ultimate power of conscious mind – क्या क्या करता है आपका चेतन मन

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चेतन मन की शक्तिया

चेतन मन की शक्तियाचेतन मन और अवचेतन मन के बारे में हम पहले की कुछ पोस्ट में पढ़ चुके है और ये जानते है की चेतन मन जाग्रत अवस्था का सबसे ज्यादा सोचने वाला वो सिस्टम है जो हमें किसी भी स्थिति के लिए तैयार करता है। ये चेतन मन ही है जो सोच, समझ कर निर्णय लेता है और स्थिति के अनुसार काम करता है। इसलिए आज की पोस्ट में हम चेतन मन की शक्तिया के बारे में और ज्यादा डिटेल से बात करने वाले है।

conscious mind हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कई कार्यो के लिए जिम्मेदार है। इसके लिए आज हम बात करेंगे चेतन मन की शक्तिया यानि अल्टीमेट पावर ऑफ कॉन्ससियस माइंड जिसमे किसी भी आईडिया के एक्शन तक पहुँचने में किन किन चरण से गुजरना पड़ता है के बारे में बात करेंगे। आइये बात करते है conscious mind क्या क्या काम करता है। क्यों की कुछ चीजों में हम संसय में पड़ जाते है की ये चेतन मन का हिस्सा है या अवचेतन मन का।

चेतन मन की शक्तिया और कार्य-प्रणाली

हम सभी जानते है की चेतन मन दिन भर हजारो विचारो से घिरा रहता है और ये थॉट्स हमें एक जगह एकाग्र नहीं होने देते है जिसकी वजह से मन चंचल बना रहता है। अगर मन स्थिर रहता है तो हम जो चाहे वो पा सकते है इसलिए अंतर्मन की अनंत क्षमताओ की श्रेणी में आज हम चेतन मन की कार्य-प्रणाली और शक्तिया समझने की कोशिश करते है।

सोचना चेतन मन की शक्तिया का एक खास हिस्सा है

दिनभर हम हजारो विचारो से गुजरते है हर पल एक नया आईडिया हमारे दिमाग में आता और जाता है। चेतन मन यानि कॉन्ससियस माइंड का सबसे पहला काम है सोचते रहना और एक सामान्य इंसान दिनभर विचारो से घिरा रहता है। सोचना या किसी भी आईडिया का दिमाग में आना या फिर किसी भी तरह की पूर्व प्लानिंग हमारे कॉन्ससियस माइंड के कार्य का हिस्सा है। हम जो भी सोचते है उसका एक तरीका है की हम क्या सबसे ज्यादा सोचते और किसकी तरफ आसानी से अट्रैक्ट होते है।

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सकारात्मक

में इस काम को कर सकता हूँ या फिर मुझे विश्वास है की ये काम मुझसे हो जायेगा जैसे विचार सकारात्मक या पॉजिटिव थॉट्स है जो हमारे अंदर सेल्फ-कॉन्फिडेंस पैदा करता है जिसकी वजह से आधा काम पहले से ही हो जाता है क्यों की सकारात्मक विचार एक ऊर्जा का प्रवाह करते है जो हमें निरंतर उस काम के प्रति प्रेरित करती है।

नकारात्मक

कोई भी काम करने से पहले या किसी आईडिया पर अमल करने से पहले अगर मन में शंका होने लगती है जैसे की में ये कर पाउँगा या नहीं, में इसमें कामयाब नहीं हो सकता है जैसे थॉट अगर आपके मन में आते है तो समझ जाइये की आप हीन-भावना से घिरे हुए है। इसमें हम जो भी सोचते है मन में शंका बनी रहती है की में कर पाउँगा या नहीं। इतना ही नहीं ज्यादातर लोग ऐसे काम में बेमन में बिना किसी उत्साह और एनर्जी के काम करते है जिसकी वजह से वो उससे संतुष्ट भी नहीं होते है।

जो नहीं करना उसपर सबसे ज्यादा ध्यान रहना

अगर कोई आपसे कहे की आपको अमुक काम नहीं करना है तो आप क्या करते है ? क्या आप उस काम को नहीं करते है। असल में आपके मन में सब विचार एक तरफ और “मुझे ये काम क्यों नहीं करना है” ही घूमने लगता है। ये हमारी मानसिकता है की जिस काम के लिए कोई हमें मना करता है हम सबसे पहले उसी काम को करते है।

इस मानसिकता के पीछे सिर्फ एक ही सोच है की कोई हमें अगर मना करता है तो उसके पीछे उसका कोई स्वार्थ है या फिर वो हमसे कुछ ऐसा छिपा रहा है जो हमें पता होना चाहिए। अगर बात करे आज की सोसाइटी की तो माता पिता बच्चो को हमेशा कहते है सेक्स बुरा है या फिर आपको काम नहीं करना, इस जगह नहीं जाना है। ऐसा कर वो खुद बच्चो के दिमाग में एक सवाल डाल रहे है और वो ये की उसे ये काम क्यों नहीं करना है। इसलिए बातचीत का तरीका बहुत मायने रखता है।

अगर आपको किसी को किसी से दूर रखना है तो उसे समझाना पड़ेगा की वो काम नहीं करना है। अगर बात करे बोलने के तरीको की तो आपके बात करने के तरीके में भी बहुत बदलाव लाना पड़ता है उदाहरण के लिए अगर आपको नकारात्मक विचारो से दूर रहना है तो ऐसे शब्द और विचारो का चयन करे जिनमे ना जैसे शब्द नहीं हो हो। ये थोड़ा मुश्किल है समझना लेकिन इसके बारे में भी आगे की पोस्ट में बात करेंगे।

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चेतन मन की शक्तिया – लॉजिक :

सिर्फ मनुष्य ही है जो अच्छे और बुरे में फर्क पहचान कर अपने लिए सही निर्णय का चुनाव कर सकता है। हमारे लिए क्या सही है और क्या मायने रखता है की पहचान करने के काम भी चेतन मन की शक्तिया का एक भाग है। हम जो भी निर्णय लेते है वो सोच समझ कर और अच्छे बुरे की पहचान कर ही लेते है। तर्क वितर्क और सही का चुनाव लेना लॉजिक की एक प्रक्रिया है।

लॉजिक के आधार पर हम किसी भी आईडिया या विचार को करना चाहिए या नहीं, अगर करना चाहिए तो क्यों और कितना जरुरी है साथ ही इसका हम पर क्या असर पड़ेगा जैसे पैरामीटर की जाँच की जाती है।

निर्णय लेना :

कोई भी काम करने से पहले हमारे अंदर विचार बनता है जिसके बाद लॉजिक का चरण आता है और फिर निर्णय लेना की करना है या नहीं ये काम भी चेतन मन यानि कॉन्ससियस माइंड की कार्यप्रणाली का एक हिस्सा है। निर्णय लेने से पहले जब हम लॉजिक के आधार पर पता करते है हमें ये करना चाहिए या नहीं तभी हम किसी फाइनल decision पर पहुँचते है और निर्णय ले पाते है।

चेतन मन की शक्तिया – एक्शन :

एक्शन यानि किसी भी काम को सोच विचार कर अंजाम देना। जब आईडिया हमारे मन में आता है तब कई ऑपरेशन के बाद वो फाइनल नतीजे पर पहुँचता है। चेतन मन की शक्तिया यानि ultimate power of conscious mind में एक्शन तभी ली जाती है जब वो ऊपर दिए गए सभी ऑपरेशन से गुजर चूका हो। जब मन स्थिर होता है तब उपरोक्त सभी प्रक्रिया आसान बन जाती है।

अगर मन स्थिर रहता है तो हम चीजे ज्यादा क्लियर तरीके से सोच पाते है और इसी वजह से हम बेहतर चुनाव कर पाते है।

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अवचेतन मन के गेट का मुख्य पहरेदार

कोई भी कार्य अगर बार बार दोहराया जाता है तो वो अवचेतन मन तक पहुँच जाता है ये तो हम सभी जानते है। लेकिन क्या आप जानते है वो अवचेतन मन तक पहुँचता कैसे है ? जब कोई कार्य किया जाता है तब वो अवचेतन तक पहुँचने का प्रयास करता है लेकिन अवरोध उसे पहुँचने नहीं देता है लेकिन बार बार दोहराये जाने पर अवचेतन मन उसे स्टोर कर लेता है।

हम जो भी कार्य करते है वो हमारे माइंड की सेल्स में कही ना कही स्टोर होता रहता है लेकिन जो हमारे डेली लाइफ में काम अत है सिर्फ वही अवचेतन मन तक पहुँचता है। इसलिए कहना उचित होगा की अवचेतन मन सिर्फ बार बार रिपीट होने वाले, फोकस होकर किये गए कामो को स्टोर करता है।

दोस्तों चेतन मन की शक्तिया की इस पोस्ट में समय समय पर अपडेट किया जाता रहेगा। अगर आपके पास और कोई सुझाव है जो आप सच्ची-प्रेरणा पर देखना चाहते है तो हमें जरूर बताए।

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