काश मेरे पास भी सुपर पावर्स होती तो में लोगो की help कर पाता ऐसा सोचने वाले इसे पढ़े – आत्म-मंथन

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शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी

क्या कभी आपके मन में आया है की काश मेरे पास यह पावर्स होती तो में ये काम आसानी से कर पाता और दुसरो की मदद कर सकता. हमारे मन में इस तरह के ख्याल आना सामान्य बात है क्यों की हम अभी उस स्थिति में नहीं है. लेकिन क्या वास्तव में हम जब कुछ पा लेते है तो दुसरो की मदद करने जैसे ख्याल ही आते है. लेकिन वो लोग भूल जाते है की शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी और विस्तार होता है सोच के दायरे में. हम सभी कल्पना करते है शक्तिवान बनने की लेकिन जिम्मेदारिया कोई नहीं लेना चाहता है. क्या कलयुग में भी सतयुग और त्रेतायुग जैसी शक्तिया हासिल करना संभव है ?

शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी

आज हमारे वातावरण में एक अदृश्य कवच बन चूका है जो सात्विक शक्तियों से हमें दूर करता जा रहा है. सिर्फ यही नहीं आज हमारा शरीर और मन भी उन युगों की तरह सबल नहीं है ऐसे में हम कैसे उम्मीद कर सकते है की हमें वो पावर्स मिल जाए जो एक कमजोर शरीर के लिए बंदर के हाथ में उस्तरा थमाने जैसा है. हमारा शरीर इस काबिल नहीं है, हमारा आत्मबल कमजोर पड़ चूका है और हम सपने देखते है शक्तिवान बनने के बिना किसी मेहनत के तो ऐसा संभव कैसे हो सकता है आप खुद सोच कर देखे.

शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी

सिर्फ शक्ति हासिल करने से कुछ नहीं होता है. इंसानी प्रकृति है उसे जब तक कोई चीज मिल नहीं जाती है वो उसे लेकर हमेशा उत्सुक रहता है. एक बार उसे वो हासिल हो गई तो उसकी या तो क़द्र नहीं कर पाता है या फिर गलत हरकत की वजह से खो देता है. हमारे पास अक्सर कई ऐसे सवाल आते है जैसे की

  • सर में वशीकरण सीख कर लोगो की help करना चाहता हूँ.
  • इतनी सारी पारलौकिक शक्तिया है और फिर भी किसी काम की नहीं ऐसा क्यों.
  • हिमालय में मौजूद साधू संत तप में लगे है उनके पास अगर शक्तिया है तो उनसे लोगो की मदद क्यों नहीं करते है.
  • शक्तिमान जैसी शक्ति मेरे पास आ जाये तो में संसार को बदल कर रख दू.

ये सवाल उन लोगो के आते है जिनका मन चंचल है, शक्ति पाने का सोच रखते है लेकिन उन्हें इसकी झलक भी नहीं मिली है. आप सब की तरह मेरे मन में भी इस तरह के सवाल आते थे. हमेशा कोई ऐसा प्रोग्राम देख कर जिसमे किसी व्यक्ति के पास ढेरो शक्तिया होती है और वो लोगो की help कर रहा होता है. उसे देख कर मन में आना स्वाभाविक है की काश में भी ऐसा कर पाता.

मान भी लेते है की आपको कुछ समय के लिए ऐसी पावर्स मिल जाती है जिससे आप जो चाहे वो कर सकते है, क्या आप लोगो की help करेंगे? क्या वाकई लोगो को आपकी मदद की जरुरत थी या है और इस बात की क्या गारंटी है की वो इसे सिर्फ अपने अच्छे कर्म के लिए ही काम में ले. हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है. शक्ति का अहम् किसी को भी ऐसी हरकत करने के लिए मजबूर कर सकता है लेकिन आध्यात्म में ऐसा नहीं है.

हर किसी को गुजरना पड़ता है इस स्थिति से

आध्यात्म अच्छे से जानता है की शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी और ऐसा करने के लिए हमें स्थिर होना बेहद जरुरी है. जो व्यक्ति आध्यात्मिक स्वरूप में साधना में लगा रहता है उसके पास शक्तिया आती जाती है. लेकिन उनका चित शांत और स्थिर होने की वजह से वो उसे आसानी से अपने अन्दर समाहित कर रखते है बिना उससे प्रभावित हुए.

हर कोई इस परिस्थति से गुजरता है लेकिन जब हम इस स्थिति में आते है हमारे सोचने का नजरिया ही बदल जाता है. इसकी वजह है हमारे सोचने में बदलाव. एक और जहाँ हम किसी बात के मतलब और वजह को एक ही reason से जोड़ से कर देखते थे अब हम अच्छे से समझने लगते है की जो हो रहा है वो सही है.

शक्ति हासिल करना बड़ी बात नहीं है, उनके वेग को संभाल पाना मुख्य है. हम आज भी चाहे तो उन शक्तियों को प्राप्त कर सकते है जिनमे पुरे यूनिवर्स को बदलने की क्षमता है. लेकिन शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी और इसकी वजह से हम जब हर बात को अच्छे से समझना शुरू कर देते है तो उसका प्रयोग हर कही, हर किसी पर करने की सोचना बंद कर देते है.

आज भी है वो शक्तिया

प्राचीन समय में ऐसी शक्तियों का जिक्र मिलता है जिनसे हम बड़े बड़े काम कर सकते थे. ब्रह्माण्ड में वो हर शक्ति आज भी विचरण कर रही है जिसका आप जिक्र सुनते आये है लेकिन उन्हें जाग्रत करने के लिए खुद का संधान करना भी आवश्यक है. जब तक हम इस लायक नहीं होते की शक्तिया अपना चुनाव खुद करे हम उन्हें नहीं पा सकते. हम सबको सिर्फ शक्ति के बारे में पता है लेकिन शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी इसका क्या ?

अगर आप सोचते है की आपको दिव्य शक्तिया मिल गई तो आप लोगो की help करने लगोगे तो ये सही नहीं है. जरुरी नहीं की जो सोच आपकी आज है वो आगे भी रहे. साधना से सिर्फ शक्ति ही नहीं मिलती है संयम और धेर्य भी मिलता है. हम सोच समझकर काम करने लगते है और इसकी वजह से वही करते है जो जरुरी होता है.

law of nature or law of universe

आपको लगता है की आज लोगो की बेवजह मौत हो रही है और अगर आपके पास कोई शक्ति होती तो आप आसानी से उस समस्या को टाल सकते, लेकिन ऐसा होना जरुरी नहीं. कोई भी बेवजह नहीं मारा जा रहा है, प्रकृति का जब जब हनन हुआ है उसने कुदरत के कहर से खुद को लोगो से बचाया है. उदाहरण के लिए हम सभी जानते है की इस साल केरल में काफी बड़ा कुदरती विनाश हुआ है. कश्मीर में होता रहता है क्या ये सब कुदरती है ?

केरल में पिछले कुछ समय से लोगो ने गाय और बेजुबान बछड़ो की निर्मम हत्या कर उनका बीफ खाया था. ये सब उन्होंने सरकार का विरोध जताने के लिए किया. विरोध करने के लिए इस तरह के तरीके अपनाना बेहद घटिया काम था. उस वक़्त हमारे अन्दर बार बार ये आवाज आती थी की गायो और बेजुबान जानवरों पर हो रहे इस अत्याचार को हम जरुर रोकते अगर हमारे पास कोई पॉवर होती तो. खैर वक़्त बिता और वही केरल इस साल कुदरत के विनाश का कहर देख रहा था.

ये सब कोई बाढ़ नहीं थी, उन बेजुबान जानवरों की हाय थी जो इस ब्रह्माण्ड में पल पल गूंज रही थी. वक़्त के साथ प्रकृति ने अपना बदला लिया. ज्यादातर लोग इस बात से इंकार करते है की केरल में आई बाढ़ का पिछले सालो में हुए जानवरों पर अत्याचार से कोई लेना देना नहीं है लेकिन वास्तविकता को आध्यात्मिकता के नजरिये से देखा जाए तो ऐसा होना संभव है. ऐसे में अगर आप अब भी नहीं समझे की शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी तो आप खुद इसका अनुभव करने की कोशिश करे.

शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी का मेरा अपना अनुभव

में भी आप सब की तरह साधारण हूँ. शुरू से मुझमे जूनून रहा था की कुछ शक्तिया हासिल की जाए और लोगो की help करे. बचपन से मुझे दादा जी का मार्गदर्शन मिला और उनके साथ रहकर मैंने इसकी शुरुआत की लेकिन जब मैंने अनजाने में ही शक्ति का प्रयोग सिर्फ प्रदर्शन में, दिखावे के लिए कर दिया तो शक्तियों ने भी साथ छोड़ दिया. जरुरी नहीं की शक्तिया कोई बड़े स्तर की हो. आपका आत्मबल, आपका व्यक्तित्व और आपका अंतर्मन ये सभी शक्तियों से बढ़कर है.

जब मेने शक्तियों के करीब होकर उन्हें खो दिया तभी मुझे समझ आया की शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी और बढ़ता है सोच का सोच का दायरा. अगर हम इसे ऐसे ही इस्तेमाल करने लगते है तो ये साथ छोड़ देती है. यही वजह है की आज भी पवित्र संत अपने आध्यात्मिक यात्रा में लगे हुए है. उनके लिए आज संसार में जो परिवर्तन हो रहे है उनके पीछे इन्सान खुद है. अगर छोटी छोटी बातो से प्रभावित होकर वो हमारे बिच आने लगे और मदद करने लगे तो खुद को स्थिर रख ही नहीं पाएंगे.

शक्ति के साथ आती है जिम्मेदारी अंतिम शब्द

इस पोस्ट में मेरे अपने विचार है. अगर आपको लगता है की इसमें कुछ त्रुटी है तो अपने विचार कमेंट में शेयर करे. आज की पोस्ट के माध्यम से मै लोगो में सिर्फ यही सन्देश देना चाहता हूँ की शक्तियों के पीछे मत भागो, मन को साधो शक्तिया अपने आप आएगी. जब शरीर इस काबिल होगा की शक्ति उसमे विचरण कर सके तो आपको शक्तिवान बनने से कोई नहीं रोक सकता. उम्मीद करता हूँ जिन लोगो को लगता है की उन्हें शक्तिया मिलनी चाहिए थी उनके मन में कुछ तो स्थिरता आई होगी.

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3 COMMENTS

  1. नमस्ते गुरुजी
    मै दीपक त्राटक करता हु .और इन दिनोमे त्राटक करता हु तो दीपक मे सात प्रकाश के साथ दीपक मे vibretion अनुभवहोता है इसका मतलबक्या है,और आगे चालू कैसे रखे,कृपया मार्गदर्शनकरीये.

    • दीपक की लौ में कम्पन होता है सिर्फ इस आधार पर आपको जानकारी दे पाना संभव नहीं है सर. दीपक की लौ में कम्पन के समय आपके मन की स्थिति कैसी है वह भी बताये ताकि सही सलाह दी जा सके.

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