कोशिश करे.
  • आपकी सफलता आपका भविष्य नहीं वर्तमान होना चाहिए.
  • अपने लिए एक vision space बनाए जहाँ आप खुद को नए नए आईडिया के लिए प्लान करे.
  • अपनी प्रतिरोधक-क्षमता को पहचाने और boundaries को भी ताकि आपको ये मालूम रहे की आपकी क्षमता क्या है.
  • अपनी लाइफ को लेकर एक master plan बनाकर रखे.
  • एक gratitude journal बनाना शुरू कर दे ताकि ये आपको एक खास स्टेट में बनने में मदद करे.
  • ये मालूम होने के बाद भी की आप हासिल नहीं कर सकते खुद से सवाल करे की आपको क्या चाहिए.
  • अपने attachment को release करना शुरू करे.
  • खुद को ऐसे लोगो के साथ समय देना शुरू करे जिनमे आपके जैसी क्वालिटी हो.

अपने अन्दर के डर को affirmation and motivation से replace करना शुरू कर दे. धीरे धीरे आप खुद में बदलाव महसूस करना शुरू कर देंगे और पाएंगे की अब आपकी Body and mind को सिर्फ Subconscious Emotions के जरिये आप कण्ट्रोल कर पा रहे है. आपका subconscious mind आपके बॉडी के अहम् रोल जैसे की body temperature, heartbeat and breathing को control करता है.

How Subconscious Emotions Deal with Brain final word

अगर आपने गौर किया हो तो किसी छोटे बच्चे का ध्यान भटकाना बेहद आसान क्यों है ? चोट लगने के बाद जब हम उनका ध्यान भटका देते है तो वो उस दर्द को भूल जाते है. यही हमारे Subconscious Emotions की सबसे बड़ी powers होती है. इसकी वजह है जितना ज्यादा हमारा अपने subconscious mind पर confidence होगा उतना ही बेहतर हम कर पाएंगे.

ये हमें हमारी लिमिट से भी आगे बढ़कर काम करने को motivate करता है. भावनाए हमारे अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालती है जिसकी वजह से हम बॉडी को उस काम के लिए तैयार कर लेते है. अगर आप इतना जान लेते है तो आपके लिए अपने अवचेतन मन को program करना बेहद आसान हो जाता है.

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