ये एक वजह बनी महाभारत जैसे महायुद्ध की वजह जो वर्तमान भारत में भी अपने चरम पर है

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hindu joint family

क्या आप जानते है hindu joint family advantages के बारे में ? इस वक़्त स्कूल में पढाए जाने वाले खास टॉपिक्स में से एक है joint family vs single or nuclear family जिसमे हम परिवार की अहमियत समझते है. इसकी importance का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते है की आज भी गाँव में उसी परिवार का दबदबा रहता है जो संयुक्त रहते है और दुसरे उनके example देते है. ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म में ज्यादातर देखने को मिलता है. तो चलिए जानते है हिन्दू जॉइंट फॅमिली इन हिंदी के बारे में.

hindu joint family

आज का टॉपिक कुछ अलग है जिसमे हम धर्म और जाति से ऊपर उठ कर सिर्फ संयुक्त परिवार का हिस्सा बनने की वजह और इसकी जरुरत के बारे में जानेंगे. हम सभी जानते है की सबसे बड़ा युद्ध दो परिवारों के बिच महाभारत कालिन में हुआ था लेकिन क्या आप ये जानते है की वो कौनसी एक छोटी सी वजह रही होगी जो इतने बड़े युद्ध का कारण बनी ? हो सकता है सबके अपने विचार हो लेकिन  में ये मानता हूँ की इस युद्ध के सबसे बड़े कारणों में से एक यह वजह रही होगी.

what is hindu joint family ?

सबसे बड़े और पुरातन माने जाने वाले हिन्दू धर्म में hindu joint family का सबसे बड़ा महत्त्व माना जाता है. एक परिवार जहा पर कई पीढ़ी एक साथ मिल कर परिवार की तरह रहती है संयुक्त परिवार कहलाता है. इसके उल्ट जहा पर सिर्फ एक पीढ़ी ही देखने को मिलती है वो परिवार सिंगल या nuclear family कहलाती है. ये तो है इसकी definition in hindi अब बात करते है की आखिर एक संयुक्त परिवार से लोग सिंगल फॅमिली की तरफ क्यों झुकते चले जाते है.

क्या आप जानते है महाभारत का युद्ध क्यों हुआ ?

हम सभी जानते है इतिहास का सबसे भयानक संग्राम महाभारत का माना गया है. एक ही पूर्वज के वंशज आपस में लड़ते हुए मारे गए और अंत में सबकुछ ख़त्म हो गया ना कुल रहा ना ही कुल धारक. आज की पोस्ट में एक सूक्ष्म लेकिन वर्तमान समाज की हकीकत को दर्शाने वाली घटनाओं के बारे में बात करने वाले है. आइये जानते है की गौरवमय होते हुए भी भारत जैसे देश में जो विश्व गुरु कहलाता है उसके वर्तमान हालात इतने बदतर क्यों है ?

हम सभी जानते है की आज हमारा समाज, हमारा घर और देश के राज्य जाति, धर्म और मजहब के नाम पर इस कदर बंट गए है की पड़ोसी के घर में लगी आग से हमें तब तक कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक की वो हमारे अपने घर में ना लग जाए. हमारे hindu joint family के इस समाज में आज जाति और वर्ण के आधार पर लोग बंटते जा रहे है.

किसने कहा भगवद गीता का पहला श्लोक

धृतराष्ट्र उवाच

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।

मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥

भावार्थ :  धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥

इस शलोक के अनुसार धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा था की हे संजय कुरुक्षेत्र में मेरे पुत्र और पांडू के पुत्र के बिच क्या चल रहा है. इससे साफ साफ पता चलता है की धृतराष्ट्र ने कभी पांडु पुत्रो को अपना माना ही नहीं था जब की वो सभी एक ही वंश के थे. एक ही परिवार में जब बात तेरी और मेरी आ जाती है वहा कभी न कभी कलह और लड़ाई होना निश्चित है.

hindu joint family – आज का समाज और अनबन की मुख्य वजह

हमारे दादा जी के 4 पुत्र है और प्रत्येक पुत्र के 2 से 3 संतान है. वंश आगे बढ़ा है लेकिन मन में विचार आ जाता है की कही मेरी जेब से ज्यादा पैसा तो नहीं लग रहा क्यों की संयुक्त परिवार में सभी मिल कर चीजे लाते है जिसका कोई हिसाब नहीं रखा जाता. इसी सोच के चलते हमें लगता है की अगर हम अलग हो जाए तो शायद अपने खर्च को सिमित कर सके, सही ढंग से चला सके.

ये सोच कर एक ही परिवार के 4 भाई अलग हो जाते है और अलग अलग होने के बाद भी सबके खर्चे एक जैसे चलते रहे क्यों की पहले 4 जाने 4 चीज ला रहे थे अब हर भाई वही 4 चीजे साथ में ला रहा है. ज्यादातर लोगो को लगता है की हम ज्यादा खर्च कर रहे है या फिर पैसे हमारे लग रहे है और भाई के बच्चे को खाने को ज्यादा मिल रहा है.

जब बात तेरे और मेरे की आ जाती है तब बंटवारा होना फिक्स हो जाता है क्यों की मन में जो फूट का बीज पड़ गया है उसका कोई हल नहीं निकलता जब तक की हकीकत का अहसास नहीं हो जाता है.

संयुक्त परिवार के लाभ

  1. संयुक्त परिवार का अपने आसपास दबदबा रहता है और सभी मिलनसार रहते है.
  2. जॉइंट फॅमिली में आपको सही परवरिश और संस्कार देखने को मिल जाएंगे.
  3. एकता और विश्वास सिर्फ संयुक्त परिवार में ही देखने को मिलेगा.

आपस में बैर रख कर रहने के नुकसान

अगर बात करे देश की तो आप देख सकते है किस तरह नेता लोग एक ही धर्म के लोगो को जाति के नाम पर बाँट कर तोड़ रहे है. इसकी वजह से कुछ लोग जो आपमें से ही आपका नेतृत्व करते है बाद में सिर्फ अपना घर भरते है और आपकी हालत वही की वही रह जाती है. for example हार्दिक पटेल जो गुजरात में पटेलो को एकत्रित कर उनके लिए आरक्षण की मांग कर रहा था. सुनने में आया है की उसने कुछ टाइम पहले ही अपनी बहन की शादी की है 20 लाख से भी ज्यादा खर्च कर. और पटेल वही के वही रह गए.

अगर बार करे हमारे ही समाज की तो गाँव में भी आजकल चुनाव के टाइम लोग जाति के नाम पर वोट मांगते है. जिसकी जाति का व्यक्ति जीतता है अगले 5 साल वही caste मौज करती है दुसरो की तुलना में. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है जो लोग चुनाव के टाइम खर्च करते है उसकी वसूली वो चुनाव के बाद 1 साल के अन्दर अन्दर कर लेते है साथ ही खुद का आलीशान घर, जमीन और जायजाद में बढ़ोतरी. क्या इसी लिए लोग चुनाव में खड़े होते है ?

अब बात करते है परिवार की तो आप पाएंगे की अगर आप एकल परिवार में रहते है तो बहुत सारे बाहर वाले आपसे आपके भाई और आपके भाई से आपकी खबर जरुर लेते है. सिर्फ इतना ही नहीं दोनों के मन में जहर भरने की भरपूर कोशिश भी करते है. कैसे ? आइये जानते है एक छोटे से example के जरिये.

परिवार से अलग रहने का नतीजा

एक गाँव में जमुना दास जी रहते थे. जमुना दास जी की hindu joint family का अपने गाँव में दबदबा था. वक़्त के साथ जमुना दास जी भी अब बूढ़े हो चले थे और उनके बच्चे जो पहले संयुक्त परिवार का हिस्सा थे अब अलग अलग होने की मांग करने लगे. बंटवारा हो गया और तय हुआ की 2 बेटे उनके यही रहेंगे और 2 बेटे किसी दुसरे गाँव काम की तलाश में चले गए.

वक़्त बीतता गया और चारो बेटे अब अलग अलग अपना परिवार बसा चुके थे. जमुना दास जी की तीसरी पीढ़ी अब आगे बढ़ रही थी और अलग अलग ही सही सब खुश ये सोच कर वो भी संतोष कर लेते थे. जमुना दास जी के दुसरे भाई से उनके बेटो की समृद्धि देखी नहीं गई और धीरे धीरे वो सभी बेटो के मामले में हस्तक्षेप करने लगे ये कह कर की आपके दादा जी यानि हमारे भाई और इस तरह से गाँव में हमारा भी नाम होता है.

जमुना दास जी के पोते इस बात को समझने लगे थे की दादा जी के भाई का इस तरह से हस्तक्षेप करना किस ओर ले जा रहा है लेकिन अपने पिता के आगे वो मजबूर थे. एक दिन आपसी मतभेद के चलते घर में लड़ाई होने लग गई. जमुना दास जी के बेटे राम लाल ने अपने पिता को बुलाने की बजाय उनके भाई को बुला लिया और अब उनका घर के मामलो में हस्तक्षेप बढ़ने लग गया. जो की जमुना दास जी के पोतो को बिलकुल पसंद नहीं था.

क्या अपने पिता को ना बुलाना उचित था ?

वक़्त के साथ पिता और बेटे के बिच बढती दुरिया इस कदर उन पर हावी हो चुकी थी की एक बेटा अब अपने पिता के बजाय उनके भाई को बुलाना ज्यादा उचित समझने लगा. हकीकत में देखे तो परिवार में झगडे जमुना दास जी के भाई के भी हो रहे थे लेकिन उन्हें तो जमुना दास जी के घर में फूट डालनी थी जो जमुना दास जी के बेटो को नहीं लेकिन पोतो को साफ साफ दिख रही थी.

आखिर एक दिन उन्होंने भी खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया, इसका नतीजा यह हुआ की गाँव में बात फैलने लग गई की जमुना दास जी के बेटे तो सही है लेकिन पोते संस्कार हीन है. खुल कर बोलने और अपने परिवार के फैसले में बाहर वाले के हस्तक्षेप रोकने की उन्हें यही सजा मिली.

hindu joint family में हर घर का है यही हाल

आज जहा भी देखते है यही देखने को मिलता है अपने हमें पराये लगते है और पराये अपने. एक बात हमेशा याद रखे आपका परिवार दुसरे लोगो से नहीं बल्कि अपने लोगो से है. पराये लोगो पर विश्वास करना गलत नहीं है लेकिन दुसरो के कहने पर अपने लोगो से दूर रहना भी सही नहीं है.

अगर आप लोगो के कहने पर अपने ही परिवार के लोगो से दूर रहते है या फिर उनके खिलाफ होते है तो जल्द ही आपके अपने दूर हो जाएंगे और जो आपको अच्छे लगते थे वो भी आपको छोड़ देंगे. इसलिए हमेशा कोशिश रखे की परिवार में भले ही आप अलग अलग रहते हो लेकिन किसी को ये खबर भी मत होने दो.

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hindu joint family – अंतिम शब्द

आज की पोस्ट आपको अलग लग सकती है क्यों की hindu joint family बहुत ही sensitive topics है. अगर हम अपने आसपास देखेंगे तो जाति धर्म के नाम पर लोग बंटे हुए नजर आएंगे. एक गाँव में अगर लोग एक दुसरे के सुख दुःख में भी काम नहीं आ सकते है तो बाहरी हमले से उन्हें आसानी से तोड़ा जा सकता है. इतिहास गवाह है फिर चाहे वो महाभारत का युद्ध हो या फिर कोई भी बाहरी देश से किया गया युद्ध हम हमेशा इसी वजह से हारे है की कही न कही हमारे मन में मेरा और पराया जैसे भाव हावी हुए है.

इसकी वजह से सिर्फ अपना फायदा सोच कर दुसरो के नुकसान से कोई वास्ता ना रखने की वजह से और दूरगामी असरो को ना समझ पाने की वजह से हम हमेशा आसानी से बाहरी लोगो के गुलाम बने है. इसलिए संयुक्त रहने की ताकत पहचाने और मिल कर रहने की भावना रखे.

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