क्या आप जानते है की त्राटक और सम्मोहन में प्राण वायु का क्या महत्व और फायदे है – advanced tips

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pran shakti healing

pran shakti healing यानि प्राण वायु का महत्व हमारे जीवन में क्या है ? और प्राण वायु ऊर्जा योग कैसे काम करता है। प्राण शक्ति कैसे काम करती है इन सबके बारे में जानने से पहले हमें प्राण वायु को समझना बेहद जरुरी है। प्राण वायु हमारे वातावरण में फैली वो वायु है जो हर प्राणी और जीव द्वारा ग्रहण की जाती है। प्राण वायु मतलब जीवनदायनी शक्ति जो हमें जीवन की गतिविधि करते रहने की शक्ति प्रदान करती है।

pran shakti healing

Life energy और prana वायु दोनों अलग शब्द है। प्राण वायु हमारे वातावरण में फैली वायु है जब वो जीवो द्वारा ग्रहण की जाती है तब शारीरिक क्रियाओ द्वारा ( स्वांस प्रक्रिया ) उसे प्राण ऊर्जा में बदल दिया जाता है। ये बिलकुल वैसे ही है जैसे अन्न को टुकड़ो में बदलकर उनके अंदर की ऊर्जा को शरीर में ग्रहण करना। इसलिए प्राण वायु का महत्व हमारे जीवन का आधार है।

प्राण वायु को प्राण ऊर्जा में बदलने के हमें कई फायदे है। जो अलग अलग जगह और अभ्यास में हमें अलग अलग benefit पहुंचाते है। इसलिए हम कह सकते है प्राण वायु हमारे जीवन का आधार तो है ही ये हमें दुसरो से ज्यादा खास भी बनाती है जितनी हमारे अंदर प्राण की मात्रा होगी हम उतना ही active रह कर कार्य कर सकते है।

pran shakti healing का महत्व हमारे जीवन में :

हम दिनभर जो गतिविधि करते है उसके लिए जो ऊर्जा चाहिए उसमे हमें 3 माध्यम द्वारा ऊर्जा मिलती है। पहली भोजन द्वारा, दूसरी जल द्वारा और तीसरी वायु द्वारा। हमारा शरीर सबसे ज्यादा ऊर्जा वैसे तो भोजन द्वारा ग्रहण करता है लेकिन अगर बात की जाये अनवरत ऊर्जा के उत्पादन की तो हमारे साँस की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा ऊर्जा ग्रहण की जाती है।

ये ऊर्जा हमें दिन-भर के काम करने की शक्ति देती है। प्राण वायु का महत्व हमारे life के physical, psychic और spiritual स्तर पर है। हमारे शरीर में जितनी ज्यादा प्राण वायु से ऊर्जा का निर्माण होगा हम उतना ही ज्यादा चुस्त महसूस करेंगे और इसकी कमी से ही हम खुद को कमजोर और उत्साह-हीन महसूस करते है।

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प्राण वायु से प्राण ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया :

हम सभी जानते है की भोजन ग्रहण करने और साँस लेने की प्रक्रिया में हम जीवन जीने के लिए ऊर्जा ग्रहण करते है। जैसे अन्न ग्रहण करते समय हमारे शरीर की आंतरिक क्रियाए अन्न में से ऊर्जा को अलग कर लेती है वैसे ही साँस लेने के प्रक्रिया में हम प्राण वायु में से ऊर्जा को अलग करते है और बाकि बची हुई वायु जो प्राण विहीन होती है उसे बाहर कर देते है। हमारा शरीर खुद इस क्रिया को अनवरत करता रहता है लेकिन क्या इतनी प्राण वायु हमें प्रयाप्त है ?

pran shakti healing –  प्राण उर्जा के अलग अलग रंग और उनका महत्व

लाल प्राण -यह गर्म है, सुदृढ़ीकरण, विशाल, विस्फारित, वितरण, रचनात्मक, उत्तेजक, को सक्रिय करने और यह भी सम्हालता भौतिक शरीर.

नारंगी प्राण – यह खदेड़ने है, को नष्ट करने, decongesting, सफाई, बंटवारे, विस्फोट और विनाशकारी.

हरित प्राण – इस रंग प्राण decongesting है, सफाई, detoxifying के, जिले को संक्रमण और भंग.

पीला प्राण – यह जोड़नेवाला है, आत्मसात और शुरुआत.

नीले प्राण – इसे शुद्ध करना है, बाधा, करार, सुखदायक, कूलिंग और लचीला.

वायलेट प्राण –  यह ऊपर के सभी गुण शामिल हैं रंग जिसको उल्लेख किया. हल्के जामुनी एक regenerating प्रभाव पड़ता है. यह भी रंग जिसको के सभी गुणों पर एक गुणक प्रभाव पड़ता है.

इलेक्ट्रिक बैंगनी प्राणिक ऊर्जा – इलेक्ट्रिक बैंगनी प्राण या उच्च से उच्चतर आत्मा स्वयं प्राप्त किया जाता है और यह “परिधि पर हल्के जामुनी के साथ शानदार सफेद” के रूप में प्रकट होता है. यह दैवी शक्ति रूप में भी जाना जाता है या आध्यात्मिक ऊर्जा. यह सामान्य वायलेट प्राण से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली है और इसमें अन्य रंग जिसको के सभी गुण है. एक चेतना अपनी खुद की इलेक्ट्रिक बैंगनी प्राणिक ऊर्जा है.

गोल्डन प्राणिक ऊर्जा – जब इलेक्ट्रिक बैंगनी ऊर्जा साथ संपर्क में आता है etheric शरीर, गोल्डन प्राण में और स्वर्ण प्राण यह प्रकाश में लाल हो जाता है शरीर द्वारा अवशोषित हो जाती है, जब यह पता चला है. गोल्डन प्राण के गुण इलेक्ट्रिक बैंगनी ऊर्जा के लिए लगभग समान होते हैं परंतु यह मामूली और कम fluidic है.

यह ऊर्जा Taoist योग में ‘स्वर्ग की”रूप में जाना जाता है, “स्तंभ प्रकाश की’ दासता में, ‘वंश की पवित्र आत्मा”ईसाई धर्म और ‘antahkarana’ में या भारत में प्रकाश की आध्यात्मिक पुल.

pran shakti healing की कमी से होते है ये नुकसान :

हम अपने दिन भर हजारो विचार अपने मन में सोचते है जो हमारे किसी काम के भी नहीं होते है। प्राण ऊर्जा को सबसे ज्यादा क्षय अगर किसी से होता है तो वो है हमारे फालतू के विचारो से दूसरा आजकल प्राण वायु इतनी शुद्ध नहीं रही जितनी होनी चाहिए। इन सबका प्रभाव हमारे जीवनशैली पर पड़ रहा है जिसकी वजह से हम ना तो खुद को Active महसूस कर सकते है ना ही किसी कार्य में अपना 100% दे सकते है। इसलिए प्राण वायु का महत्व समझना बेहद जरुरी है।

हम दिन भर जो सोचते है वो पूरा नहीं होता है या फिर हम सोचते है, कुछ प्रयास करते है पर फिर उत्साह की कमी की वजह से कार्य को बिच में ही छोड़ देते है। इसका नुकसान शारीरिक नहीं मानसिक होता है। धीरे धीरे हम जो भी काम करने लगते है वो पूरा कर ही नहीं पाते है। जैसे कुछ लोगो की आदत है किसी भी काम को करने से पहले कसम खाने की या संकल्प लेने की। अब अगर वो उसे पूरा नहीं करते है तो उन्हें लगता है की हमें कोनसा इसके बदले दंड मिलेगा। कसम तो होती ही है टूटने के लिए। इसलिए प्राण वायु के महत्व को और उसके क्षय कभी नजरअंदाज ना करे।

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संकल्प का सीधा असर पड़ता है अवचेतन मन पर

लेकिन क्या आप जानते है इसका सीधा प्रभाव आपके Subconscious mind पर पड़ता है। क्यों की आप खुद से अगर झूठ बोलेंगे तो आपका अवचेतन मन फिर कभी आपका विश्वास नहीं करता है। इन सबके पीछे का विज्ञान बहुत गहरा है जिसके बारे आपको अगली कुछ पोस्ट में जानने को मिलेगा। फ़िलहाल आप इतना जान लीजिये की हम खुद से किये वायदे से या संकल्प को तोड़ते है और प्रयास बिच में ही छोड़ देते है तो इसका प्रत्यक्ष नुकसान हमें मानसिक रूप से झेलने पड़ता है।

जिसके परिणामस्वरूप आप बाद में कुछ भी काम करना चाहो आपका मन नहीं मानेगा वो खुद ऐसे हालात पैदा कर देता है की आप उसे बिच में छोड़ दो। इसलिए इन सबसे बचने के लिए हमें प्राण ऊर्जा को collect करने पर ध्यान देना चाहिए जिससे हमारे अंदर excitement बना रहे। इसके हमें दो फायदे होंगे पहला हमारे अंदर उत्साह बना रहेगा दूसरा हमारा मन स्थिर रहेगा तो प्राण का क्षय कम से कम होगा और अगर हम कोई काम करते है तो हम उसे पूरा समय दे पाते है। प्राण वायु मुद्रा का भी हम प्रयोग कर ध्यान में प्राण वायु का महत्व समझ सकते है।

Life energy को कैसे स्टोर करे ज्यादा से ज्यादा :

प्राण ऊर्जा हमारे शरीर द्वारा उत्पन की जाती है। हमारा शरीर बिना रुके प्राण ऊर्जा का निर्माण करता रहता है हम रात्रि को सोते है उस वक़्त भी लेकिन उस दौरान हमारा शरीर जितनी भी प्राण ऊर्जा को संगठित करता है दिन भर की activity में हम उसे नष्ट कर देते है specially फालतू विचारो में। हमें चाहिए की हम अपने आप को स्थिर रखना सीखे और विचारो पर जितना हो सके नियंत्रण बना ले। पंच प्राण हमारे प्राण वायु पर आधारित है और प्राण वायु का महत्व उनमे सबसे ज्यादा है।

pran shakti healing कहा कहा काम आती है :

आपने महसूस तो किया ही होगा की कुछ लोग आसानी से दुसरो को अपनी ओर आकर्षित कर लेते है। ये लोग प्राण से भरे होते है। इसकी वजह से उनमे निम्न बाते ओरो से बेहतर मिलती है।

  • वो आपसे बेहतर तरीके से व्यव्हार करते है।
  • शांत सौम्य और विवेकशील होंगे।
  • अपने विचारो को नियंत्रण में रखते हुए आपको ज्यादा से ज्यादा सुनते है और उनके चेहरे पर ऐसा तेज होता है की आप खुदबखुद अपने सारे राज उनसे शेयर करने लगते है।

इसके अलावा pran shakti healing सम्मोहन, त्राटक और ध्यान में काम आती है अगर आप इन में से किसी भी क्षेत्र में अभ्यास कर रहे है तो आपको सबसे पहले प्राण पर ध्यान देना होगा आपने सुना तो होगा ही की ज्यादातर लोगो को स्वांस पर नियंत्रण की सलाह दी जाती है। वो इसलिए क्यों की स्वांस के साथ ही हमारे विचार नियंत्रित होते है और उसके नियंत्रण से हम बेहतर प्राण ऊर्जा का निर्माण कर सकते है।

अगली पोस्ट में हम pran shakti healing का त्राटक, सम्मोहन और ध्यान में क्या महत्व है और कैसे काम आती है पर खुल कर चर्चा करेंगे। अगर आपको आज की पोस्ट प्राण वायु का महत्व पसंद आयी हो तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये।

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2 COMMENTS

  1. Pranam,
    Mai aapse puchna chahta hun ki aapne kal gyan mantra aapke blog par diya hai. Apka bahot dhanyawad. Is mantra path mein kya ‘amukasy’ ki jagah padhne wale ka nam lena hai? 3/4 jahaho par ye shabd aya hai. Krupaya margadarshan karen.
    Dhanyawad

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