त्राटक से जुड़े कुछ खास सवाल और उनके जवाब जिन्हे आपको जानना चाहिए

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त्राटक से जुड़े सवाल

त्राटक से जुड़े सवालनमस्कार दोस्तों त्राटक की श्रृंखला में अब तक आप बिंदु त्राटक साधना, सप्त वर्तुल त्राटक अभ्यास और त्राटक के बारे में पढ़ चुके है। आज की पोस्ट त्राटक से जुड़े सवाल उनके जवाब को लेकर है। बहुत से साधक है जो त्राटक अभ्यास तो करते है पर त्राटक से जुड़े सवाल और उनके जवाब समझे बिना कुछ खास नहीं कर पाते है। आज की पोस्ट में हम विस्तृत रूप से इसी समस्या पर बताने जा रहे है। इस पोस्ट में आपके सभी सवालो का जवाब मिलेगा अगर नहीं मिले तो निराश ना हो हमें कमेंट के माध्यम से पूछे आपके सवाल को भी पोस्ट में शामिल कर लिया जायेगा। त्राटक से जुड़े सवाल पर हम बात करेंगे हर उस सवाल की जो आपके मन में त्राटक के वक़्त आता है। त्राटक से जुड़े सवाल और उनके जवाब से अपनी समस्या का समाधान करे

त्राटक से जुड़े सवाल और उनका समाधान

दोस्तों त्राटक के अभ्यास में बेसिक समझे बगैर अभ्यास में सफलता हासिल नहीं की जा सकती है। इसके लिए पहले हमें अपने हमारे मन में उभरते सवालो का जवाब खोजना चाहिए ताकि पूरी तैयारी के साथ अभ्यास में पूर्णता लायी जा सके। इसके लिए जरुरी है त्राटक के हर बेसिक को समझना आइये जानते है आपको कौन कौन से सवाल परेशान कर सकते  उनका समाधन क्या है।

त्राटक कब करना चाहिए :

त्राटक हमेशा सुबह करना चाहिए जिससे हमें ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले। पर अगर आप सुबह जल्दी नहीं कर पाते है तो आपको रात्रि 10 बजे के बाद करना चाहिए। क्यों दोनों ही समय वातावरण शांत होता है और आपके अनुकूलित होता है।

पढ़े : त्राटक से आत्मविश्वास कैसे बढ़ाये आसानी से

दिन में त्राटक करना चाहिए ?

दिन में हमारा चेतन मस्तिष्क ज्यादा सक्रिय होता है अगर ऐसे में त्राटक का अभ्यास किया जाये तो ना सिर्फ त्राटक में ज्यादा वक़्त लगता है बल्कि आपको इसके लिए वातावरण भी बनाना पड़ेगा। जैसे की अंधकार से भरा कमरा और सिर्फ आर्टिफीसियल लाइट। इसके पीछे का मनोविज्ञान है की सूर्य की रौशनी से बढ़कर कोई प्रकाश नहीं और ऐसे में अगर अभ्यास किया जाये तो हमारी आँखों को सूर्य की रौशनी अब्सॉर्ब करने में ज्यादा वक़्त लेगी। और वक़्त ज्यादा बिता कर त्राटक का अभ्यास करे ऐसा कोई नहीं चाहता है।

त्राटक कितनी देर तक करना चाहिए ?

त्राटक सुबह के वक़्त हमें हमारी आँखों की अनुकूलता के अनुसार करना चाहिए। त्राटक ज्यादा देर तक करने का कोई मतलब नहीं जब आप शून्यता की अवस्था प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए त्राटक के वक़्त आँखों को ज्यादा देर तक खुली रखने की बजाय आप कम वक़्त में शून्यता पर ध्यान दे।  अनुभव जल्दी ही मिलने लगेंगे। इसे इस तरह समझे 2 व्यक्ति त्राटक कर रहे है

  • पहला व्यक्ति त्राटक का अर्थ ये समझता है की इसमें आँखों को जितना खुला रखेंगे उतना ही जल्दी अनुभव होगा। वो अपना सारा वक़्त सिर्फ आँखों को ज्यादा से ज्यादा खुला रखने में लगा देता है। इससे होता ये है की शुरू में उसकी आँखों में जलन की वजह से उसका अभ्यास टूटता है फिर वो वापस फोकस होता है आँखों को खुली रखने पर। कुछ वक़्त के बाद उसके मस्तिष्क में एक विचार बार बार घूमेगा की आँखों को खुली रखना है। इससे अगर उसकी पलक झपकती भी है तो दिमाग में ऑटो suggestion पैदा होगा जो उसे दोबारा आंखे खुली रखने पर फोकस करने को कहेगा।
  • वही दूसरी और दूसरा व्यक्ति त्राटक के दौरान सभी क्रिया को नार्मल होने देता है वो इस बात को लेकर फोकस  नहीं है की उसे ज्यादा से ज्यादा पलके खुली रखनी है, वो सिर्फ सब कुछ बिंदु पर फोकस करता है। इससे दो बाते होगी पहली उसका फोकस बिंदु है ना की आंखे खुली रखना, दूसरा जब वो बिंदु पर फोकस होता है तो अपने आप कुछ वक़्त के बाद उसमे शून्यता आने लगेगी।

ध्यान दे यहाँ दो चीजे है फोकस होने के लिए पहली बिंदु और दूसरी आंखे खुली रखना। पहले वाली पर आप  फोकस हो सकते है लेकिन दूसरी वाली पर नहीं इसमें स्वाभाविक क्रिया अपने वक़्त पर घटित होती रहती है।

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त्राटक दिन में कितनी बार ?

त्राटक से जुड़े सवाल में ये सवाल सबसे खास और सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है। अगर आप शुरुआती साधक है तो त्राटक दिन में एक बार ही करना चाहिए।  क्यों की आँखों में सूखापन एक शुरुआती समस्या बन जाता है, इसके अलावा देखने में फर्क महसूस होना और आँखों से सम्बंधित समस्या शुरू में कुछ दिन महसूस होती है। अगर आपकी मानसिकता है की त्राटक जितनी ज्यादा बार करेंगे उतना ही फायदा होगा तो आप गलत है। क्यों की त्राटक के बाद अगर मस्तिष्क शून्यता महसूस करता है तो उस अवस्था को जीवन का हिस्सा बनाने में थोड़ा वक़्त लगता है।

tratak के बाद हमें उदासी जैसा अनुभव हो सकता है जो एक तरह से मस्तिष्क की शून्यता का अहसास होता है। ऐसा इसलिए क्यों की अवचेतन मस्तिष्क की अवस्था से चेतना में आने में  वक़्त लगता है।

त्राटक से कौन कौन सी शक्ति प्राप्त होती है ?

trataka से अगर आपका अभिप्राय अलौकिक शक्ति से है तो आप सही है। त्राटक से आँखों में आकर्षण शक्ति का विकास होता है। त्राटक से आपको आने वाली घटनाओ का भी पता चलने लगता है। ऐसा इसलिए क्यों की आप ज्यादा से ज्यादा सूक्ष्म होने लगते है। और कई तरह से छटी इंद्री जागरण के अनुभव करने लगते है। ये अनुभव आपको ध्यान में भी हो सकते है पर त्राटक ध्यान से ज्यादा सरल और सुगम रास्ता माना जाता है। ये में नहीं कहता त्राटक करने वाले साधक के अनुभव है।

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त्राटक में क्या क्या अनुभव होते है ?

त्राटक में अगर में अनुभव पर चर्चा करू तो ये आपके मानसिकता पर बुरा प्रभाव डाल सकती है ऐसा इसलिए क्यों की फिर आप अनुभव को खुद के नहीं मेरे नजरिये से करते है। तो फिर त्राटक के दुसरो के अनुभव की चर्चा क्यों ? फिर भी आपके मन की शांति के लिए में कुछ अनुभव की चर्चा यहाँ कर रहा हूँ ताकि आपको सही तरह से समझ आ सके।

  • त्राटक में सबसे पहले हमारी आँखे अपलक देखने में अभयस्त होती है इसके बाद हमारी आँखों और बिंदु के मध्य सम्बन्ध स्थापित होता है। जितनी देर ये सम्बन्ध स्थापित रहता है उतनी देर तक बिंदु काले रंग की बजाय सुनहला या चमकीला दिखाई देने लगता है।
  • इसके बाद हमें ऐसा लगता है जैसे हम बैठे बैठे बिंदु के अंदर जा रहे है। आगे ये एक सुरंग और ब्रह्मांड में तेज गति से विचरण का अनुभव हो सकता है।
  • इस दौरान हमारे विचार पहले कम होते है फिर शुन्य और इसके बाद हम मस्तिष्क से खाली हो जाते है।
  • आगे अभ्यास जारी रहे तो आपको ऐसा लगेगा जैसे आप अपने अंदर की यात्रा कर रहे है। और आप अपने प्रत्यक्ष कुछ घटनाओ को घटते हुए भी देख सकते है ऐसा इसलिए क्यों की अवचेतन मस्तिष्क तक बढ़ने के दौरान आपके मन में दबी यादे उभरने लगती है और आप उन्हें अपने प्रत्यक्ष महसूस करने लगते है।
  • जब ये होता है तो बाद में आप अपने आँखों में चमक को महसूस करते है जब आप दर्पण देखते है या फिर कुछ देर तक किसी भी जगह देखते रहने के बाद एक चमक द्वारा उस जगह से जुड़ने का अहसास होना।

अनुभव में इतना ही क्यों की आगे के अनुभव सीक्रेट है और आप अपने अनुभव खुद करे तो ज्यादा बेहतर होगा।

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 त्राटक में बोर्ड कोनसा और रंग कौनसा ?

त्राटक करते वक़्त बोर्ड हाथो से बनाना ज्यादा बेहतर रहता है और इसके लिए काले रंग का महत्व है। फिर भी कुछ लोग बने बनाये बोर्ड पर अभ्यास करना पसंद करते है। अगर आप अच्छे से बोर्ड बना सके तो अच्छा है वार्ना आप बाजार से खरीद सकते है।

trataka में सोशल मीडिया पर गतिविधि कम क्यों ?

त्राटक के practice में मस्तिष्क को एक लंबे समय तक साधना पड़ता है और अगर आप सोशल मीडिया से जुड़ते है तो आप विचारो की मात्रा से प्रभावित होते है। अगर आप शवासन का अभ्यास करते है तो आप आसानी से इससे छुटकारा पा सकते है फिर भी सोशल मीडिया पर वक़्त अभ्यास के दौरान कम ही बिताना चाहिए।

दोस्तों अगर त्राटक से जुड़े सवाल जिसके बारे में पोस्ट में जिक्र नहीं किया गया है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है इसके लिए कमेंट बॉक्स में अपना सवाल लिख दे बस।  अगर हमारी पोस्ट  अच्छी लगे तो subscribe जरूर करे।

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16 COMMENTS

  1. namaste
    mera naam triloki h. me much hafton se shakti chakra par abhyaas kar raha ho. apke bataye anubhaw to hote h aur phir indradhaush ke color dikte he .par me apani shakti ka kya practice Karo ki mujhe
    pata chale ki me sahi ho
    kirpya kar bataye
    apka abhari
    triloki

    • triloki ji ap jis tarah abhyas me aage badh rahe h ab vaqt aa chuka h ap apne antrman ko jagrat kare or khud ke anubhav dvara
      samjhe abhyas karte rahiye ye sthiti khud banne lagegi

      • thank u sir
        me khus hu par meri kuch problem h please meri help kare
        me janana chata hu ki sahkti chakra par tratak karte hue kya mujhe koi bhawan kud
        ko deni hoti h ya nahi kyu ki me jab chakra par practice par hota hu to me sunn jaisa ho jata ho kuch sochne ka pata nahi hota.
        phle tratak krate samay chakra me red color dikta tha(ankhe band karn par chamkile chakra me red color ki line si dikti thi)aur ab thodi der baad kuch green color sa dikta h(ab ankhe band karne par usme green color ka kuch cartoon jisa jise rabbit ya kuch aur dikta h)
        me kya karu agar ap meri madat kar kase to apka bhoot bhoot sukriya nahi to bhi
        thanks
        apka abhari
        triloki chand

    • टेलेपोर्टेशन के लिए किसी तरह के त्राटक के अभ्यास नहीं करना होता है। टेलेपोर्टेशन एक लम्बे समय में पूर्ण होने वाला अभ्यास है जिसके लिए उच्च स्तर का संयम और खुद को पंच भूत में विखंडन करना आना चाहिए। ये भी सिर्फ एक कयास है असलियत में शायद किसी को हो इसकी जानकारी हो।

  2. mai darpan tratak karta hu mujhe 2 din ke bad se hi darpan me us dauran kai tarah ke chehre dikhte hai.sir mai janna chahta hu ki mai sadhna ke kis level par hoo..

    • दर्पण tratak करते वक़्त अनजाने चेहरे दिखाई देना इस बात का लक्ष्ण है की आप गहरे अभ्यास में उतर रहे है. अवचेतन मन जाग्रत होने से पहले चेतन मन दबी हुई यादो को उभारता है और वही हमें अभ्यास में दिखाई देता है. अभ्यास बनाए रखे और ध्यान रखे की जो दिखाई दे उसमे आपको कोई भी प्रकार का तर्क वितर्क अपने मन में नहीं आने देना है. जैसे की ये अनजाने चेहरे क्या है क्यों दिखाई दे रहे है आपको बस लगे रहना है बाद में आप और गहरे जाओगे तब शुन्यता की स्टेज भी मिलेगी.
      अभ्यास के best of luck keep visiting on sachhiprerna

    • निर्भर करता है की ये आपको कितना कण्ट्रोल करता है या फिर आपको इसकी कितनी जरूरत है. त्राटक सुबह 4-6 बजे करना सही है. आप सोते समय रिलैक्स होकर सोए. ऐसा नहीं की त्राटक करने वाले सम्भोग नहीं कर सकते लेकिन इसे सिर्फ आपके साधना के आड़े ना आने दे.

  3. सर जी बिंदू त्रातक में बिंदू 1रुपये शिक्के जितना तो बनाया लेकीन बिंदू के बिचो बीच लाल या पिल्ले कलर का एक छोटा बिंदू बनाये या नही

    • जरुरी नहीं है, अगर आपको अपनी एकाग्रता किसी अन्य बिंदु पर फोकस करनी है तो आप बना सकते है.

  4. Sir Tratak Sadhna khali pet kare ya khana khane ke baad bhi kar sakte hai. kripya karke bataiyega jaroor sir.

    • खाली पेट इसका अभ्यास बढ़िया है अथवा खाना खाने के कम से कम 3 घंटे बाद

  5. त्राटक जब शुरू करे तो कितनी देर तक करे पहले दिन फिर कैसे समय को बढ़ाय त्राटक से मनोकामना भी पूरी होती है क्या

    • त्राटक की शुरुआत आपके अनुकूल होनी चाहिए. अगर आप शुरू में 5 मिनट ही अभ्यास कर पा रहे है तो इतना ही करे. जैसे जैसे अभ्यास बढ़ता है समय की सीमा भी बढ़ने लगती है. त्राटक के जरिये हम अपने अन्दर बदलाव ला सकते है, जो चाहते है वैसा बन सकते है.

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