आभा मंडल कमजोर होने के संकेत और घर पर रैकी के जरिये हीलिंग का सरल अभ्यास कैसे करे ?

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क्या आप भी घर पर रैकी का सरल अभ्यास कर खुद को समस्या से दूर रखना चाहते है ? ज्यादातर लोग जब मानसिक रूप से कमजोर हो जाते है या फिर उनका औरा क्षेत्र कमजोर हो जाता है / चक्र में imbalance जैसी प्रॉब्लम आ जाती है तब इस चिकित्सा पद्धति की मदद लेते है. बेहद कम समय में खुद को रिचार्ज करना, negativity दूर करना और सकारातमक बनना इसके जरिये संभव है. अगर आप काफी समय से खुद को मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे है तो समझ जाइये की आपका आभा मंडल जिसे औरा फील्ड भी कहते है बिगड़ गया है और आपको खुद में सुधार  करने की आवश्यकता है. आइये जानते है कैसे हम अपनी प्रॉब्लम का समाधान रेकी के अभ्यास के जरिये कर सकते है.

रैकी का सरल अभ्यास

आभामंडल हमारे व्यक्तित्व की परछाई होती हे । किसी का आभा मंडल बहुत सकरात्मक हो सकता हे किसी नकरात्मक । हमारे मन में विचारो की जंग चलती रहती हे,स्तिथि के अनुसार वेसे भाव हमारे चेहरे पर हमारी बॉडी लैंग्वेज पर साफ़ देखे जा सकते हे जिससे हमारे आभामंडल का निर्माण होता हे । रैकी का सरल अभ्यास हमारे आभा मंडल को समझने और उसे मजबूत करने में मदद करता है। एक बात समज में आती हे की अगर हम अपने भीतर की स्तिथि के साथ aura भी बनता बिगड़ता है। आभा मंडल से हम किसी भी इंसान के और का पता लगा सकते है और इसे रैकी में इस्तेमाल कर दुसरो की ऊर्जा संबंधी समस्याओ का समाधान कर सकते है।   प्राण ऊर्जा और हमारे स्वभाव से हमारा औरा बनता और बदलता है। इसके विभिन्न रंग अलग अलग रहस्य लिए है।

रैकी का सरल अभ्यास

आप कल्पना करे कोइ ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी से जब आप संपर्क मे आते है तो आपके भीतर की ऊर्जा और भाव भी हिलोरे लेने लगते है। जैसे एक बड़े चुम्बक के पास अगर कुछ छोटे चुबकं जाए तो उनकी क्या स्थिति होगी वो इतने आकर्षण मे आ जाए की उससे चिपक जाएगे। एसे ही साधक जब किसी महात्मा से मिलता है तो वो भी उसके चरणों मे झुक जाता है उसकी नजर की गहराई को देखने की कोशिश करता है।

लेकिन चुबकं चाहे जितना ही बड़ा क्यों न हो वो लकड़ी व अन्य धातुओ को आकर्षित नही कर सकता, कहने का भाव है साधक को सिद्ध ही आकर्षित कर सकता है जिसमे साधक के गुण है। आज भी रैकी का सरल अभ्यास हम घर बैठे कर सकते है वो भी आसानी से समझ कर।

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प्रयोग ( 1 ) :

अब मै आपको एक प्रयोग बताता हू जिससे आप अपने आभा मडंल का आकंलन कर सकते है व उसे बढ़ा सकते है, एक दीया या मोमबती जलाकर उसके सामने आखं बदं कर बैठे, उसकी दूरी उतनी हो शुरूआत मे कि जिससे आपको उसकी आँच सपष्ट महसूस हो, फिर धीरे धीरे दूरी बढ़ाते जाए दस दस मिनट के अतंराल मे, एक बात ध्यान रखे की आपको उसकी आँच निरतंर महसूस होती रहे दूरी उतनी ही हो, जितनी दूर तक आप आँच महसूस करते है उतना आपका आभा मडलं है, वो उतनी दूर तक प्रभावित करता है।

यह इसी प्रयोग से बढ़ाया भी जा सकता है। आप यह प्रयोग निरतंर करे व अपने आभामडंल का प्रभाव दुसरो पर सपष्ट देखेगे। हाँ जब यह प्रयोग करे तो अँधेरा हो तो बेहतर है|

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प्रयोग ( 2) :

एक प्रयोग और कर सकते हे सुबह सूर्योदय के समय पूर्व की और मुख कर बैठे, व् सूर्य की ताज़ा किरणों का स्पर्श महसूस करे, एसा करने से आपको लगेगा के आपमें और सूर्य में कोई तार जुड़ गया हे इन किरणों के माध्यम से, एक रिश्ता कायम हो गया है| एसा प्रयास करने से आपके मस्तक का तेज बढेगा, व् वे किरणें आप कही भी हो आपको आकर घेरने लगेगी| इसे आप सूर्य स्नान भी कह सकते हे, सूर्य नमस्कार भी कह सकते हे |

“आभामडंल जिस तरह का होगा उसी तरह की शक्तियो से संपर्क करने क्षमता आ सकती है।”

आपने सुना होगा गणेश के उपासक को गणेश, शिव के उपासक को शिव या किसी महात्मा के उपदेश मानने वाले को उस महात्मा का अतंर मे दर्शन होता है यह उस उपदेश को मानने से आभामडलं मे आए बदलाव के कारण भी सभवं होता है। अतंर मे मनोस्थिति के अनुसार आपकी तरगें रूपातरिंत होती है, व दूसरो को भी वो प्रभावित करती है । जो बहुत नकरात्मक हो जाते है वो बुरी शक्तियोे के प्रभाव मे भी आ जाते है यह आम तौर पर देखा जा सकता है इस सबका कारण आभामडंल विज्ञान है.

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करे बुजुर्गो का सम्मान :

बचपन की बात है जब हम कुछ भी देखते, सुनते उसे करने की कोशिश करते थे. इसी तरह किसी से सुना की बड़ो के पैर छूने चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए इससे परीक्षा में पास हो जायेंगे, वगेरह वगेरह. उठे जल्दी से और चल दिए दादा जी के पास उनके पैर छूने के लिए. दादा जी अक्सर सुबह जल्दी उठ कर अपने नियम से पूजा पाठ करते थे . आज भी रैकी का सरल अभ्यास का वो दिन याद आता है जब पहली बार उनके पैर छुए थे हर पल जिस मष्तिस्क में विचार चलते है वो mind उस वक़्त शुन्य की स्थिति में चला गया था, आँखे अपने आप बंद हो चुकी थी जब उनका हाथ सर पर महसूस हुआ, उस वक़्त उन्होंने कुछ देर तक अपने हाथ सर पर रखे थे और वो पल काफी सुखद था.

खैर अपने दिन के काम में व्यस्त हो गया लेकिन आज कुछ अलग था मन शांत था और हलचल कम थी.विषय में मन कम लग रहा था बस मन करता की एक जगह बैठ कर अपने आप में डूब जाये. उस दिन के बाद हर रोज़ सुबह दादा जी के पास जाना और पैर छूना जैसे नियम में शामिल था. बचपन में रैकी का सरल अभ्यास करना चाहता था लेकिन बहुत सी बातो का ध्यान ना रखने की वजह से नहीं कर पाया।

बदलाव का रहस्य

कुछ समय बीतने के बाद एक दिन दादा जी ने पूछा आजकल इतना बदल कैसे गए हो बेटा तब दादा जी को पूरी बात बताई. मुस्कुराते हुए वो बोले बेटा ये तप और ध्यान की शक्ति है जो तुम्हे फ्री में मिल रही है. इसके बाद दादा जी ने ऐसे कई रहस्य बताये जो हमारे आसपास होते हुए भी हम उस ब्रह्माण्ड शक्ति की ऊर्जा को नजर अंदाज कर देते है.

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शक्ति पात

असल में ये शक्ति पात ही होता है जो हमें अपने बड़ो से मिलता है.और कुछ नादान बाहर बाबा जी के पास शक्ति की तलाश करते है. आज की पोस्ट रैकी का सरल अभ्यास में सिर्फ इतना ही बताना मेरा उद्देस्य है की अपने घर में जब ऊर्जा की तलाश पूरी कर सकते है तो बाहर क्यों. अपने बुजुर्गो का आदर करे और सम्मान दे उनकी दुआ में जो शक्ति है वो आपका असली सुरक्षा कवच होती है.

जरा सोच के देखे आपकी माँ आपके पापा आपके दादा, दादी जब भी आपको मिलते है तो आप चाहे उनके पैर छुए या नहीं मगर उनका हाथ आपके सर पर जरूर फेरते है.करके देखे उनकी दुआ ले और अपनी ज़िन्दगी में बदलाव महसूस करे.

स्वंय को शक्ति पात

  1. सुबह ध्यान से उठने पहले, अपने दोनों हाथ जोड़ परमपिता परमात्मा को प्रणाम करे, फिर उन दोनों हाथो को थोड़ी दूरी पर रखे और भावना करे की ध्यान से उत्पन उर्जा हाथो में आ रही है।
  2. लगभग एक या दो मिनट में आपको दोनों हाथो से उर्जा निकलती स्पष्ट महसूस होगी और वो उर्जा दोनों हाथो के बीच इकठी हो जाएगी। यह प्रयोग मेने स्वय करके देखा है। उर्जा जो हमें महसूस होती है अगर उस वक्त कोई दूसरा व्यक्ति भी हमारे दोनों हाथो के बीच से अपना हाथ गुजारेगा तो वो महसूस कर सकेगा।
  3. अब आप एसा महसूस करने लगे तो अपने दोनों हाथो को आज्ञा चक्र पर कुछ दुरी पर ले आये, वो उर्जा आपके चक्र को जाग्रत करने में सहयता करेगी।
  4. प्रतिदिन ऐसा करे, आप देखेगे की हर दिन उर्जा बदती जा रही है। यह आपकी प्रगति का संकेत है। तो जैसे-जैसे ऊर्जा बढ़ती जाए आप दोनों हाथो के बीच का स्पेस बढ़ाते जाए, इससे आप को मालूम हो सकेगा की आपकी उर्जा कितनी दूर तक से हीलिंग कर सकती है। और फिर उसी तरह से चक्र जागरण में इसे लगाए।
  5. फिर आप देखेगे की दिन में बस आपकी इच्छा मात्र से उर्जा आपके हाथो में आने लगी है। उस उर्जा से आप किसी भी रोग की हीलिंग भी कर सकते है। दोस्तों यह हे स्वम् को शक्ति पात | आपने देखा होगा हम किसी देवी देवता या महात्मा की तस्वीर में उसके हाथ से निकलती उर्जा को वो इसी बात का प्रतीक है।

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आध्यात्म एक रहस्य

इश्वर ने हमें हर तरह से परिपूर्ण करके भेजा है। स्वंय के लिए हमें किसी दुसरे की शक्ति पात की आवश्यकता नहीं। आज के समय में अनेक लोगो ने रैकी का सरल अभ्यास और शक्तिपात के नाम पर अपनी दुकाने खोल रखी हे व् level के हिसाब से पैसे लेते है। दोस्तों आज आध्यात्म एक रहस्य इसी लिए बन गया हे की कोई गुर देना नहीं चाहता, यह एक सचाई है।

मेने जब यह उर्जा महसूस की तो इसके द्वारा मेने दो लोगो को भी हीलिंग की और उन्होंने भी यह उर्जा को महसूस किया धीरे धीरे आपकी उर्जा का दायरा बढता जायेगा। आपको किसी से रैकी लेने की आवश्यकता नहीं और ना ही किसी तरह के शक्तिपात की लालसा किसी दुसरे से रखने की जरुरत है। जब आप सहज यह कर पाए तो इससे आपने साथ किसी दुसरे को भी अध्यात्म मार्ग के लिए प्रेरित करे।

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अंतिम शब्द :
दोस्तों ये थी रैकी का सरल अभ्यास और शक्तिपात की कुछ जानकारी जिसमे हमने कोशिश की है की किस तरह हम खुद ही अपनी समस्याओ से निवारण पा सके। आज की पोस्ट में सेतु विक्रम सर जो हमारे आदरणीय और नजदीकी जानकार है का अमूल्य योगदान है। सेतु विक्रम सर की पुस्तके आप पीडीऍफ़ में डाउनलोड भी कर सकते है। इनका ध्यान और स्वयं समस्या निवारण में काफी गहरा जानकारी है। ध्यान, रैकी, और चक्र / कुंडलिनी हीलिंग के लिए आप उन्हें संपर्क कर सकते है।

2 COMMENTS

    • आप इसे प्रैक्टिकल कर सीख सकते है सर. कोई जरुरी मदद चाहिए तो आप हमें बताइए

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