आखिर क्यों में अपने नवोदय विद्यालय से जुड़ी यादो को हमेशा खास पलो में से एक मानता हूँ

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Navodaya vidyalaya के बारे में तो आप जानते ही होंगे. ये ऐसे schools है जो central board का एक हिस्सा है. आम schools से ये बहुत सारे मायने में अलग है. अगर आप भी अपने बच्चो को सही शिक्षा और परवरिश के साथ उन्हें जीवन के संघर्ष के अनुकूल बनाना चाहते है तो आपको navodaya vidyalayaक्या है और इनमे एडमिशन की process क्या है के बारे में जरुर जानना चाहिए. मुझे ये बताते हुए बेहद गर्व होता है की में एक ऐसे परिवार का हिस्सा हूँ जो जात-पात से काफी ऊपर है और सकारात्मक सोच के लिए जाना जाता है साथ ही दुनिया भर के हर हिस्से में नवोदयन ने जो पहचान बनाई है वो बेहद गर्व की बात है.

navodaya vidyalaya

अगर में नवोदय और अपनी लाइफ के अनमोल लम्हों का जिक्र करने बैठ जाऊ तो वक़्त कम पड़ जाएगा क्यों की यहाँ मेने वो सिखा है जो किसी अन्य student को सिखने में काफी साल लग जाते है. नवोदय की सबसे खास बात में से एक है यहाँ जीवन में आपको आत्म-निर्भर बनना सिखाया जाता है. जैसे प्राचीन भारत में गुरुकुल होते थे वैसे ही उन्नत और व्यावहारिक ज्ञान के साथ साथ जीवन में खुद फैसले लेने लायक बनने के लिए आपको अगर सबसे बेहतर जगह कही मिल सकती है तो वो navodaya vidyalayaहै.

Navodaya vidyalaya की स्थापना और इसका इतिहास

जवाहर navodaya vidyalaya अथवा navodaya vidyalaya भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाई जाने वाली पूरी तरह से आवासीय, सह शिक्षा, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली से संबद्ध शिक्षण परियोजना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति – १९८६ के अन्तर्गत ऐसे आवासीय विद्यालयों की कल्पना की गई जिन्हें जवाहर navodaya vidyalaya का नाम दिया गया, जो सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने का उत्तम प्रयास है। इस परीयोजना का प्रमुख लक्ष्य गांव-गांव तक उत्तम शिक्षा पहुचाना है। ये विद्यालय पूर्णतः आवासीय एवं निःशुल्क विद्यालय होते हैं जहाँ विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवास, भोजन, शिक्षा एवं खेलकूद सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। हर जिले में एक navodaya vidyalaya होता है।

शुरू में ये navodaya vidyalaya सिर्फ 2 थे जो जो 31.03.2007 की स्थिति के अनुसार कुल 565 हो गए है. और अब navodaya vidyalaya की तर्ज पर एकलव्य खोले जाएंगे ऐसा बिल पास होने का मुद्दा भी चल रहा है.

Navodaya vidyalaya में एडमिशन 6 class से लेने की वजह

प्राचीन काल में एक बच्चे को जब वो 8-9 साल का हो जाता था उसे गुरुकुल भेज दिया जाता था. ये उम्र को वो पड़ाव होता था जब बाल मन को जिस दिशा में ढाल दिया जाए वो उसी के अनुसार बन जाता है. इसी तर्ज पर जब एक student 5 class पढ़ लेता है तो उस दौरान वो शारीरिक और मानसिक स्वरूप से किसी भी आकार और माहौल में ढलने  के लिए तैयार हो जाता है.

नवोदय में प्रवेश पाने के लिए एक परीक्षा से गुजरना होता है जो चित्र के आगे की स्टेज, गणित और फिर लेख को पढ़कर उसके सवालों के जवाब हल करने से जुड़ी है. अगर आप इस परीक्षा को पास कर लेते है तो आपको नवोदय में एडमिशन मिल जाता है.

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Navodaya vidyalaya ही क्यों ?

हमारा समाज जाति के नाम पर बंटा हुआ है ऐसे में कई ऐसे student होते है जिनके अन्दर पढने का जूनून होता है या फिर वो इसके काबिल होते है लेकिन उनके आर्थिक हालात मजबूत नहीं होते है की उन्हें उनकी काबिलियत के अनूसार ज्ञान मिल सके. ऐसे बच्चो का चुनाव navodaya vidyalaya के लिए परीक्षा के माध्यम से किया जाता है. यहाँ से शुरुआत होती है आपको जाति से ऊपर उठाकर सबके साथ एक जैसा बनने की. navodaya vidyalaya में हर धर्म और जाति से बच्चे पढ़ते है.

यहाँ आपका रहना, खाना-पीना, पढना और खेलना सब एक साथ होता है. जो आपको कभी ये महसूस ही नहीं होने देता की आप किस धर्म से है या जाति से सब यहाँ एक जैसा व्यव्हार रखते है और रहते है. इसके साथ ही यहाँ पर आरक्षण को न के बराबर रखा गया है.

इससे एक बात साबित होती है की अगर आप नवोदय का हिस्सा है तो आप ना हिन्दू है ना ही मुस्लिम ना ही किसी अन्य धर्म का हिस्सा आप सिर्फ और सिर्फ एक राष्ट्र का हिस्सा हो. यही वो बात है जो नवोदय को सबसे अलग बनाती है.

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Navodaya vidyalaya और आपका आत्म-निर्भर बनना

मुझे नहीं लगता की कही और आपको ऐसा माहौल मिल सकता है जहा आपको ना सिर्फ उन्नत ज्ञान मिलता है बल्कि लाइफ में आत्म-निर्भर भी बनना सिखाया जाता हो. यहाँ आपको ऐसी कई आदते बनानी पड़ती है जो की आपको आत्म-निर्भर बनाती है. जैसे की

  • अपने फैसले खुद लेना.
  • अपना काम खुद करना.
  • सबके साथ समाज का हिस्सा बन कर रहना.
  • अपने आसपास के वातावरण को साफ़ रखना.
  • अलग अलग व्यवहार के लोगो के साथ अच्छे से पेश आना.
  • अपनी स्किल को उभारना जो आपकी खूबी है उसे दुसरो के सामने लाना.
  • शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनना.
  • सबसे अहम् दुसरो को उनके शारीरिक रूप से नहीं गुणों को अपनाना.

जब आप 7 साल का सफ़र तय कर बाहर समाज में जाते है तो आप संघर्ष के लिए बिलकुल तैयार होते है जो दुसरे बच्चे अक्सर नही कर पाते है यही वजह है की नवोदयन दुनिया के हर हिस्से में अपनी सकारात्मक पहचान बना रहे है.

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नवोदय से जुड़े खास रोचक fact

  1. navodaya vidyalaya में जाने और वहा से 7 साल बाद बाहर आने दोनों ही मौको पर हमारी आँखों में आंसू होते है और दुःख भी फर्क सिर्फ इतना है की प्रवेश के टाइम घरवालो से दूर रहने का दुःख होता है तो बाहर निकलते टाइम अपनों से बिछड़ने का.
  2. नवोदय एक ऐसे पिंजरे की तरह है जो शुरू में हर पक्षी ( हमें ) बहुत बुरा लगता है लेकिन समय बीतने के साथ हमें इससे इतना प्यार हो जाता है की हम इससे बिछुड़ना ही नहीं चाहते. दुनिया की कोई भी ख़ुशी नवोदय में बिताये पल की बराबरी नहीं कर सकती.
  3. नवोदय में अगर आपको किसी से प्यार होता है तो आपके क्रश को छोड़कर सब को पता चल जाता है. और सबसे खास बात कुछ दोस्त तो इतने कमीने होते है की ना चाहते हुए भी आपके क्रश को purpose करने की हिम्मत बंधा देते है. लेकिन मार खाने वाले टाइम दिखाई नहीं देते. – वैसे ये अब की बात पहले दोस्ती काफी मजबूत थी.
  4. नवोदय में भले ही दुसरो के सामने हम कितना ही अच्छा बन कर रहे लेकिन जो मजा बिखरे हुए रूम में था साफ़ रूम में नहीं. खासतौर से 10 और 12 की वो छुट्टियों के दिन जब सिर्फ 2 class ही रूकती थी.
  5. सुबह की पी.टी. यानि exercise के टाइम आपको 5-10 student तो ऐसे देखने को मिल ही जायंगे जो लडकियों की दौड़ के साथ साथ चक्कर लगायेंगे और इस चक्कर में extra round भी काट लेंगे.
  6. ऐसे बहुत से लोग है जो नवोदय की सुबह सुबह उठने और exercise करने की आदत से परेशान थे लेकिन आज सबसे ज्यादा उसे मिस करते है. क्यों ? पता नहीं.

ऐसे ही ना जाने कितने ही fact है जो आपको नवोदय में देखने को मिल जाएंगे.

नवोदय का हमारी लाइफ में महत्व

देखा जाए तो नवोदय की दिनचर्या हमें इतना मजबूत बना देती थी की हम हर काम को आसानी से बिना किसी परेशानी के कर लेते थे. इससे हमारा स्वास्थ्य फिट रहता था और मानसिक रूप से भी हम मजबूत बने रहते थे. लेकिन 7 साल बाद जब हम बाहर की दुनिया में एडजस्ट होने की कोशिश करते है तो हमें आगे चल कर एक imbalance routine की सबसे बड़ी problem देखने को मिलती है. तब हमें याद आता है की काश हम नवोदय में ही होते तो कितना अच्छा था.

नवोदय का मौहोल लगभग हर student को बेहद boring लगता था वास्तव में उन्हें जिंदगी की मुश्किलों के लिए ही तैयार करने के लिए था ये बात हमें शुरू में समझ नहीं आती थी लेकिन जब हम बाहर निकल कर असली जिंदगी में कदम रखते है तब पता चलती है. शायद यही वजह रहती है की हम नवोदय की लाइफ को बहुत मिस करते है और वापस उसे जीना चाहते है.

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navodaya vidyalaya– मेरे विचार

jawahar navodaya vidyalaya से जुड़ी मेरी लाइफ यही तक नहीं है. navodaya vidyalaya में मेरे बिताये गए पल, पहला क्रश, और भी बहुत कुछ जो सिर्फ नवोदय में ही हो सकता है. ऐसे कई किस्से है बताने को जो हर नवोदय की जिंदगी के खास पलो में से एक होते है. नवोदय और मेरी यादो का कारवा ऐसे ही चलता रहेगा. इसी तरह जुड़ते रहिये और अगर आप भी नवोदय परिवार का हिस्सा है तो आपकी story हमें भेजे. हम आपकी story को ब्लॉग के जरिये लोगो तक पहुंचाएंगे.

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