इन top 5 padmavati film vivad की वजह से karni sena इसका virodh कर रही है

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padmavati film ka virodh

पूरा देश इस वक़्त padmavati film ka virodh कर रहा है ऐसा film jodha akbar के बाद दोबारा हो रहा है जब हिन्दू संस्कृति का मजाक बनाया गया है. सिर्फ कुछ पैसो और मनोरंजन के लिए बनी dipika padukon की इस padmavati film ka virodh sanjay leela bhansali के साथ किया जा रहा है. इस film का virodh करने की वजह बहुत सी है लेकिन अब वक़्त आ गया है की हम सब ऐसे मुद्दों पर अपना मत रखे. चलिए जानते है आखिर क्यों dipka padukon को लेकर नाक काटने का फरमान जारी हुआ है . जानते है padmavaati film से jude top 5 vivad जिनकी वजह से padmavati film ka virodh किया जा रहा है.

padmavati film ka virodh

पिछले कुछ समय से दीपिका पादुकोण की अपकमिंग फिल्म पद्मावती को लेकर पुरे देश में करणी सेना ने काफी बड़े स्तर विरोध छेड़ रखा है।  दीपिका पादुकोण की इस फिल्म पद्मावती का इतना विरोध क्यों हो रहा है इसके पीछे की असली वजह क्या है ? कोई नहीं जानता की आखिर क्यों इस वक़्त हिन्दू धर्म में एक जाति और समाज वर्ग इतना आक्रोशित हो रहा है ? ये सवाल वैसा ही है जैसे कोई आपके घर घुस कर आपकी माँ और बहन पर गन्दी नजर डाले और विरोध करने पर बोले की इतने आक्रोशित क्यों हो रहे है।

सबसे पहले जान लेते है की महारानी पद्मावती कौन थी और उनका इतिहास क्या है ?

रानी पद्मावती का इतिहास :

Rani padmavati ka itihas hidni me रानी पद्मावती मेवाड़ की महारानी थी। माना जाता है की सन 1303 में उन्होंने सम्मान बचाने के लिए जौहर किया था। मालिक मोहमद जैसी ने 1540 में पद्मावत लिखी। इससे पहले भी  छिताई चारित, कवी बैन की कथा गोरा बादल में भी इनका जिक्र हुआ है।

1958 में दुर्ग पर बने विजय स्तम्भ के पास पुरातत्व विभाग को खुदाई में राख, हड्डिया और चूडिया मिली थी जो जौहर की सच्चाई को बयान करने के लिए काफी है। जाँच के बाद वो स्थल जौहर स्थल घोषित भी किया गया।

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padmavati film ka virodh – पद्मावती फिल्म से जुड़े कुछ खास विवाद :

ऐसे कई विवाद है जिनकी वजह से ये film रिलीज़ होने से पहले ही virodh का सामना कर रही है. कई ऐसे विवाद है जिनकी वजह से karni sena dipika padukon की इस film padmavati को release ही नहीं होने दे रही है. padmavati film से jude top 5 vivad जिनकी वजह से इसका virodh इतने व्यापक स्तर पर किया जा रहा है.

विवाद 1 : क्या हकीकत में पद्मावती रानी थी ?

हां क्यों की अगर वो महज कल्पना होती तो 1958 की खुदाई में उनके सबूत नहीं मिलते। रानी पद्मावती के जौहर के बाद 1540 में मालिक मोहमद जायसी ने पद्मावत लिखी। इसके अलावा भी कई सबूत और वर्णन है।

विवाद 2 : क्या जैसी ने हकीकत के साथ कल्पना जोड़ी

ये थोड़ा विवाद वाला मामला है क्यों की कुछ लोगो के अनुसार खिलजी ने रानी माँ पद्मावती को देखने की इच्छा जाहिर की और उन्होंने मना कर जौहर कर लिया था। वही कुछ लोगो के अनुसार खिलजी को रानी पद्मावती ने सिर्फ आईने में अपने अक्ष दिखाया था कुछ लोगो के अनुसार ये कांच वाली बात कल्पना लगती है लेकिन उस टाइम कांच की जगह शाइन मेटल इस्तेमाल किया गया था।

विवाद 3 : खिलजी हीरो था या नहीं ?

दीपिका पादुकोण की फिल्म में पूरी कहानी सिर्फ खिलजी और पद्मावती के इर्द गिर्द घूमती है।  खिलजी को फिल्म में जिस तरह से दर्शाया गया है वो गलत है क्यों की इससे उसकी इमेज हीरो वाली बनती है।

विवाद 4 : घूमर और पद्मावती सम्मान या नृत्य :

फिल्म में दीपिका पादुकोण को घूमर करते हुए दिखाया गया है की राजपूती शान के ये बिलकुल खिलाफ है और एक रानी इस तरह खुले में नृत्य नहीं कर सकती।

विवाद 5 : अगर फिल्म में कुछ भी गलत नहीं है तो फिर इसे वर्ग विशेष के खास लोगो को दिखाने से डर क्यों ?

संजय लीला भंसाली ने प्रॉमिस किया था की फिल्म में कुछ भी गलत नहीं होगा, किसी भी तथ्य से छेड़-छाड़ नहीं होगी। यही नहीं ये भी बताया जा रहा है की जब जयपुर में सेट पर तोड़ फोड़ हुई थी और मारपीट की गई तब भंसाली ने फिल्म को रिलीज़ करने से पहले करणी सेना प्रमुख के खास लोगो को फिल्म पहले दिखाने की बात की थी ताकि वो सुनिश्चित कर सके की फिल्म में कुछ भी गलत नहीं है। अब भंसाली उस वादे से मुकर रहे है तो लोगो में आंदोलन जाहिर सी बात है।

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पद्मावती की पहचान और चरित्र दीपिका पादुकोण की फिल्म में क्या है

maharani paadmavatiदिसंबर के महीने में रिलीज़ होने वाली दीपका पादुकोण की इस फिल्म का ट्रेलर देख कर कुछ लोगो का कहना है की इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन लोगो से एक छोटा सा सवाल क्या गारंटी है की इस फिल्म को बिना किसी मसाले के बनाया गया है। आज एक भी ऐसी फिल्म नहीं जिसमे हिन्दू धर्म का मजाक ना बनाया गया हो, या फिर सूफी अंदाज को महत्त्व और पाक ना बताया गया हो। में मुस्लिम धर्म का विरोध नहीं करता लेकिन आज यही हालत है की हमें एक आध्यात्मिक भजन की जगह सूफी संगीत सुनने में ज्यादा आनंद आता है। जब की 80-20 के दौर में गुलशन कुमार के भजन हमें रोमांच और आस्था से भर देते थे।

आखिर कब बंद होगा ये जब एक हिन्दू को आप हिन्दू को उसी के धर्म का मजाक बना के दिखाते है और वो मनोरंजन के तौर पर देखता भी है लेकिन क्या आपको पता है यही मनोरंजन वक़्त के साथ उसे अपने धर्म से दूर कार रहा है। आज किसी को शायद ही पता हो की महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी और देश के लिए जान देने वाले भगत सिंह कौन थे कोई पूरी तरह से शायद ही जानता है। जब की महात्मा गाँधी सबके आदर्श है, अकबर सबसे महान है तो ये लोग कौन थे ? padmavati film ka virodh करने के पीछे करणी sena समाज को यही सन्देश देना चाहती है की अब वक़्त आ गया है हमें खुलकर virodh करना होगा.

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padmavati film ka virodh – इस फिल्म का ही इतना विरोध क्यों ?

इस फिल्म को लेकर राजपूत और करणी सेना समाज अपना विरोध बुलंद कर रहे है। जो इस फिल्म को लांच कर रहा है या ट्रेलर दिखा रहा है वहा इसे बंद करने को कहा जा रहा है। कुछ लोग इसे गलत  निंदनीय बता रहे है। ऐसा क्यों हो रहा है की एक हिन्दू ही दूसरे हिन्दू का विरोध कर रहा है। इसकी एक वजह वक़्त के साथ बढ़ता आरक्षण और हमें पढ़ाया जाने वाला इतिहास है।

हमें हमेशा ये पढ़ाया गया की अकबर कौन थे, भारत पर किस किसने राज किया और हम कितने गुलाम बने रहे। क्या किसी किताब में हमारे प्राचीन भारत का जिक्र है जो सोने की चिड़िया कहलाता था। हमने बस सुना है की हमारा देश एक टाइम सोने की चिड़िया था लेकिन कैसे ? कौन जानता है कोई नहीं ! ऐसा क्यों ? हां इसकी बजाय हम कब से लेकर कब तक गुलाम बने रहे है ये सबको पता है।

कुछ ऐतिहासिक तथ्य जो इस ओर ही इशारा करते है

आपको याद हो तो एक समय में गुलशन कुमार हिंदी बॉलीवुड की जान थे। ऐसी कोई ही फिल्म होगी जिसमे उन्होंने अपने भजन न दिए हो। वक़्त के साथ बताया जा रहा है की उनकी एक साजिश के तहत हत्या कार दी गई, अब किसी फिल्म में भजन या आध्यात्मिक गाने की कोई जगह नहीं हां भगवान्  मजाक बनाया गया हो ऐसी कई फिल्मे आपको याद होगी।

इसकी सबसे बड़ी वजह भी हम सब है क्यों की हमें ये भी पता नहीं है की प्राचीन भारत के लोग अपने घर में गोबर का लेप क्यों करते थे, रंगोली क्यों बनाते थे या फिर जिस तरह से वो रहते थे क्यों रहते थे ? हर चीज का विज्ञान है जिसे सब समझ चुके है सिवाय हम सब के।

वक़्त के साथ हिंदी फिल्म जगह से आध्यात्मिक महत्व गायब हो गया, हिन्दू देवी देवताओ और ऐतिहासिक तथ्यों का मजाक बनाया गया लेकिन क्या किसी ने मुस्लिम धर्म के ऊपर फिल्म बनाई जिसमे मजाक बनाया गया हो।

क्या इस फिल्म को लेकर हमें अपना मत रखना चाहिए

बेशक ! इसमें कोई शक नहीं की एक फिल्म बने और उसमे मसाला ना परोसा गया हो। अगर फिल्म बनानी है तो किसी और धर्म या मजहब को निशाना बना कर बनाओ फिर देखो कितनी आसानी से वो फिल्म रिलीज़ होती है।यही वजह है की padmavati film ka virodh किया जा रहा है जो की सही भी है. सिर्फ padmavati film ka virodh ही नहीं इससे पहले भी jodha akbar को लेकर virodh किया जा चूका है लेकिन film बनाने वाले नहीं सुधरेंगे .

इससे पहले भी बन चुकी फिल्म जोधा अकबर में क्या ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़-छाड़ नहीं हुई थी। उसका परिणाम है की अगर आज कोई हमसे पूछता है की अकबर कौन था या जोधा कौन थी तो हमें याद रहेगा की जोधा अकबर की पत्नी थी। क्या वास्तव में भी ऐसा ही था। आपको आज कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्यों की इस वक़्त ये आग आपके घर में नहीं आपके पडोसी के है लेकिन जल्द ही आपके घर भी इसी तरह जलेंगे तब कोई आपके साथ खड़ा नहीं होगा।

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सिर्फ हिन्दू समाज पर ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है

हिन्दू वर्ग को निशाना बनाना बेहद आसान है क्यों की हिन्दू वर्ग समाज, जाति के नाम पर अलग थलग थे और है। क्या किसी और धर्म में ऐसा है ? नहीं एक मुस्लिम जो चाहे तेली हो या और किसी भी वर्ग से लेकिन हमेशा अपनी पहचान मुस्लिम बताता है जबकि एक हिन्दू से पूछा जाए तो वो या तो जाति, वर्ग बताएगा या फिर वर्ण कोई नहीं कहता की वो हिन्दू है।

क्या ये शर्म की बात नहीं की हम किस तरह अलग थलग जाति के नाम पर टूटे हुए है। वक़्त हमारे एक होने का है फिर चाहे वो किसी एक वर्ग से विशेष ही क्यों न हो। वक़्त है की हम जाति पाती के नाम से ऊपर उठ कर एकजुट हो। क्यों की जब तक हम अलग अलग है मीडिया और नेता हमेशा हमारा फायदा उठाएंगे।

padmavati film ka virodh – हम इसे लेकर क्या सोचते है

में इस बात के बिलकुल खिलफ हूँ की सिर्फ हिन्दू धर्म को निशाना बना कर फिल्मे बनाई जा रही है। ऐसा नहीं की इस्लाम में पैगम्बर को निशाना बना कर फिल्म नहीं बनाई गई हो लेकिन उसे बैन कर दिया गया है। उसके खिलफ निकाले गए मोर्चे और विरोध सही और जायज बताये गए क्यों की धार्मिक भावना आहत हुई तो फिर अब इतना हंगामा क्यों ? अगर फिल्म में इसी तरह हिन्दू संस्कृति को निशाना बनाया जाता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम सिर्फ नाम के हिन्दू बन कर रह जायेंगे।

dipika padukon upcoming film padmavati ka virodh kyo ho raha h और dipika padukon ki film or sanjay leela bhansali ka virodh kyo kiya jaa raha h. मुझे लगता है की ये विरोध जायज है और हमें इसका विरोध करना चाहिए। में किसी और धर्म के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन अपने धर्म के साथ मजाक भला कोई क्यों पसंद करे। सिर्फ मनोरंजन के लिए हमारी संस्कृति को निशाना बनाना बंद हो। आप अपने मत पोस्ट पर रख सकते है। अगर अच्छा लगे तो शेयर जरूर करे।

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3 COMMENTS

  1. पद्मावती फिल्म के विरोध के ऊपर बहुत साथक लेख लिखा आपने दरसल भारतीय पौराणिक चरित्रों को कमतर या मिथक साबित कर देना गलत हैं |जिस देश को अपने इतिहास पर गर्व होता है वही गौरवशाली भविष्य की दिशा में आगे बढ़ता है |

    • बिलकुल सही कहा आपने अटूट बंधन जी अफ़सोस होता है की हमारे ही धर्म में हमे अपने ही लोगो के virodh का सामना करना पड़ता है.यही सेक्युलर लोग गौरवशाली देश के पतन की वजह बने हुए है.

  2. I don’t know how should I give you thanks! I am totally stunned by your article. You saved my time. Thanks a million for sharing this article.

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